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Dadi Ki Kahani Lesbian Hindi Sex Story

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Hindi Sex Story के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. पार्ट 4. पार्ट 5. पार्ट 6. पार्ट 7. पार्ट 9. चाचा—क्या..नया..खिलाने वाली हो..??जरा बताओ तो सही.. चाची— मुझे मालुम हे जब मुझे घोड़ी बनाते हो तो लंड को मेरी गांड पे घुमाते हो..लेकिन अब..कुछ ही दिनोंमें में आपसे गांड भी मरावाउंगी। थोडा इन्तजार करना पडेगा। चाचा- पर कुछ दिनों पहले जब मेने गांड में उंगुली डाली थी.
तो तुम रो..पड़ी थी..और वहां से खून भी निकलाथा.
चाची—लेकिन आज। जानू लाओ तुम्हारी उंगुली। मेरे मुह में डालो..उस पर थूंक लगा देती हूँ। फिर तुम इसे मेरे पीछे धीरे से डालना.. चाचा- ये तो चमत्कार हो गया..केसे हुआ..ये। मेरे..ऊँगली पूरी चली गई..और तुमने आह तक नहीं की। चाची—मेरी जान तेरे लिए..तो कुछ भी करने को तैयार हु..ये क्या चीज हे..अब उंदरडाले अनाड़ी जेसे..बेठे। मत रहो.
थोडा अंदर-बाहर भी करो..मुझे मजा आरहा हे। चाचा – लेकिन..तुम्हारा दर्द कहाँ गया। केसे हुआ। बताओना जानू। चाची—ये एक लम्बी कहानी हे। फिर कभी.. चाचा—नहीं येतो तुम्हे बताना ही पडेगा.. चाची—तो,सुनो। उसदिन जब खून निकल आयाथा.
तो तुमने मुझे बोरोप्लस लगाने को दी थी। उस रात तो तुमने ही गांड पे लगा दी थी। लेकिन दुसरे दिन..बाथरूम में नहाते वक्त..मेने खुद लगाई। तीसरे दिन दर्द नहीथा..फिरभी मेने ट्यूब गांड पे लगाईं..अगलेदीन सब ठीक होगया..था..चेक करने केलिए। मेने अपनी उंगुली..गांड पे घुमाई ..गुद-गुद्दी सी हुई अच्छा लगा..तो थोड़ी ट्यूब उंगली पे लेके। गांड के छेद पर घुमाँ ने लगी। मजा आरहाथा। जान..फिर अगलेदिन वहिकिया। ट्यूब उंगुली पे लगाके। गांड पे घुमाँ ने लगी..और धीरे से दबाया। बिना कोई दर्द किये..उंगुली..अंदर चली गई। अब तो ये रोज का काम हो गया..हे। उंगुली पे साबुन लगाके अपनी गांड में खुद ही..घुसा देती हु और अंदर-बाहर करती हु। बहुत मजा आता हे। राजा। कल से..दो उंगुलियां घुसाने का ट्राय कर रहिहु। मजा आ रहाहे। लेकिन फिरभी मेरी गांड अभी तुम्हारे लंडसे चुदने लायक नहीं..हुई..पर अब ज्यादा दिन इन्तजार नहीं ।  करना पडेगा। ..फिरतो,तुम मेरे जिस्म के सारे छेद में अपनालंड डाल सकोगे..सब की चुदाई कर सकोगे।  मेरी जान। । अब उंगुली निकाल भी दो। चाचा—में तेरे लिए क्या करूँ। डार्लिंग..तूने तो मेरा दिल जित लिया। चाची—मालिक..अगर किसी और जगह में डाल ना चाहोगे तो उसे भी तुम्हारे लिए रेडी..बना..दूंगी..मेरे राजा। बस मुझसे इसी तरह प्यार करते रहना। चाचा—नहीं। मालिक नहीं। आज से ये नाचीज..आपका..गुलाम हे..रानी..साहिबा। चाची- नहीं..एसा मत कहो..तुम मर्द हो। और..में तुम्हारी..ऑरत..मेरा जिस्म तुम्हारा। हे। जो चाहे करो। मजा लेते-देते..रहना। .
