डार्क

Gunjan Ki Ma Ki Kahani Landlord Sex Story

🇮🇳 हिंदी
गति: 1.0x
स्थिति: तैयार
×

प्लेबैक सेटअप सहायता

यदि आप पहले से ही Chrome/Edge का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन फिर भी प्ले नहीं हो रहा है, तो अपने फ़ोन/पीसी सेटिंग्स की जाँच करें।
सुनिश्चित करें कि TTS इंजन सक्रिय है, उस भाषा का उपयोग कर रहा है जिसे आप सुनना चाहते हैं।

Android और अन्य OS उपयोगकर्ताओं के लिए

Android, Harmony, Lineage, Ubuntu Touch, Sailfish, ColorOS / FuntouchOS, hyperOS आदि के उपयोगकर्ताओं के लिए
मेनू एक्सेस: सेटिंग्स खोलें > एक्सेसिबिलिटी > टेक्स्ट-टू-स्पीच आउटपुट
यदि नहीं है, तो सेटिंग्स > ऊपर सर्च बॉक्स > "text-to-speech" या "text" दर्ज करें
फिर टेक्स्ट-टू-वॉयस या टेक्स्ट-टू-स्पीच, या ऐसा ही कुछ चुनें।
भाषा जोड़ने के लिए, गियर आइकन ⚙ पर क्लिक करें > वॉइस डेटा इंस्टॉल करें और अपनी इच्छित भाषा चुनें।

iOS उपयोगकर्ताओं के लिए

सेटिंग्स > एक्सेसिबिलिटी > स्पोकन कंटेंट पर जाएं
या सेटिंग्स > ऊपर सर्च बॉक्स > "स्पोकन कंटेंट" दर्ज करें और एंटर करें
भाषा जोड़ने के लिए वॉइस चुनें और आवाज़ चुनें

MacOS पीसी उपयोगकर्ताओं के लिए

मेनू एक्सेस: एप्पल मेनू पर क्लिक करें () > सिस्टम सेटिंग्स > एक्सेसिबिलिटी > स्पोकन कंटेंट

Windows उपयोगकर्ताओं के लिए

Windows 10 & 11
मेनू एक्सेस: स्टार्ट खोलें > सेटिंग्स > समय और भाषा > स्पीच
Windows 7 & 8
कंट्रोल पैनल > ईज़ ऑफ़ एक्सेस > स्पीच रिकग्निशन > टेक्स्ट टू स्पीच
Windows XP
स्टार्ट > कंट्रोल पैनल > साउंड, स्पीच और ऑडियो डिवाइस > स्पीच
Windows 2000 & ME
स्टार्ट > सेटिंग्स > कंट्रोल पैनल > स्पीच
अन्य प्रकार के पीसी उपयोगकर्ताओं के लिए, जैसे लिनक्स, क्रोमओएस, फ्रीबीएसडी, आदि।
कृपया Google, Bing आदि जैसे सर्च इंजन में टेक्स्ट-टू-स्पीच को सक्षम करने के लिए सेटिंग्स खोजें

नोट वर्तमान में, यह पृष्ठ आपके डिवाइस के इंजन के अनुसार काम करता है।
इसलिए उत्पन्न होने वाली आवाज़ आपके डिवाइस के TTS इंजन का अनुसरण करती है।

