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Fayda Teacher Student Sex Kahani

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एक कुंवारे टीचर का दिल एक नयी नयी जवान स्टूडेंट पे आ गया और उस हरामी ने अपनी पोजीशन का फायदा उठा कर उस लड़की को पाने की कोशिश की। पढ़िए एक गरमा गरम teacher student sex kahani.. मैं २५ साल का अविवहित युवक हूं। पिछले साल तब मैं एक प्राईवेट स्कूल में पढाता था। उसमें लड़के लड़कियां दोनो साथ पढते थे। १२वीं क्लास में एक सुन्दर और सेक्सी लड़की आरती पढती थी, जो लगभग 18 साल की करीब ५ फ़ुट २ इन्च की थी।. मैंने जब उसको पहली बार देखा तो देखता ही रह गया। उसका चेहरा गोल काली काली आँखें गुलाबी होंट, कमर तक लंबे बाल और सीने पर संतरे जैसे दो उरोज। जब वो चलती थी तो उसके कूल्हे काफी आकर्षक लगते थे। उसको देख कर मुझे पता नही क्या हो जाता था, मेरे मन में हमेशा ही उसको चोदने का ख्याल आता था। कई बार उसको देख कर स्कूल के बाथरूम में ही जाकर मुठ मर कर अपनी इच्छा को शांत करता था और सोचता था कि कब इस जवानी को भोगने का सुख मिलेगा।. संयोग से एक दिन मुझे वह मौका मिल ही गया। सर्दियों का मौसम था और स्कूल का समय १० से ५ बजे का था। उस दिन जरूरी काम होने के कारण मैं ९ बजे स्कूल आ गया.
थोडी देर बाद तकरीबन ९.
१५ पर मुझे आरती आती दिखाई दी.
वो काफी खुश दिखाई दे रही थी.
मैंने सोचा कि उस से खुशी का और जल्दी स्कूल आने का कारण पूछता हूँ, जिससे उसके पास बैठने और बात करने का मोका भी मिलेगा.
वो सीधे अपनी क्लास में चली गई.
मैं पीछे पीछे उसकी क्लास में गया और दरवाजे की ओट से अंदर देखने लगा.
उसने अपने बैग से कोई कागज़ निकाला और पढ़ कर मुस्कुराने लगी.
मुझे लगा की हो ना हो वो किसी लड़के का पत्र पढ़ रही है.
यह अच्छा मोका था उसे पकड़ने का, इसलिए मैं अचानक जाकर उसके सामने खड़ा हो गया.
वो मुझे देखते ही घबरा गई और कागज़ को छुपाने का प्रयत्न करने लगी.
मैंने पूछा – आरती क्या छुपा रहो हो?. वो हकलाते हए बोली क्क्कुछ नही सर!. मैंने कहा – झूठ मत बोलो, मैंने तुम्हे एक लैटर पढ़ते हुए देखा है, क्या लिखा है उस में मुझे दिखाओ.
उसने झिझकते और डरते हुए मुझे लैटर दे दिया.
मैंने पढ़ा तो किसी लड़के का ही था और उसमे प्यार भरी बातें लिखी थी.
मैंने मन में सोचा कि यह अच्छा मोका है इसे चोदने का.
मैंने उस से कहा – तो यह पढाई होती है स्कूल में? तो आरती बोली,”नही सर यह मेरा नही है, मुझ तो यह यहाँ पड़ा हुआ मिला, मैं तो इस ऐसे ही देख रही थी.
मैंने कहा – मुझे क्या बेवकूफ समझ रखा है, मैंने तुम्हे इसे अपने बैग से निकालते हुए देखा है और इस पर तुम्हारा नाम भी लिखा है.
मेरी बात सुनकर वो चुपचाप सर झुका कर खड़ी हो गई.
मैंने कहा की अगर यह लैटर मैंने प्रिंसिपल को दे दिया तो क्या होगा? वो तुम्हे स्कूल से निकाल देंगे और तुम्हे कहीं भी अड्मिशन नही मिलेगा.
हर जगह तुम्हारे परिवार की बदनामी होगी वो अलग.
यह सुनते ही वो बोली- प्लीज़ सर ऐसा मत करना मै आपके हाथ जोड़ती हूँ.
आप जो कहेंगे मै करूंगी.
मछली फंसते देख मै सोचने का नाटक करते हुए बोला – अच्छा ठीक है, मैं प्रिसिपल को कुछ नही बताऊंगा, यह बात तुम्हारे और मेरे बीच रहेगी, लेकिन तुम बताओ कि यह चक्कर कब से चल रहा है? उसने कहा – सर ४-५ दिन से वो लड़का मेरा पीछा कर रहा है और यह दूसरा ही लैटर है जो उसने मुझे दिया है.
मैंने कहा कि क्या तुम भी उससे प्यार करती हो?. आरती ने कहा – नही सर मैं उसे प्यार नही करती पर लैटर पढ़ कर अच्छा लगता है और मन में कुछ कुछ होने लगता है.