अब चलो..भी..सवारी केलिए घोड़ी तैयार हे। मेरे। चुत्तड..मुम्हारी मार का इन्तजार कर रहे हे।. चाचा- कब घूम गई पता भी नही चला। येलो मेरे लंड को तुम ही धीरे से डाल..दो..आह्ह..और चाचा-चाची दोनों आसमान की सेर करने निकल पड़े। .
धरती पर आ भी गये। । । मेरा मन भी दादी की बड़ी गांड की चुदाई करने के लिए बेताब था। मेने उंगुली भी डाली..और लंड को गांड केछेद तक ले गया ..लेकिन दादी ने मना कर दिया। रोज की तरह मेरे उपर चढ़गई और मुजे चोदने लगी। उनका ख़त्म हुआ तो मेरा मुह में लेके। चूस लिया।. सुबह सब जल्दी उठ गये। चाचाजी-चाची सामान पेक केर रहेथे..में उनकी हेल्प कर रहाथा..दादी रसोईमें व्यस्तथी। र्रसोई बनते ही सबने खाना खा लिया। फिर पेकिंग काकाम करने लगे..दादी आई चाची से कहा..किचनमें कोनसा सामान पेक करना हे। बता दे तो में करने लगु..चाचीने दादी को सब समजा दिया। वो दुसरे कमरे में आई..मुझसे कहा तुम मांजी के पास रहो उनकी हेल्प करो..में दादी के पास चलागया। और..जेसा वो कहती में वेसे सामन रखने लगा..वो झुककर जब सामान उठाती तो उनके बड़े-बड़े बुब्ब्स..ब्लाउज से झांक रहेथे। में उसे देखता रहता..दादी मुकुरादेती। कभी-कभी मेरा लंड भी टच करदेती। वो झुककर कुछ कर रहीथी। तो में पीछे से गांड पे लंड रगदने लगा..वो गरम होने लगीथी..साँसे..तेज होने लगी.
थी..में समज गया। वो तैयार होने लगिहे..उन्होंने..मेरे लंड पे हाथ रखा..मेने जिप खोलदी..उन्होंने बाहर निकाला और मुठीयाने लगी..मेने पिछेसे ही चुत्मे उंगुली करने लगा..चुत पानी छोड़ रही थी..वो ऐसे ही। बोली सब सामान रख दिया। ला तेरे.. मुसल को भी..मेरी ओखली में रख देती हु। उन्होंने दरवाजेसे दुसरे कमरे में झाँका। फिर। वो दरवाजे के पीछे ही,झुककर..साडी उपर उठाकर खड़ी होगई। क्यामस्त। सांवले रंग के बड़े-बड़े लिससे चुत्तड थे। मैने पहलीबार देखा..चूमने लगा। उन्होंने कहा। कामकर। येसब करनेका वक्त अभी हमारेपास नहीं हे। मेने अपना लंड चुत के मुह पर लगाया..और पेलने लगा। लेकिन फिसल जाताथा। उन्होंने चुत्तडोको और ऊपर उठाया..मेरे लंड कोअपने हाथमे लिया और चुत्मे डाल दिया। अब में ठोकने लगा। इतने बड़े-बड़े चुत्तड़ो की ठुकाई हो और आवाज ना आये एसा भला हो सक्ताहे। उन्होंने मुझे रोक दिया.
