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Dost Ki Bahan Sex Story In Hindi 2

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मैंने देरी ना करते हुए अपना लंड का सुपारा उसकी चूत पर रखा और एक धक्का मारा पर उसकी चूत कुँवारी होने के कारण नहीं गया। फिर मैंने एक धक्का मारा और मेरा लंड का आधा भाग उसकी चूत में घुस गया और वो चिल्लाने. लगी-. मैं…मर….
गई……अह्ह्ह्हह्ह्ह…….
ओह………….
निकालो…..इस..को…….
निकालो…….
अह्ह्ह्ह्ह………अह……….
अह…अह्ह्ह्अह……..अह… उसकी आँखों से आँसू आने लग गए तो मैं रुक गया और उसे चूमने लगा। करण उसके मम्मों को दबा कर उसका ध्यान अपनी ओर खींच रहा था।. फिर मैंने एक और धक्का मारा और मेरा पूरा लण्ड उसकी चूत को चीरता हुआ घुस गया। कुछ देर के बाद वो अपनी गाण्ड उछालने लगी तो मुझे सिग्नल मिलते ही मैं भी उस पर जंगली शेर की तरह टूट पड़ा, मैं उसे लेटा कर और उसका एक पैर मेरे कंधे पर रख कर चोद रहा था और वो करण का लौड़ा चूस रही थी।. अब तो करण भी अपनी बहन के मुँह को पकड़ कर जोर जोर से चोद रहा था।मैंने उसके मम्मे पकड़े और उसे जोर जोर से चोदने लगा। उसने मुझे अपनी ओर खींच लिया और दबोच लिया, उसके नाख़ून मुझे लगने लगे पर मेरी गति बढ़ती गई, और बढ़ती गई और वो चिल्लाती रही-हाँ…..बेबी…..फ़क…..मी…आह…..आह…अह… वो ऐसे ही अंग्रजी में बोलती रही और उसका शरीर अकड़ने लगा और वो झड़ गई। करण भी उसके मुँह में ही झड़ गया, मैं भी पूरा का पूरा झड़ गया और काफी थक गया था। रात के करीब दो बज गए थे, थक गया था पर मन तो अभी भी नहीं भरा था। मैं उनके घर करीब चार दिन रहा और चार दिन में करण और उसकी बहन की कई बार गाण्ड मारी और एक बार तो मुझे गाण्ड मरवानी भी पड़ी…. हुआ यों कि मैं तो उस दिन चुदाई करके बहुत ही थक गया था क्योंकि मैंने पहली बार किसी की गाण्ड और चूत मारी थी फिर भी दिल नहीं भरा था। मैंने रात उनके घर पर उनके साथ ही गुजारी थी तो सुबह सुबह का समय था मुझे. देरी से उठने की आदत है।. उस दिन मैं सोया हुआ था और करण और उसकी बहन उठ गए थे। वे लोग पिछली रात के बारे में बात कर रहे थे। मैं उनकी बात चोरी-छिपे सुन रहा था।. करण की बहन बोल रही थी- तेरा दोस्त तो काफी अच्छी चुदाई कर लेता है !. तो करण बोला- हाँ दीदी, मुझे भी कल मेरी गाण्ड मरवाने में मजा आ गया। तभी उसकी दीदी ने कहा- तुम्हें तो गाण्ड नहीं मरवानी चाहिए क्योंकि जब कल मैंने रात को गाण्ड मरवाई तो मुझे काफी दर्द हुआ था और तुम तो एक लड़के होकर भी गाण्ड मरवाते हो?. उसने कहा- दीदी, दर्द तो होता है पर मजा भी तो आता ही है ना ! दीदी बोली- हाँ, मजा तो आता है पर जो दर्द हम महसूस कर रहे हैं उस दर्द को इसे भी महसूस करना होगा कि कैसा लगता है। इतना सब सुनकर मेरा लौड़ा खड़ा हो गया, मैंने उठने का बहाना किया। तभी उन दोनों ने अपनी बात पलट दी और उसकी बहन मेरे पास आ कर मुझे चूमने लगी। मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था और मैं भी उसे चूमने लगा इतने में करण आया और मेरी पैंट में हाथ डालकर मेरा लौड़ा निकलने लगा।. लौड़ा पूरा खड़ा था और वो चूसने लगा।. आआआआआआअ………… ………हहहहः क्या मजा आ रहा था !. फिर मैंने अपनी पिचकारी उसके मुँह में ही छोड़ दी और बिस्तर पर से उठ गया।. मैंने मुँह धोया।. उसकी दीदी बोली- मैं तुम्हारे लिए नाश्ता बनाती हूँ !. मैंने कहा- मैं घर जाकर कर लूँगा !. तो