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Gunjan Ki Ma Ki Kahani Landlord Sex Story 2

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जय अपनी लुंगी पहने शायद शराब पी रहा था। उसका यह रूप भी मेरे सामने आने लगा था। अपना लण्ड मसलते हुये वो धीरे धीरे शराब पी रहा था। मुझे लगा कि अब वो मुठ्ठ मारेगा।. “उसे नींद की गोली दे दी है… गहरी नींद में सो गई है वो !”. मुझे उसके कमरे से मम्मी की आवाज आई। वो अभी तो मुझे नजर नहीं आ रही थी।. “आण्टी ! बस मेरी एक बात मान जाईये… गुंजन को एक बार चुदवा दीजिये !”. मेरा दिल धक से रह गया। गुंजन यानि कि मुझे… ईईईई ईईई… मजा आ गया… ये साला तो मुझे चोदने की बात कर रहा है। मेरी तो खुशी से बांछें खिल गई। अब साले को देखना… कहाँ जायेगा बच कर. बच्चू?. तभी मम्मी सामने आ गई। वो बस एक ऊपर तक तौलिया लपेटे हुई थी। शायद स्नान करके ऊपर से बस यूं ही तौलिया लपेट लिया था।. “अरे ! मम्मी ऐसी दशा में..?” “गुंजन को चोदना है तो खुद कोशिश करो… मुझे कैसे पटाया था याद है ना? उसे भी पटा लो…”. “उईईईईई… राम… मैं तो यारां ! पटी पटाई हूँ… एक बार कोशिश तो कर मेरे राजा… !!!”. मेरा दिल बल्लियों उछलने लगा था- अरे हराम जादे मुझसे कहा क्यों नहीं? इसमें मम्मी क्या कर लेगी।. तभी मेरी धड़कन तेज हो गई। जय ने मम्मी के तौलिया के नीचे से मम्मी की गाण्ड को दबा दिया। मम्मी ने अपनी टांग कुर्सी पर रख दी… ओह्ह्ह तो जनाब ने मम्मी की गाण्ड में अंगुली ही घुसेड़ दी है।. वो अपनी अंगुली गाण्ड में घुमाने लगा… मम्मी भी अपनी गाण्ड घुमा घुमा कर आनन्द लेने लगी। तभी मम्मी का तौलिया उनके शरीर से खिसक कर नीचे फ़र्श पर आ गिरा।. मम्मी का तराशा हुआ जिस्म… गोरा बदन… ट्यूब लाईट में जैसे चांदी की तरह चमक उठा। उनकी ताजी चूत की फ़ांकें… सच में किसी धारदार हथियार से कम नहीं थी। कैसी सुन्दर सी दरार थी। चिकनी शेव की. हुई चूत। उफ़्फ़्फ़ ! मम्मी… आप भी ना… अभी किसी घातक बम से कम नहीं हो।. मम्मी उससे घूम घूम कर बातें कर रही थी। कभी तो वो मेरी नजरों के सामने आ जाती और कभी आँखों से ओझल हो जाती थी।. तभी जय ने मम्मी का हाथ पकड़ कर अपने सामने सामने खींच लिया और उनके सुडौल चूतड़ों को दबाने लगा।. उफ़्फ़ ! मम्मी ने गजब कर दिया… उन्होंने जय की लुंगी झटके उतार दी…. “क्यूं राजा ! मेरे सामने शर्म आ रही है क्या? अपने लण्ड को क्यूं छुपा रखा है?”. जय ने मुस्करा कर मम्मी के दुद्दू अपने मुख में समा लिये और पुच्च पुच्च करके चूसने लगा। मम्मी धीरे से नीचे बैठ गई और उसका लण्ड सहलाने लगी। मुझे बहुत ही शरम आने लगी… मम्मी यह क्या करने लगी. है… अरे… रे…रे ना ना मम्मी… ये नहीं करो… उफ़्फ़ मम्मी भी क्या करती है… उसका लण्ड अपने मुख में लेकर उसे चूसने लगी। मैंने तो एक बार अपनी आँखें ही बन्द कर ली। जय कभी तो. मम्मी के गाल चूमता और कभी उनके बालों को सहलाता।. “जोर से चूसो आण्टी… उफ़्फ़ बहुत मजा आ रहा है… और कस कर जरा…”. अब मम्मी जोर जोर से पुच्च की आवाजें निकालने लग गई थी। जय की तड़प साफ़ नजर आने लगी थी। फिर मम्मी ने दूसरा गजब कर डाला। मम्मी उसकी कुर्सी के सामने खड़ी हो गई। अपनी एक टांग उसके दायें और एक टांग जय के बायें. ओर डाल दी। उसका सख्त लण्ड सीधा खड़ा हुआ था। दोनों प्यार से एक दूसरे को निहार रहे थे। मम्मी उसके तने हुये लण्ड पर