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 .  . फ़िर मैंने उसकी शर्ट निकाली और बाद में उसका स्कर्ट खोल दिया। अब वो केवल सफ़ेद रंग की ब्रा और लाल रंग की पैन्टी में थी। वो बहुत सुन्दर लग रही थी। मैं उसके होठों पर अपने होठ रख कर चूसने लगा। उसके गुलाबी. होठों को चूसने में बहुत ही मज़ा आ रहा था। फ़िर मैंने अपनी जीभ उसके मुंह में डाल दी और उसके मुंह में फ़िराने लगा। आरती भी अपनी जीभ मेरी जीभ से रगड़ रही थी।.  .  .  . उसके बाद मैं उसकी ब्रा खोल कर दोनो उरोज़ों को जोर जोर से मसलने लगा। वो सिस्कारियां लेने लगी और बोली – सर ! थोड़ा धीरे करो, मुझे दर्द हो रहा है। मैंने कहा – दर्द तो हो रहा है पर मज़ा आ रहा है या नहीं? वो बोली – सर ! मज़ा तो आ रहा है पर दर्द भी हो रहा है। मैंने कहा – थोड़ी देर में ये दर्द खत्म हो जाएगा।.  .  .  . काफ़ी देर बाद मैं अपना एक हाथ उसकी पैन्टी में डाल कर उसकी चूत को सहलाने लगा। वहां हल्के हल्के बाल थे। मैंने एक उंगली उसकी चूत में घुसा दी। आरती एकदम चीखी और दूर हट गई। मैंने पूछा – क्या हुआ? तो. बोली – बहुत ज्यादा दर्द हुआ था। फ़िर मैंने उसकी पैन्टी उसके पैरों से निकाल दी। अब वह बिल्कुल नंगी खड़ी थी। उसकी चूत बहुत सुन्दर थी और गीली हो रही थी। मैं उसके घुटनों के पास बैठ गया और उसकी चूत. सहलाने लगा। उसके मुंह से कामुक सिसकियां निकल रही थी। थोड़ी देर बाद मैंने उसकी चूत पर मुंह लगा दिया और जीभ से चाटने लगा। मेरी जीभ उसकी चूत पर लगते ही आरती के शरीर में हरकत होने लगी और वह जोर से काम्पने. लगी। उसके मुंह से अजीब तरह की आवाजें आने लगी- सी……सी…स्…आ…अच्छा लग रहा … और चूसो सरररर और !. उसने मेरा सिर पकड़ कर अपनी चूत पर दबा लिया और अपना योनिरस मेरे मुंह पर छोड़ दिया। मै सारा रस जीभ से चाट चाट कर पी गया। तब वो बोली – सर! इतना मज़ा आपने मुझे दिया है ! मैंने कहा – मेरी जान अभी. आगे आगे देखो मैं तुम्हें कितना मज़ा दिलाता हूं। उसके बाद मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए औए अपना८.
५ इन्च लम्बा और ३.
५ इन्च मोटा लण्ड उसके हाथों में दे दिया और उसे चूसने को कहा। उसने झिझकते हुए मेरा लण्ड अपने हाथों में ले लिया और कुछ सोचने के बाद उसे धीरे धीरे सहलाने लगी।.  .  .  . मैंने उसे लण्ड को मुंह में लेने को कहा तो वो पहले लण्ड को किस करने लगी फ़िर वो लण्ड मुंह में लेने लगी, लेकिन मोटा होने की वज़ह से बड़ी मुश्किल से उसके मुंह में जा रहा था। वो लण्ड के सुपारे को ही लोलीपोप की तरह चूसनेर लगी। मुझे इससे स्वर्गिक आनन्द आने लगा। फ़िर मैंने एक झटके से अपना आधा लण्ड उसके मुंह में घुसा दिया और आरती क सिर पकड़ कर आगे पीछे करते हुए चोदने लगा। आरती के मुंह से गूं गूं की घुटी घुटी. आवाजें आने लगी। वो अपने मुंह से लंड निकालने की कोशिश करने लगी लेकिन मैंने अपने हाथों से उसका सर कस के पकड़ रखा था इस कारण वो मेरा लंड अपने मुंह से नहीं निकाल पाई.
उसके आंसू बहने लगे.
थोडी देर चोदने के बाद मैंने अपना लंड उसके मुंह से निकल लिया.
लंड उसके थूक से एकदम गीला हो गया.
 .  .  . इसके बाद मैंने उसे सोफे पर बैठा कर उसकी टांगों को अपने कंधों पर रख लिया.
इससे उसकी छुट मेरे लंड के करीब आ गई.
मैंने ढेर सारा थूक उसकी चूत पे लगाया और ऊँगली अंदर बाहर करने लगा.
आरती सिसकारियां भरने लगी.
फ़िर मैंने अपना लंड उसकी चूत के मुहाने पर रखा और अंदर करने लगा, आरती की चूत कुंवारी होने के कारण काफी टाईट थी.
मैंने जोर लगा कर अपना लंड उसकी चूत में ठेल दिया.
