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Didi Ke Ghar Chhuttiya Didi Sex Story 3

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लेकिन मेरा लंड महाराज एकदम से तनतना गया .
मैंने दीदी के दोनों पैरों को अलग अलग दिशा में किया और उनके बुर की छिद्र पर अपना लंड रखा और धीरे धीरे दीदी के बदन पर लेट गया .
इस से मेरा लंड दीदी के बुर में प्रवेश कर गया .
ज्यों ही मेरा लंड दीदी के बुर में प्रवेश किया दीदी लगभग छटपटा उठी .
मैंने कहा – क्या हुआ दीदी, जीजा जी का लंड तो मुझसे भी मोटा है ना तो फ़िर तुम छटपटा क्यों रही हो ? दीदी – तीन महीने से कोई लंड बुर में नही ली हूँ न इसलिए ये बुर थोड़ा सिकुड़ गया है .
उफ़, लगता नही है की तुम्हे चुदाई के बारे में पता नही है। कितनो की ली है तुने? मैं बोला- कभी नही दीदी, वो तो में फिल्मों में देख के और किताबों में पढ़ कर सब जानता हूँ। दीदी बोली- शाबाश समीर, आज प्रेक्टिकल भी कर लो। कोई बात नही है। तुम अच्छा कर रहे हो। चालू रहो। मज़ा आ रहा है। मैंने दीदी को अपने दोनों हाथों से लपेट लिया। दीदी ने भी अपनी टांगों को मेरे ऊपर से लपेट कर अपने हाथों से मेरी पीठ को लपेट लिया। अब हम दोनों एक दुसरे से बिलकूल गुथे हुए था। मैंने अपनी कमर धीरे से ऊपर. उठाया इस से मेरा लंड दीदी के बुर से थोड़ा बाहर आया। मैंने फिर अपना कमर को नीचे किया। इस से मेरा लंड दीदी के बुर में पूरी तरह से समां गया। इस बार दीदी लगभग चीख उठी।. अब मैंने दीदी की चीखूं और दर्द पर ध्यान देना बंद कर दिया। और उनको पुरी प्रेम से चोदना शुरू किया। पहले नौ – दस धक्के में तो दीदी हर धक्के पर कराही । लेकिन दस धक्के के आड़ उनकी बुर चौडी हो गई॥ तीस. पैंतीस धक्के के बाद तो उनका बुर पूरी तरह से फैल गया। अब उनको आनंद आने लगा था। अब वो मेरे चुतद पर हाथ रख के मेरे धक्के को और भी जोर दे रही थी। चूँकि थोडी देर पहले ही ढेर सारा माल निकल गया था इस लिए. जल्दी माल निकालने वाला तो था नहीं.
मै उनकी चुदाई करते करते थक गया। करीब बीस मिनट तक उनकी बुर चुदाई के बाद भी मेरा माल नही निकल रहा था। दीदी बोली – थोड़ा रुक जाओ।. मैंने दीदी के बुर में अपना सात इंच का लंड डाले हुए ही थोडी देर के लिए रुक गया। मेरी साँसे तेज़ चल रही थी। दीदी भी थक गई थी। मैंने उनकी चूची को मुंह में भर कर चुसना शुरू किया। इस बार मुझे शरारत सूझी।. मैंने उनकी चूची में दांत गडा दिए। वो चीखी.
बोली- क्या करते हो?. फिर मैंने उनके ओठों को अपने मुंह में भर लिया। दो मिनट के विश्राम के बाद मैंने अपने कमर को फिर से हरकत में लाया। इस बार मेरी स्पीड काफ़ी बढ़ गई। दीदी का पूरा बदन मेरे धक्के के साथ आगे पीछे होने लगा।. दीदी बोली- अब छोड़ दो समीर। मेरा माल निकल गया।. मैंने उनकी चुदाई जारी रखते हुए कहा- रुको न.
अब मेरा भी निकल जाएगा। चालीस -पचास धक्के के बाद में लंड के मुंह से गंगा जमुना की धारा बह निकली .
