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Do Kamuk Padosi Pariwar Beti Ki Saheli

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पड़ोसियों के साथ ज़ोरदार ग्रुप सेक्स के बाद अब उनकी बेटी पे मेरी नज़र थी.
आहना क्या मस्त कमसिन माल थी और मेरी बेटी तक पहुचने का रास्ता भी.
इस भाग में beti ki saheli की चुदाई की कहानी.
Hindi Sex Stories के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. पार्ट 4. वंदना ने लेटे लेटे अपनी बुर की तरफ देखा.
आरती ने अपना चेहरा उसकी दोनों टांगों के बीच से ऊपर उठा.
दोनों एक दुसरे को देख कर मुस्काये.
वंदना उठी और आरती को पकड़ कर उसके होठों से होठों का चुम्बन दिया.
वंदना ने आरती के होठों पर लगा हुआ अपनी ही बुर का रस चाट चाट कर स्सफ कर दिया.
“ये तो वाकई बड़ा मजे वाला था आरती… थैंक यू डार्लिंग.
मुझे लगता है की मुझे भी बदले में कुछ करना चाहिए” वंदना आरती को लिटा कर उसके ऊपर 69 का पोज बना कर लेट गयी.
दोनों लड़कियां एक दुसरे की चूत मस्त हो कर चाट रहीं थीं.
प्रतीक के पास क्यूबा से लाये हुए सिगार थे.
उसने एक प्रतीक को दिया और एक खुद के लिए रखा.
दोनों लड़कियों के पास गए.
प्रतीक ने आरती की चूत में लगभग 2 इंच सिगार घुसेढ़ दिया.
हरीश ने भी इसकी पूरी नक़ल करते हुए वंदना की बुर में सिगार दाल दिया.
आरती बोली, “क्या तुम लोगों के लंड अब इतना थक गए हैं की हम लोगों को अब सिगार से चुदना पड़ेगा” “अरे नहीं मेरी जान, ये तो हम तुम्हें चोदने के पहले तुम्हारी चूतों को थोडा धूम्रपान करा रहे हैं” कहते हुए प्रतीक ने सिगार दुसरे सिरे से जलाने की कोशिश की.
पर वो जला नहीं क्योंकि सिगार को फूंकने की जरूरत होती है.
और आरती की चूत में शायद फूंकने का हुनर नहीं था.
वंदना ने जोर से डांट लगाई, “अरे ये आग हटाओ यार, हम लोग जल गए तो.. पागल हो क्या तुम लोग” दोनों ने तुरंत अपनी बीवियों की आज्ञा का पालन करते हुए सिगार चूत से निकाल कर जला लिया.
सिगार चूत के रस से लबालब था तो दोनों को सिगार पीने में ख़ास ही मज़ा आ रहा था.
कमरे में चूत के रस के साथ शराब और सिगार के धुंएँ की गंध भर गयी.
वंदना और आरती एक दुसरे की चूत चूसते हुए लगता है झड़ने ही वाले थे.
हरीश बाथरूम के लिए गया.
जब वो वापस लौटा, उसने देखा की प्रतीक चेयर पर बैठा है और वंदना उसकी बाहों में बाहें डाले उसके ऊपर बैठी हुई है.
प्रतीक का लंड उसकी चूत में घुसा हुआ है.
वंदना धीरे धीरे ऊपर नीचे हो रही मानों घोड़े की सवारी कर रही हो.
हरीश मुस्काराया और वंदना के पीछे जा कर खड़ा हो गया.
वंदना के चूतर प्रतीक के मोटे लंड के ऊपर उछालते देख कर उसका लंड फटाक से खड़ा हो गया.
आरती को समझ आ गया की हरीश की मन्सा क्या है.
उसने ड्रावर खोली और उसी KY जेली की ट्यूब निकाली और आँख मारते हुए हरीश को थमा दी.
हरीश ने ट्यूब से क्रीम अपने लौंडे पर लगाई और ढेर सारी क्रीम उंगली में लगा कर वंदना की गांड के छेद पर लगाने लगा.
जैसे ही ठंडी क्रीम वंदना की गांड में लगी, वंदना चौंक कर उचक गयी.
पीछे मुड़ कर देखा तो समझ गयी की हरीश के गंदे दिमाग में की योजना है.
वो प्रतीक के लौंडे को चोदते हुए हाँफते हुए बोली, “हाँ हरीश….
जल्दी करो… मैंने इस पोज के के बारे में कितना सोचा हुआ है… आज वो सपना हकीकत में बदलने जा रहा है….
कम ऑन हरीश…गो फॉर इट…” आरती आगे आई और हरीश का क्रीम से सना हुआ लौंडा वंदना की गांड के छेद के मुहाने पर टिकाया, ऊपर हरीश को देख कर आँख मारी, जैसे कि वो 100 मीटर रेस में रेस स्टार्ट के लिए फायर कर रही हो.
