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Hawas Ki Pujaran Randi Ki Kahani 3

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मुझे अब डिसूज़ा के ज़ोरदार धक्के में मज़ा आने लगा.
में भी अपनी गांड उछाल उछाल के उसके धक्के का जवाब देने लगी.
‘अब मज़ा आ रहा मेरी रांड़’ डिसूज़ा ने कहा.
मेने कुछ नहीं कहाँ.
मुझे गुस्सा आ रहा था कि मैं अपने आप पे काबू रख नही पा रही थी और अपने जिस्म की भूक की गुलाम हो गयी थी.
अचानक डिसूज़ा ने धक्के मारना बंद कर दिया.
मेरे मूह से ‘प्लीज़ अब मत रोको’ निकल गयी.
‘क्यूँ’. ‘क्यूंकी मुझे मज़ा आ रहा हैं’ मुझे ऐसा कहने में बहुत शरम आ रही थी.
‘क्या करने में मज़ा आ रहा हैं ?’. में कुछ नहीं बोली.
डिसूज़ा ने तब कहा ‘अगर लंड से चुदवाने में मज़ा आता है तो बोलो मुझे तुम्हारा लंड चाहिए’ ‘मुझे तुम्हारा लंड चाहिए’ मैने दबी हुई आवाज़ मैं कहा.
वो जान भुज कर मुझे ज़लील करना चाहता था.
‘मुझे सुनाई नही दिया, ज़ोर से बोल’ मैने फिर से कहा ‘मुझे तुम्हारा लंड चाहिए’ मैने ज़िंदगी में कभी ऐसी गंदी बातें नही कही थी.
उसने अब धीरे से मुझे चोदना शुरू कर दिया.
‘ज़ोर से करो प्लीज़’ मैने कहा ‘क्यूँ तू रंडी है क्या कि तुझे ज़ोर से चुदवाना हैं’. में कुछ नहीं बोली तो उसने चोदना फिर से बंद कर दिया.
में समझ गयी की वो क्या सुन ना चाहता हैं.
‘हां हां में रांड़ हूँ मुझे ज़ोर से चोदो’ मैने कहा.
ये सुनकर उसने फिर से चोदना शुरू कर दिया.
‘यह हुई ना बात, जब तक तू यह बोलती रहेगी में तेरी चुदाई चालू रखूँगा.
और धीरे से नहीं चिल्ला कर बोल’ मुझे उसके मोटे लंड से ज़ोर से चुदवाने की बहुत तलब हो गयी थी.
मेरा दिमाग़ ने अब काम करना बंद कर दिया था.
मैने अब चिल्ला चिल्ला कर उसे सुनना था वो बोलने लगी.
‘चोदो मुझे अपने लंड से’.
उसने यह सुनकर ज़ोरदार झटके मारना शुरू कर दिया में ज़ॉरो से सिसकियारी भर रही थी ‘आआआआआहह……आआआआआअहह’ और सिसकियारीओं के बीच में गंदी बातें कर रही थी. ‘तू मेरी रांड़ हैं समझी’. ‘हां आआअहह…… चोदो मुझे….. चोदो अपनी रांड़ को….. आआअहह’ ‘मज़ा आ रहा हैं मेरा लंड ले के’ डिसूज़ा हरेक धक्के पे लगभग पूरा लंड बाहर निकाल के उसे फिर से अंदर घुसेड रहा था.
‘आआआआहह….. आआआआआआअहह.
….
गधे जैसा लंड हैं तुम्हारा बहुत मज़ा आ रहा हैं.
और ज़ोर से चोदो मुझे’ आधे घंटे तक हम ऐसे ही ज़ोरदार चुदाई करते रहें और में ऐसी गंदी बातें करती रही.
हम दोनो का सारा बदन पसीने से लत पथ हो गया था.
में अब झरने के बहुत करीब आ चुकी थी.
डिसूज़ा भी झरने वाला था.
वो अब पूरे ज़ोर से मेरी चुदाई करने लगा.
चार घंटे हिलाते हिलाते डिसूज़ा के बॉल पूरे भर गये थे और अब वो सारा वीर्य मुझ में निकालने वाला था.
‘आआअहह………आआआआआआआहह साली गटर की रांड़.
यह ले मेरा पानी’ यह कह के उसने अपना वीर्य मेरी चूत में निकालना शुरू कर दिया.
‘आआआआहह…… हां में गटर की रंडी हूँ, निकाल दो अपना पानी मेरी चूत में… आआआआहह….
’ मेरा भी झरना शुरू हो गया था.
हरेक धक्के पे डिसूज़ा के लंड से ढेर सारा वीर्य निकल रहा था.
हम दोनो 5 मिनिट तक यूँ ही कुत्तों की तरह चोद्ते रहें और झरते रहे.
