डार्क

Dost Ki Pyari Bahan Tuition Sex Story

🇮🇳 हिंदी
गति: 1.0x
स्थिति: तैयार
×

प्लेबैक सेटअप सहायता

यदि आप पहले से ही Chrome/Edge का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन फिर भी प्ले नहीं हो रहा है, तो अपने फ़ोन/पीसी सेटिंग्स की जाँच करें।
सुनिश्चित करें कि TTS इंजन सक्रिय है, उस भाषा का उपयोग कर रहा है जिसे आप सुनना चाहते हैं।

Android और अन्य OS उपयोगकर्ताओं के लिए

Android, Harmony, Lineage, Ubuntu Touch, Sailfish, ColorOS / FuntouchOS, hyperOS आदि के उपयोगकर्ताओं के लिए
मेनू एक्सेस: सेटिंग्स खोलें > एक्सेसिबिलिटी > टेक्स्ट-टू-स्पीच आउटपुट
यदि नहीं है, तो सेटिंग्स > ऊपर सर्च बॉक्स > "text-to-speech" या "text" दर्ज करें
फिर टेक्स्ट-टू-वॉयस या टेक्स्ट-टू-स्पीच, या ऐसा ही कुछ चुनें।
भाषा जोड़ने के लिए, गियर आइकन ⚙ पर क्लिक करें > वॉइस डेटा इंस्टॉल करें और अपनी इच्छित भाषा चुनें।

iOS उपयोगकर्ताओं के लिए

सेटिंग्स > एक्सेसिबिलिटी > स्पोकन कंटेंट पर जाएं
या सेटिंग्स > ऊपर सर्च बॉक्स > "स्पोकन कंटेंट" दर्ज करें और एंटर करें
भाषा जोड़ने के लिए वॉइस चुनें और आवाज़ चुनें

MacOS पीसी उपयोगकर्ताओं के लिए

मेनू एक्सेस: एप्पल मेनू पर क्लिक करें () > सिस्टम सेटिंग्स > एक्सेसिबिलिटी > स्पोकन कंटेंट

Windows उपयोगकर्ताओं के लिए

Windows 10 & 11
मेनू एक्सेस: स्टार्ट खोलें > सेटिंग्स > समय और भाषा > स्पीच
Windows 7 & 8
कंट्रोल पैनल > ईज़ ऑफ़ एक्सेस > स्पीच रिकग्निशन > टेक्स्ट टू स्पीच
Windows XP
स्टार्ट > कंट्रोल पैनल > साउंड, स्पीच और ऑडियो डिवाइस > स्पीच
Windows 2000 & ME
स्टार्ट > सेटिंग्स > कंट्रोल पैनल > स्पीच
अन्य प्रकार के पीसी उपयोगकर्ताओं के लिए, जैसे लिनक्स, क्रोमओएस, फ्रीबीएसडी, आदि।
कृपया Google, Bing आदि जैसे सर्च इंजन में टेक्स्ट-टू-स्पीच को सक्षम करने के लिए सेटिंग्स खोजें

नोट वर्तमान में, यह पृष्ठ आपके डिवाइस के इंजन के अनुसार काम करता है।
इसलिए उत्पन्न होने वाली आवाज़ आपके डिवाइस के TTS इंजन का अनुसरण करती है।