हरीश ने एक धक्का दिया और उसका लौंडा वंदना की गांड में जा घुसा.
वैसे तो वंदना ने हरीश का लौंडा अपनी गांड में कई बार लिया हुआ था.
पर ये पहली बार था जब लंड गांड में तब घुसा, जब बुर में एक मोटा सा लंड पहले से घुस कर कमाल कर रहा था.
ये अनुभव बड़ा ही अनोखा था और बड़ा की मजेदार भी.
जैसे जैसे दो मोटे लंड उसके दोनों छेदों में अन्दर बाहर जाते थे, वह वासना के उन्माद में पागल सी हो जा रही थी.
आनंद के चरम शीर्ष पर थी वो और कुछ भी बडबडा रही थी.
“चोदो मुझे तुम दोनों….
ओह मई गॉड…मेरी गांड मारो हरीश….
मेरी बुर को चोद डालो प्रतीक….
ओह्ह…मैं झड़ने वाली हूँ…मेरी मारो जोर से ….
आ…आ…आ..आह…उईईईईई…….
”, वंदना ये बडबडाते हुए जोरों से झड गयी.
उस रात बहुत कुछ हुआ.
आरती और वंदना ने हरीश और प्रतीक से डबल-चुदाई कराई.
वंदना ने आरती से अपनी बुर फिर से चुस्वाई और फिर वंदना ने आरती की चूत चूसी.
गर्मी की ये लम्बी शाम चारों ने बहुत से खेल खेलते हुए गुजारी.
जब वे चलने लगे तो आरती ने कहा, “मुझे बड़ी खुशी है की हम लोगों का परिचय इतनी जल्दी तुम लोगों से हो गया.
बड़ा अच्छा हो की और 4-5 कपल्स हमारे खेल में शामिल हो सकते.
तुम लोगों किसी और कपल्स को जानते हो जो इसमें शामिल हो सकें? मैं अगले हफ्ते नया जॉब पर स्टार्ट कर रही हूँ.
वहां पर मैं और लोगों को अन्दर लाने की कोशिश करूंगी.
जल्द ही हमारे पास एक बड़ा और बढ़िया सा ग्रुप होगा.
बहुत मजा आएगा न? हम यहाँ पर पार्टी करेंगे.
हम हिल स्टेशन पर जा कर पार्टी करेंगे”. सब लोगों ने फिर से किस किया एक दुसरे के बदन को अच्छे से छुआ.
उन्होंने अगले हफ्ते की पार्टी हरीश और वंदना के घर पर तय की.
चारों लोग अपनी इस नयी शुरुआत से बड़े खुश थे.
वो जानते थे कि आने वाला समय उस सबके जीवन में नए नए आनंद ले कर आने वाला था और सब लोग इस बात से बड़े खुश थे.
आज की शाम को पड़ोसियों के घर जम कर सेक्सी पार्टी करने के बाद, वंदना और हरीश धीरे धीरे घर की तरफ टहलते हुए जा रहे थे.
थोड़े देर के लिये दोनों खामोश थे.
शायद सोच भी नहीं प् रहे थे की पिछले ३-४ घंटे में जो भी हुआ है he सच में हुआ है या सम्पना था.
शायद दोनों ही इस बात का इंतज़ार कर रहे थे की दूसरा बोले.
यह उनका स्वैप का पहला अनुभव था.
उन्हें खुशी थी की उनका पहला अनुभव इतना अच्छा गया.
हरीश मौन भंग करते हुए बोला, “वंदना.
” “यस डार्लिंग!”. “आज रात की इस पार्टी में तुम्हें मजा आया की नहीं?”. “बहुत ज्यादा मज़ा आया हरीश, तुम्हें तो मालूम है कि मुझे तुम्हारे सामने किसी दुसरे मर्द से चुदने का कितने सालों से इंतज़ार था.
मेरा प्रतीक से चुदना, फिर तुमसे चुदना फिर तुम दोनों से एक साथ चुदना…और आरती की का मेरी चूत को चाटना और मेरा उसकी चूत को चाटना…मुझे तो अभी भी मेरी किस्मत पर यकीन नहीं हो रहा है.
“ वंदना बोलती जा रही थी, “हम लोगों ने अगले हफ्ते मिलने का प्लान तो किया है.
पर मेरा मन तो उससे पहले एक बार और मिलने का हो रहा है हरीश….
मतलब कल राट ही मिलें उसने फिर से?” हरीश ने स्वीकृति दी, “बढ़िया आईडिया है ये.
मुझे लगता है कि वो मान जायेंगे.
हमारे पडोसी हमसे कहीं से कम चुदक्कड़ नहीं हैं.
वो चोदने का कोई मौका नहीं छोड़ेंगे.
मैं उन्हें कॉल कर के कल सुबह ही बुला लूँगा डार्लिंग!”
स्रोत:इंटरनेट