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Girlfriend Boyfriend Padosan Hot Porn Story

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मैं अपनी माल पड़ोसन को सोचके हमेशा अधीर ही रहता हूँ पर ज़िन्दगी में कोई और प्यार आया और मेरा ध्यान मेरी प्यारी पड़ोसन से ज़रा हट गया.
हम तीनो की ये शानदार hot porn story पढ़िए.. Hindi Sex Story के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. पार्ट 4. यह खूबसूरत घटना जो में आज आप सब से शेर कर रहा हू यह मेरी और मेरी एक सुंदर पड़ोसन दीपिका के बारे में है.
मेरी आयु तब 19 की और वो 39 की थी जब हमने प्यार किया.
दीपिका के 2 बच्चे थे.
उसकी बहूत ही चमकदार गोरी स्किन,नशेले आँके और बाल इतने लंबे के कमर तक आते थे.
उसके छाती 36 के और गांद 38 के.
जैसे के आम पड़ोसी होते हैं,हम भी वैसे ही थे.
दीपिका और उसके बच्चो का हमारे घर आना जाना होता रहा.
मैं दीपिका को मैं एक बार चोदना चाहता था .
अपने ख़यालो में कही बार चोद भी दिया .
मैं हमेशा से दीपिका से सिर्फ़ एक बार प्यार करना चाहता थ.
मूज़े ना ही कभी मोखा मिला ना ही मैं आपने तरफ़ से कोई कदम बड़ा पाया.
सोचा की किसी को पता चला तो मेरा नाम करब होगा ही दोनो फॅमिलीस के रिश्ते भी करब होंगे.
हमेशा से एक बड़े फॅमिली जैसे रहते और बात चिट करते थे.
दीपिका से बात किए बिना मेरा दिन नही कटता था.
जब मैने कॉलेज जाय्न किया तब लड़को ज्यादा लड़कियो से दोस्ती की.
यह आर्ट्स स्टूडेंट्स में कामन था.
हमेशा कॉलेज में पदाई और आपने दोस्तो में बिज़ी रहने से दीपिका से कई दिन मिल नही पाया बात तो दूर की बात थी.
एक दिन जब मैं आपने दोस्तो से मिलने जाने के लिए त्य्यर हो रहा था तब घर की कॉल बेल बाजी.
मेने जब डोर खोला तो दीपिका बाहर कड़ी थी.
मैं – (एक मुस्कुराहट के साथ) हाई. दीपिका – (बड़ी अजीब तरीके से) हाई. मूज़े ऐसा लगा जैसे उसे मुजसे बात करने में दिलचस्पी नही है.
मैं -आज आपका मूड ऑफ का क्यूँ है.
दीपिका – तूमे इस से क्या?कॉलेज जाने के बाद तुम मूज़े भूल ही गाहे हो.
दीपिका – आज कल तो ना ही ना बाइ.
मैं – ऐसा नही है,सिर्फ़ दोस्तो और कॉलेज में बिज़ी रहता हू.
मैं – में इस बारे में आपसे बाद में बात करता हू,अब ज़रा जल्दी में हू,कहीं बाहर जा रहा हू.
 . अगले दिन दोपयर को टाइम निकल के मैं दीपिका के घर गया.
दीपिका ने एक बड़ी मुस्कान के साथ दरवाजा खोला.
मूज़े देक कर वो बड़ी कुश लग रही थी.
वह काले सलवाल में बिजली गिरा रही थी.
हम किचन में खड़े रह करके बातें करने लगे.
दीपिका घर में अक्सर सलवार कमीज़ या गाउन में रहती थी.
खाने की तय्यरी करके उसने दोनो के लिए लिम्बू शरबत बनाया .
हमने लिविंग रूम में बैठ कर शरबत की चुस्की लेके बातें फिर से शुरू की.
दीपिका – अच्छा कल शाम को जल्दी जल्दी में कहा जा रहे थे?. मैं – कल मैं आपने एक दोस्त के साथ …………पार्क गये थे.
(यह पार्क हमारे शायर की एक माशूर कपल पार्क है,इस पार्क में बहूत बड़े बड़े झाड़िया हैं, वहा कपल्स चुप चुपके प्यार करते पाए जाते)यह सुनके दीपिका की एक प्यारी स्माइल दी और बोली. दीपिका – (शरारती अंदाज में) तो तुम कल तुमरि गर्ल फ्रेंड के साथ थे?. मेरे बोलने के पहले फिर से. दीपिका – मूज़े लगता है सर्दी की मौसोमे में बहूत मस्ती की तुम दोनो ने,क्यूँ?क्यूँ सही कह रही हू ना? मैं – बिल्कुल ग़लत.
वैसे मेरी कोई गर्ल फ्रेंड ही नही बनी है मस्ती तो बाद की बात है.
दीपिका को यकीन नही हुवा के मेरी कोई गर्ल फ्रेंड नही है.
