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Dost Ki Chalu Biwi Aur Bahan Group Chudai Kahani

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मेरे दोस्त की बीवी और बहन इतनी चालू है ये मुझे पता नही था ये तो मुझे उनके साथ रहने पर ही पता चला पढ़िए मेरी मस्त  group chudai kahani जो आपको गरम कर देगी. chudai story के अन्य भाग –. भाग – 1. भाग – 2.  . एक दिन मेरे दोस्त आकाश का फोन आया- यार पंकज, कल हम सभी लोग हरिद्वार जा रहे हैं, पापा ने कहा है कि तुमको भी हमारे साथ चलना है। मैंने कहा- आकाश मैं आप लोगों के साथ कैसे जा सकता हूँ, अचानक आप कह रहे हो, मैं आप लोगों के साथ नहीं जा सकता। मैंने फोन रख दिया। 10-15 मिनट के बाद आकाश के पापा का फोन आया- पंकज बेटे, तुम हमारे साथ क्यों नहीं चलना चाहते? मुझे मालूम है कि तुम हरिद्वार साल में एक दो बार जरूर जाते हो। मैंने कहा- अंकल जाता तो हूँ पर मुझे काफी सारे काम भी तो करने हैं, मेरे तो सारे काम रुक जाएँगे अंकल। तो अंकल कहने लगे- कोई बात नहीं, मैं कौन सा तुमको रोज-रोज कहता हूँ, तुम कल तैयार रहना ! अब मैं कुछ नहीं जानता ! और यह कहकर फोन काट दिया।. अगले दिन दोपहर को दो बजे आकाश का फोन आया- पंकज, हम लोग रात को दस बजे निकलेंगे, तुम तैयार रहना ! मैंने कहा- ठीक है।. और मैंने भी आपनी पैकिंग शुरु कर दी और एक छोटे बैग में दो जोड़ी कपड़े रखे और एक बकाडी की बोतल रखी और फिर मैं सो गया।. रात को साढ़े नौ बजे फिर से आकाश ने फोन किया- हम लोग निकल रहे हैं, तुम तैयार रहना। मैंने उनके आने से पहले ही दो पैग बकाडी के लिये और फिर नहाने चला गया, टीशर्ट, लोअर पहना, खाना खाया और बाहर ही निकलने वाला था कि घण्टी बजी। मैंने दरवाजा खोला तो आकाश सामने खड़ा था। मैंने उसको अन्दर बुलाया तो आकाश कहने लगा- सभी लोग आपका इन्तज़ार कर रहे हैं, जल्दी करो ! और मेरा बैग उठाया और बाहर चला गया। मैंने एक और पैग जल्दी से मारा, घर को ताला लगाया और गाड़ी के पास जाकर देखा कि आकाश के परिवार के सभी लोग स्कोर्पियो गाड़ी में बैठे थे, बीच वाली सीट पर आकाश के मम्मी-पापा और अगली सीट पर आकाश बैठा था, पीछे वाली सीट पर उसकी बहन और पत्नी बैठी थी। मैंने आकाश के मम्मी-पापा को नमस्ते किया और आकाश को पीछे वाली सीट पर बैठने को कहा। तो आकाश के पापा कहने लगे- पंकज बेटे, तुम थके होंगे, तुम पीछे बैठ जाओ, रास्ते में साईड भी तो देखने वाला चाहिए। मैं पिछ्ली सीट पर बैठ गया। मैंने मन ही मन सोचा कि यार पंकज, आज कहाँ फँस गया। मैंने अपना फोन निकाला और कानों में ईयरफ़ोन लगा कर गाने सुनने लगा। दिल्ली में तो काफी भीड़-भाड़ थी तो हम लोग एक घण्टे में गाजियाबाद पहुँचे और हम लोगों को गाजियाबाद पार करने में साढ़े ग्यारह बज गये। सब लोग सो गये, मैं भी सोने की कोशिश करने लगा तो मैंने देखा कि कोई हाथ मेरे पैर को सहला रहा है। तो मैंने ऐसे ही उसको अपने हाथ से पकड़ कर अलग कर दिया पर फिर से वो हाथ अबकी बार मेरी जांघ को सहालाने लगा तो मैंने आँखें खोलकर कर देखा तो आकाश की पत्नी रुपाली मेरे जांघ पर हाथ फेर रही थी।. अबकी बार मैंने गुस्से से हाथ हटा दिया और सोने की कोशिश करने लगा तो देखा कि आकाश की बहन अपने को सोने का बहाने बनाते हुये अपनी भाभी के कान में कुछ कह रही है।. मैंने उनकी हरकत पर कोई गौर