मेरा नाम गुंजन है। मेरी विधवा माँ ने हमारे घर में एक किरायेदार रखा। लड़का अच्छा था पर एक बाद थी, उसने हम दोनों को मौका देखते ही छोड़ डाला। एक कामुक landlord sex story आपके लिए.. उस समय मैं और मम्मी उस घर में अकेले ही रह गये थे। बड़ा घर था। पापा की असामयिक मृत्यु के कारण मम्मी को उनकी जगह रेल्वे में नौकरी मिल गई थी। मम्मी की आवाज सुरीली थी सो उन्हें मुख्य स्टेशन पर अनांउन्सर का. काम मिल गया था।. यूँ तो अधिकतर सभी कुछ रेकोर्डेड होता था पर कुछ सूचनायें उन्हें बोल कर भी देनी होती थी। मम्मी की उमर अभी कोई अड़तीस वर्ष की थी। अपने आप को उन्होंने बहुत संवार कर रखा था। उनका दुबला पतला बदन साड़ी में खूब. जंचता था। रेलवे वाले अभी भी उन पर लाईन मारा करते थे। शायद मम्मी को उसमें मजा भी आता था।. मैं भी मम्मी की तरह सुन्दर हूँ… गोरी हूँ, तीखे नयन नक्श वाली। कॉलेज में मेरे कई आशिक थे, पर मैंने कभी भी आँख उठा कर उन्हें नहीं देखा था। हाँ, वैसे मैंने एक आशिक संदीप पाल रखा था। वो मेरा सारा कार्य कर देता था। घर के काम… बाहर के काम… कॉलेज के काम और कभी कभार मम्मी के काम भी कर दिया करता था। वैसे मैं उसे भैया कहकर बुलाती थी… पर मम्मी को पता था कि यह तो सिर्फ़ दिखावे के लिये. है।. फिर एक बार मम्मी की अनुपस्थिति में उसने मुझे जबरदस्ती चोद भी दिया था। मेरा कुंवारापन नष्ट कर दिया था।… बस उसके बाद से ही मेरी उससे अनबन हो गई थी। मैंने उससे दोस्ती तोड़ दी थी। यूं तो उसने मुझे. मनाने की बहुत कोशिश थी पर उसके लिये बस मन में एक ग्लानि… एक नफ़रत सी भर गई थी। उस समय मैं कॉलेज में नई नई आई ही थी।. घर तो अधिकतर खाली ही पड़ा रहता था। मम्मी की कभी कभी रात की ड्यूटी भी लग जाती थी… वैसे तो उन्हें दिन को ही ड्यूटी करनी पड़ती थी पर इमरजेन्सी में तो जाना ही पड़ता था। मम्मी यह जान कर अब परेशान रहने. लगी थी कि मुझे रात को अकेली जान कर कोई चोद ना दे… या चोरी ना हो जाये। हम दोनों ने तय किया कि किसी छात्र को एक कमरा किराये पर दे दिया जाये तो कुछ सुरक्षा मिल सकती है। हम किसी पतिवार को नहीं देना. चाहते थे क्योंकि फिर वो घर पर कब्जा करने की कोशिश करने लगते थे। यहाँ तो यह आम सी बात थी। हमें जल्दी ही एक मासूम सा लड़का… पढ़ने में होशियार… मेरे ही कॉलेज का एक लड़का मिल गया।. मम्मी ने जब मुझे बताया तो मुझे भला क्या आपत्ति हो सकती थी। वो मेरा सीनियर भी था। जयेश खंडेलवाल था उसका नाम, जिसे हम जय कह कर बुलाते थे। कुछ ही दिनों में उसकी और मेरी अच्छी मित्रता भी हो गई थी। हम दोनों आपस में खूब बतियाते थे। मम्मी तो बहुत ही खुश थी। हम सभी साथ साथ टीवी भी देखते थे। भोजन भी अधिकतर वो हमारे साथ ही करता था। फिर वो एक. दिन पेईंग गेस्ट भी बन गया। पांच छ: माह गुजर चुके थे। उसका कमरा मेरे कमरे से लगा हुआ था दोनों के बीच में खिड़की थी जो बन्द रहती थी। कांच टूटे फ़ूटे होने के कारण मैंने एक परदा लगा रखा था। वो अपने कमरे में. रात को अक्सर अपने कम्प्यूटर पर व्यस्त रहता था। मुझे जय से इतने दिनों में एक लगाव सा हो गया था। मैं अब उस पर नजर रखने लगी थी कि वो क्या क्या करता है?. जवान वो था… जवान मैं भी थी, विपरीत सेक्स का आकर्षण भी था। एक बार खिड़की