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दोस्तों जैसा की आपने पिछले cheating sexy kahani  में पढ़ा की कविता और रुपाली पुरे रास्ते मुझे चुदाई के लिए उकसाती रही पर में अपने दोस्त को धोखा नहीं  दे सकता था पढ़िये कहानी का अंतिम भाग –. sex story के अन्य भाग –. भाग – 1. भाग – 2.  . मैंने कहा- अंकल, अब किस जगह पर चलोगे? तो अंकल ने कहा- पंकज, तुम ही बताओ कि पहले कहाँ चलें ! मैंने कहा- मनसा देवी चलते हैं !. तो सब लोग कहने लगे- ठीक है। मनसा देवी ही चलते हैं !. सब गाड़ी में बैठ गये, मैंने कहा- आकाश, आप लोग चलो, मैं आपको वहीं पर मिलता हूँ। तो आकाश कहने लगा- तुम कैसे आओगे?. तो मैं कहने लगा- मेरे पास बाईक है, चलो, मैं आपको रास्ते में मिलता हूँ ! तो आकाश कहने लगा- यह बाईक कहाँ से आ गई?. मैंने कहा- दोस्त की है ! चलो, मैं वहीं पर मिलता हूँ। वो सभी लोग अप्पर रोड पर मनसा देवी की तरफ चल दिये। मैंने भी अपना बैग कन्धे पर रखा और उन लोगों से पहले ही मनसा देवी वाले रास्ते पर पहुँच गया। थोड़ी देर में ही सब लोग पहुँच गये तो मैंने कहा- अंकल, किस रास्ते से चलना है?. अंकल ने कहा- सीढ़ियों वाले रास्ते से चलते हैं !. मैंने कहा- ठीक है अंकल, मैं आप लोगों को ऊपर ही मिलता हूँ ! तो अंकल ने कहा- तुम हमारे साथ नहीं चलोगे क्या ?. मैंने कहा- नहीं, मैं तो बाईक से जाता हूँ ! आप मेरे साथ चलो ! अंकल ने कहा- नहीं पंकज, मुझे तो डर लगता है। तभी कविता कहने लगी- पंकज, मैं चलती हूँ ! मैंने कहा- नहीं, मैं अकेले ही ठीक हूँ ! तो रुपाली ने कहा- पापा मुझे कुछ थकावट हो रही है, क्या मैं पंकज के साथ चली जाऊँ? अंकल ने कहा- आप लोगों की जैसे मर्जी।. मैंने कहा- अंकल ये साड़ी पहने हुए हैं और चढ़ाई बहुत ज्यादा है।. तो रुपाली ने कहा- मैं अपने कपड़े बदल लेती हूँ।. मैंने कहा- रुपाली जी, आप रहने दो, मैं कविता को ले जाता हूँ, कविता ने जीन्स पहनी हुई है। तो रुपाली नराज होने लगी- आप मुझे क्यों नहीं ले जाना चाहते?. मैंने कहा- कोई बात नहीं ! कविता, तुम चलो मेरे साथ ! तो कविता कहने लगी- नहीं पंकज, भाभी दो मिनट में कपड़े बदल कर आ जाएँगी। हम अपनी भाभी की किसी भी बात को मना नहीं करते। तो आकाश कहने लगा- पंकज, कविता ठीक कह रही है, रुपाली आपके साथ चली जायेगी। रुपाली ने गाड़ी से बैग निकाला और पास के लॉज़ में चली गई और पाँच मिनट में कपड़े बदल कर आ गई और कहने लगी- पंकज, अपना बैग मुझे दो ! तो मैंने अपना बैग रुपाली को दिया। रुपाली ने बैग अपनी कमर पर लटका लिया और सब को बाय किया। हम लोग बाईक पर बैठ कर चल दिये। रुपाली मुझसे चिपक कर बैठ गई।. तभी अंकल ने कहा- पंकज बेटे, जरा सँभल कर जाना ! मैंने कहा- ठीक है !. और हम लोग चल दिये। थोड़ी दूर जाने के बाद मैंने रुपाली से कहा- रुपाली जी, मुझे भूख लगी है ! कुछ खा लिया जाये? तो रुपाली ने कहा- हाँ पंकज, भूख तो मुझे भी लगी है, बताओ क्या खाओगे? मैंने कहा- देखते हैं क्या मिलता है?. और मैंने एक होटल के पास बाईक खड़ी की, अन्दर गये, होटल वाले से पूछा- क्या-क्या है खाने के लिये? तो उसने कहा- हमारे यहाँ सवेरे-सवेरे छोले भटूरे मिलते हैं।. मैंने रुपाली से पूछा- छोले भटूरे खाओगी क्या?. तो कहने लगी- आप जो