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First Class Ac Train Xxx Stories 2

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यह कहकर शिवांगी फूट-फूट कर रोने लगी .
मैं भी भावुक हो गया और उनके दोनों हाथ अपने हाथों में लेकर उनको सहलाने लगा हम दोनों में एक नया भावनात्मक बंधन पैदा हो गया .
रोने के बाद शिवांगी थोडा  शांत हुई और धीरे से अपने हाथ मेरे हाथ से छुड़ा लिए.
मैंने कहा शिवांगी जी मैं कुछ कहूं उसने अपना सिर   हाँ में हिलाया .
मै —  शिवांगी जी सर्वप्रथम मैं कहूँगा कि आप बहुत सुंदर हैं. शिवांगी की आंखों में एक चमक आई पर  उन्होंने कहा —-आप मुझे बना रहे हैं. मैं—– क्या आपको लगता है कि मैं आपको बना रहा हूं और मैं ऐसा क्यों कहूंगा आपके चेहरे में और आपके शरीर में एक ऐसी चमक है जो किसी को भी अपनी और आकर्षित कर सकती है मैं तो यही कहूंगा कि शायद. आपने कभी लड़कों की तरफ ध्यान नहीं दिया नहीं तो आप पाती कि वह आप से मित्रता करने के लिए कितने लालायित रहे होंगे. अब शिवांगी मुस्कुराने लगी थी और उन्होंने कहा— अच्छा तो बताइए कि आपको मुझ में क्या अच्छा लगता है. मैंने कहा मुझे आपकी आंखें बहुत सुंदर लगती हैं और —–. यह कहकर मैंने वाक्य बीच में ही छोड़ दिया. शिवांगी— और क्या कहिये ना .
  उसकी आवाज में एक उतावलापन था.
मैं —-आप बुरा तो नहीं मानेंगी. शिवांगी ने मेरे हाथ पकड़ लिया और कहा — कहिए ना. मैंने कहा— आपके होंठ बहुत सुंदर हैं. शिवांगी ने अपनी आंखें बंद कर ली बोली —-और कहिए. मैंने कहा —-और तो कुछ अधिक दिखाई नहीं दे रहा है और जितना दिख रहा है काफी आकर्षक है मेरी आवाज में एक शरारत थी. शिवांगी ने आंखें खोली और कहा—- आप इतने सज्जन  नहीं है जितने लग रहे हैं उसकी आवाज में भी शरारत थी एक मीठी शिकायत थी .
उसने मेरा हाथ अभी भी पकड़ा हुआ था और मेरे शरीर में सनसनी दौड़ रही थी.
मैंने कहा —क्या और कुछ अधिक देखने को मिलेगा जिससे मैं आपकी सुंदरता का  और अधिक बयान कर सकूं शिवांगी ने कहा—- सोचते हैं .
आप कुछ ज्यादा ही मांग रहे हैं.
कह कर उसने मेरा हाथ छोड़ दिया .
पर मुझको यकीन हो गया कि आज रात बहुत कुछ देखने को मिलेगा.
गाड़ी सतना के प्लेटफार्म पर प्रवेश  कर रही थी मैंने कहा चलिए यहां पर खाना खाते हैं और खड़ा हो गया .
दरवाजे खोल कर असिस्टेंट को बुलाया और कहा—खाने के लिए प्लेट लगा दो .
शिवांगी से कहा—-  चलिए हाथ धोकर आते हैं .
शिवांगी ने कहा— चलिए  स्टेशन पर चलते हैं वंही हाथ भी धो लेंगे थोड़े हाथ पैर भी खुल जाएंगे मैंने डिब्बे का दरवाजा खोला और हम दोनों प्लेटफार्म पर आ गए.
पानी की टंकी थोड़ी दूर थी हम दोनों वहां तक गए और जाकर हाथ धोए .
इसके बाद हम दोनों टहलते हुए थोड़े आगे तक निकल गए अचानक मैंने महसूस किया कि हमने एक दूसरे का हाथ पकड़ लिया है और इसमें हम दोनों को ही कोई आपत्ति नहीं थी.
मैं बहुत रोमांचित था और महसूस कर रहा था कि शिवांगी भी बहुत आनंद ले रही है थोड़ा आगे तक जाने के बाद हम दोनों हाथ पकडे पकडे ही वापस अपने डब्बे तक आ गए और अंदर आ गए .
   असिस्टेंट ने खाना लगा दिया था हम दोनों ने चुपचाप खाना समाप्त किया इसी बीच गाड़ी चल दी.
असिस्टेंट आया और सभी समान उठाकर लेकर चला गया उसने पूछा श्रीमान जी कुछ और ले कर आऊं चाय या कॉफी मैंने शिवांगी की तरफ प्रश्नवाचक नजरों से देखा तो उसने सिर हिला दिया मैंने भी असिस्टेंट को धन्यवाद देते हुए मना कर दिया .