बैठने ही वाली थी… मेरे दिल से एक आह निकल पड़ी। मम्मी प्लीज ये मत करो… प्लीज. नहीं ना…. पर मम्मी तो बेशर्मी से उसके लण्ड पर बैठ गई।. मम्मी घुस जायेगा ना… ओह्हो समझती ही नहीं है !!!. पर मैं उसके लण्ड को कीले तरह घुसते देखती ही रह गई… कैसा चीरता हुआ मम्मी की चूत में घुसता ही जा रहा था।. फिर मम्मी के मुख से एक आनन्द भरी चीख निकल गई।. उफ़्फ़्फ़ ! कहा था ना घुस जायेगा। पर ये क्या? मम्मी तो जय से जोर से अपनी चूत का पूरा जोर लगा कर उससे लिपट गई और और अपनी चूत में लण्ड घुसा कर ऊपर नीचे हिलने लगी।. अह्ह्ह ! वो चुद रही थी… सामने से जय मम्मी की गोल गोल कठोर चूचियाँ मसल मसल कर दबा रहा था। उसका लण्ड बाहर आता हुआ और फिर सररर करके अन्दर घुसता हुआ मेरे दिल को भी चीरने लगा था। मेरी चूत का पानी. निकल कर मेरी टांगों पर बहने लगा था।. मम्मी तो जय से जोर से अपनी चूत का पूरा जोर लगा कर उससे लिपट गई और और अपनी चूत में लण्ड घुसा कर ऊपर नीचे हिलने लगी।. अह्ह्ह ! वो चुद रही थी… सामने से जय मम्मी की गोल गोल कठोर चूचियाँ मसल मसल कर दबा रहा था। उसका लण्ड बाहर आता हुआ और फिर सररर करके अन्दर घुसता हुआ मेरे दिल को भी चीरने लगा था। मेरी चूत का पानी. निकल कर मेरी टांगों पर बहने लगा था।. मम्मी को चुदने में बिलकुल शरम नहीं आ रही थी… शायद अपनी जवानी में उन्होंने कईयों से लण्ड खाये होंगे… अरे भई ! एक तो मैं भी खा चुकी थी ना ! और अब मुझे जय से भी चुदने की लग रही थी।. तभी मम्मी उठी और मेज पर अपनी कोहनियाँ टिका कर खड़ी हो गई। उनके सुडौल चूतड़ उभर कर इतराने लगे थे। पहले तो मैं समझी ही नहीं थी… पर देखा तो लगा छी: छी: मम्मी कितनी गन्दी है।. जय ने मम्मी की गाण्ड खोल कर खूब चाटी मम्मी मस्ती से सिसकारियाँ लेने लगी थी। तब जय का सुपाड़ा मम्मी की गाण्ड से चिपक गया।. जाने मम्मी क्या कर रही हैं? अब क्या गाण्ड में लण्ड घुसवायेंगी…. अरे हाँ… वो यही तो कर रही है…. जय का कड़का कड़क लण्ड ने मम्मी की गाण्ड का छल्ला चीर दिया और अन्दर घुस गया। मैं तो देख कर ही हिल गई। मम्मी का तो जाने क्या हाल हुआ होगा… इतने छोटे से छल्ले में लण्ड कैसे घुसा होगा… मैंने तो. अपनी आँखें ही बन्द कर ली। जरूर मम्मी की तो बैण्ड बज बज गई होगी।. पर जब मैंने फिर से देखा तो मेरी आँखें फ़टी रह गई। जय का लण्ड मम्मी की गाण्ड में फ़काफ़क चल रहा था। मम्मी खुशी के मारे आहें भर रही थी… जाने क्या जादू है?. मम्मी ने तो आज शरम की सारी हदें तोड़ दी… कैसे बेहरम हो कर चुदा रही थी। मेरा तो बुरा हाल होने लगा था। चूत बुरी तरह से लण्ड खाने को लपलपा रही थी… मेरा तन बदन आग होने लगा था… क्या करती।. बरबस ही मेरे कदम कहीं ओर खिंचने लगे।. मैं वासना की आग में जलने लगी थी। भला बुरा अब कुछ नहीं था। जब मम्मी ही इतनी बेशरम है तो मुझे फिर मुझे किससे लज्जा करनी थी। मैं मम्मी के कमरे में आ गई और फिर जय वाले कमरे की ओर देखा। एक बार मैंने अपने. सीने को दबाया एक सिसकारी भरी और जय के दरवाजे की ओर चल पड़ी।. दरवाजा खुला था, मैंने दरवाजा खोल दिया। मेरी नजरों के बिलकुल सामने मम्मी अपना सर नीचे किये हुये, अपनी आँखें बन्द किये हुये बहुत तन्मयता के साथ अपनी गाण्ड मरवा रही थी… जोर जोर से आहें भर रही थी। जय ने मुझे एक बार देखा और सकपका गया। फिर उसने मेरी हालत देखी तो सब समझ गया।.
स्रोत:इंटरनेट