मैंने कहा – अच्छा ठीक है , आज के बाद तुम उस लड़के से बात नही करोगी और कोई लैटर भी नही लोगी, मेरी हर बात मानोगी.
उसके पास मेरी बात मानने के अलावा कोई रास्ता ही नही था, इसलिए बोली – ठीक है सर , आप जो कहेंगे मै करुँगी लेकिन लैटर की बात आप किसी को नही बताएँगे! इतने में स्कूल के दूसरे बच्चे भी आने लगे थे.
मैंने उसे इंटरवल में ऑफिस में आने को कहा.
वो बोली ठीक है सर.
मैं वहां से आ गया और मन ही मन खुश था कि अब मेरा ख्वाब पूरा होने वाला है.
इंटरवल में वो मेरे ऑफिस आई और मैंने कहा – तुम थोडी देर रुको, मैं बिजी हूँ.
तुम सामने सोफे पर बैठ जाओ.
 .  .  . वो सामने बैठ गई.
मैं तिरछी नज़र से उसे देखता रहा.
बैठने के कारण उसका स्कर्ट थोड़ा उठ गया था.
उसकी गोरी गोरी जांघें दिख रही थी.
मेरा लंड खड़ा होने लगा जिसे मैं आरती के सामने ही सहलाने लगा.
उसने मुझे ऐसा करते देख अपना सर झुका लिया.
फ़िर मै उठ कर उसके पास जाकर बैठ गया.
और एक हाथ उसके कंधे और दूसरा उसकी जाँघों पर रख कर स्कर्ट के उपर से ही सहलाने लगा.
ऐसा करने पर आरती पहले तो कसमसाई , फ़िर बोली सर आप ये क्या कर रहे हैं, प्लीज़ मुझे जाने दीजिए.
 .  .  . मैंने कहा -तुम्ही ने तो कहा था कि आप जो कहेंगे मै वो ही करूंगी, तो अब क्यों मना कर रही हो और ध्यान रखो कि अभी भी तुम्हारा वो लैटर मेरे पास है, मै उसे प्रिंसिपल को दे सकता हूँ.
इतना सुनते ही वो चुप हो गई.
अब मेरी हिम्मत और बढ़ गई.
मैं अब एक हाथ से आरती कि चूचियां दबा रहा था और दूसरे से उसका स्कर्ट उपर करके उसकी जाँघों को मसल रहा था.
 .  .  . जब मै उसके शर्ट के बटन खोलने लगा तो वो मना करने लगी.
पर मैंने उसकी बात को ध्यान ना देते हुए उसके सारे बटन खोल दिए.
सफ़ेद रंग की ब्रा में बंद उसके उरोज काफी कातिलाना लग रहे थे.
उसकी ब्रा को नीचे किया तो उसके उरोजों को गुलाबी रंग के चूचुक काफी सुंदर लग रहे थे.
एक को मैं मुंह में लेकर चूसने लगा और दूसरे को हाथ से मसलने लगा.
ऐसा करने को आरती जोर से कसमसाई और बोली सर मुझे छोड़ दीजिए, मुझे दर्द हो रहा है.
लेकिन मैंने उसकी बात ना सुन कर अपना एक हाथ उसकी स्कर्ट में डाल दिया और पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत सहलाने लगा.
उसके मुंह से सिस्कारियां निकलने लगी.
 .  .  . इतने में इन्टरवल ख़त्म होने की घंटी सुनाई दी तो मैंने उसे कपडे ठीक करके जाने को बोला और कहा – आरती ! स्कूल ख़त्म होने के बाद यहीं आ जाना और यदि ना नुकुर की तो कल मैं यह लैटर सीधा प्रिन्सिपल को. दे दूंगा। इतना कह कर मैं अपने ओफ़िस से निकल कर स्टाफ़रूम की तरफ़ चल दिया और स्कूल खत्म होने का इंतज़ार करने लगा। स्कूल खत्म होने पर आरती आई, तो मैंने उसे अपने ओफ़िस में जा कर बैठने को कहा।  .  .  . थोड़ी देर में सभी टीचर और बच्चे चले गए तो मैं अपने ओफ़िस में गया। वहां आरती सोफ़े पर बैठी हुई थी। मैं उसके पास गया और सोफ़े पर बैठ कर उसके कपड़े खोलने लगा। आरती बोली- सर ! प्लीज़्… मुझे घर जाने दीजिए, लेट होने पर मेरी मम्मी मुझे डांटेगीं। मैंने कहा- अपनी मम्मी को बोल देना कि एक्स्ट्रा क्लास थी और फ़िर भी ना माने तो मेरी बात करा देना, अब चुपचाप जो मैं कहता हूं वो करो। इसके बाद वो कुछ नहीं बोली।
स्रोत:इंटरनेट