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Ghar Ki Bahu Naukar Sex Kahani 2

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बाबूजी ने मुझे देखा तो मैंने इकरार में सिर हिला दिया कि मुझे ये सब पसंद हैं।.  . बाबूजी ने गोपाल से कहा- “यार, ये सब भरोसे के आदमी तो हैं ना? ऐसा ना हो कि ये हर एक को बताते फिरें और हमारी बदनामी हो…”  . गोपाल बोला- “साहिब जी, आप बिल्कुल बेफिकर रहें। गोपाल आदमी पहचानने में कभी गलती नहीं करता…”  . गोपाल की बात सुनकर बाबूजी सबसे कहने लगे- “मैं आप सबको ये बात बिल्कुल साफ-साफ बता देना चाहता हूँ कि मुझे सिर्फ़ वफादार लोग पसंद हैं और मैं आप लोगों को सिर्फ़ इसी शर्त पर अपने पास मुलाजिम रखूंगा कि मेरे. घर की कोई बात आप बाहर किसी को नहीं बतायेंगे…”.  . सब कहने लगे- “साहिब, कोई हमारी गर्दन भी काट देगा, तब भी हम आपसे नमकहरामी नहीं करेंगे…”  . बाबूजी उनकी बात सुनकर बोले- “मुझे आप लोगों की बात पसंद आई। अब मैं असल बात पर आता हूँ। वैसे तो मुझे इतने मुलाजिम रखने की जरूरत नहीं है। मगर ये मेरी जो बहू है नीलम, इसका कहना है कि घर में और मुलाजिम भी होने चाहिए जो गोपाल के काम में हाथ बटा सकैं। गोपाल हमारा बहुत पुराना मुलाजिम है और हम इसे अपना मुलाजिम नहीं समझते। और ये हमारे घर में एक मर्द की तरह रहता है और इसलिए गोपाल घर के काम-काज से फारिग होकर. मेरी बहू को खूब चोदता भी है जिसकी मैंने इसको पूरी इजाजत दे रखी है। अब मैं चाहत हूँ कि आप लोग भी इस घर में घर के मर्द की रहें और गोपाल की तरह आप लोग भी मेरी बहू को खूब चोदें…”.  . बाबूजी की बात सुनकर सब हैरान रह गये और हैरत से मुझे देखने लगे। उन में से एक बोला- “ये आप क्या बात कर रहे हैं?”.  . बाबूजी मुश्कुराये और बोले- “अरे इसमें हैरान होने की क्या बात है? मेरी बहू को शौक है चुदवाने का और गोपाल को चोदने का। और मैं भी अपनी बहू को खूब चोदता हूँ और अब मैं आप लोगों से चोदने के लिए कह रहा हूँ. तो इसमें हैरानी की क्या बात है? और इस नौकरी में दूसरे काम का तो बहाना है। मैं तो आप लोगों को मुलाजिमत ही अपनी बहू को चोदने की दे रहा हूँ। अब आप लोग सोच लें? एक तो आप लोगों को महीना तनख्वाह भी मिलेगी. और चोदने के लिए मेरी बहू भी। अब आप लोगों में से जिसको ये नौकरी मंजूर है वो यहां रुके, वरना वो यहां से चला जाय। मैं आप लोगों को सोचने के लिए 5 मिनट दे रहा हूँ…”  . बाबूजी की बात सुनकर सब एक दूसरे को देखने लगे। सभी इस मजेदार नौकरी पर खुश थे। फिर वो बोले- “साहिब जी हमें ये नौकरी करनी है…”.  . सबकी बात सुनकर बाबूजी खुशी से बोले- “तो फिर आप लोगों की जाब पक्की…”.  . मैं जो खामोश बैठी थी कहने लगी- “बाबूजी, अभी इनकी नौकरी पक्की ना करें…”  . बाबूजी ने हैरत से मुझसे कहा- “अब क्या बात है? सब कुछ तो तुम्हारी मर्जी से हुआ है…”.  . मैं मुश्कुराई और बोली- “हाँ, मैं यही चाहती थी। मगर मैं पहले इन सबको टेस्ट करना चाहती हूँ कि ये सब मेरी सही से चुदाई कर पायेंगे या नहीं?”  . बाबूजी मेरी बात सुनकर मुश्कुराये और बोले- “हाँ, ये बात तो सही है…”  . मैं उठी और सबसे बोली- “मैं आप लोगों से पहले चुदवाकर आप लोगों की मर्दानगी टेस्ट करूंगी, फिर आप लोगों की जाब पक्की होगी। अब आप सब अपने-अपने कपड़े उतार दें ताकी मैं आप सबके लण्ड देख सकूं…”  . उन में से एक बाबूजी से बोला- “साहिब जी, पहले इनको नंगा करें, ताकी पहले हम देखें कि जिस काम के लिए हमें रखा जा रहा है वो हमें पसंद आता भी है या नहीं?”  . उसकी बात सुनकर बाबूजी हँस पड़े और मुझसे बोले- “बहू रानी, इसकी बात भी सही है। पहले तुम इनको अपना जिश्म टेस्ट करवाओ…”  . बाबूजी की बात सुनकर मैं मुश्कुरा दी। किसी के सामने मेरे लिए नंगा होना अब क्या बड़ी बात थी। मैंने फौरन ही अपने कपड़े उतार दिए और नंगी हो गई। मेरा खूबसूरत सेक्सी जिश्म देखकर सबकी आँखों में चमक आ गई। फिर. सबने एक-एक करके अपने-अपने कपड़े उतार दिए। अब खुश होने की बारी मेरी थी क्योंकी उनमें से किसी का भी लण्ड 9” इंच से कम नहीं था।.  . बाबूजी सबसे बोले- “मैं आप 6 लोगों को 6 घंटे दे रहा हूँ और खुद दूसरे कमरे में जा रहा हूँ। अब आप लोगों ने मेरी बहू की ऐसी चुदाई करनी है कि मुझे इसकी चीखें दूसरे कमरे तक सुनाई दें, और इन 6 घंटों के दौरान इसकी चीखें 6 सेकेंड के लिए भी नहीं रुकनी चाहिए। अगर इसकी चीखें रुकी या धीरे हुई तो आप लोगों को ये नौकरी नहीं मिलेगी…”.  . सब बोले- “साहिब आप बेफिकर रहें। आपकी बहू की चीखें दूसरे कमरे तो क्या पूरे घर में इसकी चीखें गूँजेंगी…”.  . बाबूजी मुश्कुराये और बोले- “ऐसा ही होना चाहिए…” फिर बाबूजी और गोपाल चले गये।.  . और वो सब मुझपर कुत्तों की तरह टूट पड़े। फिर जैसा उन लोगों ने कहा था वेसा ही हुआ। उन लोगों ने मेरी 6 घंटे तक वो चुदाई करी कि मेरी दर्द भरी चीखें पूरे घर में गूँजती रहीं। 6 घंटे बाद जब बाबूजी और गोपाल. कमरे में आये तो अब भी वो सब मुझे कुत्तों की तरह चोद रहे थे और मैं बुरी तरह से चीख रही थी। बाबूजी को देखकर उन लोगों ने मेरी चुदाई बंद कर दी।.  . उनमें से एक बोला- “साहिब बताइये हमने कैसे चोदा है आपकी बहू को?”.  . बाबूजी मेरी जबरदस्त चुदाई से बहुत खुश थे इसलिए वो खुशी के मारे सबसे गले मिले और मेरी शानदार चुदाई करने पर सबको मुबारक बाद दी। फिर बाबूजी कहने लगे- “दोस्तों आप लोगों ने मेरी बहू की शानदार चुदाई करके. साबित कर दिया है कि आप लोगों को इस नौकरी पर फौरन रख लिया जाय। अब आप लोगों का काम ये है कि आप लोग जब चाहे, जहां चाहें, जिस वक़्त चाहें, मेरी बहू को चोद सकते हैं। बस आप लोगों ने मेरी बीवी यानी घर की मालेकिन के सामने अएहतियात करनी है, वरना आप सब लोगों को आजादी है जिसका जितना दिल चाहे मेरी बहू को चोदे, इसमें वक़्त की पाबंदी नहीं है। आप लोगों ने अपना काम सही तरीके से और ईमानदारी से करना है। अगर कभी मेरी बहू आप लोगों से चुदवाने में नखरा करे या मना करे तो आप लोग जबरदस्ती इसे चोदें और इसके साथ कोई रियायत ना करें…”.  . सब बाबूजी की बात से बहुत खुश थे और ये इन सब लोगों की ज़िंदगी की सबसे मजेदार नौकरी थी। मेरे तो मजे आ गये थे। माँजी पूरे 6 दिन बाद आईं और इन 6 दिनों में बाबूजी ने इन 7 नोकरों के साथ मिलकर मेरी जबरदस्त. तरीके से चुदाई करी।.  . जब माँजी वापिस आईं तो मुलाजिमों की ये फौज देखकर मुँह बनाया।.  . मगर बाबूजी ने प्यार से माँजी को समझाया कि घर बड़ा है और गोपाल अकेला, इसलिए मैंने ये मुलाजिम रखे हैं। घर में जो मुलाजिम थे उनकी पोस्ट ये थी- एक ड्राइवर, एक माली, एक बावर्ची, दो चौकीदार, और गोपाल को मिलाकर दो घर की सफाई वगैरा के लिए।.  . रात को तो बाबूजी सातों नौकरों के साथ मिलकर मेरी खूब चुदाई करते थे और दिन में भी जिसको भी मोका मिलता मुझे चोद देता था। दिन में मैं ज्यादातर नौकरों के क्वार्टर्स में चुदवाती थी, क्योंकी माँजी कभी नौकरों के क्वार्टर्स की तरफ नहीं जाती थीं। और मैं आजादी के साथ सबसे चुदवाती थी। इसके अलावा नौकरों को जहां भी मैं तन्हा नजर आती, वो मुझे पकड़कर चोदना शुरू कर देते। नौकर मुझे मेरे कमरे में, किचेन में, बाथरूम में, ड्राइंग रूम में बाहर गार्डेन में, कार पार्किंग में और घर की छत पर भी चोद चुके थे। अब मेरी ज़िंदगी मजे से भरपूर हो गई है।
स्रोत:इंटरनेट