नहीं किया क्योंकि सभी लोग तो सो चुके थे, मैं भी सोने की कोशिश करने लगा। पर थोड़ी देर के बाद रुपाली मेरी सीट पर आकर बैठ गई और आकाश की बहन कविता पूरी सीट पर अपने पैर फैला कर सो गई।. पहले मैं रुपाली और कविता के बारे में बता दूँ- रुपाली की फिगर 28-32-34 और कविता की फिगर 30-32-36, दोनों का रंग दूध की तरह साफ और लम्बाई रुपाली की 5 फीट 4 इंच और कविता की 5 फीट 6 इंच और रुपाली की उम्र 26 साल और कविता की 20 साल थी। दोनों ही एकदम से देखने में स्मार्ट और सुन्दर जो भी देखे बस देखता ही रह जाये।. रुपाली ने कुछ देर सोने का नाटक किया और फिर से मेरी जांघ पर हाथ घुमाने लगी। अबकी बार मैंने रुपाली का हाथ पकड़कर रुपाली के कान में कहा- भाभी जी, यह आप क्या कर रही हो? रुपाली ने कहा- पंकज, कुछ तुम करो और कुछ मैं करती हूँ, सफर आराम से कट जायेगा। मैंने कहा- नहीं भाभी जी, यह सब अच्छी बात नहीं है, अगर किसी को पता चल गया तो क्या होगा? हम दोनों ही बदनाम हो जायेंगे।  . रुपाली कहाँ मानने वाली थी, रुपाली पर तो काम वासना का भूत सवार हो चुका था, रुपाली ने मेरे लोअर में हाथ डाल दिया और कहने लगी- अब की बार मुँह से कुछ मत बोलना, नहीं तो मैं बहुत कुछ बोलूँगी। बस तुम मजा लो और दो !. यह कह कर मेरे मुँह पर हाथ रख दिया और बोली- पंकज, तुम पूरा मजा लो ! और यह कहकर मेरे लण्ड को पकड़ लिया जो कि अभी सोया हुआ था। रुपाली की अंगुलियाँ अपना कमाल दिखाने लगी, मेरा लण्ड भी अपने पूरे आकार में आने लगा। रुपाली एक हाथ से मेरे लण्ड को सहला रही थी और दूसरे हाथ से मेरी छाती सहलाने लगी।. मैं भी पूरा गरम होने लगा। रुपाली अपने काम में पूरी मस्त हो चुकी थी उसको किसी की कोई परवाह नहीं थी। मैंने तभी देखा कि कविता अपने शरीर में कुछ हरकत कर रही है और हिल-डुल रही है और अपने एक हाथ को अपनी चूत. पर फिरा रही है और दूसरे हाथ से अपनी छाती को मसल रही है।. तो मैंने रुपाली को रुकने को कहा पर रुपाली रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी और मेरी गाण्ड फटी जा रही थी। मैंने रुपाली को एक तरफ धकेल दिया और उठने के लिये हिला ही था कि इतने में ही कविता उठ गई और मुझे. धीमे से बोली- पंकज, आराम से बैठ जाओ, आपको कोई प्रोब्लम नहीं होगी। भाभी को खुश कर दो, सब लोगों की मैं गारंटी लेती हूँ। मैं सोच में पड़ गया कि माजरा क्या है। गाड़ी में अन्धेरा था और सब लोग सो चुके थे। बस जब कोई गाड़ी आती तो उसकी रोशनी गाड़ी के अन्दर आती तो वो ही दिखाई देती और सब लोग आराम से सो रहे थे, मेरी समझ में कुछ भी नहीं आ रहा था कि यह क्या हो रहा है।. मैंने अपनी जेब से फोन निकाला और अपने दोस्त सुनील को फोन किया- सुनील यार, मुझे माफ करना, इस समय फ़ोन किया ! तो सुनील ने नीन्द में ही जवाब दिया- पंकज भाई, क्या बात है बताओ? मैंने कहा- यार, हम लोग किसी जरूरी काम से हरिद्वार आ रहे हैं और मुझे एक कमरा और एक बाईक चाहिए, वो भी सवेरे बहुत ही जल्दी ! तो सुनील ने कहा- कोई बात नहीं पंकज ! जैसे ही ज्वालापुर पहुँचो, मुझे फोन कर देना, मैं खुद आ जाऊँगा यार ! अब मुझे सोने दो ना यार ! और फोन रख दिया।. क्योंकि मेरी तो हालत खराब हो चुकी थी, मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था। अब तो मुझे समय बिताना था, मैंने कविता से कहा- पानी है क्या ?
स्रोत:इंटरनेट