और खुदही आग-ेपीछे होने लगी..चुत्ताडोको गोल-गोल घुमाँ ने लगी। उनकी साँसे तेज हो गई। में खडा ही था। उनकी स्पीड बढ़ गई.. उन्होंने मेरे हाथोको अपने बुब्बस पर रखदिया..में ब्लाउज के ऊपर सही सहलाने लगा..तो उन्होंने मेरा हाथ बुब्ब्स पे..दबाया..मे समजगया और बूब्स को जोर-जोरसे दबाने लगा। उनकी सासे तेज चल रहीथी.. और हलकी सी थपाक-थपाक होने लगी..अब वो चुत्ताडोको लंड पे ठोकने की बजाय। उपर-नीचे स्पीड से करने। लगी..मेरी हालत बुरीथी..वो इतना जोरसे..चुत्तड़ो को उपर-नीचे कर रहीथी..की मुझे लगताथा । आज वो मेरा लंड तोड़ देगी। पर नहीं वो रुकगई। और हांफने लगी..दरवाजेकी बाहर झांक करदेखा। चाचा-चाची दुसरे कमरेमें काममें व्यस्त थे। वो खड़ी हुई..मुझे बाँहों में भर लिया में भी किस करने लगा। अपने खड़े लंद्को उनके हाथो में रख दिया..वो बोली मुज ेमालुम हे..अभी ठंडा कर देती हूँ। तू जरा..बाहर नजर रखना। वो मेरे पेरों के बीच बेठगई..और लंड चुसाई करने लगी। जब में झड़ने वाला था..तो अपने अंदाज में वो चूसने लगी..मेरा सारा माल पी गई। मेने किस किया और उनके होठों को साफ़ कर दिया..( मुझे यकीन होगया था..की दादीको जब भी गरम करूंगा वो कुछभी करके मुझसे चुद्वादेगी..मेने लंड को पेंट में रहते हुए कहा..लाले..तेरे मुठीयाने के दिन गये..अब तो चूत मिलती ही रहेगी। ) सब नोर्मल होने के बाद चाची को आवाज दी। चाची आई देखा उनके कहने के मुताबिक़ सब पेक हो गयाथा। फिर हम उनके साथ..उस कमरेमे काम करने लगे। चाचीकी । नजर कभी-कभी दादीके बड़े-बड़े बुब्ब्स को देख लेती। मेने नोटकिया कभी। वो बुब्बस और चुत्तडो को टच भी कर देती..थी..दादी को शायद ये सहज लगता था। पर मुझे अजीब लगता था।. सब सामन पेक हो गयाथा.
हम टेम्पो की राह देखरहेथे। सब बेठेथे। आइसक्रीम के पेक में कुछ आइसक्रीम बची थी..तो सब खारहेथे..दादी अपनी स्टाइलमें साड़ी उठाये बेठीथी.
चाची उनके जानगो पे नजरे मार लेती थी..मुझे अच्छा लगता था। टेम्पो आगया..टेम्पोवाला साथमे एक मजदूर लेके आया..चाचा से बोला भाईसाब ये एक ही मिला..आप हेल्प कीजिएगा। हम सामान टेम्पो में भरने लगे। वो मजदूर और में सामान ला रहेथे..चाचाजी टेम्पोमें थे.
वो सामान को ठीक तरीके से लगा रहेथे..बड़ा-बड़ा सामान सब रख दिया..इतनेमें चाचा को चोट आ गई..और हाथमे दर्द होने लगा..शायद मोच आगईथी..तो उस आदमीने कहा भैया में एक वैध को जानता हू वो एक मिनट में ठीक करदेंगे.. वो..टेम्पो में चढ़गया..और सारा सामान में ला कर उसे देनेलगा..चाची-और दादी भी मेरी हेल्प करने लगे..सामन उठाते। ओऊ टेम्पो में रखते वक्त कभी-कभी चाची दादी के पीछे खड़ी रह जाती और दादीके चुत्तड़ो को छू लेती। सब सामन रखने बाद चाचाने मुझसे कहा तुम पीछे रहना..चाची और दादी को आगे बैठ ने को कहा..और उस आदमी से कहा तुममेरे साथ बाइक पे चलो। उम हाथ दिखा कर आते हे। दादीने चाची को आगे बैठ ने को कहा और वो खुद मेरे साथ पीछे आगई। टेम्पो चल दिया। में दादी के पास खड़ा था.
मेने दादी से कहा बधाई हो। लंड तो लंड अब,तो चूत भी आपको लाइन दे रही हे।  दादी-में कुछ समजी नहीं.. मेने कहा- क्या सच में आपको मालुम नहीं,?? मेने उनके चुत्तड़ो पर हाथ रखदिया। सहलाने लगा। दादी-साफ साफ बता दे। में- चाची,। आपके बुब्ब्सको प्यार से देखती हे। .
दादी मेरी तरफ देखती रह गई। .
