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Ek Ladki Ke Sex Jeevan Ki Mahagatha Part 3

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दोस्तों.. मैं अपनी Hindi Sex Kahani ‘एक लड़की के सेक्स जीवन की महागाथा’ का तीसरा भाग पेश करने जा रही हूँ.
अभी तक आपको कहानी कैसी लग रही है? सच सच बताना कितनी बार मुठ मारी? और लड़कियों, तुम कितनी बार झड़ी? अब ज्यादा देर नहीं करती और sexy story पर आती हूँ.. कहानी के अन्य भाग–. पार्ट 3. उस दिन के बाद फिर से दो तीन बाद ऐसा मौका फिर से मिला और हर बार उन दोनों को सेक्स करते हुए देखने के बाद हम एक दुसरे को शांत करके सो जाते थे.
एक महीने तक ऐसा ही चलता रहा, पर एक दिन मैंने सोचा की हस्तमैथुन करने के लिए मैं ज्योति पर क्यों निर्भर हूँ, में खुद भी तो कभी कभी कर सकती हूँ.
सो मैंने अपने आप हस्तमैथुन करने का भी सोचा.
पर समस्या यह थी की कहाँ करून? क्योंकि घर पर दो कमरे थे, एक मैं मम्मी और पापा रहते थे और दुसरे में हम तीनो बहिने रहती थी.
और रात में सोते समय तो बिलकुल नहीं कर सकती थी.
फिर कहाँ करूँ, यही सब सोचते सोचते काफी दिन निकल गए और फिर एक्साम भी आ गए थे.
ज्योति भी व्यस्त हो गयी थी.
गर्मी की छुट्टियाँ हुईं.
हम लोग अब थोड़े फ्री थे.
एक दिन घर पर स्वाति भाभी आईं और उन्हें देखकर पुरानी बातें फिर से याद आ गयीं और फिर से मन हुआ की काफी दिन से हस्तमैथुन भी छूटा हुआ था एक्साम की वजह से.
पर समस्या अभी भी वही थी की हस्तमैथुन इतना खुल कर कहाँ किया जाएँ? अब में ज्योति से भी ज्यादा मिक्स नहीं होना चाहती थी.
और मेरी समस्या का हल मिल गया मेरे को….
वो ऐसे की एक दिन सोते समय मैंने अपनी जांघों के बीच तकिया लगा लिया, बस फिर क्या था मुझे अपनी पूसी पर तकिये का दवाब बड़ा अच्छा लगा.
मैंने चुपचाप बाथ रूम में जाकर अपनी पैंटी उतार कर वाशिंग मशीन में डाल दी और वापस आकर अपनी स्कर्ट के अन्दर तकिया लगा कर लेट गयी.
और फिर जब सोने से लगे तो में तकिये के किनारे को पानी पूसी के लिप्स पर जोरों से रगड़ने लगी.
मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.
लग रहा था जो जैसे मैं किसी के साथ सेक्स कर रही हूँ.
लगभग १० मिनट तक मैं ऐसी ही करती रही और बीच बीच में अपनी क्लिटोरिस को भी छेड़ देती तो उत्तेजना और बड़ जाती थी.
और उसके बाद मेरी पूसी ने पानी निकालना शुरू किया तो में मारे उत्तेजना के भूल ही गयी जो तकिया खराब हो जायेगा…और वही हुआ.. तकिया का एक किनारा मेरी पूसी से निकले जूस से भीग गया.
मुझे जब होश आया जब मैं ओर्गास्म से बाहर आयी और जाघों के बीच तकिया गीला लगा.
अगले दिन सुबह उठते ही मैंने तकिया का कवर उतार डाला और उसे वशं मशीन से धो भी दिया, पर यह तरीका भी खतरे का लगा.
और मैं फिर कोई और तरीका खोजने लगी.
मैं 18 साल की हो चुकी थी.
और मेरे प्रयोग जारी थे.. एक दिन में टीवी देख रही थी और उस पर कोई सुहागरात का सीन आया जिसे देख कर मुझे रवि भैया और स्वाति भाभी का सीन याद आ गया.
फिर रात में जब मैं पड़ने के लिए चेयर पर बैठी थी और दीदी और छोटी बहिन सो गयी थी थी मुझे ऐसा लगा जैसे मेरी पैंटी गीली हो गयी है (वो पहला दिन था जब मेरा पूसी जूस बिना मेरे हाथ लगाये बाहर आ गया था).
मैंने अपनी पूसी को अपनी स्कर्ट में हाथ डाल कर छू कर देखा तो पाया की वो वहां गीली हो चुकी थी.
और मेरी उँगलियों के स्पर्श ने और आग लगा दी, मेरी उंगलियाँ अपने आप चलने लगी और मैं अपनी गीली पैंटी से ही हस्तमैथुन करने लगी.
और पता नहीं क्या हुआ , आप विश्वास नहीं करोगे, की सिर्फ दस सेकेंड्स में मुझे चरमउत्कर्ष (ओर्गास्म) की अनुभूति हो गयी और वो भी बहुत ज्यादा.
कुछ दिनों में ही यह मेरी आदत में आ गया.
गीली पैंटी के साथ साथ में ऊँगली से अपनी क्लिटोरिस को रगड़ती थी और ओर्गास्म पर पहुँच जाती थी.
