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Ek Ladki Ke Sex Jeevan Ki Mahagatha Part 4

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दोस्तों.. मैं अपनी Hindi Sex Kahani ‘एक लड़की के सेक्स जीवन की महागाथा’ का चौथा भाग पेश करने जा रही हूँ.
अभी तक आपको कहानी कैसी लग रही है? सच सच बताना कितनी बार मुठ मारी? और लड़कियों, तुम कितनी बार झड़ी? अब ज्यादा देर नहीं करती और Hindi Sex Kahani पर आती हूँ.
इस बार आपको एक लड़की की Desperation और 2 बहनों का पहला साथ साथ चूत साफ़ करने का अनुभव पढने को मिलेगा.. प्लीज कमेंट्स करके बताइए कैसी लगी ये desi kahani?. कहानी के अन्य भाग–. पार्ट 3. पार्ट 4. सूरज और दीप्ती के उस दिन की घटना के बाद न तो उनको और न ही मुझे ऐसा कोई और मौका मिल पाया जो की ख़ास लिखने लायक हो, पर हाँ एक बदलाव जो मेने महसूस किया वो ये था कि, सूरज अब मेरे से थोडा सा frank हो गया था और वो दोनों मेरे सामने किस और छोटी मोटी छेड़खानी करते रहते थे.
कुछ दिनों के बाद, मेरा एक कजिन भाई हमारे घर आया.
उसकी कुछ दिन कि छुट्टियां थी सो वो हमारे यहाँ घुमने चला आया.
मेरे से वो दो साल छोटा था.
हमारा कोई सगा भाई नहीं था और इसी वजह से हम लोग शुरू से लड़कों के प्रति अनजान रहे और उनके प्रति अब आकर्षित होने लगे थे.
मैं ज्यादा से ज्यादा उन के बारें में जानना चाहती थी.
मैंने स्कूल में अपने बॉय फ्रेंड बनाने कि भी कोशिश कि पर सारे मेरे शरीर से इतने प्रभावित थे कि सारे वो सब पहले करने के लिए आतुर रहते थे जो कुछ समय बाद होना चाहिए.
कुल मिलाकर मैं किसी को भी अपना बॉय फ्रेंड बनाने पर कोई फैसला नहीं ले पायी.
और जब राजीव मेरे घर पर छुट्टियों में आया तो मुझे उसमे अपना फ्रेंड ज्यादा नजर आया.
मेरी किस्मत में पता नहीं क्या क्या लिखा था? खैर , तीन चार दिन में ही हम लोग एक दुसरे से खूब मस्ती करते और बातें करते.
वो हमारे कमरे में ही सोता था.
बड़ी दीदी एक पलंग पर सोती थी.
मैं और छोटी बहिन दुसरे बेड पर और राजीव फोल्डिंग पलंग पर सोता था.
और मेने महसूस किया कि हर सुबह मैं नयी उमंग से मुखातिब होती थी.
और उस रात मैंने पता नहीं कैसे एक बहुत कामुक सपना देखा और उसमे मैंने देखा कि मैंने राजीव का लिंग देखा जोकि सूरज के लिंग जैसे ही था और पता नहीं क्या क्या…मेरी आँख खुल गयी.
मुझे पसीना आ रहा था और मेरा गला सुखा हुआ था.
मेरी उँगलियों ने मेरी पैंटी को छू कर देखा तो वो थोडी गीली थी, मैंने महसूस किया कि मेरी पूसी कि बीच में कुछ स्पंदन हो रहे थे, मेरी निप्पलस एकदम सख्त थे.
मैंने अभी अभी एक ओर्गास्म से गुजर चुकी थी, कब, कैसे, कुछ नहीं पता..! मेरी साँसे तेज तेज चल रही थी और दिल कि धड़कनें बड़ी हुयी थीं.
मैंने बगल में सोयी मेरी छोटी बहिन को देखा कि कहीं मैंने उसे तो नहीं जगा डाला.
पर वो तो सो रही थी.
पिछले दो -तीन दिन से रोज रात को ऐसा ही हो रहा था मेरे साथ, पर आज तो हद ही हो गयी थी शायद.
मैंने अपनी पैंटी उतार ली और अपने को चादर से अच्छी तरह ढक लिया.
मैं अपने मन को थोडा और शांत करना चाहती थी.
मैं सोचने लगी कि काश मेरा अपना एक अलग कमरा होता तो मैं कितने मजे से यह सब कर रखती थी और किसी बात कि कोई चिंता भी नहीं होती.
पर अभी मैं अपनी बहिन को जगाना नहीं चाहती थी.
हम साथ हो सोते थे पर कभी भी उसने मुझे touch नहीं किया.
न ही कभी मैंने उसे नंगा देखा था.
मुझे पता था कि उसके बॉय फ्रेंड भी थे, पर मुझे उसकी सेक्स लाइफ का कोई ज्ञान नहीं था, क्योंकि उसके साथ इस बारें में कभी भी बात नहीं हुयी.
