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Ek Promotion Ki Khatir Office Sex Story 3

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मेरा लण्ड फिर से पत्थर की तरह सख्त हो कर तन कर गया था। मैं बोला, “लतिका, अब तुम फिर से घोड़ी बन जाओ!” लतिका ने जल्दी से अपना गिलास खाली किया और ज़मीन पर घोड़ी बन गयी। तब मैंने कहा, “लतिका, अब मैं तुम्हारी गाँड मारुँगा!” लतिका थोड़ा डरते हुए बोली, “लेकिन तुम्हारा लण्ड तो बहुत मोटा है!” मैं बोला, “तुम घबराओ मत… मैं आराम से करुँगा!” लतिका अब काफी नशे में थी और मस्ती में चहकते हुए बोली, “ओके, तुम सिर्फ मेरे बॉस ही नहीं बल्कि जानेमन हो, मेरा सब कुछ तुम्हारा ही तो है! चाहे जो करो… आज तुम्हारी लतिका तुम्हारे लण्ड की ग़ुलाम है! मारो मेरी गाँड को, फाड़ दो इसे भी… मैं कितना भी चिल्लाऊँ… तुम रुकना मत….
अपनी लतिका की गाँड बेदर्दी से पेलना!” मैं उठ कर उसके पीछे आ गया और लतिका की गाँड के छेद पर ढेर सारा थूक लगा दिया। मेरा लण्ड तो पहले से ही लतिका के थूक से सना हुआ था। फिर मैंने लतिका की गाँड के छेद पर अपने लण्ड की टोपी रखकर लतिका की कमर को. पकड़ लिया और धीरे-धीरे अपने लण्ड को लतिका की गाँड में घुसाने लगा। लतिका ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगी। अभी तक लण्ड का सिर्फ़ सुपाड़ा ही घुस पाया था। फिर मैंने लतिका की गाँड के छेद को हाथों से फैलाया और फिर से. लतिका की कमर पकड़ कर एक धक्का दिया। लतिका दर्द से अपना सर कुत्तिया की तरह इधर-उधर हिलाने लगी। मैंने थोड़ा ज़ोर और लगाया तो लतिका और भी ज़ोर-ज़ोर से चींखने-चिल्लाने लगी। मैं बोला, “लतिका मेरी जान! अगर तुम ऐसे चिल्लाओगी तो कैसे काम बनेगा?अभी तो ये तीन इंच ही अंदर घुसा है!” लतिका दर्द से चिल्लाते हुए ही बोली, “मेरे चिल्लाने कि तुम परवाह मत करो! घुसा दो अपने तमाम लण्ड को मेरी गाँड में… फाड़ डालो इसे!”. फिर मैंने लतिका के मुँह पर एक हाथ रख दिया और उसकी कमर को पकड़ कर धक्के पर धक्का लगाते हुए अपने लण्ड को लतिका के गाँड में घुसाने लगा। लण्ड लतिका की गाँड में और गहराई तक घुसने लगा तो लतिका दर्द के मारे. छटपटाने लगी। मैं बोला, “शाबाश लतिका! मेरा लण्ड अब तुम्हारी गाँड में करीब छः इंच तक घुस चुका है!” दर्द से लतिका कि हालत अभी भीखराब हो रही थी। मैं पूरी ताकत से लतिका की गाँड में लंड ठूँसने में लगा था और रुकने का नाम ही नहीं ले रहे था। लतिका की गाँड चौड़ी होती गयी और दर्द भी बढ़ता गया। गाँड में दर्द की वजह से लतिका सिसकियाँ लेती रही। लतिका के आँसू भी निकल आये पर लतिका ने हिम्मत नहीं हारी। लतिका की गाँड. में अपना लण्ड पूरा घुसाने के बादमैं रुक गया।. थोड़ी देर में दर्द धीरे-धीरे कम हो गया तो मैंने फिर धीरे-धीरे पेलना शुरू कर दिया। अब मैं अपना आधा लण्ड बाहर निकालता और वापस एक ही धक्के में पूरा लण्ड उसकी गाँड में अंदर तक घुसेड़ देता। हालांकि दर्द अभी. खतम नहीं हुआ था पर फिर भी लतिका अब अपनी गाँड मेरे हर धक्के के साथ आगे-पीछे हिलाने लगीथी। अब मैं पुरी स्पिड से लतिका को चोदने लगा। अब मैं अपना पुरा लण्ड बाहर निकालता और वापस तेजी के साथ अंदर घुसा देता।. लतिका को तो यकीन ही नहीं था कि इतना लंबा और मोटा लण्ड वो कभी अपनी गाँड में ले पायेगी।. मैं बहुत मज़े ले-ले कर लतिका की गाँड मारने में लगा हुआ था। लतिका भी और ज्यादा मस्त हो गयी थी और अपनी गाँड ढकेलते हुए बोली, “पेलो मुझे! मेरी गाँड फाड़ दो! अपनी लतिका की गाँड चौड़ी कर दो! बेदर्दी से पेलो मुझे… मेरे जनू! मेरे बॉस!” मैं लतिका की गाँड पकड़ कर ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारता हुआ अपना लण्ड उसकी गाँड में गहराई तक घुसेड़-घुसेड़ कर पेलता रहा। वो भी कभी चींखती तो कभी सिसकती और कभी मुजे ज़ोर-ज़ोर से. गाँड पेलने को कहती और फिर चींखने लगती। थोड़ी देर में मैं लतिका की गाँड में ही झड़ गया और हम दोनों दोने ज़मीन पर ही लेट गये। दोनों की साँसें फूली हुई थीं। बीस पच्चीस मिनट ऐसे ही पड़े रहने के बाद मैं लतिका. को अपनी बांहों में सहरा दे कर बेडरूम में ले गया और हम दोनों बिस्तर पे लेट कर सो गये।. अगले दिन सुबह लतिका बहुत खुश थी और मैंने भी एक हफ़्ते के अंदर उसका प्रमोशन करा दिया। लतिका तो मेरे लण्ड की दीवानी बन गयी थी और मैं जब तक लखनऊ में रहा हर रात लतिका के घर पर उसकी चुदाई करने में गुज़ारी।. पढने के लिए से अच्छा कुछ नहीं..
स्रोत:इंटरनेट