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Ghar Ki Bahu Sex Stori In Hindi

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मैंने अपने नौकर को इतना सेड्युस किया, चूत चटवाई, मम्मे चुसवाए। उसका लंड खड़ा किया और फिर खड़े लंड पे चोट कर दी। sex stori in hindi के इस भाग में जानिए किमैंने ऐसा क्यूँ किया? Hindi Sex Story के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. पार्ट 4. पार्ट 5. मेरी बात पर अब गोपाल को भी गुस्सा आ गया और वो बोला- “साली रंडी की औलाद, अभी तो तू खुद मेरे साथ मस्तियां कर रही थी, और अब सती-सावित्री बन रही है…” मैं गुस्से से बोली- “तू यहां से जा रहा है या मैं फोन करके पोलिस को बुलाकर तुझे अंदर करवा दूं?”. गोपाल गुस्से से मुझे देखता रहा और ये कहकर चला गया- “अभी तो मैं जा रहा हूँ, पर देखना मैं तेरा क्या हाल करता हूँ…” अभी गोपाल को गये हुये थोड़ी ही देर हुई थी कि कमरे का दरवाजा खुला और मेरे ससुरजी कमरे में आ गये।. वो बिल्कुल नंगे थे और उनका लण्ड पूरी तरह से अकड़ा हुआ था। मैं बाबूजी को देखकर मुश्कुराई और आगे बढ़कर उनसे लिपट गई।. बाबूजी मुझे लेकर बिस्तर पर लेट गये और बोले- इतना अच्छा दृश्य चल रहा था, तुम्हें ये एकदम से क्या हुआ?  . मैं हँसी और बोली- क्यों ससुरजी, आपको मजा नहीं आया?  . बाबूजी ने मेरी चूचियों को दबाकर कहा- “मजा तो बहुत आया। देखो मेरा लण्ड कैसे अकड़ा हुआ है…”.  . मैं मुश्कुराकर बोली- “पहले आप अपने लण्ड को बैठा दें। बातें बाद मैं करेंगे क्योंकी मेरी चूत में भी आग लगी हुई है…”.  . बाबूजी ने लेटे-लेटे ही अपना लण्ड मेरी चूत के छेद में फिट किया और एक जोरदार झटका मारा। पहले ही झटके में उनका लण्ड जड़ तक मेरी चूत में घुस गया।.  . मैंने एक तेज सिसकारी लेकर कहा- “उउफफ्फ… बहुत जबरदस्त ससुरजी, अब ऐसे ही जोरदार झटके मारकर अपनी बहू को चोदिए…”  . बाबूजी ने खूब तेज-तेज झटकों से मुझे चोदना शुरू कर दिया और मैं भी खूब मजे में अपनी चूत उछाल-उछालकर उनके झटकों का जवाब देने लगी। बाबूजी ने मेरी आधे घंटे तक खूब जमकर चुदाई करी और फिर उन्होंने अपने लण्ड. की मनी मेरे मुँह के अंदर निकाल दी।.  . फारिग होने के बाद वो फिर मुझसे लिपटकर लेट गये, और बोले- “अब बताओ कि तुमने बिचारे गोपाल पर जुल्म क्यों किया? वो प्यासा ही वापिस चला गया। तुमने एक बार तो उससे चुदवा लेना था और तुमने उसपर बिला वजह गुस्सा उतार दिया…”. मैं मुश्कुराई और बोली- “हाँ, बिचारे के साथ गलत हो गया है मगर ये मेरे मंसूबे में शामिल था…”  . बाबूजी ने कहा- और तुम्हारा मंसूबा क्या था?.  . मैं मुश्कुराई और बोली- “मैं गोपाल को गुस्सा इसलिए दिलाया था कि वो मेरा रेप कर दे, मगर बिचारा शरीफ आदमी प्यासा ही चला गया…”  . बाबूजी ने कहा- अब तुम्हारा क्या इरादा है?.  . मैं मुश्कुराई और बोली- “मेरा इरादा है कि मैं अब रात में गोपाल के क्वार्टर में जाऊँगी। वो रात तक खूब मदहोश हो चुका होगा और गुस्से में भी होगा। आप देखिएगा कि वो मदहोशी और गुस्से में मेरी कैसी कसकर चुदाई. करेगा। मेरा ये इरादा है कि मैं रात में उसे और गुस्सा दिलाऊँ ताकी वो गुस्से में पागल होकर मेरी खूब जमकर चुदाई करे और मैं मजे से पागल हो जाऊँ…”.  . बाबूजी ने मेरी चूचियों को खूब कसकर दबाया और बोले- “साली, तू तो बहुत खतरनाक लड़की है…”  . मैं हँसी और बोली- “ससुरजी, खतरनाक नहीं जबरदस्त आक्टर कहिए, आप रात में मेरी आक्टिंग देखिएगा…”  . बाबूजी ने कहा- “हाँ मैं रात में तुम्हारी आक्टिंग जरूर देखूंगा और तुम मेरे साथ ही चलना ताकी मैं पूरा ड्रामा देख सकूं…”.  . मैं बोली- “ससुरजी जब आप माँजी को चोदकर फारिग होंगे तो कहीं इतनी देर में गोपाल सो ना जाय…”.  . बाबूजी ने कहा- “मैं तेरी सास को तो रोज चोदता हूँ मगर मैं ये दृश्य नहीं छोड़ सकता। मैं ये ड्रामा पूरा देखना चाहता हूँ इसलिए आज मैं तेरी सास को नहीं चोदूंगा…”.  . मैं बोली- मगर आप सासूमाँ से क्या कहेंगे?.  . बाबूजी ने फिर मेरी चूचियों को जोर से दबाया और कहने लगे- “मैं कुछ नहीं कहूंगा। बल्की तुम उसके दूध में नींद की दवा मिलाओगी, ताकी वो सुबह तक बेखबर सोती रहे और मैं सकून से अपनी बहू रानी के चोदने का ड्रामा देख सकूं…”.  . मैं मुश्कुराई और बोली- “बाबूजी, आप भी कुछ काम चालक नहीं हैं…”  . बाबूजी भी मुश्कुराने लगे। उनका लण्ड फिर से अकड़ गया था मगर अब माँजी के भी आने का वक़्त हो गया था इसलिए उन्होंने मुझे और नहीं चोदा।.  . रात में खाने के बाद मैंने माँजी के दूध में बेहोशी की दवा मिला दी। बाबूजी रात 10:00 बजे ही माँजी के साथ कमरे में चले जाया करते थे। रात 10:15 बजे मेरे कमरे के दरवाजे पर दस्तक हुई और मैंने दरवाजा खोला तो. बाबूजी कमरे में आ गये। वो इस वक़्त धोती और बनियन में थे।.  . मैं कहने लगी- माँजी का क्या हाल है?.  . बाबूजी ने आगे बढ़कर मुझे लिपटाकर किस किया और बोले- “तेरी सास घोड़े बेचकर सो रही है…”.  . मैं मुश्कुराई और बोली- तो फिर चला जाय?.  . बाबूजी बोले- हाँ चलो, मगर क्या तुम इस हुलिये में जाओगी? मैं मुश्कुराई और बोली- “नहीं बाबूजी…” फिर मैंने उनसे अलग होकर अपने सारे कपड़े उतार दिए और सिर्फ़ एक छोटी सी नाइटी पहन ली। मेरी नाइटी इतनी छोटी थी कि उससे मेरे कूल्हे ही छुप रहे थे, बाकी मेरी पूरी टांगें नंगी थी। मैंने नाइटी की डोरी भी ढीली बांधी थी जिसकी वजह से मेरा पेट और चूचियां भी काफी नुमाया हो रही थीं। मैं मुश्कुराकर बाबूजी से बोली- आपकी बहू कैसी लग रही है?.  . बाबूजी ने मुझे देखकर कहा- “मुझे आज पता चला है कि मेरी बहू कितनी सेक्सी है… तुम बहुत सेक्सी लग रही हो, मेरा तो दिल ये कह रहा है कि गोपाल के बजाय मैं तुम्हारा रेप कर दूं…”  . मैं मुश्कुराई और बोली- “बाबूजी, आज बिचारे गोपाल का हक है। मैंने दिन में वैसे ही उसके साथ बहुत ना-इंसाफी कर दी थी। अब मैं उसको उसका पूरा हक देना चाहती हूँ…”  . बाबूजी ने कहा- “अरे मेरी बन्नो रानी, तो मैं तुम्हें कब रोक रहा हूँ? मगर अपने लण्ड का क्या करूं?”  . मैं मुश्कुराई और बोली- “अपने लण्ड को सुबह तक समझाइये। सुबह मैं आपके लण्ड को भी पूरा मोका दूंगी अपनी चूत को चोदने का…”.  . फिर हम दोनों कमरे से बाहर आ गये। जब हम घर के पीछे बने हुये गोपाल के क्वार्टर की तरफ आये तो खुली हुई खिड़की में से रोशनी बाहर आ रही थी। हम दोनों ने खिड़की से अंदर झाँका तो अंदर गोपाल बिस्तर पर नंगा लेटा. हुआ था उसका लण्ड एकदम तना हुआ था। उसने अपने लण्ड पर मेरा ब्रेजियर जो मैं शाम में पौधों के पास में ही छोड़ आई थी, उसने वो ब्रेजियर अपने लण्ड के गिर्द लपेटा हुआ था और वो मेरे ब्रेजियर को तेजी से अपने लण्ड पर रगड़ड़ता हुआ मूठ मार रहा था।.  . गोपाल की आँखें बंद थी और वो मूठ मारते हुये बड़बड़ा रहा था- “नीलम उउफफ्फ… आआह्ह नीलम, मैं तुझे चोद दूंगा… मैं तेरी गाण्ड फाड़ दूंगा आआह्ह…”  . बाबूजी ने मुझसे कहा- “बहू रानी, ये तो तुम्हारे लिए पागल हो रहा है, अब अंदर जाओ और इसकी प्यास बुझाओ…”
स्रोत:इंटरनेट