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Do Kamuk Padosi Pariwar Hindi Erotic Story 2

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“थैंक्स डार्लिंग….
मैं टॉप माल हूँ..और तुम्हारी बेटी काजल? क्या तुम उसे हमारे खेल में जल्दी शामिल करने की सोच रहे हो?” “पता नहीं बेबी….
पर मुझे लगता है इस मामले में किसी तरह की जल्दबाजी ठीक नहीं है” वंदना को फिर से अपनी गांड में कुछ गड़ता हुआ सा महसूस हुआ.
उसे हरीश का ये कभी भी तैयार रहने का अंदाज़ बड़ा भाता था.
वंदना जब हरीश से मिली थी तब तक सेक्स के प्रति उसका रुझान कुछ ख़ास नहीं था.
पर हरीश के साथ बिठाये पहले 6 महीने में वंदना एक ऐसी औरत में तब्दील हो गयी जिसे हमेशा सेक्स चाहिए.
वो एक दुसरे के लिए एकदम खुली किताब थे.
उन्हें एक दुसरे की पसंद, नापसंद, गंदी सेक्सी सोच सब बहुत अच्छी तरह से पता था.
वो दोनों बहुत दिन से अपने १८ वर्ष की बेटी को अपने सेक्स के खेल में लाने की सोच रहे थे.
जब भी मौका मिलता, वे दोनों इस विषय में चर्चा करना नहीं चूकते थे.
वंदना को ये अच्छी तरह से पता था की काजल का काम तो होना ही है, आज नहीं तो कल … हरीश खिड़की से झांकता हुआ बोला, “अपना नए पडोसी की बॉडी तो एकदम मस्त है और देखने में भी हैण्डसम है.
उसे उतार लो शीशे में.
किसी दिन जब मैं ऑफिस में हूँ, तुम उसे किसी बहाने से यहाँ बुला कर जम कर चोदना” वंदना आनंदातिरेक से भर उठी.
उसकी एक और कल्पना थी की वो अपने पति हरीश के अलावा किसी गैर मर्द के साथ यौन सुख का आनंद ले.
हरीश को ये बात पता थी.
वो इस बारे में अक्सर बात करते थे.
वो सेक्स करने के दौरान गैर मर्द वाला विषय अक्सर ले आते थे.
ऐसा करने से इससे उन्हें चुदाई में अतिरिक्त आनंद मिलता था.
वंदना और हरीश दोनों एक दुसरे के पसंद अच्छी तरह समझते थे.
शायद यही उनके खुश वैवाहिक जीवन का राज था.
उनके पडोसी का सामन अब तक अनलोड हो चुका था.
वो मूविंग ट्रक के ड्राईवर से कुछ बात कर रहा था.
उसने एक पतली टी-शर्ट और टाइट शॉर्ट्स पहन रखे थे.
हरीश ने वंदना के कान के पीछे का हिस्सा चूमते हुए पूछा, “वंदना, उसके टाइट शॉर्ट्स में उसका सामान देख रही हो? मुझे पक्का पता है कि तुम उसका लौंडा मुंह में लेकर चूस डालोगी न? सोचो न उसका लंड तुम्हारे मुंह में अन्दर बाहर हो रहा है.
” वंदना गहरी साँसे ले कर कुछ बडबडायी.
हरीश ने उसकी स्कर्ट उठा दी और अपना लौंडा उसकी गांड की दरार में रगड़ने लगा.
वंदना आगे झकी और अपने चूतडों को उठाया.
हरीश ने अपना लंड वंदना की चूत के छेद पर भिड़ाया और एक ही झटके में पूरा घुसेड़ दिया.
वंदना इस अचानक आक्रमण से सिहर सी उठी.
उसकी सीत्कार से पूरा कमरा गूंज उठा.
वंदना बोली, “एस..हरीश सार्लिंग…चोदो मुझे…हाँ मुझे पडोसी का लंड बड़ा मजेदार दिख रहा है….
मैं किसी दिन जब तुम ऑफिस में होगे …उसे यहाँ बुलाऊंगी …और जम के चुद्वाऊंगी…..आह…आह…पेलो….
” जल्दी ही हरीश वंदना की चूत में झड गया.
वंदना को हरीश से चुदना और साथ में पडोसी को ले कर गंदी गंदी बात सुनने में बड़ा मज़ा आया.
हरीश ने अपना लंड वंदना की चूत से निकाल लिया और ऊपर शावर लेने चला गया.
ऊपर से बोला.
“वंदना, तुम जा कर हेल्लो हाय कर के आ जाओ.
और उन्हें शाम को बाद में चाय नाश्ते के लिए इनवाईट लेना” बाद में, हरीश जब शावर से निकला, उसने देखा वंदना वहां खडी हो कर कपडे उतार रही थी, नीचे ब्रा नहीं पहनी थी.
“ओह… तुम्हारी ब्रा को क्या हुआ जानेमन?” हरीश ने पूछा.
“वो मैंने पड़ोसियों से मिलने जाने के पहले उतार ली थी.