मैं – (मुस्कुराते हुवे) मैं सच कह रहा हू,क्यूँ ना तुम ही मेरी गर्ल फ्रेंड बनो.
दीपिका – ( एक मादक मुस्कान के साथ) मैं इस बारे में सोचूंगी .
(मूज़े मेरे नसीब पर यकीन नही हुवा और उसके मेरी गर्ल फ्रेंड बनने की ख्वाब देकने लग गया).  . मैं – एक बार तुम मेरी गर्ल फ्रेंड बनके देखो में तूमे कैसे खुश रखता हू.
(एन सब बतो से मेरा शेर कड़क बनके खड़ा हो गया था लेकिन जीन्स पहने से उसे शायद देखा नही ). कुछ देर आम बात करने के बाद में आपने घर गया.
उस रात दीपिका के बारे में सोच कर दो बार मास्टरबेट किया.
कुछ दिन बाद 14 फ़रवरी के वॅलिंटाइन गिफ्ट के तौर पर एक लाल गुलाब और एक छोटा हार्ट लिए जिस पर मेरा और दीपिका का नाम बुना गया था.
फ़रवरी 13 को जब मैं उससे मिला तो दीपिका ने मूज़े छेड़ने की लिया कहा की कल तो तुम आपनी कॉलेज की गर्ल्स में बिज़ी रहोगे,तो मैने भी उसे छेड़ने की लिए हा कह दिया .
मेरी इस बात को सुन कर दीपिका बुरी तरह से झांप गहि.
वह बहुत उदास लग रही थी जब मैं आपने घर के लिए निकला.
मैने उसे गिफ्ट के बारे कुछ नही कहा और उसे 14त फेब को सर्प्राइज़ देने मैं दीपिका के घर दोपहर को चला गया जब उसके बच्चे स्कूल में और हज़्बेंड ऑफीस में आम तोर पर रहते थे.
जब मेरे घर में सब सो गाहे ,तब मैने उसके घर की बेल बजाई.
दीपिका ने जब डोर खोला और मूज़े देखा तो उसे विश्वास ही नही हुवा.
मैं तो उसे देखता ही रह गया.
उसने सफेद सलवार कमीज़ पहनी हुवी थी जिस में बहूत बारीक एमब्राय्डरी बने थे.
वो मूज़े किसी पारी से कम नही लगी.
जैसे हमेशा से है घर में वो दुपट्टा नही लेती थी,वैसे ही आज भी उसने नही लिया था.
मैने अंदर आके डोर बंद करके मैने बात छेड़ी.
मैं – आप आँख बंद करके हाथ आगे बदाओ.
दीपिका – (स्माइल के साथ) क्यूँ?क्या करने वाले हो मेरी आँख बंद करके?. मैं – पहले आप आँख बंद करो मुज पर विश्वास करके.
मैं – आपको मैं कुछ नुकसान नही पहुचौँगा यह मेरा वाडा है आपसे.
दीपिका ने आँख बंद करने के बाद आपना हाथ आगे बदाया .
मैने लाल हार्ट जिस में मेरा और उसका नाम बुना था उसे आपने जेब से निकलके दीपिका के हाथ में रख दिया और गुलाब को भी उसे दिया.
उसने आँख कोल कर गिफ्ट को देखा और एक बड़ी मुस्कान के साथ मेरा हाथ पकड़ के मूज़े आपने बेडरूम लेजके बेड पे बिताया और दो कॉफी बनके तोड़े देर में ले आई और बोली-. दीपिका – शुक्रिया इतना स्पेशल फील करने के लिए.
मैं – आपनी गर्ल फ्रेंड को गिफ्ट देने के लिए शुक्रिया क्यू?. दीपिका – मैने अभी तक तुमरि गर्ल फ्रेंड बनने के लिए हा नही कहा.
मैं – वैसे तो ना भी नही काया है.
दीपिका – हा,उस दिन हा नही कहा पर आच हा करती हो पर यह बात हम दोनो के बीच में रहनी चाहिए.
मैं – टिक है डियर,अब मेरा गिफ्ट कब डोगी मूज़े? दीपिका – अब मेरे पास तूमे देने के लिए कुछ नही है,सॉरी फ्रेंड.
मैं – इट इस ओक डियर,पर क्या मैं तूमे डार्लिंग कह सकता हू जब हम अकेले हो तो? दीपिका – टिक है पर द्यान रकना की सिर्फ़ अकेले मैं,ओके? मैं – हा डार्लिंग ओके .
कुछ दिन ऐसे ही बीते और इस बीच हम ज़्यादा नस्दीक़ हो गये.
कुछ बार तो इनडाइरेक्ट यानी डबल मीनिंग में बात भी होती रही.
यह सब मेरे दीपिका को छोड़ने करने का कवाब बहूत जल्दी पूरा होता दिखा.
पर इस बीच कुछ ऐसा हुवा जिससे मेरी जिंदगी बदल दी.

स्रोत:इंटरनेट