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Fauji Bhaiya Ke Sath Train Rail Sex Story

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मेरे फौजी भैया मुझे बहुत अच्छे लगते थे, उनका बलशाली व्यक्तित्व तो जान ले लेता है। पर उस रेल यात्रा के बाद तो वो मुझे और भी अच्छे लगने लगे। भाई बहन की कामुक rail sex story पेश है.. मैं निकू हूँ। मैं अपने बारे में शुरु से बताती हूं। मैं अपने घर में अपने भाई बहनों में तीसरे नंबर, 20 साल की हूं। सबसे बड़े विजय भैया हैं जो आर्मी में हैं। उनकी शादी नहीं हुई है। मुझसे छोटा एक भाई है। मैं होस्टल में रह कर पढ़ति हूं। एक दिन मेरे विजय भैया मुझ से मिलने होस्टल आये। मैं उन्हे देख कर बहुत खुश हुई। वो सीधे आर्मी से मेरे पास ही आये थे। और अब घर जा रहे थे। मैने भी उनके साथ घर जाने का मन बना. लिया और कोलेज से 8 दिन की छुट्टी लेकर मैं और विजय भैया घर के लिये रवाना हो गये। जिस ट्रेन से हम घर जा रहे थे उस ट्रेन में मेरा रिज़र्वेशन नहीं था। सिर्फ़ विजय भैया का था। इसलिये हम लोगों को एक ही बर्थ. मिली। ट्रेन में बहुत भीड़ थी। अभी रात के 11 बजे थे। हम इस ट्रेन से सुबह घर पहुंचने वाले थे। मैं और विजय भैया उस अकेली बर्थ पर बैठ गये। सर्दियों के दिन थे। आधी रात के बद ठंड बहुत हो जाती थी।. विजय भैया ने बेग से कम्बल निकाल कर आधा मुझे उढा दिया और आधा खुद ओढ लिया। मैं मुस्कुराती हुई उनसे सट कर बैठ गयी। सारी सवारियां सोने लगी थीं। ट्रेन अपनी रफ़्तार से भागी जा रही थी। मुझे भी नींद आने लगी थी. और विजय भैया को भी। विजय भैया ने मुझे अपनी गोद में सिर रख कर सो जाने के लिये कहा। विजय भैया का इशारा मिलते ही मैं उनकी गोद में सिर टिका और पैरों को फैला लिया। मैं उनकी गोद में आराम के लिये अच्छी तरह. ऊपर को हो गई। विजय भैया ने भी पैर समेट कर अच्छी तेरह कम्बल में मुझे और खुद को ढांक लिया और मेरे ऊपर एक हाथ रख कर बैठ गये।. तब तक मैने कभी किसी पुरूष को इतने करीब से टच नहीं किया था। विजय भैया की मोटी मोटी जांघों ने मुझे बहुत आराम पहुंचाया। मेरा एक गाल उनकी दोनो जांघों के बीच रखा हुआ था। और एक हाथ से मैने उनके पैरों को. कौलियों में भर रखा था। तभी मेरे सोते हुये दिमाग ने झटका सा खाया। मेरी आंखों से नींद घायब हो गई।. वजह थी विजय भैया के जांघ के बीच का स्थान फूलता जा रहा था। और जब मेरे गाल पर टच करने लगा तो मैं समझ गई कि वो क्या चीज़ है। मेरी जवानी अंगड़ाइयां लेने लगी। मैं समझ गई कि विजय भैया का लंड मेरे बदन का. स्पर्श पाकर उठ रहा है। ये ख्याल मेरे मन में आते ही मेरे दिल की गति बढ़ गई। मैने गाल को दबा कर उनके लंड का जायज़ा लिया जो ज़िप वाले स्थान पर तन गया था। विजय भैया भी थोड़े कसमसाये थे। शायद वो भी मेरे बदन से. गरम हो गये थे।. तभी तो वो बार बार मुझे अच्छी तरह अपनी टांगों में समेटने की कोशिश कर रहे थे। अब उनकी क्या कहूं मैं खुद भी बहुत गरम होने लगी थी। मैने उनके लंड को अच्छी तरह से महसूस करने की गरज़ से करवट बदली। अब मेरा. मुंह विजय भैया के पेट के सामने था। मैने करवट लेने के बहाने ही अपना एक हाथ उनकी गोद में रख दिया और सरकते हुए पैंट के उभरे हुए हिस्से पर आकर रुकी। मैने अपने हाथ को वहां से हटाया नहीं बल्कि दबाव देकर. उनके लंड को देखा।. विजय भैया ने भी मेरी कमर में हाथ डालकर मुझे अपने से चिपका लिया। मैने बिना कुछ सोचे उनके