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Ek Ladki Ke Jeevan Ki Mahagatha Part 1 2

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मैंने उसे आगे बढ़ने को कहा….
वो मेरी ओर बड़ी और मेरी आँखों में झाँकने लगी.
वो भी नहीं समझ पा रही थी कैसे शुरुआत करे , आखिर वो कोई उसकी भाभी कि तरह तो थी नहीं.
और वो भी शर्मा रही थी.
उसने सबसे पहले मुझे किस किया तो में शर्माने लगी, वो बोली, “जैसे भाभी करती हैं वैसे ही मैं करुँगी..इसलिए मुझे करने दो…तुम्हे थोडा अटपटा लगेगा.
पर विश्वास करो इसके बाद तुम्हे इतना अच्छा लगेगा जितना कि मुझे भाभी के साथ करने के बाद लगा था.
” उसने मुझे मेरे कान के नीचे किस किया और मेरे शरीर को अपनी ओर खींच लिया.
मैंने भी उसे किस कर दिया.
शुरू शुरू में सिर्फ लिप्स ही टच हो रहे थे पर फिर फ्रेंच किस शुरू हो गया, उसने मुझे अपनी बाहों में भर रखा था और हम दोनों कि स्तन एक दूसरे से रगड़ खा रहे थे.
मेरे निप्पलस भी कड़े हो गए थे उन्हें छूने कि इच्छा त्रीव हो रही थी.
हम दोनों के दिल की धड़कन आसानी से सुनी जा सकती थी.
मैं शर्मा भी रही थी और शर्म से लाल हुयी जा रही थी और ज्योति निर्भीकता से अपने काम में मस्त थी.
मैं शर्माने के कारण बस उसे अपनी बाहों में थाम रखा था और बाकी सब उसे ही करने दे रही थी.
उसके हाथ मेरी पीन्थ पर चल रहे थे और मेरी हिप्स तक आ जा रहे थे.
उसने अपनी दोनों हथेलियाँ मेरे दोनों हिप्स पर रखी और उन्हें जकड लिया.
उसे अपनी बाहों में लेकर मेने अपना मुह उसकी गर्दन और बालों में के बीच छिपा लिया था.
हालांकि मैं उसके किसी भी हरकत का विरोध नहीं कर रही थी और मजा भी आ रहा था.
यह सब शुरुआत थी और मेरी पूसी गीली होने लगी थी.
इसके बाद ज्योति ने मेरे से मेरी सलवार की गाँठ खोलने के लिए बोला.
मैंने शरमाते हुए गाँठ खोल दी.
सलवार की गाँठ कहने पर हम फिरसे एक दूसरे को अपनी बाहों में भरने लगे.
ज्योति की हथेलियों की हरकतें पहले जैसी हीं थी मेरे हिप्स पर , बस अंतर यही था की अब वो मेरे नंगे हिप्स पर मेरी सलवार के अन्दर हरकत कर रही थी.
मैंने अपने हिप्स को थोडा एडजस्ट करते हुए उसके हाथों को अन्दर आने दिया और बहुत ही गर्माहट थी उस छुहन में.
आप सभी मेरे बारें में पता नहीं क्या सोच रहे होगे, पर में क्या करूँ उस छोटी सी उम्र में यह सब फील करना बड़ा सेक्सी लग रहा था.
मैं कोई Slut तो नहीं थी पर मैं क्या करती, उस एहसास के आगे मजबूर होती जा रही थी.
मैं सिर्फ १३ साल की थी और एक लड़की के हाथ मेरे हिप्स पर चल रहे थे.
थोडी सी सलवार नीचे हुयी तो मेरी गुलाबी चड्डी भी नजर आने लगी.
और इस बार मैंने उस से कहा की ‘ज्योति अब तुम पहले मुझे अपनी दिखाओ तब मैं कपडे खोलूंगी’.
ज्योति मुस्कुराई और मेरा हाथ अपने हाथ में लिया और अपने पेट पर रख कर बोली , ‘अब इसे ऊपर से नीचे तक चलाओ, मेरे बूब्स से लेकर मेरी पूसी (वैसे वो पूसी को फुद्दी बोलती है ) तक!’.
मैंने उसे किस किया और अपने हाथ उसके स्तनों की ओर बड़ा दिए.
वो मेरे से एक साल बड़ी थी और उसके बूब्स भी मेरे से थोड़े से बड़े थे.
ज्योति को शर्म नहीं आ रही थी बल्कि मेरे हाथों ने जब उसके स्तन को छुआ तो उसने बड़े ही मादक अदा से आह की आवाज निकाली.
मैंने उसकी कुर्ती के अन्दर कभी बायाँ स्तन दवाती तो कभी दायाँ.
और उस से रहा नहीं गया और उसने मुझे नंगी होने को कहा.
शर्म, डर, संकोच सब कुछ दूर हो गया था.
