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Hawas Ki Pujaran Hawas Ki Kahani 2

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घर पे कह दिया कि तबीयत नहीं अछी पर असल में दर्द के मारे मेरा हाल बुरा हो रहा था.
मेरे मूह और जबड़े में दर्द तो था लेकिन सारे वक़्त मेरे दिमाग़ में सिर्फ़ डिसूज़ा का मोटा लंड था.
घर के नौकर को मैने बाहर भेज दिया और अकेली घर में नंगी हो कर बिस्तर पर अपनी चूत से खेलती रही.
मैं सोचती रहती कि अगर डिसूज़ा का कहना मानकर में टाय्लेट में उससे फिर से मिली होती तो वो मेरे साथ क्या क्या करता.
यह सोच सोचते सोचते में झार जाती.
झरने के वक़्त में ज़ॉरो से चिल्ला.. ऐसे ही ना जाने कितनी बार में झार गयी.
मेरे दिमाग़ में अब सिर्फ़ चुदाई थी.
मेरे मूह और जबड़े का दर्द तीन दिन तक नही गया.
आख़िर किसी को शक ना हो इसलिए में डॉक्टर के पास चली गयी.
डॉक्टर से कहा कि मेरे पैरों में मोच हैं और दर्द कम करने की दवाई ले ली.
आख़िर मुझे थोड़ा अछा लगने लगा.
पाँच दिन बाद मेरा दर्द चला गया और में स्कूल जाने के लिए तैयार हो गयी.
उन पाँच दिनो मैने सिर्फ़ लंड के बारे मैं सोचा और ना जाने कितनी बार झार गयी.
अब सेक्स की पुजारन बन गई थी में जब स्कूल में अपनी क्लास में पहुचि तो पता चला कि मेरी बगल की सीट रोहित ने ले ली थी.
क्लास शुरू होते ही उसने मुझ से कहा ‘सुना हैं तुम्हारी तबीयत खराब थी ? अभी ठीक हो ?’ ‘हां अभी ठीक हूँ’. ‘तुम्हे पता हैं मैने तुम्हे टाय्लेट मे देखा था’. ‘हां पता है’. ‘उस मदरचोड़ ने तुम्हारे साथ बहुत गंदा सलूक किया’ ऐसा कह कर रोहित मेरे और नज़दीक आ गया.
हम क्लास की पिछली वाली सीट पे बैठे थे इस लिए कोई हमे देख नही सकता था.
‘आज लंच टाइम पे स्पोर्ट्स टीचर ने तुम्हे अपने ऑफीस में बुलाया है’.
रोहित के यह कहने से मेरे मन में लड्डू फूटने लगे.
टीचर का वो मोटा काला लंड मेरे दिमाग़ में आ गया.
रोहित ने अब मेरा हाथ ले के अपने लंड पे रख दिया.
मैं पॅंट के उपर उपर से उसे सहलाने लगी.
उसने अपनी ज़िप खोलदी और अपना लंड बाहर निकाला.
उसका लंड लगभग 4 इंच का होगा और उसी की तरह पतला था.
मैने उसके लंड को पकड़ लिया और उससे धीरे से हिलाने लगी.
लंड हिलाते दो मिनिट भी नही हुए थे कि रोहित अपना हाथ मेरे हाथ पे रख ज़ोर से लंड को हिलाने लगा और झार गया.
‘टीचर ने कहा हैं कि लंच टाइम तक मैं तुम्हारा अच्छा ख़याल रखू’ यह कह के रोहित ने अपना हाथ मेरे स्कर्ट के अंदर डाल दिया और मेरी जाँघ.
को सहलाते सहलाते मेरी चूत तक पहुच गया.
पॅंटी के उपर उपर से वो मेरी चूत को सहलाने लगा.
मुझे मज़ा आ रहा था.
लंच टाइम होने तक रोहित ने मेरी चूत को सहला सहला कर मुझे पागल सा कर दिया था.
मुझे अब टीचर के लंड की भूक थी.
मेरे पूरे बदन में अब सेक्स चढ़ गया था.
लंच होने पे रोहित टीचर के ऑफीस में चला गया और मुझसे पाँच मिनिट बाद आने को कहा.
पाँच मिनिट में मैने टीचर के ऑफीस में प्रवेश किया.
अंदर का नज़ारा देख में दंग रह गयी….. टीचर अपनी ऑफीस में डेस्क के पीछे बैठा था.
उसके साइड में रोहित पूरा नंगा होकर अपने घुटनो तले ज़मीन पे बैठा था.
उसके गले में कुत्तो को पहनाने वाला पट्टा था.
‘आओ पायल.
दरवाज़ा ज़रा बंद कर दो.
’ मेने दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया.
‘मेरा नाम.
वेंकट हैं.
मैं तुम्हारी क्लास को नही पढ़ाता हूँ.
’ उसने मुझे रोहित को देखते देखा और मुस्कुरा के कहा ‘और यह मेरा पालतू कुत्ता हैं.
अगर तुम्हे अछा लगे तो तुम इससे खेल सकती हो’ मैने कुछ नहीं कहा.