मेने कहा और आइसक्रीम खाते वक्त जांगो को भी देख रहीथी। इतना ही नहीं..सामन भरते वक्त वो आपके चुत्तड़ो को जान बुजकर छू लेतीथी। .
कुछ होने वाला हे.. में- चाची,। आपके बुब्ब्सको प्यार से देखती हे। .
दादी मेरी तरफ देखती रह गई। .
मेने कहा और आइसक्रीम खाते वक्त जांगो को भी देख रहीथी। इतना ही नहीं..सामन भरते वक्त वो आपके चुत्तड़ो को जान बुजकर छू लेतीथी। .
कुछ होने वाला हे.. । में हंस ने लगा..दादी शरमा गई। फिर बोली..वो क्या कर सकती हे। ? मेरी पेंट पे हाथ रखकर बोली। उसके पास कहाँ हथियार हे?। एसा कहते मेरा हथियार बाहर निकाल ने लगी। और सहलाने लगी। मेने भी साडी को उंचा कर दिया..चूत में उंगली करने लगा। उनकी साँसे तेज होने लगी । उन्होंने एक्जस्ट किया और चूत में लंड ले लिया। टेम्पो चल रहाथा । .
हम दोनो मजा ले रहे थे..में बुब्ब्स दबाने लगा..दादी पहलीबार चुदवाते हुए बोलने लगी।  दादी—जरा जोर से दबा। ये क्या। सह्ला रहा हे..हे। में—दबा तो रहाहु मोटी..में चिड़ाते हुए बोला। दादी—अब ठोक जोरसे। साले..जब देखू चोद ने को तैयार हो जाता हे। .. में – तुभी साली। साडी उठाके। चुत्तड आगे केर देती हे। दादी— चुदाई मे ध्यान दे चुतीये। .
जोर से चोद ए कया.
?..गुद्गुद्दी कररहा हे। में- ले साली रांड। तेरी तो। फाड़ दूंगा आज। .
दादी—चोद साले ..माँ के लोडे। चो.
ओ..द..में—ले साली। पूरा दे रहाहू। आज तो तेरी सारी गरमी निकाल देताहू..माँ की लोड़ी । दादी—जरा जोर लगा के चोद भोसड़ी के। साले भडवे। आ..आह्ह्ह। .
ठोक। ओ..र..जोर से। आह। चूतिये। राडं की ओलाद। चोद..ओह्ह्ह.. में- ले साली माँ की चूत चुत्तड.
उछाल-उछाल के। ले। छिनाल साली। चलते टेम्पोमे हमारी गालिया और थपाक-थप्पक की आवाजे गूंज रही थी। वो जैम कर चुदवा रही थी। उनकी साँसे बहुत तेज हो गई।  बोली- अबे। मेरे बुब्ब्सको निचोड़..दे। आह्ह्ह। ओह.
ओह्ह्ह। चोद साले मादरचोद।  ओ..ओ। ओह्ह..आह्ह्हह्ह्ह्ह। ओ.
ओ.
ओ.
ओ.
ओ.
ऊऊऊऊ। ओह। ओह। ओ। में—आज तो पूरी। भर दूंगा। तेरी। माँ की लोड़ी। ले..वो हांफ रही थी..अबे छोड़ ..दे। अब फट..गई..हे।  नहीं आज तो पूरा लोडा..निचोड़ दूंगा..मत रोक। मुझे।  वो समज गई की में झड़ने वालाहू। आगे खिसक गई। झट से मुड़कर मेरा। मुह में ले लिया.
चूसने लगी। मुह्मेही गोल-गोल घुमाँ ने लगी। मेने उसका मुह भर दिया..वो..ओं..ओं..करके..घटक गई। फिर धीरे –धीरे चाटकर साफ़ कर दिया। खड़ी हुई और हंसने लगी..नोर्मल होते। मुझे पूछा मजा अयाना..?? में– पहलीबार चालूकाममें आपको बोलते सुना..बहुत मजा आया। मेतो ऐसी ही हूँ। वो हंसने लगी। मेने कहा..र्सोरी..कुछ उल्टा-सीधा बोल दिया होतो..वो बोली नहीं..मुझे ऐसे मजा आता हे।
स्रोत:इंटरनेट