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Dadi Ki Kahani Lesbian Hindi Sex Story 2

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हम बाते करने लगे। मेनेपुछा उस रात चाची को क्या हुआ होगा?। वो चीख गईथी तब..ना। हाँ..जब गोदिमें बैठकर। अंदर घुसाते हे तो एसा ही होताहे..लंड सीधा..चूत को फाड़कर..बच्चेदानी.
के मुह पर टकराता..हे..कभी-कभी सुपाड़ा बच्चेदानी में भी घुसजाता हे। तब..एसी कच्ची कलियों को बहुत दर्द होताहे। चाची अभी दो साल से ले रही हे फिरभी कच्छी-कलि केसे .
? उसको अभी बच्चा नहीं हुआ हे इसलिए। उसकी बच्चेदानी मुह नहीं खुला..जब बच्चा होजायेगा तब। अगर एसा होगा तो भी इतना दर्द नहीं होगा। ऐसा कब–कब होताहे..मतलब बच्चेदानी तक कब-कब पहुच जाता हे..एक तो गोदीमे बैठाकर..जब डालते हे..ओरत ऊपर बैठकर ले ती हे..और..घोड़ीबनाकर..डालते हे। उस रात जब जोशमे आकर में तुम्हारे ऊपर बेठ गई तो एसा ही झटका लगाथा। फिर मेने सेट कर लिया..चाची को। तो घोड़ी बनते वक्त दर्द नहीं होता..था..,उसे। घोडी का दांव अच्छी तरह समजमें आ गया हे। वो कैसे..?? घोड़ी के दांव में बहुत राज छुपे हे। जब कोई ओरत को घोड़ी बनाता हे..तब समजदार ओरत अपने हाथ से लंड को नाप लेती हे। फिर धीरे से अंदर डालती हे। अगर ज्यादा अन्दर चला जाताहे तो चुत्तड़ो को थोडा पीछे करके लंड को ज्यादा अंदर जाते रोक देती हे..तुम कितना भी जोर करो वो। सारी मार चुत्तड़ो पर लेलेती हे। और अगर कोई मर्द फिरभी दर्द देता हे..तो वो..जांगो को भिड़ा लेती हे इससे..लंड..की मार सिर्फ.
चुत्तड और जांगो को ही लगती हे। .
मुज जेसी मोटी ओरत को घोड़ी बनाओ तो वो अपनी..मर्जी से ही अंदर जाने देतीहे..कभी-कभी तो मोटी जांगो के बीच ही लंड को घिसाती रहती हे..सिर्फ सुपाडे को ही। चूत तक जाने देती हे। जांगो को ऐसा भीड़ देती हेकी चुदाई करने वालेको पता भी नहीं चलता। और काम तमाम हो जाता हे।  वाह,दादी आप तो सबसे बड़ी खिलाड़ी हो। सेक्स के बारे में आपका नोलेज बहुत बढ़िया हे..कहना से सब ज्ञान प्राप्त किया..?? बेटे,जब तकलीफ होती हे न तब उसका उपाय ढूंढना पड़ता हे। जब मेरी शादी हुई तब में तेरे दादाजी से काफी छोटी थी..वेसे तबभी मेरा फिगर बड़ा ही था..तेरे दादाजी तजुर्बेदार थे..और मुझसे ताकतवर भी। उन्हें भी घोड़ी की सवारी में ही मजा आता था। वो हंमेशा मुझे घोड़ी बनाते मुझे बहुत दर्द होता..तब मेने मेरी माँ को बताया। माँ ने उसका ये उपाय बताया। मेने उनकी चूत पर हाथ रखा ..और हँसते हुए कहा..कितने लिए हे इसमें..वो मुस्कराते बोली..दो..तेरे दादाजी के बाद तेरा। .