उसने कहा- मुझे और चुदवाना है ! और ऐसा मोका बार बार नहीं मिलेगा !. तभी मैंने घर पर फ़ोन किया। पापा ने फोन उठाया, मैंने बोला- पापा, करण की तबीयत थोड़ी ख़राब है तो मैं यहीं पर रुकूँगा और आज स्कूल नहीं जा पाऊँगा। तो उन्होंने कहा- ठीक है !. मुझे मन ही मन खुशी हो रही थी कि आज फिर से दोनों भाई बहन की गाण्ड मारने मिलेगी।. मैं और करण नहाने जाने के लिए अपने कपड़े उतार रहे थे और उसकी बहन रसोई में नाश्ता बना रही थी।. हम घर में अकेले थे इसलिए दरवाजा खुला रख कर ही पूरे नंगे होकर नहा रहे थे। मैंने करण को और करण ने मुझे नहलाना शुरू किया। उसने मेरा लौड़ा पकड़ लिया मैंने भी उसका लौड़ा पकड़ लिया और आगे पीछे करने लगा। हम. दोनों एक दूसरे को चूम रहे थे। करीब 15 मिनट से हम ऐसे ही कर रहे थे। तभी उसकी बहन आई और बाहर से बोली- नाश्ता लग गया है, चलो ! उसकी बहन को भी नहाना बाकी था तभी मैंने उसकी बहन को अन्दर खीच लिया और उसने गाउन पहन हुआ था तो वो पूरा गीला हो गया, उसने अन्दर कुछ नहीं पहना था, गीले गाऊन के कारण उसके चूचे दिख रहे थे मेरी तो नजर वहीं पर रुक गई और मैं उनको पकड़ कर जोर जोर से दबाने लगा, जितना जोर से हो सका, उतना जोर से दबाता रहा ! वो चिल्लाती रही- आ..आ..आ….
आ आआ…आआ..आअ……..हाह्हह्हहहा ! मुझे छोड़ दो ! दर्द हो रहा है !. पर मैंने नहीं छोड़ा.
फिर मैंने उसकी चुम्मी ले ली और उसे नंगा कर दिया। तब हम तीनों नंगे खड़े थे और एक दूसरे को चूम रहे थे।. मैंने उसे नीचे झुका कर अपना लौड़ा चुसवाना शुरू किया और करण को कहा- तू अपनी बहन की गाण्ड मार !. तो वो मना करने लगा। तो उसकी बहन ने कहा- लौड़े की दुम ! चुदवाता ही रहेगा या चोदेगा भी कभी? आ जा ! मेरी मार आज ! जम के मारना !. करण, मैं और उसकी बहन बाथरूम से बाहर आये और एक दूसरे का बदन पौंछा और बिस्तर पर चले गए। पिछली रात को मैं जो तीन निरोध लेकर आया था, एक पिछली रात को उपयोग किया था और दो शेष थे। एक मुझे उसकी बहन ने पहनाया और एक करण को पहनाया। दोनों चॉकलेट स्वाद के थे तो अब वो मेरा लौड़ा अच्छे से चूस रही थी, मुझे मजा आ रहा था। करण उसकी चूत चाट रहा था। कुछ देर के बाद करण मेरा लौड़ा लेने लगा और वो करण का लौड़ा !. मेरा लौड़ा गीला हो गया तो करण लेट गया और उसकी बहन उसके लौड़े पर बैठ गई। वो मेरा लौड़ा चूसे जा रही थी और धीरे-धीरे उसके लौड़े पर बैठ रही थी। उसकी आवाज नहीं आ रही थी क्योंकि उसने मेरा लौड़ा अपने मुँह में ले. रखा था।. इस बीच उसने मेरा लौड़ा निकाला अपने मुँह से और करण को चूमने लगी। करण भी उसे अच्छे से चोद रहा था।. मैंने उसके चूचो को चुसना शुरू किया फिर थोड़ी देर के बाद उसके मुँह में फिर से लौड़ा घुसा दिया।. मैं सोच रहा था कि साले दोनों भाई बहन कैसे योजना बना रहे हैं सुबह से मुझे दर्द महसूस करवाने का कि देख कैसे दर्द होता है गाण्ड मरवाने में !. मैं उठा और उसकी गाण्ड में जाकर अपना लौड़ा डाल दिया।. वो दर्द से चीख उठी क्योंकि उसने कभी भी दो लण्ड एक साथ नहीं लिए थे। मैं जोर जोर से झटके मार रहा था और उसकी गाण्ड से खून निकलने लगा था, शायद उसकी गाण्ड फट गई थी क्योंकि उसकी गाण्ड में मैंने एकदम से लौड़ा डाल दिया था इसलिए वो चिल्लाती रही- ऊऊ …आआ ….
ऊउ…..ह्ह्ह…….
मैं….
मर…..जाऊँगी….
.
ई.
ईई….
ईईइ..प्प्ल……ल्ज्ज.
…ओह…मैं…..मर…..जाऊँगी…….
प्ल्ज़……गोड…..आआ…..ऊउ…ह्ह्ह…..
स्रोत:इंटरनेट