के छेद से… हालांकि बहुत मुश्किल से दिखता था… पर कुछ तो दिख ही जाता था… मैंने कुछ ऐसा देख लिया कि मेरे दिल में खलबली मच गई। मेरा दिल धड़क उठा था। आज उसके कम्प्यूटर की जगह उसने बदली दी थी, एकदम सामने आ गया था वो। वो रात को ब्ल्यू फ़िल्म देखा करता था। आज उसकी पोल भी खुल गई थी। मुझे भी उसकी लगाई हुई अब तो ब्ल्यू फ़िल्म साफ़ साफ़ दिख रही थी। मुझे अब स्टूल लगा कर नहीं झांकना पड़ रहा था। वो कान में इयरफ़ोन लगा कर फ़िल्म देख रहा था। फिर चूंकि उसकी पीठ मेरी तरफ़ थी इसलिये पता नहीं चला कि वो अपने लण्ड के साथ क्या. कर रहा था पर मैं जानती थी कि साहबजादे तो मुठ्ठ मारने की तैयारी कर रहे थे।. वो जब चुदाई देख कर उबलने लग गया तो उसने अपनी पैंट उतार दी और फिर कुर्सी सरका कर नीचे बैठ गया। उसका लम्बा मोटा लण्ड तन कर बम्बू जैसा खड़ा हुआ था। उसने अपने लण्ड की चमड़ी को ऊपर खींच कर सुपारा बाहर निकाल. लिया।. इह्ह्ह्ह… चमकदार लाल सुपारा… मेरा मन डोल सा गया।. उसका लण्ड अन्जाने में मुझे अपनी चूत में घुसता जान पड़ा। पर उसकी सिसकी ने ध्यान फिर खींच लिया। उसने अपना हाथ अपने सख्त लण्ड पर जमा लिया। मेरा हृदय घायल सा हो गया… एक ठण्डी आह सी निकल गई। उफ़्फ़ !. क्या बताऊँ मैं… मैं तो बस मजबूर सी खड़ी उसका मुठ्ठ मारना देखती रही और सिसकारियाँ भरती रही। उसका उधर वीर्य छलका, मेरी चूत ने भी अपना कामरस छोड़ दिया। मैंने अपनी चूत दबा ली। मेरी पेंटी गीली हो चुकी थी। मैंने जल्दी से परदा खींच दिया और अपनी चड्डी बदलने लगी।. उस रात को मुझे नींद भी नहीं आई, बस करवटें बदलती रही… और आहें भरते रही… रात को फिर मैंने एक बार पलंग से नीचे उतर कर मुठ्ठ मार ली। पानी निकालकर मुझे कुछ राहत सी मिली और मुझे नींद भी आ गई। मेरी नजरें अब जय में कुछ ओर ही देख रही थी, उसके जिस्म को टटोल रही थी। मेरी नजरें अब जय में सेक्स ढूंढने लगी थी। मेरी जवानी अब बल खाने लगी थी, लण्ड खाने को जी चाहने लगा था। मेरी यह सोच चूत पर असर डाल रही थी, वो बात बात पर गीली हो जाती थी। कॉलेज में भी मेरा मन नहीं लगता था, घर में भी गुमसुम सी रहने लगी। कैसे जय से प्रणय निवेदन किया जाये… बाबा रे ! मर जाऊँगी मैं तो… भला क्या कहूँगी उसे… “क्या हुआ बेटी… कोई परेशानी है क्या?”. “हाँ… नहीं तो… वो कॉलेज में कल टेस्ट है…!”. “तो तैयारी नहीं है…?”. “नहीं मां… सर दुख रहा है… कैसे पढूँगी?”. “आज तो सो जा… यह सर दर्द की गोली खा लेना… कल की कल देखना।”. “अच्छा मां…”. मैंने गोली को देखा… मुझे एक झटका सा लगा… वो तो नींद गोली थी। मम्मी ने कई बार यह गोली मुझे दी थी… पर क्यों?. मेटासिन काफ़ी थी… पर मुझे सर दर्द तो था नहीं, सो मैंने उसे रख लिया। “जरूर खा लेना और ठीक से सो जाना… सर दर्द दूर हो जायेगा…”. मुझे आश्चर्य हुआ, मैंने कमरे में जाकर ठीक से देखा… वो नींद की गोली ही थी। मैंने उस गोली को एक तरफ़ रख दिया और आँखें बन्द करके लेट गई। दिल में जय का लण्ड मेरे शरीर में गुदगुदी मचा रहा था। पता नहीं कितनी देर हो गई। रात को मम्मी मेरे कमरे में आई और मुझे ठीक से सुला दिया और चादर ओढ़ा कर लाईट बन्द करके कमरे बन्द करके चली गई। मैंने धीरे से चादर हटा दी और उछल कर खिड़की पर आ गई।.
स्रोत:इंटरनेट