मुझे बहुत शरम आ रही थी.
‘बैठो पायल.
अपने जूते उतार दो’ मैने जूते उतार दिए और रूम के दूसरे कोने में जो कुर्सी थी उस पे बैठ गयी.
मेरे बैठते ही रोहित अपने हाथ और घुटनो के बल मेरे पास आ गया और मेरे पैर चाटने लगा.
मुझे थोड़ी गुदगुदी हो रही थी पर मज़ा भी आ रहा था.
‘लगता हैं तुम मेरे कुत्ते को बहुत अछी लग गयी हो’ टीचर ने हसके कहा ‘पर तुम हो ही ऐसी’.
रोहित ने अब मेरे पैर की उंगलियाँ अपने मूह में लेके चूसना शुरू कर दिया था.
मुझे अच्छा लग रहा था और मेरी चूत में गर्मी बढ़ रही थी.
तब टीचर ने कहा ‘कुछ दिन पहले में जेंट्स टाय्लेट में अपने कुत्ते को ट्रैनिंग दे रहा था तो मैने देखा कि तुम भी वाहा थी.
तुम भी शायद कुछ ट्रैनिंग ही ले रही थी’ टीचर मे मुस्कुराते हुए कहा.
‘क्या तुम्हे पता हैं कि हम तुम्हे देख रहे थे’.
मेने अपना सिर हां में हिलाया.
‘क्या तुमने मुझे कुत्ते को ट्रैनिंग देते हुए देखा’.
मैने फिर से हां में सिर हिलाया.
‘मज़ा आया हमे देख के ?’. ‘जी हां’.
टीचर ने अपना एक हाथ डेस्क के पीछे ले लिया.
मुझे पता था कि वो ज़रूर अपने लंड से खेल रहा होगा.
रोहित अब ज़ोर ज़ोर से मेरे पैर चाटते चाटते मेरे घुटनो तक आ गया था.
उसकी जीब के एहसास से मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.
‘क्या तुमने मेरा लंड देखा’. ‘जी’. ‘अछा लगा तुम्हे’. मेने कुछ नहीं कहा.
‘शरमाओ मत पायल.
बोलो.
क्या तुम्हे अच्छा लगा’ मैने कुछ कहे बिना अपना सर हां में हिलाया.
‘फिर से देखो गी’ यह कह के टीचर खड़ा हो गया.
खड़े होते ही मुझे पता चला कि उसने शर्ट के नीचे कुछ नही पहना था.
उसका काला मोटा लंड कड़क हो के शान से खड़ा था.
लंड को देख मेरे बदन में एक हुलचूल सी हो गयी.
मैं उस काले लंड को छूना चाहती थी.
पर टीचर वही पर खड़ा रहा.
उसने अपना शर्ट के बटन खोलना शुरू किया.
रोहित यहाँ अब मेरी जांघे चाट रहा था.
मैं बैचैन हो रही थी और मैने उसका सर उसके बालों से पकड़ और उपर कर लिया.
अब उसका सर पूरा मेरे स्कर्ट के नीचे था और वो मेरी चूत मेरी पॅंटी के उपर से चाट रहा था.
मुझे अब ऐसी बेशर्मी करने मे कोई खिचक नही थी.
मेरी हवस की आग भड़क उठी थी.
में अपने दोनो हाथो से उसका सर नीचे दबा रही थी और टीचर के लंड को देख रही थी.
टीचर अब पूरा नंगा था.
उसका काला और बालों से भरा मोटा बदन दिखने में एकदम ही गंदा लग रहा था.
पर मेरे शरीर की भूक इतनी थी कि मुझे सिर्फ़ वो लंड दिखाई दे रहा था.
मैं अब रोहित का सर नीचे और दबा रही थी और साथ ही साथ अपनी गांद उठा उठा के उसके चेहरे पे अपनी चूत रगड़ रही थी.
टीचर सामने का नज़ारा देख कर खुश हो गया.
उसने मन में ठान लिया ‘कुछ भी हो जाए आज इसको चोदे बिना जाने नहीं दूँगा’.
उसने इतनी चिकनी लड़की नही देखी थी और वो भी इतनी जवान.
में उसके सामने रांड़ की तरह गांद उपर करके चूत चटवा रही थी.
‘बहुत अच्छे पायल.
यह मेरा कुत्ता बहुत वफ़ादार है.
तुम जितना चाहो खेल सकती हो’ टीचर ने कहा.
दस मिनिट तक में वैसे ही ज़ॉरो से अपनी चूत रोहित के मूह पर रगड़ती रही और पूरे ज़ोर से रोहित का सर नीचे दबाती रही.
में झर ने ही वाली थी कि टीचर ने रोहित से कहा.
‘बहुत हो गया कुत्ते, अपना सर उठा’.
पर मुझे और चूत चटवानी थी मेने रोहित के बॉल पकड़ उससे रोकने की कोशिश की पर वो मेरे चंगुल से निकल के साइड पे हो गया.

स्रोत:इंटरनेट