उस रात तो आपने पहले मना..कर दिया था..अरे..उस रोज की तो बात ही मत कर। बस में साले दो लोगों ने इतना परेशान करदिया था..बात मत पूछ जी करता था। की इसे लोंगो का तो लं काट देना चाहिए। क्यों। भीड़ में पहलेने मेरे चुत्तड़ो पर लंड रगड़ केमुजे गरम कर दिया,वो साला उतर गया। तो..मुझे लगा अच्छा हुआ..लेकिन उसके पीछेवाला एकदम बेशर्म निकाला। साले ने पहले खुद के लंड को। मेरे चुत्तड़ो की दरारमें सेट किया फिर गम की तरह चिपका दिया। होले-होले रगड़े जा रहाथा। .
मुझे भी मजा आरहा था..ये मेरे साथ पहलीबार ऐसा हो रहा था।  कितना गरम था.
उसका..मुझे कपड़ो के बीच से उसकी गर्मी महसूस हो रही थी। तू नहीं माँ नेगा पर में बस में ही झड गईथी। फिर भी सालेने यहाँ उतरने तक इसे ही सटाए रखा। और रात को उन दोनों की आसमान की सेर ने तो मेरी हालत ख़राब करदी..मुस्कुराते बोली अच्छा हुआ तू साथमें था..वरना मेतो रोज उंगुलिया कर के थक जाती।  मेने भी मुस्कराते कहा-अच्छाहुआ दादी बस में आपने उनके लंड नहीं काटदिए वरना रात को क्या करती ?? दादी चोंक गई..फिर हँसते हुए बोली..तो,। दूसरा तू था..हाँ। बेशर्म कहिका। इतने में घर आ गया.
और टेम्पो रुक गया। थोड़ी देरमे चाचाजी भी आगये। हम सब काममे जुट गये। सारा सामन मेने और मज्दुरने उतार दिया..टेम्पोवाला किराया लेके निकल गया..सामन घर में रखने में चाची और दादी की मदद करने लगा। इसी बीच हलकी सी हंसी-मजाक होती रही। सारा सामान घरमे सजा दिया..चाचाजी ने कहा अब तू पहले नहाले और तैयार होजा। हम बाहर जाते हे । चाची से कहा तू और माँ भी तैयार हो जाना..आज हम बाहर खाना खायेंगे। जा में तैयार हो गया तो चाची से कहा। तुम तैयार होकर निकल जाना, नुक्कड़ से रिक्सा लेलेना हम होटल पे मिलते हे। शाम हो गई थी। चाचाजी ने कहा तुजे बहुत थकान लगी होगी..चल कही जाते हे।  और में एक दारू के अड्डे पर पंहुच गये ..चाचा ने तिन बीयर ली, एक मेक्दोवेल- १ का अध्धा,सोडा और कुछ स्नेक्स ले लिया..वहां से निकल गये..और रस्तेमें एक जगह बेठ कर पिने लगे..में सिर्फ बीयर ही पिता हूँ चाचा को मालुम हे..तो में दो टिन पि गया..पीते-पीते बाते करने लगे । चाचा ने बताया..शादी दो साल के बाद भी अभीतक कुछ नहीं हे। मेने कहा डॉ.
से मिललेते तो । चाचा-अरे चार डॉ.
बदल लिए सब यही कहते हे दोनों मेसे किसीमे कोई कमी नहीं हे। प्रयत्न करो उपरवाला सब ठीक कर देगा..लेकिन बाबूजी दूसरी शादी के लिए कहते हे। लेकिन में तेरी चाची को छोड़ नहीं सकता। दादी क्या कहती हे? वो कहती हे भगवान सब अच्छा करेंगे..चाचाने भी अध्धा खतम कर दिया..मेने कहा तो फिर आप टेंशन क्यों लेते हो वक्त आने पर जरुर सब ठीक हो जाएगा..चाचा उठते हुए बोले जाने कब वो वक्त आयेगा। इतने में चाची फोन आया वो होटल केलिए निकल गई थी। हम भी चल दिए..होटल के नजदीक पहुचते बीयर का एक तिन बचा था वोभी आधा-आधा पि गये..नशा अच्छा सा हो गया था..चाची और दादी आगये हम टेबल पर पहुच गये चाची और दादी ने ऑर्डर दिया। खाना खाने लगे। दादी को तो कुछ मालुम नहीं हुआ लेकिन चाची आखें फाड़ कर देख रही थी। में और चाचा आँखे बचा रहे थे।. घर वापस आये तो चाचा ओर में द्रोइंग रुम में सो गये चाची और दादी दोनों बेड रुम में सो गये। रात को में पेशाब के लिए उठा तो बेडरूम में झाँक कर देखा..नाईट लेम्प की रोशनी में । दादी का पेटीकोट जांगो तक चढ़ा हुआ था..चाची का गाउन भी उनकी जांगो तक चढ़ा था..और चाची का मुह दादी के बुब्ब्स पर था.
