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Ek Ladki Ke Sex Jeevan Ki Mahagatha Part 3 2

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उसका बॉय फ्रेंड भी था, पर वो लोग अभी ज्यादा आगे नहीं बड़े थे.
दीप्ती कहती थी की मैं उसे अभी और अच्छी तरह से समझना चाहती हूँ.
दीप्ती अपने भाई के साथ रूम लेकर रहती थी.
वो वैसे चित्तोर की रहने वाली थी पर सूरजपुर में पढाई की वजह से आकर रह रही थी.
उसका भाई एक सॉफ्टवेर कंपनी में काम करता था.
कभी कभी स्कूल से मैं सीधे उसके रूम पर जाती थी तो हम लोग उसके कंप्यूटर पर पॉर्न साईट खोल लेते थे.
और फिर उसे देखते देखते हस्तमैथुन करते थे.
उसके बाद कंप्यूटर से सारी हिस्ट्री साफ़ कर देते थे, जिससे की उसके भाई को कुछ पता न चले.
अधिकतर साईट पर नंगी लडकियां की ज्यादा दिखाई देती थीं, जबकि हम तो लड़कों के उस ख़ास अंग को ओनके मांसल शरीर को देखने के ज्यादा इच्छुक होते थे.
चित्रों में हमने खूब देखा की कैसे कैसे लिंग होते हैं पर पवन के अलावा अभी तक किसी का रियल में नहीं देख पायी थी.
उस समय हम छोटे भी थे और उसका भी ज्यादा विकसित नहीं था, पर अब तो हमारी आगे ग्रुप में काफी अच्छी खासी उम्र के लड़के भी थे और मुझे भी एक बॉय फ्रेंड बनाने का प्रेस्सर था नहीं तो मैं भी बहिन जी की श्रेणी में आने वाली थी.
सूरज और दीप्ती बहुत अच्छे फ्रेंड बन चुके थे.
अधिकतर समय साथ गुजारने लगे थे पर मुझे भी अधिकतर अपने साथ ही रख ते थे.
धीरे धीरे हम तीनो ही आपस में खुलने लगे थे.
दो तीन के लिए मैं छुट्टियों पर बाहर गयी तो यहाँ हालत ही बदल गए.
दीप्ती और सूरज इतने करीब आ गए और एक दुसरे को प्यार करने लगे की वो एक दुसरे के प्रति समर्पित हो जाना चाहते थे.
दीप्ती ने मुझे अकेले में कैंटीन में लेजाकर बताया की सूरज और हम बहुत नजदीक आ चुके हैं और वो मुझे मूवी दिखने ले गया था जहाँ मैं उसके साथ कुछ हद तक फिजिकल हो गयी थे.
यह सुनते ही मैं सन्न रह गयी.
मैं उसको बोली, ‘बेवकूफ, जैसे ही मैं क्या गयी, तुम लोग चालू हो गए.
अच्छा फायदा उठाया तुमने मेरे जाने का.
’ वो हंसने लगी और बोली की पता भी है क्या हुआ…अगर मेरी जगह तू होती तो तू भी वही करती जो मैंने किया…मैंने उसे पूछा की ऐसा क्या किया…तब उसने बताया….
उसने बताया की वो लोग जिस्म मूवी देखने गए थे और मूवी देखते समय सूरज अपने सीने पर हाथ बाँध कर बैठा था और उसी दौरान उसकी हथेलियाँ मेरे बायें स्तन के साइड में आकर टकरा रही थीं, पर वो धीरे धीरे उसे छूने की कोशिश कर रहा था और मुझे इस चोरी छिपे एक्ट में मजा भी आ रहा था.
जब मैंने उसे मुस्कुराकर देखा तो उसका भी साहस बढ गया और उसने मेरे बायें स्तन को टी शर्ट के ऊपर से अपनी हथेलियों में भर लिया और मसाज़ सी देने लगा.
मन तो करा की उससे लिपट जाऊं पर वो सिनेमा हाल था न..उसने अपने दाएं हाथ से बारी बारी दोनों स्तनों की छुआ और महसूस किया.
इसके बाद बदले मैं उसने मेरे बायाँ हाथ अपनी पेंट की जिप के पास रखा….
और oh my god..वहां उसका पेनिस एक दम सख्त हो रखा था….
यार..! मैं उसे पेंट के ऊपर से ही छुआ और दबाया…ज्यादा कुछ नहीं कर पाए…पर उसने मुझे किस भी किया…और घर पर छोड़ते समय उसने मेरे से कहा कि He wants to loose his virginity with me! बस सही मौके कि तलाश है..! यह सब सुनकर मेरी आँखें फटी कि फटी रह गईं.
मैंने उसे विस्मेयता से पुछा, ‘क्या तेने सूरज का देखा..? कैसा है…कितना बड़ा है…?’, वो मेरे इस सवाल को सुनकर जोर जोर से हंसने लगी और बोली, ‘सौम्या तू तो पागल है…तेरे पर मुझे दया आती है, अरे तू भी कोई अच्छा सा लड़का ढूँढ ले और अपना बॉय फ्रेंड बना ले नहीं तो…बस..ऐसी ही सवाल पूछती रह जायेगी.