मेरा नाम वीर है.
मेरी उम्र २३ साल की है.
मैं पढ़ाई लिखाई में बचपन से ही अच्छा हूँ.
गणित मेरी प्रिय विषय है.
जब मैं स्नातकी में था तब मेरी दोस्त की बहन १२ कक्षा पास करने के बाद मेडिकल प्रवेशिका परीक्षा देने की तैयारी कर रही थी.
मैं अपने फ़ुरसत के समय ट्यूशन भी किया करता था.
मैं हाई स्कूल के बच्चों को पढाता था.
हमारे इलाके में मेरा काफी नाम भी हो गया था.
पढ़िए मेरी tuition sex story, मज़ा आ जायेगा.. उसी दौरान मेरे दोस्त ने मुझे अपने बहन को गणित का ट्यूशन देने को कहा.
मैं उसे पैसे के बारे में कुछ ना बोल पाया.
उसकी बहन को ट्यूशन देना चालू कर दिया.
उसकी बहन का नाम शैलजा था.
उनके घर में वो दो भाई बहन और उनकी अम्मी रहती थी.
उनके पापा गुजर चुके थे.
शैलजा अपनी नाम की तरह अपने में एक अजब सी कशिश समेटे हुऐ थी.
वो नई नई जवानी की दुनिया में पाँव रख रही थी.
उसका कमरा हर वक्त सजा संवरा और कुछ ज्यादा ही गुलाबी नजर आता था.
वो बला की खूबसूरत थी। उसकी तन पे यौवन के फूल धीरे धीरे बड़े हो रहे थे.
उसके गुलाबी होंठ हमेशा जैसे किसी सवेरे गुलाब की पंखुडियां सुबह की ओस में भीगी सी नजर आती थी.
उसके लब के दाईं ओर एक छोटा सा तिल था जो उसकी सुन्दरता को चार चाँद लगाता था.
मैं जब भी उसे ट्यूशन देने पहुंचता तो वो कुछ दूसरी ही बातें शुरू कर देती.
उसका कभी पढ़ाई में मन नहीं लगता था.
वो बीच बीच में मुझे कभी कभी आँख मार देती। मैं जान के भी अनजान सा रह जाता.
एक दिन में जब ट्यूशन देने पहुंचा तो वो अपना सर दोनों हाथों से जकड के बैठ गयी.
मैंने पूछा तो उसने बताया कि जोर का सरदर्द है.
उसने मुझे मेंथोप्लास बाम उसके माथे पे लगाने को कहा.
मैंने पास ही में रखा मेंथोप्लास की डिब्बी उठाई और थोड़ा निकाला और उसके सिर पे धीरे धीरे मलने लगा.
वो कुछ देर तक वैसे ही बैठी रही और फिर अचानक मेरी हाथ को खींच के अपने नन्हे बोबों पे रख दिया.
मैं उसकी इस अचानक की हरकत से भौंचक्का रह गया और अपना हाथ फट से खींच लाया.
उसने फिर मेरे हाथ को खींच के अपने बोबों पे रख दिया.
उसकी अप्सराओं वाली सुन्दरता और उसकी इस हरकत से मेरी ७” वाली लंड धीरे खडा होने लगा.
फिर वो उठी और मुझे अपने आगोश में भर लिया.
उसकी कोमल स्पोंज जैसे बोबे मेरे चौडे सीने के नीचे दबने लगे.
मैं भी अजब सी दीवानगी में उसे जोर से अपने करीब खींच लाया.
मेरे लब उसके लब से सट गए.
हम दोनों रस पान करने लगे.
उसकी नाजुक सी पतली लबों की मिठास के आगे दुनिया की सबसे मीठी मिठाई भी फीकी थी.
उसी अवस्था में हम करीब १० मिनट रहे.
फिर मैंने अपना हाथ धीरे से उसके गले की ओर लेते हुए सीधे उसके बोबों पे रख दिया.
वो धीरे से सिसक उठी.
अब मैं उसके बोबों को धीरे धीरे दबाने लगा था.
मेरा लंड खड़ा होकर पैंट के अन्दर से ही नजर आने लगा था और उसके टांगों के बीच में रगड़ खा रहा था.