दोनों टांगो के बीच दादी का एक पैर दबाये हुए लेटी थी।  नाईट बल्ब की रोशनी में चाची की सफ़ेद और दादी की सांवली टाँगे चमक रही थी। करीब तिन बजे में फिर उठा,देखा। दादी का पेटी कोट चुत्तड़ो से ऊपर था..चाची का गाउन भी उनके छोटे-छोटे चुत्तड़ो से ऊपर काली पेंटी दिख रही थी। और चाची पीछे से दादी के नंगे बड़े-बड़े चुत्तड़ो से चिपक कर सो रही थी। मुझे बड़ा अजीब सा लगा। में सो गया.. सुबह देर से उठा.. चाचा ऑफिस जाने कोतैयार थे..चाची आँखों में गुस्सा था। मेंभी तैयार हो गया..सबने मिलकर खाना खाया..चाचा निकल गये में भी टहेल ने निकल गया। वापस आया..टीवी देखा..और थोडा सो गया..दादी और चाची सामान ठीक से सजा रही थी। जब उठा चाय पी। चाचीने कहा मुझे कुछ काम हे चल मेरे साथ..हम दोनों बाइक लेके निकल गये..रस्ते में एक मंदिर आया। चाची ने कहा रोक यहाँ। हम मंदिर गये मंदिर का परिसर बहुत बड़ा था..पेड़ लगे थे..पेड़ोके नीचे बेंचे रखी थी..एक बेंच पर हम बेठ गये। चाची ने इन्कवायरी सुरु की –कल कहाँ गये थे..? सच बताना तुजे भगवान की कसम। में चुप रहा..तुचुप क्यों हे?? अच्छा क्या मेरा शक सही हे.
?? तुम दोनों ने पी रखी थी..न..मेरा हाथ पकड कर अपने सिर पर रखदिया..बोल हाँ या ना। मेने हाँ में मुंडी हिलाई।  तू कब से सिखा एसा..?? मेने कहा छोडिये न चाची ये तो कभी-कभी हो जाता हे। क्या छोडिये ये कभी-कभी से ही आदत पड जाती हे । और कहाँ गये थे। ?? और कही नहीं गये। सीधा होटल आ गयेथे। उनोने मेरा हाथ पकड़ा..अपने सिर पर रखने के लिए। लेकिन मेने झटक दिया। नहीं चाची में सच बोलरहा हु। मेरी आँखों में आसू आगये..में रोते –रोते बोला चाची चाचाजी आपको बहुत प्यार करते हे..तो क्या शराबी बन जाने दूँ..एसा नहीं हे चाची ..वो टेंशन में रहते हे। एसी क्या बात हे जो मुझे नहीं बता सकते ..?मेने..रोते-रोते बताया आपकी शादी को दो साल हो गये और कुछ नहीं हे। चाची थोड़ी नर्म पड़ी..में कहा तो,दादाजी दूसरी शादी को बोल रहे हे। और दादी ?? दादी कहती हे सब उपरवाले के हाथमे हे। देर-सवेरे सब अच्छा होगा। अब चाची की आवज भर आयी..लेकिन डॉ कहते हे दोनोमे सब ठीक हे किसीमे कमी नहीं हे। हम प्रयास भी करते हे। मेने कहा..चाची प्लीज चाचाजी को डाटना मत वो आपको बहुत प्यार करते हे। ठीक हे उन्हें प्यार से समजाउंगी। लेकिन तू भी समज ले ये सब गलत हे। अगर दादी को पता चल जाता तो क्या होता..? हाँ, लेकिन अब आप किसीको बताना मत। चाची ओके चल..अब मंदिरमें दर्शन कर आते हे और प्राथना करे सब को सदबुध्धि दे..हम वहीँ से निकले बाजार गये चाची ने खरीदी की और वापस घर आगये.. दादी टीवी देख रही थी।  सोफे पर पैर उठाये बेठी थी..