” वंदना ने आँख मारते हुए बोला.
“ह्म्म्म..तो पड़ोसियों ने तुम्हारे शानदार मम्मे ठीक से ताके की नहीं” हरीश ने पूछा.
“शायद….
एनी वे, बंसल्स यानी की हमारे नए पडोसी शाम को 6:00 बजे आयेंगे.
ओह हरीश वो बहुत अच्छा आदमी है…अब तुम देखते जाओ..वो जिस तरह से मुझे तक रहा था..मुझे लगता है की मेरा बरसों पुराना सेक्सी सपना पूरा होने वाला है…”. बंसल्स ठीक शाम 6:00 बजे पहुँच गए.
सब ने एक दुसरे से परिचय किया.
हर आदमी एक दुसरे को टाइट हग कर रहा था.
काजल वहां खड़े हो कर आश्चर्य से इन सब का मिलाप देख रही थी.
वंदना को जब प्रतीक ने हग किया तो वो इतना टाइट हग था की वंदना उसका मोटा और लम्बा लंड अपने बदन पर गड़ता हुआ महसूस कर सकती थी.
प्रतीक ने अपना हाथ वंदना की गांड पर रखा और हलके से मसला.
वंदना ने घूम कर इधर उधर देखा – हरीश आरती लगभग उसी हालत में थे.
आहना और काजल पीछे के दरवाजे से निकल रहे थे.
वंदना ने प्रतीक से नज़रें मिलाईं और मुस्कराई और फुसफुसाई “ध्यान से प्रतीक…जरा ध्यान से”. इस बात का मतलब था की मेरी गांड से खेलो जरूर पर तब जब कोई देख न रहा हो.
सब लोगों ने ड्राइंग रूम पार कर के पेटियो में प्रवेश किया.
वंदना ने वहां सैंडविच, समोसे, चाय वगैरह लगवा रखे थे.
हरीश और वंदना एक दुसरे के देख कर बीच बीच में मुस्करा लेते थे.
हरीश ने ध्यान दिया की उनकी बेटी काजल एक वहां अकेली लडकी थी जिसने ब्रा पहनी हुई थी.
आहना हर बहाने से अपने शरीर की नुमाइश कर रही थी.
उसे पता था की हरीश उसे देख देख के मजे ले रहा है.
प्रतीक की पत्नी आरती काफी खुशनुमा स्वभाव की थी.
तब वो झुक कर खाना अपनी प्लेट में डाल रही थी, उसके लो-कट ब्लाउज से उसके मम्मे दिखते थे.
हरीश को यह देख कर बड़ा आनंद आ रहा था.
वैसे आरती और वंदना दोनों की दिल्ली की लड़कियां थीं.
शायद इसी लिए इस मामले में दोनों काफी खुले स्वभाव की थीं.
सब लोग नाश्ता खाते हुए एक दुसरे से बात कर रहे थे.
आहना और काजल जल्दी से गायब हो गए.
शायद वे दोनों काजल के रूम में बैठ कर कुछ मूवी देख रहे थे.
वंदना प्रतीक को अन्दर ले कर गयी और उसे दिखाने लगी की उनका इम्पोर्टेड स्टोव कैसे काम करता है.
आरती हरीश को देख कर मुस्कुरा रही थी.
“सो ये मोहल्ला मजेदार है की नहीं हरीश.
हम जब मुंबई से मूव हो रहे थे, तो वहां के पड़ोसियों को छोड़ने का बड़ा अफ़सोस था हमें.
हम उनसे काफी करीब भी आ चुके थे” आरती ने पूछा.
हरीश मुस्कराने हुए आरती के मस्त उठे हुए मम्मे देख रहा था.
उसने उसे देखा और जवाब दिया, “मुझे लगता है आप लोगों के आने से मोहल्ले में नयी रौनक आ जायेगी.
” आरती मुस्कराई और बोली, “ये मुझे एक इनविटेशन जैसा लग रहा है हरीश.
जब हम लोग थोडा सेटल हो जाएँ, तुम और वंदना हमारे साथ एक शाम गुजारना.
” हरीश बोला, “ओह उसमें तो बड़ा मज़ा आएगा.
हम लोग आपके मुंबई के पड़ोसियों वाले खेल भी खेल सकते हैं उस दिन” “रियली? क्या तुम और वंदना वो वाले खेल खेलना चाहोगे?” आरती ने चहकते हुए पूंछा.
आरती मनो ये पूँछ रही हो, “अरे हरीश तो तुम्हें मालूम भी है की हम कौन सा खेल खेल खेलते हैं वहां?” हरीश मन ही मन मुस्कराते हुए मना रहा था कि भगवान् करे तुम उसी खेल की बात कर रही हो जिसमें उसे आरती की स्कर्ट के अन्दर जाने का मौका मिले.
वह आँख मारते हुए बोला. “आरती, अगर तुम सिखाने को तैयार को वो खेल तो हम लोग सीखने में बड़े माहिर हैं”
स्रोत:इंटरनेट