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First Class Ac Train Xxx Stories

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ट्रेन के डिब्बे में सिर्फ हम दो, मेरी बीवी को भी ऐतराज़ नहीं.
अब भी अगर कुछ न हो तो धिक्कार है.. इन train xxx stories का अगला धमाकेदार भाग– Hindi Sex Story के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. मैंने देखा कि शिवांगी कनखियों से मुझे देख रही है और हमारी बात समझने कि कोशिश कर रही है.
मैंने इशारे से उनसे माफ़ी मांगी और दरवाजा खोल कर बाहर आ गया.
बाहर आ कर मैंने मधु को शिवांगी के विषय में बताया .
मधु– तो राजा, आप दोनों कूपे में बंद है.
मैंने हँसते हुए कहा- हां.
मधु- ये शिवांगी है कैसी ?. मै- काली है पर है सुंदर और जवान है .
मधु- राजा, तुम्हारा तो काम बन गया.
आज रात को इसको चोद लो.
ट्रेन में तो बहुत मजा आएगा.
मै- और मधु उसे मैंने कोक भी अपने वाला पिला दिया.
मधु- कमाल हो गया .
मुझे नहीं पता था कि आप इतने शातिर हो गए हो .
मुझे पूरा किस्सा बताना पड़ेगा.
मेरी चूत तो तुम्हारी बात सुनकर ही गीली हो गयी है.
इतने में ट्रेन चलने लगी .
मैंने मधु को सब बाते बताने का वादा किया और फोन कट गया.
मैंने अन्दर आ कर दरवाजा बंद कर दिया.
अब मैंने शिवांगी को एक नयी नज़र से देखा और मुझे लगा की शिवांगी तो एक सेक्स बम है.
शायद ये मधु से एक सप्ताह दूर रहने का , उसकी बातो और पुरे माहौल का असर था.
मैंने देखा कि शिवांगी ने इतनी देर में सारी कोक पी ली है.
शिवांगी- आपकी पत्नी का फोन था ?. मै-  जी हां.
शिवांगी मुस्कुराते  हुए – आप से बहुत प्रेम करती है .
आपको बहुत मिस कर रही है.
मै–आप ठीक कह रही है.
एक सप्ताह हो गया मुझे आये हुए.
अचानक मैंने महसूस किया की इतनी देर में न तो शिवांगी के पति का कोई फोन आया न ही उनके बच्चो का कोई फोन आया .
मुझे ये थोडा अजीब लगा.
तभी शिवांगी ने कहा – सुदेश जी, ये कोक तो बहुत ही आराम देने वाली लगी.
बड़ा हल्का महसूस कर रही हूँ.
अगर बुरा न माने तो एक गिलास और पिते है.
अब मेरा डर ख़तम हो चूका था और मेरे इरादे भी कुछ और हो चुके थे, इसलिए मैंने दोनों के लिए एक एक गिलास और भर लिया .
मै- आपने कहा कि मेरी पत्नी मुझ से बहुत प्यार करती है .
क्या आप अपने पति से प्यार नहीं करती? शिवांगी मेरी बात सुन कर थोड़ी देर चुप रही .
मैंने कहा- छोडिये , लगता है मुझे ये प्रश्न नहीं करना चाहिए था.
मै आप को परेशान नहीं करना चाहता था.
शिवांगी धीरे धीरे बोली- मैंने आपको नहीं बताया कि मेरे पति मेरे से लगभग 10 वर्ष बड़े है और मैंने अपने परिवार के विरुद्ध जा कर उनसे शादी की थी.
आज हम दोनों बहुत व्यस्त है कभी मेरा सेमिनार तो कभी उनका सेमिनार और फिर आगरा में काम भी समय की मांग  करता है जिसके कारण हम दोनों को मिले हुए भी कई कई दिन हो जाते है.
मै उनको आज भी बहुत प्यार करती हूँ पर हम दोनों के बीच में समय के साथ एक अलग तरह का समझोता हो गया.
मै- शिवांगी जी, पर आप अपने बच्चो से क्यों दूर है? शिवांगी हैरानी से मुझे देखते हुए – आपको कैसे पता लगा कि मै बच्चो से दूर हूँ?. मै- इसमें कोई मुश्किल नहीं है.
हम दोनों पिछले 2 घंटे से साथ है इतनी देर में न आप ने बच्चो को और न ही बच्चो ने आपको फोन किया.
यह सुनकर शिवांगी की आँखों में आंसू आ गए और वो चुप चाप कोक के घुट भरती रही.
हम दोनों ने अब तक दो गिलास खाली कर दिए थे और मुझे पूरा विश्वास था कि शिवांगी को हल्का हल्का नशा जरूर हो गया होगा.
नमकीन की प्लेट भी हमने खाली कर दी थी.
मैंने चुपचाप दोनों के लिए एक और गिलास भर दिया और एक खाने का डब्बा खोलने लगा.
शिवांगी ने कहा — मै वाश रूम जा कर आती हूँ.
मै अपनी बर्थ से उतर कर खड़ा हो गया.