चाची नीचे बेठ गई और सब्जी साफ़ करने लगी..दादी की और देखकर बाते भी करती..में चाची के पीछे कुर्सी पर बेठा था..और मेभी बड़ी-बड़ी जांगे देख रहा था..मेने दादी को इशारा किया वो समज गई..उन्होंने पैर थोडा और ऊपर किया..चूत दिखने लगी। दादी टीवी की और देख रही थी..बाते कर रहीथी..चाची उनकी चूत को देख रही थी। दादी ने मरी और देखा फिर। कुछ एसा किया की उनकी चूत खुलकर दिख गई फिर पैर पर पैर चढ़ा दिया और बेठ गई अब सिर्फ जांगे ही दिखती थी। चाची किचन में चली गई..काम में लग गई..वो भी उनके पास जाने को उठी मेंने अपने खड़े लंड की और इशारा किया वो मुकुराई..और किचन में चली गई। वापस आई। मुझे दरवाजे के पास बुलाया..और लंड को पकड़ा मुठीयाने लगी..उनका मुह किचन की और था..फिर वो अंदर आई साड़ी उठाके पिच्छ्वाडा मेरे सामने धर दिया..मेने अपना ठोक दिया। लेकिन चाचाजी के आने की आवाज आई और काम अधुरा छोड़ दिया।  रात को खाना खाने के बाद में और चाचा गप्पे लगा रहे थे..दादी और चाची अपना काम निपटा के आये। चाचाने कहा चलो बाहर थोडा घुमने जाते हे। मेने कहा नहीं आप हो आइये। में टीवी देखता हूँ। दादी बोली ठीक हे में घर पे हु आप दोनों चले जाइए..चाचा चलो तुम तो आती हो या..चाची बोली हम साथ-साथ हे। (शायद वो दोनों कल के बारेमे कुछ बाते करना चाहते थे)..और दोनों चले गये..में दादी के पास खड़ा हो गया..वो उठी..और एक दुसरे से लिपट गये । में उनकी साड़ी उतारने लगा वो बोली क्या करता हे। मेने कहा में आपको नंगा देखना चाहता हूँ। उन्होंने कहा..नहीं,लाले..अभी जो काम अधुरा हे उसे पूरा कर वरना..रात को मुठ मारनी पड़ेगी। वो साड़ी उठाके खड़ी हो गई और में काम पे लगगया..इसबार भी वोजल्दी झड गई..और मेरा मुहं में ले कर पी गई..फिर हम साथ बेठ गये। मेने चाची के बारे में पूछा की रात को कुछ हुआ था..तो उन्होंने बताया..हाँ वो नींद में मेरे बूब्स और चुत्तड़ो को दबा रही थी। चिपक कर सो गई थी। एक-दो बार तो मेरी चूत को..सहला भी दियाथा.
उसने। मेने मुस्कराते कहा केसा लगा बहु का स्पर्श । वो शर्माते बोली..तू भी ना। मेने कहा मेरा अंदाजा सही था।  आपने आज चूत अच्छी तरह दिखादी हे। कुछ न कुछ तो जरुर होगा..तू बता आगे वो क्या कर सकती हे??..में बोलने ही जा रहता की वो आ गये। हमारे लिए आइसक्रीम ले आये थे..हमने खाई.. दादीने मुझे कहा सुबह जल्दी उठना कल निकलना हे.. चाची ने कहाँ नहीं मांजी अभी कुछ दिन और रुक जाइए चाचा ने भी कहा। हा माँ.. रुक जाइए..दादी बेटा बहुत दिन हो गये..नहीं माँ कल तो रुक ही जाओ।  थोड़ी देर बाते होती रही..फिर चाची ने कहा में और मांजी बेडरूममें सोते हे आप दोनों। .