लंड का सुपारा ही अंदर गया था कि आरती जोर जोर से चीखने लगी.
मैंने अपने हाथों से उसका मुंह बंद कर दिया.
और जोर जोर से धक्के लगा कर अपना लंड उसकी चूत में घुसाने लगा.
अभी आधा ही अंदर गया था कि आरती जोर जोर से अपने हाथ पाँव मारने लगी.
लेकिन मैंने मजबूती से उसे पकड़ रखा था इस कारण वो कुछ नहीं कर पाई और उसका मुंह मेरे हाथ से बंद होने के कारण उसके मुंह से गूँ गूँ की आवाजें आने लगी और उसके आंसू बहने लगे.
 .  .  . मुझे उसकी चूत से कुछ बहने का अहसास हुआ, नीचे देखा तो उसकी चूत पूरी खून से भरी हुई थी.
मैंने इस पर ध्यान ना देते हुए एक और जोर का झटका दिया जिससे मेरा तीन चोथाई लंड उसकी चूत में समा गया.
इस झटके से आरती अपना सर जोर जोर से इधर उधर पटकने लगी.
अब मै थोडी देर के लिए रुका और उसके उरोज मसलने लगा, उसके होठों को किस करने लगा.
अपने लंड को धीरे धीरे आगे पीछे करने लगा, अब उसका सर पटकना कुछ कम हुआ और वो भी धीरे धीरे अपने चूतड़ उछालने लगी.
मैंने अपना हाथ उसके मुंह से हटा लिया तो वो बोली सर अपने तो मेरी जान ही निकाल दी थी एक बार लगा कि यहाँ से मैं जिन्दा घर नहीं जा पाउंगी.
 .  .  . मैं बोला मेरी जान दर्द तो एक बार हुआ होगा लेकिन अब मज़ा आ रहा है या नहीं? आरती ने कहा – सर ! मज़ा तो बहुत आ रहा है, बस आप ऐसे ही अपने लण्ड को मेरी चूत में रगड़ते रहिए, सच में आज ज़न्नत क अहसास हो रहा है। मैंने कहा – मेरी जान ! अभी तुम्ने ज़न्नत देखी ही कहां है, आगे आगे देखो मैं तुम्हें क्या दिखाता हूं। इतना कहते ही मैंने एक जोरदार धक्का लगा कर अपना पूरा लण्ड उसकी चूत में घुसा दिया। आरती इस अचानक हुए हमले के लिए तैयार नहीं थी, इस कारण उसकी चीख निकल गई और बोली – प्लीज़ सर ! आप अपना लण्ड मेरी चूत से निकाल लीजिए, मुझे बहुत दर्द हो रहा है, मैं मर जाऊंगी, प्लीज़ सर निकाल लीजिए अपना लण्ड, मैं आपके हाथ जोड़ती हूं।  .  .  . मैं उसकी बातों पर ध्यान ना दे कर उसके मम्मे चूसने लगा और अपने लण्ड को उसकी चूत धीरे धीरे पेलने लगा। थोड़ी देर में उसको भी मज़ा आने लगा। वो अपनी गाण्ड ऊपर नीचे उछालने लगी और बड़बड़ाने लगी – ओ यस. यस्स्स और जोर से चोदो सररर, मेरी चूत फ़ाड़ दोओअओ, आज मुझे लरकी से औरत बना दो, चोदो और जोर से चोदते जाओ, मेरी चूत को फ़ाड़ कर भोसड़ा बना दो, आज मेरी चूत की आग को मिटा दो, और जोर से रगड़ो सर।  .  .  . आरती अपना हाथ मेरी पीठ पर फ़ेरने लगी और मेरे होंठों पर अपने होंठ रगड़ने लगी।.  .  .  . मेरी रांड मैं तुझे आज क्या कई साल तक चोदूंगा, जब चाहे चोदूंगा, आज मैं तेरी चूत क कचरा कर दूंगा, तेरी मां को चोदूं साली, रंडी आज तक तू बहुत नखरे करती थी। आज मैं तेरे सारे नखरे मिटा दूंगा, तू देखती जा मैं तेरे साथ क्या क्या करता हूं।.  .  .  . फ़िर मैंने अपना लण्ड उस्की चूत से बाहर निकाल लिया। वो बोली – सर ! आपने लण्ड बाहर क्यों निकाल लिया? मज़ा आ रहा था, प्लीज़ सर आप यूं ही गालियां देते हुए मुझे चोदो, मुझे अच्छा लग रहा है। मैंने कहा साली, रंडी की औलाद, देख आज मैं तुझे कैसे चोदता हूं, चल अब तू घुटनों के बल कुतिया की तरह खड़ी हो जा। फ़िर वो सोफ़े से खड़ी हुई तो उसकी नज़र सोफ़े पर फ़ैले खून पर पड़ी। उसने कहा – सर ! आपने तो मेरी चूत ही फ़ाड़ दी, देखिए कितना खून निकला है।
स्रोत:इंटरनेट