फिर मैंने उसकी ऊपर की टॉप उतार दी। उसने भी मेरी टी-शर्ट उतार दी.
अब मैंने उसकी पैंट भी उतार फेंकी.
वो अब सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में बची थी.
उसका सरीर किसी मॉडल से कम नहीं था.
फिर उसने मेरी पैंट उतार दी.
अब मैं सिर्फ़ एक चड्डी में था जिसको मेरा लंड फाड़ के बाहर आने को बेकरार हो रहा था.
तब हम बेड पे गिर पड़े.
मैं शैलजा के पूरे शरीर को चूमता जा रहा था.
वो सिसकारियां भरती जा रही थी.
उसके उभार जो कि ब्रा के ऊपर से बाहर निकल रहे थे, मैं उन्हें चूमता ही जा रहा था.
तब मैंने उसकी ब्रा का हुक खोल दिया और उसे निकाल कर फ़ेंक दिया.
अब वो सिर्फ़ ब्रा में थी.
उसके गोल गोल उभार ना बड़े ना छोटे मेरे सामने रौंदे जाने को बेकरार हो रहे थे.
मैं उन पर लपका, दाईं चूची को अपने मुंह में ले लिया और बाईं को हाथ से दबाने लगा.
शैलजा अपना जैसे कि होश ही खो बैठी थी.
फिर मैं अपना हाथ सरकाते हुए उसकी पैंटी तक पहुँच गया.
वो पूरी गीली हो चुकी थी.
तब शैलजा ने मेरी चड्डी को नीचे करके अलग कर दिया.
मेरा ७” का लंड पूरा खड़ा हो के उसके जांघो के बीच में जगह खोजने लगा.
मैंने भी मौका ताड़ के उसकी पैंटी उतार फेंकी.
हम दोनों अब पूरे नंगे बेड पे एक दूसरे के ऊपर पड़े थे.
मेरा लंड अब पूरी तरह तना हुआ उसके चुत के छोटे से छेद से घुसने को बेसब्र हो रहा था.
मैं कभी उसके लबों को चूसता तो कभी उसकी बोबों को.
। फिर मैं नीचे सरक गया और अपनी जीभ उसकी चूत से सटा दी.
वो सिसक कर रह गयी.
फिर मैं उसे जोर जोर से चाटने लगा.
वो भी मजे लेने लगी.
मैं उसकी चुत के छोटे से छेद को अपनी जीभ से चोदता ही जा रहा था.
उसका पानी निकलना जारी था.
वो अपनी आँखें बंद करके मेरे बालों को सहला रही थी और आहें भर रही थी.
करीब १० मिनट के बाद वो बोली कि जल्दी जल्दी करो, मुझे कुछ हो रहा है, शायद मैं झड़ने वाली हूँ, जल्दी से चोद दो ना मुझे.
” मैं फिर मौका ना गंवाते हुए उसकी ऊपर आ गया और उसकी कुंवारी चूत पे अपनी लंड को रख दिया.
अब मैं भी बेचैन होने लगा था.
मैंने अपना सुपाडा उसकी चूत के आगे रखा और धीरे से अन्दर धकेलने लगा.
तभी वो दर्द से कराहने लगी फिर बोली,” थोड़ा धीरे वीर मेरी चूत अभी तक अन्छूई है.
इसे प्यार से चोदों”.
तो मैंने अपनी रफ्तार थोडी धीमी कर दी और उसको और गरम करने के लिए उसके चूचियों को जोर जोर से दबाने लगा और उसके लबों को चूसने लगा.
इसी दौरान मैं अपना लंड धीरे धीरे शैलजा के चूत के अन्दर डालता जा रहा था….. तभी शैलजा के सब्र का बाँध टूट गया और वो चिल्लाने ही वाली थी कि मैंने उसके मुहं को अपने हाथ से बंद कर दिया.
मैंने नीचे देखा तो एक धार में खून मेरी लंड से नीचे गिर रहा था.
तो मैंने एक पल न गंवाते हुए एक धक्का लगाया और मेरा लंड पूरा शैलजा की चूत में था…. वो दर्द से तड़प उठी…और लंड बाहर निकाल लेने को मिन्नतें करने लगी.