और जब मेरी पूसी से जूस अगर नहीं भी आ रहा होता था तो मैं थोडा सा आयल ही लगा लेती थी.
या पानी भी प्रयोग किया.
मैं एक दिन में तीन तीन बार हस्तमैथुन करने लगी.
फिर एक दिन शाम को जब मैं नहाने के लिए बाथ रूम में गयी तो मैंने बात तब में पानी भरना शुरू करा और अपनी पूसी को पैंटी से ही रगड़ना शुरू किया तभी दिमाग मैं एक आईडिया आ गया और मैं पानी से भरे तब में बैठ. गयी , दोनों टाँगे तब के किनारों पर रख कर फैला दीं.
मेरी पैंटी पानी से भीग गयी थी और मेने अपनी पूसी को उँगलियों से रगड़ना शुरू कर दिया.
मुझे कभी इतना अच्छा नहीं लगा था.
और कुछ ही देर में मैं ओर्गास्म पर आ गयी.
और पानी में लेट गयी.
कुछ देर बाद जब होश आया तो देखा की पैंटी पर अन्दर की और कुछ चिपचिपा सा लगा है तो मैंने अपनी पैंटी भी धो डाली.
बाद में दीदी ने पूछा तो मैंने कह दिया की दीदी आज से में अपने अंडर गारमेंट्स खुद धो लिया करुँगी और जिसके जवाब में दीदी ने कहा की ‘वाह, सौम्या तो बड़ी हो गयी है.
’ इसके बाद मैं हमेशा पैंटी पहिन कर बात तुब मैं हस्तमैथुन करती थी और फिर पैंटी को धो कर सुखा देती थी.
पैंटी पहिने पहिने हस्तमैथुन करते हुए एक अलग ही फीलिंग होती थी.
जब मैंने ज्योति को अपने इन प्रयोगों के बारें में बताया तो उसने मुझे एक – दो किताबें दीं जिसमे बड़ी सेक्सी सेक्सी कहानियाँ और तसवीरें भी थी.
वो किताबें उसके भैया स्वाति भाभी के लिए लाये थे और उसने स्वाति भाभी से लीं थी.
मैं उन्हें अपने स्कूल बैग में रख कर घर ले आयी.
और छुपा कर रख दीं.
अब मैं दिन मैं दो दो बार नहाने जाती थी और कपडों में वो किताब भी छुपा कर ले जाने लगी.
मैं बात रूम मैं जाकर किताबें पड़ती और सेक्सुअल उत्तेजना में डूब आकार हस्तमैथुन करती.
पापा का ट्रान्सफर सूरजपुर हो गया था तो हम सारे लोग सूरजपुर शिफ्ट हो गए थे और मेरी एक अच्छी दोस्त ज्योति पीछे रह गयी.
नए शहर में आकर हम तीनो बहिन आपस में ज्यादा खुल गईं और जैसे हम लोग अपनी दोस्तों से बातें करते थे वैसे ही आपस में करने लगे.
मेरी दीदी मेरे से चार साल बड़ी थीं और एनआयीआईटी से कंप्यूटर का कोर्स भी ज्वाइन कर लिया था कॉलेज के साथ साथ.
मैं १२ क्लास में आ गयी थी और छोटी बहिन १० में पड़ रही थी.
और पता नहीं भगवान् ने मेरी किस्मत में और क्या क्या लिखा था.
मैं अब लगभग रोजाना ही हस्तमैथुन वगेरह करती थी, पर कोई भी ऐसी चीज उसे नहीं करती थी जिससे की मेरी कौमार्य झिल्ली को कोई नुक्सान पहुंचे.
यहाँ सूरजपुर में हमारे स्कूल में लड़के और लडकियां एक साथ ही पड़ते थे मेरा मतलब स्कूल को एड था.
स्कूल का नाम तो नहीं बता सकती पर इतना बता सकती हूँ की स्कूल सी स्कीम में था और काफी नामी कॉन्वेंट स्कूल है.
वहां मेरी एक और सहेली बनी जिसका नाम है दीप्ती.
हमारे पुराने शहर और सूरजपुर में इतना अंतर था की वहां सब चीजे छुप छुप कर होती थीं और यहाँ खुलकर होती थीं.
हर लड़की का एक बॉय फ्रेंड होना जरूरी था नहीं तो उसे बहनजी बोला जाता था.
सारी लडकियां सेक्स और उनसे जुड़े हर पहलु के बारे में सबकुछ जानती थी या यह कहलो की पूरा encyclopedia थीं.
बाद में और भी बहुत कुछ पता चला सभी लड़कियों के बारें में…वो बाद में बताउंगी.
दीप्ती से दोस्ती भी इसलिए ही हो गयी थी की वो हमारे घर के पास ही रहती थी.
और मेरी और उसकी काफी अच्छी पाटने लगी थी.
तीन चार महीने में हम लोग आपस में जब खूब खुल गए थे तो मैंने उस से अपनी पुराने बिताये पल (ज्योति के साथ) बताये, तो उसने बोला की यह तो आम बात है…तुम ने अपने घर में किया था, यहाँ तो लडकियां रूम्स ले लेकर करती हैं, और तो और स्कूल के टोइलेट्स में भी कर लेती हैं.

स्रोत:इंटरनेट