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Ghar Ki Bahu Naukar Sex Kahani

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बाबूजी के सामने मुझे अपने नौकर गोपाल के साथ नंगे हाथों पकडे जाने की एक्टिंग करके मुझे और चुदासी चढ़ रही थी और शायद बाबूजी को भी.. पर अब मुझे लौड़ा चाहिए, दोनों का! इस naukar sex kahani का आखिरी भाग.. Sex Story के अन्य भाग-. पार्ट 3. पार्ट 4. पार्ट 5. बाबूजी ने अपना सर झुका लिया।. तो मैं बोली- “बाबूजी, अगर आप गोपाल के साथ मिलकर मुझे चोदेंगे तो मुझे बहुत खुशी होगी…” बाबूजी का लण्ड अब तक खड़ा हो चुका था और वो उनकी धोती से बाहर आने के लिए बेताब हो रहा था।. मैंने आगे बढ़कर धोती के ऊपर से ही उनका लण्ड पकड़ लिया और बोली- “बाबूजी, आपका खड़ा लण्ड ये कह रहा है कि आप भी मुझे चोदना चाहते हैं। अगर हाँ तो मुझे पकड़ लें, अब ये रिश्ते नाते क्या देखना…” बाबूजी तो पहले ही राजी थे। ये तो गोपाल के सामने आक्टिंग की जा रही थी। अब बाबूजी से ज्यादा आक्टिंग नहीं हो सकी और उन्होंने मुझे अपनी तरफ घसीट लिया और मुझे लिपटाकर बेतहासा किस करने लगे।.  . बाबूजी को मुझे किस करता देखकर गोपाल खुश हो गया और वो हमारे पास आ गया और बाबूजी से बोला- “साहिब जी ये हुई ना मर्दों वाली बात। आपकी बहू बहुत सेक्सी है, हम दोनों मिलकर इसे चोदेंगे तो बहुत मजा आयेगा…”  . बाबूजी ने मुझे खुद से अलग किया और गोपाल से बोले- “अभी तू ही मेरी बहू को चोद मैं रात में तेरे साथ मिलकर अपनी बहू को चोदूंगा। तू मेरी बहू को लेकर इसके कमरे में जा और आराम से जितना तेरा दिल करे इसे चोद।. मैं जाकर तेरी मालेकिन को चोदता हूँ…” वो फिर बोले- “जा जल्दी जा… यहां खड़ा वक़्त क्यों खराब कर रहा है। जा जाकर ऐश कर…”. बाबूजी की बात पर गोपाल बहुत खुश हो गया और बोला- “साहिब जी, अभी आपकी बहू को लेकर जाता हूँ…” और गोपाल मेरा हाथ पकड़कर किचेन से निकालने लगा।  . तो बाबूजी बोले- “गोपाल खूब जमकर चोदना मेरी बहू को, इसकी चीखें निकाल देना…”  . गोपाल हँस कर बोला- “ऐसा ही होगा साहिब जी आप फिकर ही ना करें…”.  . फिर मैं और गोपाल मेरे कमरे में आ गये। गोपाल खुशी से बोला- “नीलम, ये तो बहुत अच्छा हो गया है। अब तो साहिब जी भी हमारे साथ हैं, अब तो हम दोनों मिलकर खूब तुम्हारी चुदाई करेंगे…”  . मैं मुश्कुराई और बोली- “हाँ प्यारे, ये बहुत अच्छा हुआ है। अब मैं एक साथ दोनों छेदों में चुदवाया करूंगी…”  . फिर गोपाल मुझे लेकर बिस्तर पर आ गया और उसने खूब जमकर मेरी चुदाई शुरू कर दी। गोपाल ने शाम 7:00 बजे तक मेरी खूब जोरों से चुदाई करी।.  . रात खाना खाने के बाद बाबूजी माँजी के साथ अपने कमरे मैं चले गये। मैं अपना काम निपटाकर अपने कमरे में आई तो मेरे पीछे-पीछे गोपाल भी कमरे में आ गया। मैं गोपाल को देखकर मुश्कुरा दी। कमरे में आते ही गोपाल. ने मुझे नंगा कर दिया। मैंने सोचा कि बाबूजी पता नहीं कब आयेंगे, इसलिए मैंने गोपाल से चुदवाना शुरू कर दिया। ये मेरी चुदाई का दूसरा घंटा था जब बाबूजी पूरे नंगे कमरे में दाखिल हुये। उनका लण्ड पूरी तरह से अकड़ा हुआ था।.  . मुझे गोपाल से चुदता हुआ देखकर वो मुश्कुराये और फिर हमारे पास आकर बोले- “अकेले-अकेले ही मजे किए जा रहे हैं…”.  . गोपाल बाबूजी को देखकर मुझे चोदकर हटा।. तो बाबूजी मुश्कुराकर बोले- “लगा रह यार, इस साली के दो छेद हैं एक को तू चोद एक को मैं चोदता हूँ…”  . गोपाल ने लेटकर मुझे अपने ऊपर लिटा लिया और मेरी चूत में अपना लण्ड घुसा दिया। फिर बाबूजी अपना लण्ड मेरी गाण्ड में घुसाकर मेरे ऊपर लेट गये। फिर दोनों ने तेज-तेज झटकों से मुझे चोदना शुरू कर दिया। मेरी चूत. और गाण्ड के बीच में पतला सा गोश्त था जिससे मुझे दोनों के लण्ड आपस में रगड़ खाते हुये साफ-साफ महसूस हो रहे थे। ये पहला मोका था जब मैं एक साथ दो मर्दों से चुदवा रही थी। मुझे बहुत मजा आ रहा था और मैं खुद. को लज़्ज़त के आसमान पर महसूस कर रही थी। दोनों ने पूरी रात तरह-तरह से मेरी खूब चुदाई करी।.  . जब हम तीनों थक कर लेट गये तो मैं बाबूजी से बोली- बाबूजी, आपको नहीं लगता कि हमारे घर में नौकर कम हैं?  . बाबूजी बोले- क्या मतलब? मैं समझा नहीं?. मैं मुश्कुराई और बोली- “मेरा कहने का मतलब है कि बिचारे गोपाल को अकेले पूरे घर का काम करना पड़ता है। ये बिचारा कितना थक जाता होगा। आपको नहीं लगता कि इसकी मदद के लिए हमें कुछ और नौकर रखने चाहिए?”.  . बाबूजी अब मेरा मतलब समझ गये थे और उन्होंने कसकर मेरी चूचियों के निपल को दबाया जिससे मेरी चीख निकल गई। बाबूजी हँसकर बोले- “मैं अच्छी तरह समझता हूँ कि तेरा मतलब तुझे गोपाल की मदद के लिए नहीं अपनी प्यास. के लिए और आदमी चाहिए…”.  . मैं भी हँसी और बोली- “मैं गोपाल की मदद के लिए ही कह रही हूँ। पहले वो लोग घर के काम में गोपाल की मदद करेंगे फिर मुझे चोदने में गोपाल की मदद करेंगे। अब आप ही बताइये कि इसमें मेरा मतलब कहां से आ गया? हाँ. ये और बात है कि ये घर मेरा भी है और घर की कोई भी चीज मैं अपने इश्तेमाल में ले लूँ तो इसमें कोई हर्ज नहीं है…”.  . मेरी बात पर बाबूजी हँस दिए और बोले- “तू कह तो सही रही है। वाकई गोपाल की मदद के लिए कुछ लोगों को होना चाहिए…” फिर बाबूजी मुझे से बोले- अच्छा, कितने लोगों को मुलाजिम रखूं?  . मैं मुश्कुराई और बोली- “बाबूजी 2-3 लोग तो और होने ही चाहिए…”.  . बाबूजी मुश्कुराये और बोले- “मैं 3 नहीं 6 आदमियों को नौकरी पर रखूंगा…”.  . मैं बाबूजी बात सुनकर खुशी से उनसे लिपट गई और बोली- “बाबूजी, आप बहुत अच्छे हैं। आपको अपनी बहू का कितना ख्याल है…”  . मेरी बात पर बाबूजी हँसने लगे। फिर वो गोपाल से बोले- “यार, अब ये तेरी जिम्मेदारी है कि तू अपने साथियों का इंतेजाम कर…”  . गोपाल बोला- “साहिब जी, ये तो कोई मसला ही नहीं है। आप देखिएगा मैं ऐसे आदमी लाऊँगा कि वो बहुरानी को चोद-चोदकर इसका हुलिया बिगाड़ देंगे…”  . मैं गोपाल से बोली- “हाँ गोपाल, मुझे ऐसे ही आदमी चाहिए जो मुझे चोद-चोदकर मेरा हुलिया खराब कर दें…”  . गोपाल इसी दिन से अपने काम पर लग गया। दूसरे ही दिन वो 6 आदमियों को घर ले आया। इत्तेफाक की बात ये है कि इसी दिन सासूमाँ को एक काम में दूसरे शहर जाना पड़ गया और अब वो 3-4 दिन से पहले नहीं आ सकती थी।.  . जो आदमी गोपाल लाया था वो सबके सब लंबे तगड़े और सेहतमंद थे। उन सबकी नजरें बार-बार मुझपर पड़ रही थीं, क्योंकि मेरा हुलिया ही ऐसा था कि वो सब मुझे देखे बिना नहीं रह पा रहे थे। मैं इस वक़्त एक छोटे से स्कर्ट और स्लीवलेश टी-शर्ट पहनी हुई थी, और बगैर ब्रेजियर के मेरी चूचियां टी-शर्ट में से साफ-साफ दिखाई दे रही थीं। मुझे उन सबका इस तरह देखना बहुत अच्छा लग रहा था। मुझे भी वो सबके सब पसंद आ गये थे और मैं भी उनको पसंदीदगी की निगाहों से देख रही थी।.
स्रोत:इंटरनेट