भी खिला दो, मैं तो वही खा लूँगी। छोले भटूरे खाकर हम दोनों चल दिये। जब तक रास्ता सीधा था तब तक तो रुपाली मुझसे चिपक कर बैठी रही पर जैसे ही हम दोनों चढ़ाई पर चढ़ने लगे तो रुपाली डरने लगी क्योंकि रास्ते में मोड़ और चढ़ाई बहुत ही ज्यादा. थी। रुपाली कहने लगी- पंकज, अगर कुछ हो गया तो हम दोनों तो जान से हाथ धो बैठेंगे। मैंने कहा- रुपाली, इसीलिये तो मैंने आपको पहले ही मना किया था ! पर आप कहाँ मानने वाली थी? चलो आप उतरो और मेरे पीछे पीछे आओ। तो रुपाली कहने लगी- नहीं पंकज, मुझे डर लगता है, और थक भी बहुत गई हूँ। क्योंकि रास्ते में भीड़भाड़ भी नहीं थी तो मैंने कहा- डरने की कोई बात नहीं, बस आप मेरे से चिपक कर बैठ जाओ और हिलना डुलना मत ! बात भी मत करना ! तो रुपाली कहने लगी- ठीक है !. रुपाली मेरे से चिपक कर बैठ गई पर दो-तीन मोड़ के ही बाद रुपाली रोने लगी- पंकज, मुझे बहुत ही डर लग रहा है ! मैंने कहा- रुपाली, डरने की कोई बात नहीं ! थोड़ी देर आँखें बन्द करके बैठी रहो। जल्दी ही पहुँच जायेंगे। रुपाली आराम से बैठ गई, पर जैसे ही मोड़ आता वो चिल्लाना शुरु कर देती। तभी मुझे एक दुकान नजर आई और मैंने बाईक रोककर रुपाली से कहा- आप आराम से बैठो, मैं अभी आया ! और दुकान वाले से पूछा- पानी मिल सकता है क्या?. तो दुकान वाले ने कहा- हाँ !. और मैंने उससे एक बोतल पानी और एक गिलास प्लास्टिक का लिया। मैं चल दिया तो रुपाली ने कहा- पंकज, क्या लिया है? मैंने कहा- पानी है !. और थोड़ा उपर चढ़ने के बाद रुपाली फिर से डरने लगी, मैंने कहा- रुपाली, ठीक है, मैं बाईक साईड में लगाता हूँ। मैंने बाईक साईड में लगा दी। रास्ता सुनसान था, कोई इक्का-दुक्का ही आदमी नजर आता था। मैंने अपना बैग लिया और बकाडी की बोतल निकाली तो रुपाली कहने लगी- पंकज, यह तुम क्या कर रहे हो? हम मन्दिर में जा रहे हैं, आप ये? मैंने कहा- रुपाली, आप किसी भी जगह पर जाओ, मन्दिर जाओ या गुरुद्वारे जाओ या मस्जिद जाओ, इससे क्या फर्क़ पडता हैं श्रद्धा तो दिल से होती है ! मैंने एक पैग लिया और फिर से एक पैग थोड़ा हल्का बनाया, रुपाली को कहा- यह आप पियो ! तो रुपाली कहने लगी- नहीं पंकज, मैं कैसे ले सकती हूँ ! तो मैंने कहा- रुपाली, तुमने मुझे कब से परेशान कर रखा है ! यह ले लो ! डर नहीं लगेगा। रुपाली ने अपनी नजर झुका ली, मेरे हाथ से गिलास लिया और एक ही घूंट में पूरा पी गई और कहने लगी- पंकज यह तो बहुत ठीक है ! रात में तो कुछ अलग ही थी !  . मैंने रुपाली को नमकीन खाने को दी तो रुपाली ने कहा- पंकज, एक और गिलास दो ना ! तो मैंने कहा- नहीं रुपाली, रात में आप सो ली थी, अब काम खराब हो जायेगा ! तो रुपाली कहने लगी- ठीक है, मैं भी सब समझती हूँ ! मैंने एक और पैग मारा और चल दिया, रुपाली से कहा- मुझे पकड़ कर बैठना और हिलना डुलना मत ! रुपाली मुझसे चिपक कर बैठ गई और मैं अपने हिसाब से चलने लगा क्योंकि हम लोगों को 20-25 मिनट से ज्यादा हो गए थे, मैंने स्पीड थोड़ी तेज कर दी और जल्दी अपनी मन्जिल पर पहुँच गये। रुपाली से मैंने कहा- बैग मुझे दे दो !. तो मैंने देखा कि रुपाली तो नशे में है !. रुपाली ने कहा- पंकज, हम किस जगह पर हैं? मैंने कहा- हम मनसा देवी पहुँच चुके हैं।.
स्रोत:इंटरनेट