जब मैंने अपनी कुर्ती उतारनी शुरू की तो उसकी आँखों में एक चमक दिखाई दे रही थी.
मेरी उत्तेजना अब मेरी शरमाहट पर भारी पड़ रही थी और किसी और के सामने नंगी होने में अलग ही मजा लग रहा था.
मैं उस पल को जी रही थी जबकि कोई और मेरे गुप्तांगों को देखने जा रही थी.
“wow !” ज्योति ने बोला जैसे ही उसने मेरे स्तनों को देखा.
“यार सौम्या, तेरे तो बड़े हो गए हैं और सही शेप है यार…”.
उसने थोडी देर तक मेरे स्तनों को दबाया, उन्हें बायें दायें किया , मेरी निप्पलस से खेला.
मुझे मेरे स्तनों पर बड़ा गर्व महसूस हुआ जब उसने ऐसा कहा.
मुझे पता था की वैसे भी मेरी एज ग्रुप में मेरे सबसे अच्छे स्तन थे.
मेरे निप्पलस के चारों ओर का घेरा भी छोटा था और निप्पलस भी कड़े थे.
और फिर ज्योति के हाथों और लिप्स से वो और उत्तेजित हो खड़े से हो गए थे.
थोडी देर मेरे निप्पलस से खेलने के बाद उसने मेरी सलवार उतार दी.
मैंने ब्रा तो नहीं पहन रखी थी पर एक चड्डी तो थी ही.
मेरे हिप्स और जांघें मेरी गुलाबी पैंटी में फंसी सी नजर आ रही थी.
मैंने उसकी ओर मुह करके बैठी थी.
जिससे की वो मेरी चिकनी जाँघों को अच्छी तरह से देख पा रही थी.
उसने मेरी जाँघों पर हाथ रखा और ऊपर की और तब तक बड़ी जब तक की मेरी पूसी लिप्स, जोकि मेरी पैंटी के अन्दर थे, से एक इंच की दूरी न रही.
उसके बाद वो झुकी और जीभ से मेरी झांघों को चाटने सा लगी.. मैं बता नहीं सकती उस समय मेरी क्या फीलिंग्स थी..बस लगा की आज मर ही जाउंगी.
वो सनसनाहट बिलकुल अलग थी और पहली पहली बार हुयी थी.
मेरी टांगें कमजोर लग रही थी.
जिसने भी पहली बार सेक्स किया होगा वो अच्छी तरह समझ रहा होगा की मैं कौनसी फीलिंग की बात कर रही हूँ! किसी लड़के या लड़की से पहली बार अपने आंतरिक अंगों पर छुहन का एहसास.
ज्योति ने मुझे खड़े होकर पींठ उसकी ओर करके खड़े होने को कहा.
वो पलंग पर बैठी थी.
और उसके सामने मेरे हिप्स पैंटी के साथ थे.
उसने मेरी चड्डी उतारनी शुरू की और घुटनों से नीचे लाकर छोड़ दी जिसे मैंने अपनी टांगों से निकाल कर एक और दाल दिया, और वापस ज्योति की और घूम गयी, बिलकुल एक मोडल की तरह.
और इस तरह एक १३ साल की कुंवारी लड़की की पूसी उसके सामने थी.
जोकि हलके हलके बालों से ढकी थी.
वो अपना कण्ट्रोल खो बैठी और उसने अपना चेहरा मेरी पूसी पर पूरी ताकत से सटा दिया, मुझे लग रहा था की उसे इस सब में बड़ा मजा आ रहा है , क्योंकि उसने वहां काफी समय लगाया.
कभी अपनी नाक से मेरे पूसी लिप्स को रगडा, कभी मेरी पूसी पर ही किस कर दिया.
मेरी टांगें अपने आप खुलने लगी थी क्योंकि मन कर रहा था कि उसकी जीभ और अन्दर चोट मारे और मेरे पूसी होल को छू ले.
मुझे मजा आने लगा था पर उसी समय ज्योति रुक गयी.
मैंने उसे चालू रहने को कहा तो वो बोली, ‘यार, पहले मेरा पहला ओर्गास्म हो जाने दे, मैं बहुत उत्तेजित हो गयी हूँ, मुझे अभी ओर्गास्म चाहिए.
पहले एक दूसरे को ओर्गास्म देते हैं फिर आगे करेंगे.
” मैंने भी हामी भर दी और वो भी नंगी होने लगी.
उसको नंगी होते हुए भी देखने में मजा आ रहा था, और जैसे ही उसकी शर्ट उतरी उसके स्तन बाहर कि और निकल पड़े, जिन्हें देखते हुए मेरी पूसी और गीली हो गयी.
जल्दी ही वो पूरी नंगी थी पर कमाल कि बात थी कि उसकी पूसी पर एक भी बाल नहीं था, वो बिलकुल चिकनी थी.
उसने मुझे पलंग पर लेटने के लिए कहा.

स्रोत:इंटरनेट