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Do Kamuk Padosi Pariwar Padosan Sex Story 2

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वंदना को हरीश के वापस आने के लिए लगभग दो घंटे इंतज़ार करना पड़ा.
हरीश को देखते ही वंदना समझ गयी को वो आरती को जम कर छोड़ कर आया है.
हरीश ने उसे साड़ी आपबीती सुनाई.
उसने बताय की जब वो उसके घर पहुंचा आरती बिस्तर पर नंगी लेट कर उसका इंतज़ार कर रही थी.
दोनों ने एक दुसरे पहले तो चूस चूस कर पानी निकाला फिर चोद चोद कर.
“वंदना उन्होंने हमें शाम को ड्रिंक्स के लिए बुलाया है.
तुम अभी भी राजी हो ना?” वंदना हंसी और बोली, “अरे ये भी कोई पूछने की बात है… ऐसा मौका छोड़ने का तो सवाल ही नहीं उठता.
” “अच्छा एक बात – आरती पूछ रही थी की क्या तुम्हें औरत के साथ सेक्स पसंद है”. वंदना बोली … “मुझे लगता है की ये कला भी सीखने का वक़्त आ ही गया है….
” दोनों ने बाकी का दिन शाम का इंतज़ार करते हुए ही गुज़ारा.
शाम को जब वो पड़ोसियों के लिए निकलने ही वाले थे, उसके घर की घंटी बजी, दरवाजा खोला तो देखा पड़ोसियों की बेटी आहना खडी थी.
“मैंने सोचा की मैं काजल को यहाँ कंपनी दूंगी, ताकि आप दोनों को मेरी मम्मी और पापा को ठीक से जानने का पूरा मौका मिले.
” आहना अन्दर आई.
वो मिनी स्कर्ट और लो कट ब्लाउज पहने हुए थी.
वंदना अभी भी ऊपर तैयार हो रही थी.
हरीश ने आहना की चून्चियों को घूरा और बोला, “ये बड़ी अच्छी बात है आहना.. ये तो बड़ा अच्छा होगा अगर तुम और काजल अच्छी सहेलियां बन जाओ..” आहना मुस्करा रही थी उसे अच्छे तरह पता था की हरीश इस समय उसके चुन्चियों को मजे ले कर घूर रहा है.
वो बोली, “मुझे पूरा यकीन है की हम दोनों बेस्ट सहेलियां बनेंगे … क्या आप मेरे दोस्त बनेंगे. हरीश अंकल? मुंबई में मेरी कई सहेलियों के पिता लोग मेरे बड़े अच्छे दोस्त थे”. हरीश मन ही मन सोच रहा था की आहना क्या उसे हिंट दे रही थी कि मुंबई में वो अपनी सहेलियों के पिताओं के साथ मौज कर रही थी.
इस ख़याल से ही उसका लंड खड़ा हो गया.
उसने आहना की आँखों में आँखें डाल कर बोला, “मुझसे दोस्ती करोगी आहना?”. “ओह.. बिलकुल” उसी समय वंदना सीढ़ियों से उतारते हुए नीचे आई.
उसकी ड्रेस बहुत ही सेक्सी थी, हरीश और आहना जैसे वंदना को घूरते जा रहे थे.
काजल वंदना के पीछे पीछे आई और वंदना की ड्रेस का बिलकुल ध्यान न देते हुए उसने आहना का हाथ पकड़ा और अपने ऊपर कमरे में चली गयी.
वंदना और हरीश हाथों में हाथ डाले जब पड़ोसियों के यहाँ पहुचे, प्रतीक और आरती दोनों ने बड़े ही खुशी से उसका दरवाजे पर उनका स्वागत किया.
जल्दी प्रतीक ने सबको ड्रिंक्स बना दिए.
इस परिस्थिति में सब के लिए ड्रिंक्स जरूरी था.
जैसे ही थोडा सरूर चढ़ा, वो चार लोग एक दुसरे के साथ और भी खुलते गए.
प्रतीक के चुटकुले और हरीश के जवाबी चुटकुले नॉन-वेज होते चले जा रहे थे.
लड़कियां उन गंदे चुटकुलों पर जम के ताली बजा बजा कर हंस रही थीं.
हरीश और प्रतीक एक दुसरे की बीवियों के साथ खड़े थे.
थोड़े समय में ही दोनों जोड़ियाँ एक दुसरे से थोडा दूर होती गयीं.
एक दुसरे के कानों में फुसफुसाना शुरू हो गया.
एक दुसरे को छूने का छोटा से छोटा मौका भी कोई छोड़ नहीं रहा था.
सारा मामला बिलकुल ठीक दिशा में जा रहा था.
कुल मिला कर प्रतीक के बनाए हुए ड्रिंक्स जैसे बिलकुल ठीक काम कर रहे थे.
हरीश ने वंदना को चेक किया.
वंदना के मम्मे आनंद में कड़े हो गए थे, उसके गाल शायद थोडा नर्वस होने की वज़ह से लाल हो गए थे.
