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Hawas Ki Pujaran Public Sex Story 2

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इतना बड़ा लंड मूह में लेकर उसका हाल बहाल हो गया था.
उसने कहा ‘बस अब और नही होगा टीचर जी’.
टीचर ने कहा ‘साले मदारचोड़ चुप चाप मेरा लंड चूस वरना तुझे फैल कर दूँगा’.
लड़के ने उपर देखते कहा ‘नही टीचर मुते फैल कर दोगे तो ….
’.
लड़के की बात पूरी होने से पहले ही टीचर ने अपना लंड उसके मूह मे फिरसे डाल दिया.
टीचर ने फिर से उसके सर को अपने हाथो से पकड़ा और अपना लंड उसके मूह में अंदर बाहर करने लगा.
मुझे रोहित का खड़ा लंड देख कर लग रहा था कि शायद लड़के को भी मज़ा आ रहा था.
मुझे ये सारा नज़ारा देख कर बहुत मज़ा आ रहा था.
मैने आज तक किसी भी आदमी का लंड नही देखा था.
और अब मेरे सामने दो लंड थे.
मेरे बदन में एक गर्मी सी छा गई थी.
हैरत की बात तो मुझे ये लगी की रोहित से ज़्यादा मुझे वो काले टीचर का बड़ा लंड अच्छा लग रहा था.
मेरी नज़र वो मोटे लंड से हट नही पा रही थी.
में मन ही मन में सोच रही थी कि काश मुझे वो काला लंड चूसने को मिल जाए.
में वाहा टाय्लेट में कुत्ति की तरह ज़मीन पर बैठी थी.
मेरी पॅंटी पूरी गीली हो गयी थी.
मैने अपनी स्कर्ट उपर कर ली और पॅंटी उतार दी.
मेने एक हाथ से अपने चूत को सहलाना शुरू कर दिया और दूसरे हाथ की उंगली को अपने गांद के छेद पे फिराने लगी.
मुझे ये बिलकूल खबर नही थी कि जिस तरह में बाजू की टाय्लेट में झाक रही थी वैसे हे तीसरी टाय्लेट के छेद से मुझे कोई झाक रहा था.
जिस आदमी ने मूत्रालय में आते ही मुझे आपना लंड दिखाया था वो मेरे पीछे मेरे बाजू के टाय्लेट में घुस गया था.
उसे पता था की टाय्लेट के बीच में छेद हैं.
अब उसे जो नज़ारा दिख रहा था वो उससे पागल हो रहा था.
उसके सामने में घूम के पॅंटी निकाल के बैठी थी, मेरी चिकनी, गोरी गांद और चूत उसे साफ दिखाई दे रही थी.
वो देख रहा था कि में अपनी चूत में दो उंगली डाल के ज़ोर से अंदर बाहर कर रही थी और अपनी गांद के छेद पे उंगली घुमा रही थी.
उसका लंड खड़ा हो गया और वो उसे सहलाने लगा.
यहाँ टीचर और तेज़ी से रोहित का मूह चोद रहा था.
रोहित भी अपना लंड ज़ोर से हिला रहा था.
दो मिनिट मे टीचर ज़ोर से आवाज़ करने लगा ‘आआआआआअहह, आआआआआआः’ और पागल की तरह बहुत तेज़ी से लड़के के मूह में आपना लंड अंदर बाहर करने लगा.
रोहित का बुरा हाल था.
मैं अपने आप को झरने के करीब पा रही थी और ज़ॉरो से अपनी उंगलियाँ चूत के अंदर बाहर करने लगी.
टीचर झड़ने के बहुत करीब था.
‘साले .
के आआआअहह… आआआआआआः पी जा मेरा पानी आआअहह’. टीचर ने यह कहते अपना सारा पानी लड़के के मूह मे निकालना शुरू कर दिया.
टीचर के साथ में भी अब झार रही थी.
लड़के के लंड से भी फुवरे के जैसे पानी निकल रहा था.
टीचर के लंड से इतना विर्य निकला के लड़का पूरा पी नही पाया और कुछ पानी उसके मूह के साइड से निकल कर नीचे बहने लगा.
यह देख मेरा झरना और तीव्र हो गया.
टीचर का झार ना ख़तम हो गया था पर उसने थोड़ी और देर तक अपना पूरा लंड लड़के के मूह में ही रखा.
जब उसका लंड पूरा बैठ गया तब उसने उसको निकाला.
उसका बैठा हुआ काला लंड भी बहुत बड़ा था और वीर्य और रोहित की थूक से चमक रहा था.
लड़का नीचे देख कर ज़ोर ज़ोर से साँसे ले रहा था और खास रहा था.
टीचर के काले लंड ने उसकी हालत बूरी कर दी थी.
