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Ek Ladki Ke Jeevan Ki Mahagatha Part 1 3

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Windows 10 & 11
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Windows 7 & 8
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Windows XP
स्टार्ट > कंट्रोल पैनल > साउंड, स्पीच और ऑडियो डिवाइस > स्पीच
Windows 2000 & ME
स्टार्ट > सेटिंग्स > कंट्रोल पैनल > स्पीच
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मैं पूरी तरह से नंगी, एकदम खुली हुयी पलंग पर लेट गयी.
ज्योति ने मेरे पाँव से शुरुआत की, और उसके हाथ धीरे धीरे ऊपर की और बदने लगे.
मेरी साँसे तेज तेज चलने लगी और गले से आह आह की आवाजे अपने आप आने लगी.
वो जानती थी की मैं इस समय उसके हाथ की कठपुतली बन चुकी थी.
वो मेरे को इतने दिनों से मनाने में लगी थी और आज वो दिन था.
वो अभी १४ साल की ही थी पर इतने अच्छे तरीके से कर रही थी की साफ़ लग रहा था की वो भाभी के साथ कई बार कर चुकी है.
उसकी उंगलियाँ मेरी बालों वाली पूसी के लिप्स से थोडी दूर ही रह गयी थीं.
मेरे से रहा नहीं गया और में बोल ही पड़ी, “ज्योति…प्लीज़ मेरी पूसी को छुओ न..में अब नहीं रुक सकती.
” वो हल्का सा मुस्कुराई और मेने उसकी ठुड्डी पकड़ कर उसके चेहरे हो मेरी पूसी से बिलकुल सटा डाला.
और उसकी जीभ ने मेरी क्लिटोरिस को चाटना शुरू कर दिया.
मेरे हाथ उसके बालों में थे और उसके सर को बार बार अपनी पूसी पर कसके दवा रही थी.
मैंने अपने चेहरे पर तकिया रख लिया सो मेरी आवाजे कमरे से बाहर न जाएँ.
पर मुह से निकलने वाली आवाज ही कमरे में नहीं गूँज रही थी बल्कि ज्योति की जीभ और मेरी पूसी की गीलेपन की आवाज भी आ रही थी..जब जब उसकी जीभ मेरी पूसी के लिप्स को टटोलती थी एक आवाज कमरे में गूंज जाती थी.
उसने मेरी क्लिटोरिस को भी सक किया और अपनी एक ऊँगली मेरी योनी की ओर डालनी चाही, पर मैंने उसे रोका और बोला, “ज्योति, प्लीज़ अन्दर नहीं डालना…!”. वो बोली, “चिंता मत करो, में ऐसे करुँगी की तुम्हारी हाईमन नहीं टूटेगी.
तुम्हे अच्छा लगेगा की अन्दर करते हुए भी तुम्हे अच्छा लगेगा.
” उसने मेरी क्लिटोरिस को किस किया और अपनी ऊँगली धीरे से मेरी योनी के छेद के किनारे किनारे लगाई और अन्दर बाहर करने लगी, और यह अनुभव बहुत ही आनंद से भरा था , शरीर का एक एक अंग उन्माद में आ चूका था.
मेरा शरीर कांपने सा लगा और मेरा पहला ओर्गास्म स्टार्ट होने लगा था.
में बुरी तरह से इधर उधर हो रही थी और मेरा मन एक पानी से भरे तालाब में डूबा जा रहा था.
वो प्मेरी पूसी को चाट रही थी और ऊँगली से भी कर रही थी, मेरा ओर्गास्म नजदीक ही था.
में एहसास कर रही थी की मेरी पूसी से कुछ तरल सा निकल रहा हे और मेरी साँसे रुक रुक कर आणि शुरू हो गयी थीं.
और जब ओर्गास्म हुआ तो मेरी बॉडी अकड़ सी गयी और बहुत जोर के साथ एक प्रेस्सर सा रिलीज़ हुआ मेरी थ्रोब्बिंग पूसी से और मेरा पूसी जूस बहने लगा.
मुझे लगा जैसे मेरी सुसु निकल गयी हो.
यह बिलकुल नया था.
पहले कभी अनुभव नहीं किया था.
में पहले कभी यह नहीं जानती थी पर तब ओर्गास्म के बारे में जान गयी थी.
वो मुझे जब तक चाट टी रही जब तक की मेरी कंपकंपाहट ख़तम नहीं हुयी.
वो उठी और मेरी ओर मुस्कुराकर बोली, “कैसा लगा सौम्या? चलो अब मेरी बारी…वैसे भी मेरी तुम्हारी तरह बालों वाली नहीं है”.
वो एक मिनट भी बर्बाद नहीं करना चाहती थी.
मैंने उसकी पूसी चाटनी शुरू करदी जोकि चिकनी भी थी और गीली भी थी.
जैसे जैसे उसने मेरी पूसी से किया था वो वो में भी कर रही थी, मैंने अपनी जीभ उसकी पूसी में डाल दी और उसकी पूसी काफी गीली हो चुकी थी क्योंकि वो काफी देर से इन्तजार भी कर रही थी.
इसलिए उसे ओर्गास्म पर पहुँचने में ज्यादा समय नहीं लगा.
मैंने अपनी tounge-fucking जारी रखी जब तक की वो ओर्गास्म पर नहीं पहुंची.
उसका ओर्गास्म और भी ज्यादा पोवेर्फुल था क्योंकि उसे इस बात का पूरा पूरा अनुभव था की कब ओर्गास्म रिलीज़ करना है.
और जब उसका क्लाइमेक्स हुआ तो मैंने एक शक्तिशाली ओर्गास्म होते हुए देखा, ‘ओह ज्योति…में सोच भी नहीं सकती की यह सब इतना मजा देता है.
” मैंने उसे कहा.
उस रात सोने से पहले हमने दो बार फिर से यह किया.
और यह मेरी जिंदगी का पहला सेक्स अनुभव था जो हमेश याद रहेगा.
और इसी वजह से एक एक बात मुझे अच्छी तरह याद थी… सौम्या के जीवन के अगले अनुभव का इन्तेजार कीजिये, जल्द ही My पर पोस्ट करुँगी.. कहानी के अन्य भाग–. पार्ट 1. पार्ट 2.
स्रोत:इंटरनेट