डार्क

Darwaje Pe Dastak Filmy Sex Story

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वो दिन मिलन के लिए यादगार बन गया, एक ही दिन में 2 बार किस्मत खुली और 2 बार किस्मत लुटी.
भरी बारिश में दरवाजे पे हुई दस्तको की एक filmy sex story पढ़िए.. शाम के करीब 4 बजे थे। बाहर तेज बारिश हो रही थी। मिलन अपने बेडरूम में अधलेटी अवस्था में किसी उपन्यास के पन्ने पलट रहा था। मौसम सुबह से ही खराब था जिसकी वजह से वह आफिस भी नहीं गया था। हाथ में थमा. उपन्यास वह पहले भी एक दफा पढ़ चुका था, लिहाजा दोबारा पढ़ने में उसे बोरियत महसूस हो रही थी। कुछ क्षण और पन्ने पलटते रहने के बाद उसने सुबह की डाक से आया मां का पत्र उठा लिया और एक बार फिर उसे पूरा पढ़ डाला।.  . मां ने लिखा था कि उसकी शादी किसी चेतना नामक युवती से तय कर दी गई है। चेतना बी.
ए.
पास थी और एक काल सेंटर में जॉब करती थी। पत्र में मां ने लिखा था कि वह जल्दी ही चेतना की फोटो उसे भेज देंगी। पूरा पत्र पढ़ चुकने के बाद उसने उसे तकिए के नीचे रख दिया और पुनः उपन्यास हाथ में उठा लिया। तभी दरवाज़े पर दस्तक हुई।.  . मिलन उठ कर दरवाजे तक पहुंचा और किवाड़ खोलते ही चौंक गया। दरवाजे पर सिर से पांव तक भीगी हुई एक खूबसूरत युवती खड़ी थी। उसने जींस की पैंट और सफेद रंग का शर्ट पहन रखा था। शर्ट का पहनना और ना पहनना बराबर. था क्योंकि भीगा हुआ शर्ट उसके शरीर से चिपक गया था और उसकी मांसल छातियां स्पष्ट नुमाया हो रही थी। मिलन पहली ही नजर में भांप गया कि युवती शर्ट के नीचे कुछ भी नहीं पहने थी। उसके शरीर में सनसनी की लहर. दौड़ गई।.  . कुछ क्षण युवती को घूरने के बाद उसे युवती की सूरत जानी-पहचानी नहीं लगी। उसने अपने दिमाग पर जोर डाल कर युवती को पहचानने की कोशिश की किंतु कामयाब नहीं हुआ। कुछ ही क्षणों में उसे यकीन हो गया कि आज से पहले. उसने युवती को कभी नहीं देखा था अतः उसने व्यर्थ सिर खपाने की बजाय उससे पूछ लेना ही उचित समझा, ‘कहिए किससे मिलना है?’  . ‘मुझे नहीं मालूम,’ युवती बोली। फिर उसने महसूस किया कि उसकी बात स्पष्ट नहीं है अतः जल्दी से बोल पड़ी, ‘मेरा मतलब है बाहर बहुत तेज बारिश हो रही है। अगर आपकी इजाजत हो तो बारिश बंद होने तक मैं यहां रुक जाऊं।’.  . ‘हां क्यों नहीं, प्लीज अंदर आ जाइए।’  . युवती कमरे में दाखिल हो गई। मिलन ने दरवाजा बंद कर दिया।.  . ‘मेरा नाम निमिषा है। मैं…’. ‘परिचय बाद में दीजिएगा, पहले आप भीतर जा कर कपड़े बदल लीजिये वरना बीमार पड़ जायेंगी। वार्डरोब में से जो भी आप पहनना चाहें पहन सकती हैं। आप चेंज करके आइए तब तक मैं आपके लिए चाय बनाता हूं।’  . यह कह कर मिलन किचन की ओर बढ़ गया। युवती, जिसने अपना नाम निमिषा बताया था, बेडरूम में पहुंच कर कपड़े बदलने लगी। जींस और शर्ट उतार कर उसने मिलन का पाजामा-कुर्ता पहन लिया। मर्दाना लिबास में उसकी खूबसूरती पहले से अधिक निखर आई। वह ड्राइंगरूम में पहुंची तो दो कपों में चाय उड़ेलता मिलन उसे ठगा सा देखता रहा गया।.  . ‘ऐसे क्या देख रहे हो?’ निमिषा ने इठलाते हुए एक बदनतोड़ अंगड़ाई ली।.  . ‘तूम बहुत खूबसूरत हो और…’.  . ‘और क्या?’ निमिषा ने उसकी आंखों में देखा।.  . ‘बहुत सेक्सी भी।’.  . ‘सच?’. ‘एकदम सच। मैंने तुम जैसी हसीन लड़की आज तक नहीं देखी, सच पूछो तो मुझे अभी तक यकीन नहीं हो रहा है कि स्वर्ग की एक अप्सरा मेरे सामने खड़ी है। मुझे सब कुछ स्वप्न जैसा प्रतीत हो रहा है।’  . ‘तुम मुझे बना तो नहीं रहे हो?’.  . ‘बिल्कुल नहीं।’.  . ‘फिर तो तारीफ करने के लिए शुक्रिया,’ निमिषा एक दिलफरेब मुस्कराट के साथ बोली।  . ‘तुम हो ही इस लायक। दिल चाहता है कि मैं तुम्हें हमेशा देखता रहूँ।’.  . ‘तुम्हें ऐतराज़ न हो तो पहले हम चाय पी लें। बाद में तुम जी भर के देख लेना।’ निमिषा ने कहा और हंस पड़ी।.  . ‘अरे चाय को तो मैं भूल ही गया था।’.  . मिलन ने उसे एक कप पकड़ाया और दूसरा स्वयं उठा लिया। दोनों चाय पीने लगे मगर इस दौरान भी मिलन ललचाई नजरों से निमिषा के कपड़ों के भीतर छिपे उसके गुदाज बदन की कल्पना कर आनंदित होता रहा।.  . ‘ओह, मैं पूछना ही भूल गई! तुम्हारा नाम क्या है?’ निमिषा ने पूछा।  . ‘मिलन,’ वह बोला, ‘मिलन अरोड़ा।’  . ‘तो मिस्टर मिलन, ये बताइये कि क्या आप हर लड़की पर ऐसे लाइन मारते हैं?’  . ‘तुम्हें ऐसा लगता है?’.  . ‘जी हां, तभी तो पूछ रही हूं।’  . ‘तो सुन लो कि तुम बिलकुल गलत सोच रही हो। मैंने आज तक किसी लड़की से ऐसा नहीं कहा और न कभी कहूँगा। मुझे तो तुम्हारे सांचे में ढले बदन ने दीवाना बना दिया है!’.  . ‘मुझे तुम्हारी दीवानगी और साफगोई दोनों पसंद आई मगर तुम यूं ही दूर से ही अपना प्रेम प्रगट करते रहोगे या करीब आकर भी कुछ…?’.  . ‘यूं आर सो स्वीट!’ मिलन चहक कर बोला। उसने आगे बढ़ कर निमिषा को अपनी बांहों में भर लिया। इस प्रक्रिया में उसे अपना चाय प्याला टेबल पर रखना पड़ा। निमिषा ने इस स्थिति का पूरा फायदा उठाया। उसने अपनी. अंगूठी का कैप उठा कर पाउडर जैसा कोई पदार्थ उसकी चाय में डाल दिया।.  . मिलन बड़ी बेसब्री से उसके कुर्ते के अंदर हाथ डालकर उसकी नग्न चिकनी पीठ को सहला रहा था।.  . ‘इतनी भी क्या जल्दी है, डार्लिंग? पहले हम चाय तो पी लें।’  . ‘जिसके आगे सोमरस का प्याला हो वह चाय क्यों पीयेगा?’ यह कह कर मिलन ने निमिषा को फिर अपनी बांहों में भर लिया और उसके गुलाबी होंठों को चूसने लगा। निमिषा के मुख से मादक सिसकारियां निकलने लगी। वह मिलन का. पूरा साथ दे रही थी। देखते ही देखते मिलन ने उसका कुर्ता उतार फेंका और उसकी तनी हुई छातियों को सहलाते हुए उसके अंग-अंग को चूमने लगा। अतिरेक से निमिषा ने उसका चेहरा अपनी छातियों के बीच भींच लिया।.  . ठीक इसी वक्त मिलन की पकड़ ढीली पड़ने लगी। उसे पूरा कमरा गोल-गोल घूमता प्रतीत होने लगा और कुछ ही पलों में वह बेहोश हो कर फर्श पर पसर गया।.  . ‘साला कुत्ता! मुझे मुफ्त का माल समझा था।’ बड़बड़ाती हुई निमिषा बेडरूम की ओर बढ़ गई।.  . करीब दो घंटे बाद मिलन को होश आया। वह हड़बड़ाहट में उठ कर बैठा। उसे निमिषा कहीं नज़र नहीं आयी। वह तो कब की जा चुकी थी! उसने उठ कर पूरे घर का चक्कर लगाया। घर का सारा कीमती सामान व नकद रुपये गायब थे। मिलन. को समझते देर न लगी कि वह ठगी का शिकार हुआ हुआ है। मगर अब वह क्या कर सकता था!.  . अभी मिलन इस शॉक जैसी स्थिति से उबर भी नहीं पाया था कि दरवाजे पर दस्तक हुई। उसने बेमन से उठ कर दरवाजा खोला तो हैरान रह गया। दरवाजे पर निमिषा से कहीं ज्यादा खूबसूरत एक युवती भीगी हुई खड़ी थी।.  . ‘कहिए?’.  . ‘जी, बाहर तेज बारिश हो रही है। क्या बारिश बंद होने तक मैं यहां रुक सकती हूं?’  . उसकी बात सुन कर मिलन के होंठों पर एक विषैली मुस्कान तैर गई। उसे समझते देर न लगी कि एक बार फिर उसे ठगने की कोशिश की जा रही है। मन ही मन उसने उस लड़की को मजा चखाने का फैसला कर लिया और मुस्करा कर बोला, ‘जी हां, भीतर आ जाइए।’
स्रोत:इंटरनेट