सारी धारा दीदी के बुर के विशाल कुएं में समा गयी । एक बूंद भी बाहर नही आई। बीस मिनट तक हम दोनों को कुछ भी होश नही था। मै उसी तरह से उनके बदन पे पड़ा रहा।. बीस मिनट के बाद वो बोली -समीर , तुम ठीक तो हो न? मैंने बोला -हाँ।. दीदी – कैसा लगा बुर की चुदाई कर के?. मैंने – मज़ा आ गया।. दीदी- और करोगे?. मैंने – अब मेरा माल नही निकलेगा।. दीदी हँसी और बोली- धत पगले। माल भी कहीं ख़तम होता है। रुको में तुम्हारे लिए कॉफ़ी बना के लाती हूँ।. दीदी नंगे बदन ही किचन गई और कॉफ़ी बना कर लायी। कॉफ़ी पीने के बाद फिर से ताजगी छा गई। दीदी के जिस्म देख देख के मुझे फिर गर्मी चढ़ने लगी।. दीदी ने मेरे लंड को पकड़ कर कहा- क्या हाल है जनाब का?. मैंने कहा – क्यों दीदी , फिर से एक राउंड हो जाए? दीदी – क्यों नही। इस बार आराम से करेंगे।. दीदी बिस्तर पर लेट गई। पहले तो मैंने उनके बुर को चाट चाट के पनिया दिया। मेरा लंड महाराज बड़ी ही मुश्किल से दुबारा तैयार हुआ। लेकिन जैसे ही मैंने उनको दीदी के बुर देवी से भेंट करवाया वो तुंरत ही जाग गए।. सुबह के चार बज गए थे। उसी समय अपने लंड महाराज को दीदी के बुर देवी कह प्रवेश कराया। पूरे पैंतालिस मिनट तक दीदी को चोदता रह। दीदी की बुर ने पाँच छः बार पानी छोड़ दिया।. वो मुझसे बार बार कहती रही -समीर छोड़ दो। अब नही। कल करना।. लेकिन मैंने कहा नही दीदी अब तो जब तक मेरा माल नही निकल जाता तब तक तुम्हारे बुर का कल्याण नही है।. पैंतालिस मिनट के बाद मेरे लंड महाराज ने जो धारा निकाली तो मेरे तो जैसे प्राण ही निकल गए। जब दीदी को पता चला की मेरा माल निकल गया है तो जैसे तैसे अपने ऊपर से मुझे हटाई और अपने कपड़े लिए खड़ी हो गई। में. तो बिलकूल निढाल हो बिस्तर पे पड़ा रहा .
दीदी ने मेरे ऊपर कम्बल रखा और बिना कपड़े पहने ही हाथ में कपड़े लिए अपने कमरे की तरफ़ चली गई .
आँख खुली तो दिन के बारह बज चुके थे .
में अभी भी नंगा सिर्फ़ कम्बल ओढे हुए पड़ा था .
किसी तरह उठ कर कपड़े पहना और बाहर आया .
देखा दीदी किचेन में है .
मुझे देख कर मुस्कुराई और बोली – एक रात में ही ये हाल है , जीजाजी का आर्डर सुना है ना पूरे एक महीने रहना है । हां हां हां हां !!!! इस प्रकार दीदी की चुदाई से ही मेरा यौवन का प्रारम्भ हुआ .
मैं वहां एक महीने से भी अधिक रुका जब तक जीजा जी नही आ गए। इस एक महीने में कोई भी रात मैंने बिना उनकी चुदाई के नही गुजारी। दीदी ने मुझसे इतनी अधिक प्रैक्टिस करवाई की अब एक रात में पाँच बार भी उनकी बुर की चुदाई कर सकता था। उन्होंने मुझे अपनी गांड के दर्शन भी कई बार करवाई। कई बार दिन में हम दोनों ने साथ स्नान भी किया।. आख़िर एक दिन जीजाजी भी आ गए। जब रात हुई और जीजाजी और दीदी अपने कमरे में गए तो थोडी ही देर में दीदी की चीख और कराहने की आवाज़ ज़ोर ज़ोर से मेरे कमरे में आने लगी। में तो डर गया। लगता है की दीदी की चुदाई. का भेद खुल गया है और जीजा जी दीदी की पिटाई कर रहे हैं। रात दस बजे से सुबह चार बजे तक दीदी की कराहने की आवाज़ आती रही।. सुबह जैसे ही दीदी से मुलाकात हुई तो मैंने पुछा – कल रात को जीजाजी ने तुम्हे पीटा? कल रात भर तुम्हारे कराहने की आवाज़ आती रही।. दीदी बोली- धत पगले। वो तो रात भर मेरी चुदाई कर रहे थे। चार महीने की गर्मी थी इसलिए कुछ ज्यादा ही उछल कूद हो रही थी।. मैंने कहा- दीदी अब में जाऊँगा।. दीदी ने कहा – कब? मैंने कहा – आज रात ही निकल जाऊँगा।. दीदी बोली- ठीक है। चल रात की खुमारी तो निकाल दे मेरी।. मैंने कहा – जीजाजी घर पे हैं। वो जान जायेंगे तो।.
स्रोत:इंटरनेट