टीचर के मोटे लंड पे काफ़ी सफेद वीर्य अभी भी चिपका हुआ था.
टीचर ने रोहित से कहा ‘मेरा लंड कौन साफ करेगा ? तेरा बाप.
चल इसको ठीक से चाट कर साफ कर’.
लड़का उस काले लंड को पकड़ अपनी जीब निकाल के चाटने लगा और पूरा वीर्य लंड से साफ कर दिया.
टीचर ने अब उसका हाथ हटा के पॅंट पहेनना शुरू किया और कहा ‘कल इसी वक़्त यहाँ मिलना.
कल में तेरी गांद मारूँगा’ यह कह कर टीचर बाहर चला गया.
लड़का भी अपने कपड़े पहन के वहाँ से चला गया.
वो दोनो चले गये थे पर मेरी बदन की आग अभी भी भड़की हुई थी.
में टाय्लेट के ज़मीन पे लेट गयी.
मेने अपने टॉप के उपर से ही एक हाथ से अपने बूब्स को दबा दबा कर उंगलियों से निपल को खीच रही थी.
दूसरे हाथ से में अपनी चूत में दो उंगलियों डाल कर अंदर बाहर कर रही थी.
मेरी मूह से सिसकियारी निकल रही थी ‘उम्म्म्ममम….
आआहह’.
वो काला लंड मेरे दिल और दिमाग़ पर छा गया था.
तब अचानक मैने आवाज़ सुनी ‘मज़ा आ रहा है बेबी ?’.
मेने आँख उठा कर देखा तो मुझे पता चला कि टाय्लेट के दूसरी साइड पे भी कई छेद थे और वैसे ही एक छेद से मुझे उस आदमी की आँखे दिखाई दी.
में एक सेकेंड के लिए डर गयी खड़ी हो गयी.
‘डरो मत बेबी, तुम इतनी गरम हो गयी हो मेरे पास तुम्हे ठंडा करने के लिए कुछ हैं’ ऐसा कह कर उसने अपना लंड एक छेद में डाल दिया.
उसका लंड भी वो काले टीचर की तरह मोटा और लंबा था.
‘यह लो बेबी तुम अपनी चूत के साथ साथ इस से भी खेलो.
तुम्हे और मज़ा आएगा’.
में तो वो लंड को देख के पागल सी हो गयी.
मेरा सिर चकराना शुरू हो गया.
मेरा सारा बदन एकदम गरम सा हो गया था.
में लंड को छूना चाहती थी पर डर भी बहुत लग रहा था.
मेरा दिमाग़ मुझसे कह रहा था कि में वहाँ से भाग कर घर चली जाउ पर मेरी नज़र उस लंड से नही हट रही थी.
मैने अपने आप से कहा कि ‘ऐसा तो नही कि मैं किसी लंड से चुदवा रही हूँ.
इस लंड से थोड़ा खेल लूँ फिर भी मैं कुँवारी ही रहूंगी’.
एक बड़े लंड को अपने इतने करीब पा कर में अपनी मा की सलाह को बिल्कुल भूल गयी और धीरे से अपना हाथ उस लंड की तरफ बढ़ाने लगी.
मुझे तब यह नही पता था कि जिस गहरी खाई से मेरी मा दूर रहने को कहती थी मैं उसी में कूदने जा रही थी.
और एक बार कूदने के बाद में गिरती चली जाउन्गि.
मेरा हाथ मैने धीरे से बढ़ा कर वो लंड पे रख दिया.
वो लंड गरम था और कड़क भी और मेरे हाथो में थोड़े हल्के से झटके खा रहा था.
मेरे छूते ही उस आदमी के मूह से आवाज़ निकल गयी ‘आआआहह… क्या मुलायम हाथ है तुम्हारा बेबी.
इसे पकड़ कर थोड़ा हिलाओ’.
मुझे यह पता था कि लड़के अपने लंड को हिलाते हैं, पर यह नहीं पता था कि कैसे हिलाना चाहिए लंड को.
मैने लंड को पकड़ लिया और लंड को उपर नीचे करने लगी.
‘ऐसे नहीं करते बेबी.
हाथ को आगे पीछे करो उपर नीचे नहीं.
’ मैने हाथ आगे पीछे करना शुरू कर दिया.
हाथ पीछे करने से लंड की चमड़ी पीछे हो गयी और लंड का गुलाबी हिस्सा मुझे दिखाई दे रहा था.
मेरा जी कर रहा था कि में उसे मेरे होंठो के बीच में ले लू और अपनी जीब से उसे चाटू, मेरे मूह में पानी आ गया.
लेकिन में काफ़ी डरी हुई भी थी.
मैने हिलाना ज़ारी रखा.

स्रोत:इंटरनेट