डिसूज़ा ने इतना सारा वीर्य निकाला की वो अब मेरी चूत से बह कर बाहर आ रहा था और हरेक धक्के पे ‘चुप चुप’ की आवाज़ आ रही थी.
वीर्य निकालते निकालते डिसूज़ा का लंड झटके खा रहा था और उससे मुझे और मज़ा मिल रहा था.
आख़िर हम दोनो का झरना बंद हुआ.
डिसूज़ा अपना लंड धीरे से अंदर बाहर करता रहा.
हम दोनो ज़ोर से साँसें ले रहे थे.
डिसूज़ा का लंड अभी भी झटके खा रहा था.
में इतनी ज़ोर से झार गयी थी की मेरा सारा बदन अभी भी काँप रहा था.
मुझे डिसूज़ा के लंड से प्यार तो पहले से ही हो गया था, पर अब तो में इस लंड की गुलाम हो गयी थी.
डिसूज़ा मुझ पर पूरा लेट गया था.
धीरे धीरे उसका लंड मेरी चूत में ही छोटा हो रहा था.
आख़िर उसने अपना लंड बाहर निकाला और खड़ा हुआ.
‘तुम्हारा लंड तो कमाल हैं’ मैने शरमाते हुआ कहा.
‘सच कहता हूँ पायल.
सारी ज़िंदगी में आज तक तेरे जैसी सेक्सी लड़की नही देखी और नही तेरे जैसी रांड़.
चल अभी में चलता हूँ फिर मिलेंगे.
तू थोड़ा आराम कर और ये ले अपने मूह में’ डिसूज़ा ये कह के मेरे पास में पड़ी मेरी गीली पॅंटी को मेरे मूह में ठूंस दिया.
सारी पॅंटी मेरे मूह में ठूंस दी और खड़ा हो के वहाँ से चला गया.
में अब होटेल की ज़मीन पर अकेली पड़ी थी.
मेरा सारा बदन इतनी सारी चुदाई से दर्द कर रहा था.
में किसी भी तरह खड़ी हो कर शीशे के सामने आ गयी.
शीशे मैं मेने अपनी हालत को देखा.
मेरे बाल बिखरे हुए थे मेरे चेहरा पूरा लाल हो गया था मिस्टर वर्मा की गांड के रगड़ने से, मेरी गांड और चूत से अभी भी वीर्य निकल रहा था और मेरे पैरों से बह कर नीचे जा रहा था, मेरे बदन के दूसरी जगह पे वीर्य सूख चुक्का था और मुझे सूखे हुए वीर्य की बास आ रही थी और मेरे मूह में मेरी पॅंटी थुसि हुई थी.
मेरे सारे बदन में दर्द था जो अगले दिन थोड़ा कम हो गया लेकिन सिवाय मेरी गांड का.
मिस्टर शर्मा ने मेरी छोटी सी गांड की ऐसी हालत की थी की मुझे चलने में और बैठने मैं तकलीफ़ हो रही थी.
मैने बुखार का बहाना बना के कुछ दिन स्कूल जाना बंद कर दिया और डॉक्टर से दर्द की दवाई लेने लगी.
एक हफ्ते बाद मेरा दर्द कम हो गया और में स्कूल जाने के काबिल हो गयी.
सारे हफ्ते मुझे सिर्फ़ डिसूज़ा का लंड ही दिमाग़ में आ रहा था.
में अब उस लंड की गुलाम हो गयी थी.
अगले दिन से में स्कूल जाने लगी.
जब में स्कूल से घर जा रही थी तो मेने देखा के बाहर डिसूज़ा खड़ा था.
पर में अपनी कुछ सहेलिओं के साथ थी इसलिए उसने कुछ नही कहा और चुप चाप मेरे पीछे चलता रहा.
थोड़ा चलने के बाद मैने सहेलिओं को बहाना बनाया की में स्कूल में किताब भूल गयी और पीछे रह गयी और उनको आगे जाने दिया.
अब डिसूज़ा मेरे बगल में आ गया और मुझे खीच के एक पास वाले मकान के पीछे ले गया.
मकान पुराना सा और बंजर था और उसमे कोई नही रहता था.
मेरा रंडीपना तो बढ़ता ही जा रहा था, आज डिसूजा मुझे स्कूल के बहार से उठा ले गया, पता नहीं अब क्या पहाड़ टूटेगा मेरी चूत पे? मुझ randi ki kahani का अगला पार्ट जल्द ही.. और भी पढ़िए My HIndi Sex Stories पर.. Hindi Sex Story के अन्य पार्ट-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. पार्ट 4. पार्ट 5. पार्ट 6. पार्ट 7.
स्रोत:इंटरनेट