चाचाने कहा ठीक हे। में दादी की और देखकर मुस्कुराया..दादी भी मुस्कुराई।  सुबह जब में उठा..सब अपने –अपने काम में व्यस्त थे..फिर खाना खाया चाचाजीने कहाँ की मेरे दोस्त घर पूजा रखी हुई हे तो चाची को साथ ले जाता हु । वो रिक्सा से घर आज्येंगी। और वो निकल गये..में टीवी देख रहाथा..दादी अखबार पढ रहीथी। मेने धीरे से पूछा रात को नींद अच्छी आई होगी। ? वो..आँखे निकाल ने लगी..मेने कहा नाराज तो मुझे होना चाहिए। चाची ने मेरी चीज पे ट्राय मारा हे। वो हंस पड़ी..में पास जाके बेठा गया ..बताओ न क्याहुआ..?? दादी बताने लगी..देर रातको वो मेरे बुब्ब्सपर मुह मारने लगी। .
में कुछ नही किया तो उसने ही मेरा ब्लाउज खोल दिया और। बुब्ब्स को दबाने सहलाने लगी। फिर मेरा पेटीकोट उठा दिया..और मेरी जांगो पे किस करने लगी। में सोने का नाटक कर रहीथी। एसा चुमते हुए मेरी चूत तक आगई। चूत पे मुह मार रहीथी पर अंदर फानको तक पहुच नहीं पा रहीथी.
तो तकिया मेरे चुत्तड़ो के निचे रख दिया। मेरी चूत को उंचा कर दिया। और मजे से चाटने लगी..मेरी चूत के फोंको से निकली चमड़ी को चूसने लगी। मेतो झड ने ही वालीथी..की सालीने चुसना छोड़ दिया। फिर खुद नंगी हो गई। और बेशर्म होक मुज पर लेट गई। उसके छोटे-छोटे बुब्ब्स मेरे बड़े-बड़े बुब्ब्स पर रगड़ने लगी। मुझे मजा आने लगाथा। सचमे बहुत अच्छा लग रहाथा..मेरी चूत पर अपनी छोटी सी चूत रगड़ने लगी। मेरी और उसकी चूत पानी छोड़ रही थी। ..कोई ओरत दूसरी ओरत के साथ सेक्स कर सकती हे सूना था.
लेकिन आज तो लाइव अनुभव हो रहाथा..वो गरम हो गई । मेरी सांसे भी तेज हो गई। तो उसने । मेरी जांगो को खोल दिया। मुझे साइड पर घुमादिया और मेरी एक जाँग पर बेठगई। दुसरे पैर को ऊँचा करके पकड रखा एसा करने से मेरी चूत पूरी तरह खुल गई। । उसने अपनी छोटी सी चूत को मेरी चूत पर रख. दिया।  ओह। क्या..लाजवाब अनुभव था..में बता नहीं सकती..दोनों गरमा-गरम चुते गीली थी। वो अपनी चूत मेरी चूत पर रगड़ने लगी। आह्ह..आह। करने लगी थोड़ी देरमे झड गई। में भी साथ में झड गई। .
दोनों की जांगे पानी-पानी हो गई थी। क्या बात करूँ..??..कितना मजा आया। अब तो लगता हे,कब रात हो मेरी बहु मुझसे मस्ती करें। अपनी कहानी सुनाते हुए मेरे लंड को मुठिया रही थी। फिर कड़ी हो गई। और साड़ी उठाके पिच्छ्वाडा दिखाने लगी। मेने अपना लंड पेल दिया। चुदाई करने लगा। हरबार कि तरह वो झड गई और मेरा माल मुहमे चूस कर पी गई। .
कपडे ठीक किये।  इतनेमे चाची आ गई। Hindi Sex Story के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. पार्ट 4. पार्ट 5. पार्ट 6. पार्ट 7. पार्ट 9.
स्रोत:इंटरनेट