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कविता ने कहा- भाभी, जो पानी वाला गिलास था, मुझे भी दो ना ! रुपाली ने कहा- कविता, वो पानी बच्चे नहीं पीते ! तो कविता कहने लगी- भाभी, अब मैं बच्ची नहीं हूँ ! यह देखो ! मेरा सीना तुम से बड़ा है। और हम लोग हँसने लगे, मैंने कहा- कविता, तुम्हें पानी चाहिए क्या? तो वो कहने लगी- एक गिलास दो ना।. मैंने कविता को एक हल्का पैग बना के दे दिया, कविता ने पी लिया। मैंने कहा- सब लोग आने वाले होंगे, जल्दी करो। अबकी बार कविता बीच में बैठ गई तो मैंने बाईक रोकी और कविता को पीछे बैठने को बोला।. कविता पीछे बैठ गई और हम मजा लेते हुए नीचे पहुँच गये और कविता और रुपाली से कहा- कुछ खाना है क्या?. वो कहने लगी- हाँ !. मैंने कहा- इस वक्त सिर्फ छोले-भटूरे ही मिलेंगे।. हम लोगों ने छोले भटूरे खाये और बाहर बैठ कर आपस में गप्पे लड़ाने लगे। जब सब लोग आ गये तो मैंने कहा- अंकल, अब कहां चलना हैं। अंकल और आन्टी ने कहा- बेटे, हम लोग तो बहुत थक गये हैं, अब हम आराम करेंगे। मैंने आकाश से पूछा- अब क्या प्रोग्राम क्या है?. तो आकाश ने कहा- पापा, आप बताओ क्या करें। कविता कहने लगी- पंकज ने रात को किसी को फोन किया था कि मुझे एक कमरा और बाईक चाहिए, क्यों ना पापा हम भी पंकज के साथ चलें, हम लोग भी आराम कर लेंगे। आकाश ने कहा- पापा ये ही ठीक रहेगा। मैंने कहा आकाश क्यों ना आप लोगों के लिये होटल में रुम मैं बुक करवा देता हूँ मैंने कहा- अंकल जी, वहाँ इतनी जगह नहीं होगी ! तो आकाश कहने लगा- हम लोगों को करना ही क्या है, हम लोग तो आपके ही साथ काम चला लेंगे। सब लोग गाड़ी में बैठ लिये और मैं बाईक पर चलने लगा तो कविता ने कहा- पंकज मैं भी तुम्हारे साथ चलती हूँ !. और मेरा बैग गाड़ी में रखकर मेरे पीछे बैठ गई। मैं उन लोगों के आगे-आगे चलने लगा। 10 मिनट के बाद हम लोग संगमपुरी पहुँच गये। पहुँच कर सुनील को फोन करके कहा कि हम आपकी कोठी के सामने खड़े हैं।. सुनील जल्दी से बाहर आया, कहने लगा- अन्दर नहीं आ सकता था क्या। मैंने कहा- नहीं यार, मेरे साथ कुछ लोग और भी हैं, एक की बजाय तीन कमरे चाहिये। सुनील कहने लगा- कोई बात नहीं ! और भी चाहियें तो बता दो वो भी हो जायेगा।. सुनील ने लड़के को आवाज लगाई- गाड़ी को अन्दर लगवा दो।. सब लोग जाकर आराम करने लगे, मैं भी सुनील से 10-15 मिनट बात करने के बाद अपने कमरे में चला गया, तौलिया लिया और बाथरूम में चला गया। फ्रेश होने के बाद नहा कर ऐसे ही नंगा कमरे में आ गया, तो मैंने देखा कि कविता और रुपाली मेरे कमरे बैठी हुई हैं।. मेरी तो जान ही निकल गई और मैं उलटा ही दबे पैर बाथरूम में घुस गया, तौलिया लपेटा कस कर और दरवाजा खोल कर दोनों को बाहर जाने को कहा। तो वो दोनों ही बोली- हम से क्या शर्म कर रहे हो? हम लोग सब कुछ देख चुके हैं पंकज ! बाहर आ जाओ, नहीं तो हम अन्दर आ जाएँगी। मैंने गुस्से में कहा- मैं अंकल को फोन करता हूँ !. तभी दोनों बोली- पापा को क्या, किसी को भी कर लो हम नहीं जाएँगी। अब आप बाहर आ जाओ। मैंने सोचा कि मैं किस मुसीबत में फँस गया? करूँ तो क्या करूँ?. कविता बोली- पंकज, मैं बाहर जा रही हूँ, आप बाहर आ जाओ। कविता ने बाहर जाकर दरवाजा बन्द किया तो मेरी जान में जान आई और मैं बाहर निकला, देखा कि रुपाली दरवाजा अन्दर से बन्द कर रही है। मैंने बाहर आकर निकर और एक टीशर्ट पहन ली, देखा कि रुपाली मुझे ही घूर रही है। मैं आराम से