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Do Kamuk Padosi Pariwar Padosan Sex Story

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माहौल गरम हो रहा था, आरती ने हरीश को खुला निमंत्रण दे दिया था उसके घर आके उसकी चुदाई करने का.
उधर उसकी बीवी आरती के पति के साथ क्या करके आई वो तो वो ही जाने.
padosan sex story का अगला पार्ट- Hindi Sex Stories के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. पार्ट 4. हरीश के हाथ आरती की फिट गांड पर रेंग रहे थे, वो बीच बीच में उसके ब्लाउज में हाथ डाल कर उसके मम्मे मसल लेता.
तो कभी पैंटी मन डाल कर उसकी चूत में उंगली डाल देता.
आरती हरीश के शॉर्ट्स में हाथ डाले बैठी थी और उसके खड़े लंड को अपने मुलायम हाथों से सहला रही थी.
ये सोच कर की कल ये लंड उसकी चूत में होगा उसे एक अजीब सी सिहरन सी हो रही थी.
इसी बीच किसी के आने की आवाज ने उन्हें चौंका दिया और वो दोनों एक दम से अलग दूर हो कर खड़े हो गए थे मानों उनके बीच कुछ हुआ ही न हो.
प्रतीक और वंदना वापस आ गए थे.
हरीश ने देखा की वंदना उसकी तरफ देख कर मुस्करा रही थी.
शायद वो सोच रही थी की उसके अनुपस्थिति में हरीश और आरती के बीच क्या हुआ होगा.
हरीश भी ये सोच रहा था की प्रतीक ने वंदना के साथ क्या क्या किया होगा.
बाद में उस रात जब हरीश और वंदना बिस्तर पर लेटे, वंदना बड़ी गर्म थी.
वो एक मिनट के लिए हरीश का लंड चूसती, तो दुसरे ही पल हरीश का मुंह अपनी चूत में भिड़ा के अन्दर खींच देती.
फिर अगले ही पल वह हरीश को नीचे लिटा कर उसके ऊपर चढ़ गयी और लगी उसे दनादान छोड़ने.
वंदना को खुद पता नहीं था की वो चोद चोद कर कितनी बार झडी.
जब वो आखिरी बार झडी तो वो हरीश के ऊपर से जैसे साइड में बिस्तर पर कटे पेड़ की तरह गिर पडी.
“आज की चुदाई बड़ी ही मजेदार है मेरी जान.
” हरीश थोडा ऊपर खिसका और वंदना की चून्चियों से खेलते हुए बोला, “मुझे लगता है की तुमने आज प्रतीक के साथ थोड़ी तो मौज की है पर जब तुम लौटे तो तुम्हारे चेहरे पर एक अजीब सा लुक था.
हैं ना?” वंदना थोड़ी हिचकिचाई उसने अपने हाथों से हरीश का मुलायम पद गया लौंडा पकड़ लिया और उससे तब तक खेला जब तक की वो फिर से खड़ा बहिन हो गया.
वो बोली, “प्रतीक मुझे लाइन मार रहा था जोरों से.
जब मैं उसे अपना स्टोव दिखा रही थी, वो पीछे खड़ा था.
वो अपने हाथ मेरे हाथों के नीचे से ला कर मेरे मम्मे सहलाने लगा.
और उसने मेरी गर्दन के पीछे किस भी किया.
” “और तुमने क्या किया बेबी डॉल?”. “पहले तो मैं वह चुपचाप खडी रही.
मुझे विशवास नहीं हो रहा था की ये सब वास्तव में हो रहा है….. फिर मैं वापस उसकी तरफ घूमी….
तुम्हें तो पता ही है की मैं ऐसे समय ब्रा नहीं पहनती ताकि मेरे तगड़े मम्मों की जम के नुमाइश कर सकूं…उसने मेरे मम्मों को देखा..और बोला – वंदना तुम्हारे मम्मे तो लाजवाब हैं.
” “इसके पहले की मैं कुछ कहती वो मेरे दोनों मम्मे मसलने लगा …मैं कुछ बुद्बुदाई..मुझे बड़ा आनंद आ रहा था….
उसने मेरा ब्लाउज खोल दिया और मेरे मम्मों को एकदम नंगा कर के मसलने लगा …थोड़ी देर में मैने उसका हाथ हटा दिया और ब्लाउज के बटन लगा दिए.
” “तुम्हारा मन नहीं हुआ की प्रतीक को वहीं के वहीं चोद डालो वंदना मेरी जान!”. वंदना हरीश का लौंड़े को जोर से हिला रही थी.
उसने हरीश की आँखों में ऑंखें डाल के बोला, “हरीश, प्लीज बुरा मत मानना पर सच्चाई ये है की मेरा बस चलता तो उसे वहीँ पटक कर चोद देती उसे.