’ और भगवान् ने मेरी जिन्दगी में एक और घटना लिखी हुयी थी, और वो होनी थी…सो वो दिन ऐसे आया कि, हमारे इन्टरनल एक्साम चल रहे थे और मेरी दीदी कि शादी कि बातें चल रही थी.
मम्मी, पापा और दीदी और मेरी छोटी बहिन सभी लड़के वालों के जाने वाले थे.
मेरे एक्साम थे सो मैं घर पर ही रुकने वाली थी, अब क्योंकि घर पर अकेले रुकने का सवाल था सो मेने मम्मी को बोला कि मैं और दीप्ती साथ ही रहेंगे.
मम्मी आश्वस्त होकर चली गयीं, वैसे भी एक दिन कि ही बात थी.
मेने दीप्ती से पुछा भी नहीं था कि वो मेरे साथ रुक लेगी या नहीं…पर मेने मम्मी को बोल दिया था.
मेने स्कूल में दीप्ती को जाकर अपना विचार बताया.
मैंने उसे बताया कि मेरे घर पर कोई नहीं होगा तो वो एकदम से खुश हो गयी..क्योंकि वो लोग तो काफी दिन से इसी तरह का मौका ढूँढ रहे थे.
दीप्ती के रूम पर यह मुमकिन नहीं था क्योंकि उसके मकान मालिक निगाह रखते थे.
पर हमारा तो सरकारी क्वार्टर था और उसमे दो कमरे थे.
उसने पूछा कि क्या सूरज वहां मेरे से मिलने आ सकता है? तो मेने उसे कहा,’ हाँ हाँ, हीर रांझा आपस में मिल सकते हैं पर ज्यादा देर नहीं…ओके… मैं दुसरे कमरे में रहूंगी और तुम लोगो को डिस्टर्ब नहीं करुँगी.
उसने सूरज को मिलकर सारी बात बताई और वो भी राजी हो गया और दीप्ती मेरे को दोपहर को चार बजे करीब आने के लिए बोलकर चली गयी.
मैं घर पर आ गयी और काम वाली के आने पर उसको बोला कि शाम को मत आना, मैं खुद कर लूंगी बर्तन वगेरह.
तीन बजे वो भी चली गयी.
शाम को चार बजे दीप्ती भी घर आ गयी, वो एक बैग भी लाई थी और उसके भैया उसे छोड़ने आये थे.
उनको चाय नास्ता भी कराया और फिर वो चले गए.
हम लोग अपना होम्वोर्क करने बैठ गए…मुझे नहीं पता थी कि दीप्ती के दिमाग में एक बड़ी प्लानिंग चल रही थी.
उसने अचानक ही मेरे से पुछा…’सौम्या एक बात पूछूं…अगर मैं और सूरज थोडा सा समय अकेले में बिताना चाहे तो तुम्हे कोई हर्ज तो नहीं…? तुम समझ रही हो न मैं क्या कहना चाह रही हूँ?”. मैं समझ गयी कि वो दोनों क्या करना चाहते हैं…पर मुझे क्या दिक्कत थी…मैंने मन में सोचा कि क्यों न इनको बाहर वाले कमरे में थोडी देर के लिए छोड़ दूंगी और खुद अन्दर वाले कमरे में रहूंगी, और अगर चाहूँ तो वहां से उन्हें सब कुछ करते हुए देख भी सकती हूँ, क्योंकि दोनों कमरों के बीच एक खिड़की थी जिस पर एक कपडे का पर्दा था.
जो मैं कभी भी हटा सकती थी.
पर अगर मैं बाहर वाले कमरे में रहती हूँ तो परदे पर कण्ट्रोल अन्दर वाले कमरे में बैठे व्यक्ति पर होता…मैं अपनी चतुराई पर मन ही मन खुश हो गयी.
हम दोनों ने मिलकर सूरज और दीप्ती कि डेटिंग के लिए कुछ डिश तयार कीं.
और शाम को छ बजे वो आ गया.
एक दो घंटे तक हम लोगों ने खूब बातें करी और करीब आठ बजे जब सूरज ने जाने के लिए बोला तो दीप्ती ने मेरे से कुछ देर के लिए उन्हें एकांत में छोड़ देने के लिए कहा.
मैंने उन्हें बाहर वाले कमरे में छोडा और अन्दर आकर पलंग पर बैठ गयी.
बाहर का कुछ सुनायी नहीं दे रहा था.
बस हलकी हलकी फुस्पुसाहत आ रही थी.. मैंने धीरे से पर्दा एक साइड से हटाया तो देखा दोनों एक दुसरे को चूम रहे थे.
अभी कुछ और होता कि इससे पहले घर कि लाईट चली गयी.
दीप्ती ने मुझे आवाज दी सो मैं वापस बाहर रूम में आ गयी.
सूरज ने अपने मोबाइल से रौशनी कि और मैं बाहर गयी देखने कि लाईट क्यों गयी है.
तो पता चला कि फ्यूज उड़ गया है.
मुझे यह सब नहीं आता था पर सूरज ने फ्यूज सही कर दिया.
तब मौका देखकर दीप्ती ने सवाल दागा..’सौम्या, क्यों न सूरज हमारे साथ ही रुक जाय यहाँ…किसी को पता नहीं चलेगा…और हमें डर भी नहीं लगेगा..बोलो..’
स्रोत:इंटरनेट