असिस्टेंट ने हम दोनों को गुड नाइट कहां और कुपे  का दरवाजा बंद करके चला गया. मैंने शिवांगी से पूछा क्या आप अपने कपड़े बदलना चाहेंगी. शिवांगी ने कहा —- हाँ. तो मैंने कहा ठीक है मैं बाहर चला जाता हूं आप चेंज कर ले. 5 मिनट के बाद जब मैं कूपे में वापस आया तो शिवांगी ने कपड़े चेंज कर लिए थे और मैं उसकी खूबसूरती देख कर आवाक  रह गया उसने ऊपर एक पिंक कलर का टॉप पहना हुआ था जिसमें उसकी मोटी मोटी चूचियां दिखाई दे रही थी . मैंने नोटिस किया की शिवांगी ने नीचे ब्रा नहीं पहनी हुई है और उसके निप्पल्स टॉप में साफ उभरे  हुए दिखाई दे रहे हैं नीचे उसने पिंक कलर का ही लोअर पहना हुआ था जिसमें उसके मोटे चुतड साफ दिखाई दे रहे थे. मैंने नोटिस किया कि शायद उसने  पैंटीज भी नहीं पहनी है.
  मेरा लौड़ा पेंट में टेंट बनाने लगा.
शिवांगी की आवाज मुझको वापस दुनिया में लायी वह कह रही थी —-क्या मुझको देख  ही जा रहे हो कुछ तो शर्म करो.
मैंने देखा कि वह मुस्कुरा रही थी और उनकी सुंदरता का जो कुछ  मेरे ऊपर  असर हुआ था उससे वह बहुत संतुष्ट थी. मैंने भी मुस्कुराते हुए कहा मुझे क्या पता था कि आप रति की तरह सुंदर हैं. शिवांगी हंसते हुए बोली क्या रति भी काली थी. मैंने कहा यह तो मुझे नहीं पता पर अब आगे से मैं यही कहूंगा की रति  भी काली  थी.  . मैं आगे बढ़कर बैग से अपने कपड़े निकालें और टॉयलेट में जाकर चेंज करके आ गया मैंने भी जानबूझकर अपना अंडरवियर नहीं पहना और पैजामा में दूर से ही दिखाई दे रहा था की मेरा लौड़ा खड़ा है. शिवांगी की आवाज मुझको वापस दुनिया में लायी वह कह रही थी —-क्या मुझको देख  ही जा रहे हो कुछ तो शर्म करो.
मैंने देखा कि वह मुस्कुरा रही थी और उनकी सुंदरता का जो कुछ  मेरे ऊपर  असर हुआ था उससे वह बहुत संतुष्ट थी. मैंने भी मुस्कुराते हुए कहा मुझे क्या पता था कि आप रति की तरह सुंदर हैं. शिवांगी हंसते हुए बोली क्या रति भी काली थी. मैंने कहा यह तो मुझे नहीं पता पर अब आगे से मैं यही कहूंगा की रति  भी काली  थी. मैं आगे बढ़कर बैग से अपने कपड़े निकालें और टॉयलेट में जाकर चेंज करके आ गया मैंने भी जानबूझकर अपना अंडरवियर नहीं पहना और पैजामा में दूर से ही दिखाई दे रहा था की मेरा लौड़ा खड़ा है. मै आ कर कूपे में बैठ गया .
मैंने महसूस किया कि शिवांगी ने मेरा लोडा देख लिया और वो थोडा परेशां हो गयी है.
मैंने उसको सहज बनाने के लिए कहा — अभी तो 9 ही बजे है और नीद भी अभी नहीं आएगी.
बैठ कर बाते ही करते है.
शिवांगी ने मुस्कुराते हुए कहा —- हाँ , आप मुझे अपनी पत्नी के बारे में बताये, आपने मेरी तो बहुत सारी बाते सुन ली.
मै— आपको मधुस्मिता और अपने बेटे प्रतीक की फोटो दिखाता हूँ.
इधर आ जांए मेरी तरफ.
शिवांगी थोड़ी झिझकी पर उठ कर मेरी तरफ आ गयी.
मैं फ़ोन में stored मधुस्मिता और प्रतीक की फोटो दिखने लगा.
शिवांगी— आपकी पत्नी तो बहुत सुंदर है और शायद आप मुझ को बना रहे थे कि मै आपको बहुत सुंदर लगती हूँ.
उसकी आवाज में एक शिकायत थी.
मैं– अच्छा मै आपको यकीं दिलाने के लिए अभी मधुस्मिता को फोन करता हूँ और तब आपको पता चलेगा की मैंने आपके बारे में उसे क्या कहा है.
शिवांगी ने हँसते हुए सर हिलाया और कहा —मिलाये फ़ोन मधुस्मिता को और आप का झूठ अभी पकड़ा जायेगा.
मैंने फोन स्पीकर पर करके , मधुस्मिता को फोन किया.
मधुस्मिता (चहकते हुए)— हाय राजा , कंहा हो? कितनी देर से तुम्हारे फोन का इंतजार कर रही थी.

स्रोत:इंटरनेट