अगर तुम दोनों दुसरे कमरे में नहीं होते तो भगवान् न जाने आज मैं क्या कर बैठती” “ओह, मुझे मालूम है बेबीडॉल की तू क्या करती.
तू अपनी टाँगे फैला कर प्रतीक का बड़ा और मोटा लौंडा अपनी प्यासी चूत में गपाक से डाल लेती ना? वैसे लगता है अब समय आ गया की हम अपना इतना पुराना सपना पूरा करें… प्रतीक और रीता स्वैप करने में पूरी तरह से इंटरेस्टेड हैं..तू क्या बोलती है मेरी जान? ” वंदना पूरे उन्स्माद में भर चुकी थी.
वो हरीश के ऊपर चढ़ गयी और उसका लौंडा अपनी खुली चूत में भर कर उसे जम के छोड़ने लगी.
जैसे वो ऊपर ने नीचे आती उसकी आज़ाद चुन्चिया हवा में उछल जाती थीं.
उन दोनों की ये चुदाई बड़ी की स्पेशल थी क्योंकि पहली बार वो अपनी चुदाई में औरों को सामिल करने के काफी करीब थे.
वंदना ने अपनी हस्की आवाज में पूछा, “क्या तुम पड़ोसियों के साथ ये सब करना चाहोगे? ओह..मुझे तो पहले से पता है की तुम आरती को चोदना चाहते हो.
मुझे पता है की तुम मेरे अलावा और औरतों को चोदते हो और मुझे इससे कोई समस्या नहीं रहे है.
तुमने मुझे हमेशा खुश रखा है…पर पड़ोसियों के साथ का ये सब तुम्हें ठीक रहेगा हरीश? प्रतीक ने मुझे बोल ही रखा है की वो कहीं और मिल कर मेरी लेना चाहता है”. “ओह तो ये बात है बेबी डॉल! लगता है हमारे पडोसी समय बर्बाद करने में बिलकुल विश्वाश नहीं रखते हैं”. हरीश ने भी वंदना को बताया कि इस दौरान आरती और उसके बीच में क्या हुआ.
हरीश वंदना की चूत में अपना लंड उछल उछल कर डालने लगा.
वंदना को हरीश का लौंडा अपनी चूत के अन्दर फूलता हुआ सा लगा.
हरीश धीमे धीमे से छोड़ने लगा और एक पल बाद ही जोर से चोदने लगता.
पूरा कमरा चुदाई की मस्की गंध से भर सा गया.
वंदना ने झुक कर हरीश का लंड गपागप अपनी चूत में जाते देखा और हरीश से पूछा, “तो तुम मानसिक रूप से उस बात के लिए बिलकुल तैयार हो की प्रतीक मुझे छोड़ दे? तुम्हारा आरती को चोदना मुझे तो बड़ा अच्छा लगेगा….
पर तुम गैर मर्द की मेरे साथ चुदाई देख सकोगे?” “अगर तुम प्रतीक से चुदना चाह रही तो मुझे इससे कोई समस्या नहीं है बेबी डॉल.
मेरी तो ये सब करने की वर्षों की तमन्ना थी.
” “ओह शिट हरीश… मैं तो उस समय के लिए तरस रही हूँ जब प्रतीक मेरी ले रहा होगे और तुम मुझे उससे चुदते हुए देख रहे होगे.
गैर मर्द से चुदने के विचार से मुझे मजा आने लगता है” हरीश ने वंदना को अपने आरती के साथ के अनुभव को अब विस्तार में बता रहा था और उसे चोद रहा था.
इस समय वंदना को पता चला की उन्हें पड़ोसियों से मिलने अगली सुबह जाना है, “ओह यस….
तुम आरती को जोर से चोद देना हरीश….
ओह…आईईई…ई..ई…..मैं गयी रे… ” कहते हुए वंदना झड गयी.
दोनो एक दुसरे की बाहों में लिपट कर नंगे ही सो गए.
उन्हें अगले दिन की सुबह का इंतज़ार था.
उन्हें पता था की वो सुबह उनके जीवन में कई नए आयाम ले कर आयेगी.
वंदना और हरीश नंगे बदन एक दुसरे की बाँहों में समाये साड़ी रात सोते रहे.
दोनों ने पिछली रात एक दुसरे को चोद चोद कर इतना थकाया था की जब वो एक बार सोये तो सुबह कब हुई ये पता नहीं चला.
हरीश की आँख 9:30 पर खुली और वो तुरंत ब्रश करने चला गया.
वापस आकर वंदना के होठों पर होंठ रखे और धीरे से बोला, “बाय”.
हरीश अपने सामने के घर में कल ही शिफ्ट हुए पड़ोसी की बीवी आरती से मिलने जा रहा था.

स्रोत:इंटरनेट