लंड को उंगलियों से टटोलना शुरू कर दिया। उस वक्त विजय भैया भी शायद मेरी हरकत को जान गये। तभी तो वो मेरी पीठ को. सहलाने लगे थे। हिचकोले लेती ट्रेन जितनी तूफ़ानी रफ़्तार पकड़ रही थी उतना ही मेरे अंदर तूफ़ान उभरता जा रहा था।. विजय भैया की तरफ़ से कोई रिएक्शन न होते देख मेरी हिम्मत बढ़ी और अब मैने उनकी जांघों पर से अपना सिर थोड़ा सा पीछे खींच कर उनकी ज़िप को धीरे धीरे खोल दिया। विजय भैया इस पर भी कुछ कहने कि बजाय मेरी कमर को कस. कस कर दबा रहे थे। पैंट के नीचे उन्होने अंडविजययर पहन रखा था। मेरी सारी झिझक न जाने कहां चली गई थी। मैने उनकी ज़िप के खुले हिस्से से हाथ अंदर डाला और अंडविजययर के अंदर हाथ डालकर उनके हैवी लंड को बाहर. खींच लयी।. अंधेरे के कारण मैं उसे देख तो न सकी मगर हाथ से पकड़ कर ही ऊपर नीचे कर के उसकी लम्बाई मोटाई को नापा। 8-9 इंच लम्बा 3 इंच मोटा लंड था। बजाय डर के, मेरे दिल के सारे तार झनझना गये। इधर मेरे हाथ में हैवी लंड था उधर मेरी पैंट में कसी बुर बुरी तरह फड़फड़ा उठी। इस वक्त मेरे बदन पर टाइट जींस और टी-शर्ट थी। मेरे इतना करने पर विजय भैया भी अपने हाथों को बे-झिझक होकर हरकत देने लगे थे।. वो मेरी शर्ट को जींस से खींचने के बाद उसे मेरे बदन से हटाना चाह रहे थे। मैं उनके दिल की बात समझते हुये थोड़ा ऊपर उठ गई। अब विजय भैया ने मेरी नंगी पीठ पर हाथ फेरना शुरू किया तो मेरे बदन में करेंट दौड़ने. लगा। उधर उन्होने अपने हाथों को मेरे अनछुई चूचियों पर पहुंचाया इधर मैने सिसकी लेकर झटके खाते लंड को गाल के साथ सटाकर ज़ोर से दबा दिया।. विजय भैया मेरी चूचियों को सहलाते सहलाते धीरे धीरे दबाने भी लगे थे। मैने उनके लंड को गाल से सहलाया विजय भैया ने एक बर बहुत ज़ोर से मेरी चूचियों को दबाया तो मेरे मुंह से कराह निकल गई,,,,,,,,,,,,, हम दोनो में इस समय भले ही बात चीत नहीं हो रही थी मगर एक दूसरे के दिलों की बातें अच्छी तरह समझ रहे थे। विजय भैया एक हाथ को सरकाकर पीछे की ओर से मेरी पैंट की बेल्ट में अपना हाथ घुसा रहे थे मगर पैंट टाइट. होने की वजह से उनकी थोड़ी थोड़ी उंगलियां ही अंदर जा सकीं।. मैने उनके हाथ को सुविधा अनुसार मन चाही जगह पर पहुंचने देने के लिये अपने हाथ नीचे लयी और पैंट की बेल्ट को खोल दिया। उनका हाथ अंदर पहुंचा और मेरे भारी चूतड़ों को दबोचने लगा। उन्होने मेरी गांड को भी उंगली. से सहलाया। उनका हाथ जब और नीचे यानि जांघों पर पैंट टाइट होने के कारण न पहुंच सका तो वो हाथ को पीछे से खींच कर सामने की ओर लाये।. इस बार उन्होने ने मेरी पैंट की ज़िप खुद खोली और मेरी बुर पर हाथ फिराया। बुर पर हाथ लगते ही मैं बेचैन हो गई। वो मेरी फूली हुई बुर को मुट्ठी में लेकर भींच रहे थे। मैने बेबसी से अपना सिर थोड़ा सा ऊपर उठा. कर विजय भैया का सुपाड़ा चूमा और उसे मुंह में लेने की कोशिश की परंतु उसकी मोटाई के कारण मैने उसे मुंह में लेना उचित न समझा और उसे जीभ निकालकर लॅंड के चारो और चाटने लगी।. मेरी गर्म और खुरदरी जीभ के स्पर्श से विजय भैया बुरी तरह आवेशित हो गये। उन्होने आवेश में भरकर मेरी गीली बुर को टटोलते हुये एक झटके से बुर में उंगली घुसा दी। मैं सिसकी भरकर उनके लंड सहित कमर से लिपट. गयी। मेरा दिल कर रहा था कि विजय भैया फ़ौरन अपनी उंगली को निकाल कर मेरी बुर में अपना मोटा और भारी लंड ठूंस दें। मेरी ये इच्छा भी जल्द ही पूरी हो गयी।.
स्रोत:इंटरनेट