मगर मैं जनता था कि यह वक्त लंड निकाल लेने के लिए ठीक नहीं है.
तो मैंने कुछ देर तक लंड को वैसे ही रहने दिया.
फिर कुछ देर बाद धीर धीरे लंड को अन्दर बाहर करने लगा.
मैं पहली मर्तबा जीती जागती चूत के अन्दर अपने लंड को महसूस कर रहा था….
वो अनुभूति अभी भी मुझे याद है….
चूत की गीली, नर्म, गर्म सतह से लंड के जकडे होना ऐसे लग रहा था जैसे कि मैं सातवें आसमान में पहुँच चुका हूँ और आनंद के समुन्दर में गोते लगा रहा हूँ…. धीरे धीरे शैलजा का दर्द गायब हो गया…और वो मेरा साथ देने लगी.. वो उसकी पहली चुदाई होने के बावजूद एक मंझे हुए खिलाड़ी की तरह जुम्बिश देती जा रही थी और अपने कमर को लचका रही थी.
जब मैंने देखा कि वो अब खूब मजे लेने लगी है तो मैंने उसे डौगी के पोज़ में उल्टा कर दिया और फिर चोदता गया….. करीब ३० मिनट बाद वो बोली, “वीर अब मैं नहीं रोक सकती, मैं झड़ने वाली हूँ।” यह सुन के मैंने जोर जोर से धक्के लगाना चालू कर दिया…और कुछ देर बाद शैलजा की चूत से ढेर सारा पानी निकला और वो निढाल हो कर लेट गई।. मेरा भी बाँध टूटने वाला था तो मैंने झट से लंड को चूत से बाहर निकाला और जोर जोर से मूठ मारने लगा.
जब मेरा माल निकलने वाला था तब मैं उसके मुंह के पास चला गया….
शैलजा ने अपने मुंह खोला और मैंने उसमें अपना सारा इकट्ठा माल गिरा दिया…. मैं अब शैलजा के साथ ही बेड पे गिर गया.
कुछ देर बाद मैं और शैलजा एक साथ बाथरूम में घुसे और नहा लिए.
अब मैं बिना देरी किए वहां से निकल आया.
अब मैं जब भी ट्यूशन पढ़ाने जाता था तब पढ़ाई कम और प्यार की बातें ज्यादा होती थी और हमने कई बार सेक्स भी किया उस साल शैलजा मेडिकल में जगह न बना पाई.
तब मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ.
मैं एक दोस्त से विश्वासघात करने का दोषी था… कुछ साल बाद एक अच्छा रिश्ता देखके शैलजा के घरवालों ने उसकी शादी कर दी….
.
उसके पति का तबादला हो के वो लोग अब हमारे शहर में ही रह रहे हैं.
मुझसे शैलजा ने एक दो बार मिलने की कोशिश की, पर मैं हर बार बहाना बना कर टालता गया….
कुछ दिन बाद उसके पति की एक सड़क हादसे में जान चली गयी… शैलजा अब अपने मायके में रहने लगी.
मुझसे शैलजा की सफ़ेद साड़ी देखी नहीं गयी.
उसका खिला खिला सा चेहरा अब उदास रहने लगा था.
मैंने सोचा कि मेरी भूल सूधारने का इससे अच्छा मौका नहीं मिल सकता.
तो मैं एक दिन शैलजा के घर गया और शैलजा की माँ से उसका हाथ मांग लिया.
उसकी माँ की खुशी के ठिकाने नहीं रहे.
कुछ दिन बाद एक मन्दिर में हम दोनों ने शादी कर ली.
अब हमारी शादी को एक साल पूरा होने वाला है और शैलजा मेरी बच्चे की माँ बनने वाली है.
मुझे अब मेरी करनी पर कोई शर्मिंदगी नही है.
पढ़िए My Hindi Sex Stories पर..
स्रोत:इंटरनेट