बिस्तर पर बैठ गया, रुपाली भी मेरे पास आकर बैठ गई और दो तीन मिनट के बाद बोली- पंकज, तुम नाराज हो गये क्या? हमें क्या मालूम था कि आपका कमरा अन्दर से बन्द नहीं होगा और आप इस तरह से बाहर निकलोगे? मैं आपसे माफी माँगती हूँ, मुझे माफ करो दो, पंकज मैं क्या कहूँ, यही कुछ सोच रहा था, तभी मैंने देखा कि रुपाली रो रही है। मैंने रुपाली को गले लगाया और कहा- तुम अकेली होती तो कोई बात नहीं, पर कविता तो मेरी और आकाश की बहन लगती है। रुपाली कहने लगी- नहीं, मैं आपसे कुछ कहना और माँगना चाहतीं हूँ ! और अपनी चुन्नी फ़ैला कर बोली- इसमें मेरे लिये कुछ डाल दो !. मैंने रुपाली से कहा- मैं आप सब लोगों से अपने परिवार की तरह से प्यार करता हूँ, लेकिन मुझे भी तो सोचने का मौका दो ! पंकज तुम कविता से शादी कर लो, कहकर रुपाली मेरे पैरों में गिर गई, मैंने रुपाली को पकड़ कर बिस्तर पर बैठाया, गले से लगा लिया और उसकी कमर को हाथ से सहलाने लगा। रुपाली ने अपने सर को मेरी छाती में छुपा लिया। दो तीन मिनट तक मैं ऐसे करता रहा और रुपाली रोती रही। पर मैं भी इन्सान हूँ, आखिरकार मैं भी जवाब दे गया और अपने होठों को रुपाली के होठों पर रख कर चूमने लगा और रुपाली के चूतड़ों को सहलाने लगा, रुपाली ने पैन्टी नहीं पहनी थी। अब मैंने रुपाली को बिस्तर पर लेटने को कहा, पर रुपाली ने मना कर दिया, कहने लगी- पंकज आप काफी थके हो, बस आराम से लेट जाओ। मैं बिस्तर पर लेट गया, रुपाली जल्दी से अपने कपड़े उतारने लगी तो मैंने रुपाली से कहा- यहाँ पर यह सब ठीक नहीं है। रुपाली कहने लगी- क्या ठीक है क्या गलत है इन बातों को छोड़ो।. मैंने कहा- रुपाली कमरे को लॉक कर दो।. तो रुपाली कहने लगी- कमरा मैंने पहले ही लॉक किया हुआ है।. वह मेरी निकर उतार कर मेरे लण्ड को चूसने लगी। मुझे भी मजा आने लगा, जैसे ही मेरा लण्ड तन कर पूरे आकार में आया, रुपाली मेरे लण्ड को अपनी चूत पर रखकर बैठने लगी। रुपाली को थोड़ा सा दर्द हुआ पर वो उसको सहन करते हुए ऊपर से धक्के लगाने लगी और मैं भी रुपाली का साथ देने लगा। मैं कभी उसकी चूचियों को दबाता तो कभी रुपाली के चूतड़ों पर हाथ चलाता।. रुपाली बहुत जल्दी झड़ गई और मेरे ऊपर लेट गई, मेरा लण्ड रुपाली की चूत में फँसा था और अभी भी अपने पूरे आकार में था। मैंने रुपाली से कहा- सब ठीक है ना?. तो कहने लगी- हाँ, सब कुछ ठीक है ! मैंने रुपाली को बिस्तर पर लिटाया और अपने होंठ रुपाली की गीली चूत पर रख दिये और 2-3 मिनट तक अपनी जीभ रुपाली की चूत में चलाता रहा। जब रुपाली को मजा आने लगा तो मैंने रुपाली के पैर अपने कन्धोंम पर रखे और. और अपना लण्ड धीरे-धीरे रुपाली की चूत में घुसाने लगा। जब मेरा लण्ड आराम से चलने लगा तो मैंने रुपाली से कहा- रुपाली जी, तैयार हो ना? तो रुपाली कहने लगी- मैं अब तुम्हारी हूँ, जैसे मर्जी, वैसे करो। मैं रुपाली को सटासट पेलने लगा और रुपाली भी मेरा पूरा साथ देने लगी। 6-7 मिनट के बाद मैंने रुपाली को कहा- अब तुम बिस्तर से नीचे आकर हाथ बिस्तर पर रख कर झुक जाओ।. रुपाली बिस्तर से नीचे उतर कर उसी पोज में हो गई और मैं पीछे से अपना लण्ड रुपाली की चूत पर रख कर धक्के लगाने लगा, फिर रुपाली के बाल पकड़ कर धक्के लगाने लगा। अब मैं रुपाली को पूरा मजा देना चाहता था और रुपाली भी पूरा मजा लेने लगी। मैं कभी रुपाली के स्तन पकड़ कर मसलता तो कभी उसके पेट को सहलाता और कभी उसके बाल पकड़ कर खीचता।.
स्रोत:इंटरनेट