खैर, मैं पींठ के बल लेट गयी और मेरी टांगों को फैला लिया.
आँखों को बंद किया और अपनी पूसी पर उँगलियों को ऊपर से नीचे की और चलाने लगी.
और अभी मुझे अच्छा लगना शुरू ही हुआ था की अचानक बहिन ने करवट ली और मेरी तरफ उसका मुह था.
मुझे डर था की अगर उसकी आँखें खुली तो वो मेरे को यह सब करते हुए देख सकती है.
मैं कोई chance नहीं लेना चाहती थी.
मैंने भी उसी की और करवट ली और इसलिए भी की अगर वो जगी तो मुझे पता रहेगा.
मैंने एक तकिया लिया और अपनी जाँघों के बीच फंसा लिया.
जिससे की मेरी पूसी पर अच्छा खासा दवाब आ रहा था.
उसका ठंडा ठंडा कपडा मेरी नंगी पूसी पर काफी अच्छा लग रहा था हलाँकि मुझे पता था की यह सब काफी नहीं होगा.
सो मेने उठकर बाथरूम में जाने का फैसला किया.
मैंने शान्ति से बाथरूम में घुसी और अपने टाँगे फैला कर अपनी भगान्कुर (clitoris क्लिटोरिस) को घिसना शुरू किया.
मेरी पूसी ऐसी गरम हो गयी थी जैसे की उसमे अन्दर से आग निकल रही हो.
मुझे पता नहीं क्या हो रहा था की मैं अपना पानी निकालने की लिए बहुत आतुर हो रही थी.
आयी वांट टू cum desperatly.
मैं बाथरूम में ऐसा कुछ ढूँढने लगी जो मेरी तड़प को शांत कर सके.
मैं व्याकुल हो रही थी , कोई मेरे को इस उत्तेजना से शान्ति दिला दे…कोई भी…कैसे भी…!!. मेरा इतना बुरा हाल था की मैं किसी छुअन को अपनी पूसी पर महसूस करना चाहती थी, कोई मुझे वहां lick करे और मेरा पानी छूट जाए.
मैंने एक शैंपू की बोतल ली और उसे वाश बेसिन के साथ लगा लिया और उस से अपनी पूसी को सटा दिया, मेने अपनी क्लिटोरिस को शैंपू के चिकने ढक्कन से टकराना शुरू कर दिया.
मैं उत्तेजना के सागर में गोते लगाने लगी.
मैं अपने आप को शीश में देख रही थी और कल्पना कर रही थी की कोई मुझे देख रहा है.
मैं चाहती भी थी की कोई मुझे देखे.
मैं किसी के लिए भी ओर्गास्म पर पहुंचना चाहती थी अगर वो मुझे देखे भी.
कुछ मिनट और निकले, मैं और ज्यादा चाहती थी, मैं अपने को भरना चाहती थी.
मैं चाहती थी की कोई मुझे छुए.
मुझे लगा की मेरे पर अब मेरा भी कण्ट्रोल नहीं हो रखा था.
जब मेरे से कण्ट्रोल नहीं हुआ तो मैं बाथरूम के फर्श पर लेट गयी और कंडीशनर की एक बोतल लेली, टांगों को चौडा कर कंडीशनर की बोतल से कुछ कोल्ड लोशन मैंने अपनी पूसी पर उडेल दिया जो बहता हुआ मेरी क्लिटोरिस से बहता हुआ मेरी पूसी के लिप्स से होता हुआ मेरी गुदा तक चला गया.
उसके बाद मैं फर्श पर झुक गयी और अपने दोनों हाथ और पैरों पर हो गयी.
और फिर एक हाथ से अपनी पूसी को रगड़ना शुरू करदिया, पर कुछ ख़ास नहीं हो पाया.
तब मैं उठी और अपने कमरे में वापस आ गयी.
कमरे में आने पर देखा की दोनों बहिने सो रही थी.
और राजीव अपने पलंग पर पींठ के बल लेता हुआ था.
और मेने पास में आकर पाया की उसका लिंग तनाव में था और उसके पायजामे में एक टेंट की तरह आकार हो रखा था.
में अछाम्भित सी हो गयी और उसके नजदीक गयी, मेरा एक हाथ मेरी पूसी पर था और में कल्पना करने लगी की वो मेरे साथ सेक्स कर रहा है.
में दुगुनी रफ़्तार से अपनी पूसी रगड़ने लगी जैसे ही मेरे मन में ये पिक्चर आने लगे.
में अब उसका लिंग महसूस करना चाहती थी.
में उसके लिंग को मेरे ऊपर वीर्य उड़ेलते हुए देखना चाहती थी.
पर अगर वो जग गया तो? पर में रुकने वाली नहीं थी…और..
स्रोत:इंटरनेट