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Do Kamuk Padosi Pariwar Hindi Erotic Story 3

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ऐसी गर्म बातें सुनते ही हरीश का लंड न चाहते हुए भी थोडा टाइट हो गया.
आरती ने ये बात तुरंत नोटिस की.
वो अपने होठों को होठों से चबाते हुए मुस्कराई और हरीश की तरफ थोडा झुक गयी.
उसका बलाउज थोडा खुल सा गया और हरीश को उसकी गुलाबी और मस्त टाइट चून्चियों का मस्त नज़ारा दिख गया.
उसने चून्चियों का अपनी आँखों से सराहते हुआ कहा, “हमको लगता था की हमें दोस्ती करने में थोडा वक़्त लगेगा.
पर तुम लोगों से मिल कर लगता है की मैं गलत था.
” हरीश और आरती की नज़रें एक दुसरे से मिलीं.
हरीश किसी भी लडकी से इतनी जल्दी नहीं घुला मिला था.
दोनों को बहुत अच्छी तरह से पता था की उनके दिमाग में क्या खिचड़ी पाक रही थी.
हरीश आरती को जल्दी से जल्दी चोदना चाह रहा था.
आरती को ये बात बहुत साफ़ दिखाई पद रही थी.
और सबसे बड़ी बात तो ये थी की हरीश को आरती के स्कीम बड़ी अच्छे तरह से पता थी.
हरीश मुस्कराया और बोला, “मैं हमारे खेल खेलने का बेसब्री से इंतज़ार कर रजा हूँ.
” “वो तो ठीक है मिस्टर हरीश, पर तुम्हारी बेगम वंदना का क्या” आरती ने पूछा.
“मुझे लगता है की उसे भी ये खेल पसंद आएगा, हम दोनों ने कुछ करते हुए इस बारे में कई बारे में बात करी है” , हरीश बोला.
“कुछ करते हुए ..हाँ.. पर क्या करते हुए?” आरती ने उसे चिढाया.
“वही जो मैं तुम्हारे साथ करना चाह आहा हूँ.
” हरीश ने अंततः बोल ही डाला.
उसने ये मान लिया था की प्रतीक को इससे कोई समस्या नहीं है.
आरती ने हरीश के खड़े लंड उसके शॉर्ट्स के अन्दर देखा और एक सिहरन भरते हुए बोला, “अजीब सी बात है.
अभी अभी खाया है पर फिर से कुछ खाने का दिल करने लगा” हरीश हंसने लगा और बोला, “मुझे भी.
क्या हमने कुछ और खाने के लिए तुम लोगों के सेटल होने का इंतज़ार करना पड़ेगा?” “किस बात के लिए हरीश” आरती ने उसे फिर से चिढाते हुए पूछा.
हरीश को आरती का ये चिढाने का अंदाज़ बड़ा भाया.
वो बोला “वही बात जिसमें मुझे तुम्हारे सारे ओपेनिंग्स भरने का मौका मिले.
” “ओह..बात तो ये है की मैं तो बिलकुल तैयार हूँ, अभी के अभी.. पर तुम कल सुबह हमारे यहाँ क्यों नहीं आ जाते…हम मिल कर अपने खेलों की प्रक्टिस जम कर करेंगे …” “किस वक़्त””. “दस बजे? हमारा दरवाजा खुला छोड़ देंगे.
बस आ जाना.
और हरीश साहब…मुझे तुम्हारी ओपेनिंग्स भरने वाला खेल बहुत पसंद…बहुत…” बाहर अँधेरा होने लगा था.
वो दोनों वहां बैठ कर बात कर रहे थे.
दोनों खड़े होते और उन्हें हाथ एक दूसरे के शरीर पर चल रहे थे मानों एक दुसरे में कुछ ढूंढ रहे हों.
हरीश के हाथ आरती की फिट गांड पर रेंग रहे थे, वो बीच बीच में उसके ब्लाउज में हाथ डाल कर उसके मम्मे मसल लेता.
तो कभी पैंटी मन डाल कर उसकी चूत में उंगली डाल देता.
आरती हरीश के शॉर्ट्स में हाथ डाले बैठी थी और उसके खड़े लंड को अपने मुलायम हाथों से सहला रही थी.
ये सोच कर की कल ये लंड उसकी चूत में होगा उसे एक अजीब सी सिहरन सी हो रही थी.
इसी बीच किसी के आने की आवाज ने उन्हें चौंका दिया और वो दोनों एक दम से अलग दूर हो कर खड़े हो गए थे मानों उनके बीच कुछ हुआ ही न हो.
प्रतीक और वंदना वापस आ गए थे.
हरीश ने देखा की वंदना उसकी तरफ देख कर मुस्करा रही थी.
शायद वो सोच रही थी की उसके अनुपस्थिति में हरीश और आरती के बीच क्या हुआ होगा.
हरीश भी ये सोच रहा था की प्रतीक ने वंदना के साथ क्या क्या किया होगा.
पढने के लिए My  बेस्ट है.
Hindi Sex Stories के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. पार्ट 4.
स्रोत:इंटरनेट