वंदना भी हरीश को बीच बीच में देख लेती थी.
वैसे उसे हरीश और आरती के बारे में कुछ सोचने की जरूरत ही नहीं थी क्योंकि वो दोनों तो आज सुबह ही अपनी चुदाई की शुरुआत कर चुके थे.
बात ये थी की उसके और प्रतीक के बीच की बात कुछ आगे बढेगी या नहीं?. प्रतीक शायद वंदना की इस अदृश्य उलझन को भांप गया.
वो बोला, “वंदना तुमने अपने घर में मुझे अपना स्टोव दिखाया था.
आओ मैं तुम्हें अपना होम थिएटर रूम दिखाता हूँ.
” वंदना तो मानों पहले से ही तैयार बैठी थी.
प्रतीक ने उसका हाथ अपने हाथों में लिया और बढ़ गया.
अब ध्यान देने की बात ये है कि होम थिएटर रूम देखने का निमंत्रण हरीश और आरती को क्यों नहीं मिला.
शायद प्रतीक और वंदना जल्दी से जल्दी आरती और हरीश से बराबरी करना चाहते थे.
क्योंकि सुबह कि चुदाई के बाद हरीश और आरती का स्कोर इनके मुकाबले में 1-0 था.
जैसे ही वे दोनों वहां से निकले, आरती ने दीवाल पर अलग हुआ स्विच आन कर दिया.
वो हरीश की तरफ मुडी और मुस्कराते हुए बोली, “अब हम प्रतीक और तुम्हारी प्यारी और मासूम बीवी के बीच जो कुछ भी होगा वो सारा हाल इस स्पीकर पर सुन सकेंगे.
” उन्हें स्पीकर पर दरवाजा खुलने की आवाज आई और फिर प्रतीक और वंदना के परों की आहट सुनाई पडी.
साड़ी चीजें बिलकुल साफ़ सुनाई पड़ रही थीं.
उन्होंने क्लिक की आवाज सुनी, लगता है प्रतीक ने दरवाजा लॉक कर लिया हो.
वंदना मुंह दबा कर हंस रही थी.
उसकी दिल की धडकनें जोर से चल रही थीं.
प्रतीक ने लाइट ऑफ कर के वहां अँधेरा कर दिया.
वंदना ने जोर से सांस भरी और उई की अव्वाज निकाली क्योंकि प्रतीक अपना हाथ उसकी स्कर्ट के अन्दर डाल कर उसकी चूत सहला रहा था.
वंदना ने अपने पैरों को फैला दिया ताकि प्रतीक उसकी चूत को मजे से सहला सके और बोली, “मौका मिला की की दरवाजा बंद और बत्ती बंद और काम चालू प्रतीक जी?”. “अरे मै तो तुम्हारे लिये कब से कितना बेकरार हूँ, बस मौका मिलने की ही देर थी जानेमन.
” “ओह नो ….
ओह… नो ….. बड़ा मजा आ रहा है, तुम जिस तरह से मेरी स्कर्ट के अन्दर मेरी रगड़ रहे हो….
ओह प्रतीक … तुम तो बड़े खिलाडी निकले..आह्ह…” “आओ यहाँ इस काउंटर पर बैठो, ताकि मैं तुम्हारी बुर चाट सकूं वंदना.
” बाहर हरीश और आरती स्पीकर पर चलने की आवाज फिर गीली चीज चाटने की आवाज और साथ में वंदना के सिहरने की आवाज सुन रहे थे.
“ऊ ऊ ऊ ऊ ऊ… यस प्रतीक… बहुत अच्छे … कितना मजा आ रहा है….. ओह शिट प्रतीक लगता है की झड जाऊंगी… फक…….
” भरी साँसों के आवाजों से सारा कमरा भर उठा.
थोडी समय बाद वंदना एक धीमी से चीख मार कर शांत हो गयी.
वंदना बोली, “अब कुछ खाने का मेरा टर्न प्रतीक….
चलो खोलो और दिखाओ यहाँ क्या छुपा रखा है …” और इसके बाद स्पीकर पर प्रतीक के लंड के ऊपर वंदना का गीले मुंह की आवाजें सुनाई दीं.
प्रतीक को मजा लेने की आवाजें भी बीच में आ रही थीं.
और कुछ ही छड़ों बाद. “मैं तुम्हारी बुर चोदना चाहता हूँ वंदना… अभी के अभी…”. “यस ….
जल्दी से….
ओह यस …मजा आ रहा है ….. सो गुड.
ओह तुम्हारा बड़ा लंड बड़ा प्यारा है प्रतीक… पेल दो इसे ….
छोड़ दो मुझे…मुझे चोदो…….
फक…फक…”. थोड़ी देर में जब आवाजें आनी बंद हो गयीं, प्रतीक बोला, “ओह वंदना, कपडे वापस पहनने की जरूरत नहीं है.
चलो वापस हरीश और आरती के पास चलते हैं… मुझे पूरा यकीन है की वो दोनों ऐसा की कुछ कर रहे होंगे”
स्रोत:इंटरनेट