वो भी अपनी बर्थ से उतर कर खड़ीहोने लगी तभी ट्रेन में झटका लगा और वो लडखडा गयी तो मैंने उनको बांह पकड कर संभाला.
उनको छुते  ही मै रोमांचित हो गया और मैंने देखा कि उनके रोंगटे भी खड़े हो गए है.
पर हम दोनों ने कुछ नहीं कहा.
वो सँभलते हुए आगे बढ़ी मैंने आदर दिखाते हुए उनके लिए दरवाजा खोल दिया और उनके पीछे पीछे टॉयलेट तक चला गया.
शिवांगी ने मुझे नहीं रोका और टॉयलेट का दरवाजा मैंने उनके लिए खोले और कहा थोडा संभल कर जांए.
शिवांगी ने मुझे धन्यवाद् कहा और अन्दर चली गयी.
मै बाहर ही उनका इंतजार करता रहा.
थोड़ी देर में , शिवांगी बाहर आई और हम दोनों कूपे में वापस आ गए.
आ कर हम दोनों अपनी अपनी बर्थ पर आ कर बैठ गए .
मैंने कहा 8:30 बज गए है 9 बजे तक सतना पहुचेगे .
वंहा ट्रेन 10 मिनट रुकेगी यदि आप को उचित लगता हो तो वन्ही खाना खायेंगे .
शिवांगी ने कहा – आप बैठिये .
आज मै अपने आप को बहुत हल्का महसूस कर रही हूँ आप से मुझे एक अलग तरह का अपनत्व लग रहा है.
मै आप के साथ बाते करना चाहती हूँ.
मैंने कहा — अच्छा तो मे भी हल्का हो कर आता हूँ.
उसने कहा जरूर.
मै भी टॉयलेट जा कर हल्का हो कर आ गया.
मैंने देखा कि शिवांगी ने इतनी देर में तीसरा गिलास भी आधा खाली कर दिया है.
मै आ कर अपनी बर्थ पर बैठ गया .
शिवांगी ने कहा – सुदेश जी आपकी कोक में कुछ जादू है छोड़ने को दिल ही नहीं कर रहा.
आपकी ये बोतल तो खली हो गयी .
मैंने कहा- आप चिंता न करे मेरे पास एक और बोतल है.
इस पर हम दोनों हसने लगे.
मुझे भी अब हल्का हल्का सरूर होने लगा था और हर पल शिवांगी ज्यादा खुबसूरत लग रही थी.
हम दोनों को ही आजादी की अनुभूति हो रही थी.
मैंने शिवांगी को कहा – अब आप मेरे से जी भर के बाते कर सकती है.
अभी सतना आने में आधा घंटे का समय था मैंने सोचा कि अभी दोनों मिलकर बातें करते हैं सतना  जाकर खाना खाएंगे और देखते हैं इस के बाद  क्या हो पाता है. बात को आगे बढ़ाते हुए मैंने कहा तो आप अपने दिल की बात बताना चाह रही थी. शिवांगी — सुदेश जी , अपने दिल के फफोले  दिखाते हुए बहुत कष्ट होता है मैंने गंभीरता से कहा दर्द बांटने से हमेशा कम होता है. शिवांगी — मैं बचपन से काली होने के कारण से अपने को बदसूरत समझती थी और हिन् भावना से ग्रस्त थी.
  कोई लड़का मुझसे बात नहीं करना चाहता था तो मैंने अपना समय अधिक से अधिक पढ़ाई में लगा दिया और एक के बाद एक कक्षा  में प्रथम आती रही .
  बारहवीं कक्षा के बाद में मेडिकल प्रवेश परीक्षा भी  में पास कर गई और आगरा में मेरा एडमिशन हो गया यहां पर भी लड़के मुझ को पसंद नहीं करते थे और मैं सबसे दूर रहती थी पढ़ाई में अच्छी ही थी और मेडिकल कॉलेज में भी मैं  प्रथम स्थान पर रही .
इसके बाद मैंने MD करने की सोची और अरुण घर जो कि अब मेरे पति हैं उनके अंडर में मुझको दाखिला मिल गया 3 साल साथ साथ काम करते-करते हम दोनों में प्रेम को गया हालाँकि अरुण मुझसे 10 साल बड़े थे इसलिए मेरे परिवार  के सभी लोग इस शादी से नाखुश है परंतु मैंने उनकी परवाह ना करते हुए डॉक्टर अरुण से  शादी कर ली .
हम दोनों एक दूसरे को बहुत प्रेम करते हैं पर समय के साथ एक ऐसी दूरी बन गई जो आज हम दोनों ही भर नहीं पा रहे हैं शादी के 2 साल बाद मेरी पहली बेटी ने जन्म लिया और उसके 2 साल के बाद दूसरी बेटी ने .
काम की अधिकता के कारण से दोनों बच्चियों को मेरी मां ने ही लालन पालन किया और मैं उनको जो मां का प्यार था नहीं दे पाई और आज मेरी मां उन दोनों के लिए अधिक महत्वपूर्ण है और मैं उनके लिए अजनबी .

स्रोत:इंटरनेट