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मेरे दिल की धड़कनें बढ़ने लगी थी और मेरा खून मेरी रगों में बुलेट ट्रेन की तरह दौड़ रहा था । और मेरा लंड लोहे की रॉड की तरह सख्त हो गया ।. मुझे अपने ऊपर कंट्रोल रख पाना मुश्किल लगने लगा था । मैंने बड़ी मुश्किल से खुद को सम्हाला और धीमे पांव से दीदी की तरफ बढ़ गया और ठीक उनकी उभरी हुई गांड पर अपने बॉक्सर में बने टेंट को टिका कर बोला , ” गुड मॉर्निंग रॉय ! ”.  . दीदी ने पहले तो थोड़ा सीधा होने की कोशिश की पर जैसे ही मेरे लंड का अहसास उन्हें अपनी गांड पर हुआ । वो उसी पोजीशन में झुक गयी और अपनी गांड को मेरे लंड पर दबा कर बोली , “ गुड़ मॉर्निंग मोनू ।”  . मैंने अपने लंड को थोड़ा सा और उनकी गांड पर दबाया । फिर मैं दीदी के ऊपर झुक गया और उन्हें कमर से आलिंगन करते हुए बोला , ” आज तो कमाल लग रहा है तू रॉय ।”.  . वीणा दीदी मेरी स्थिति को समझ चुकी थी और वो काफी खुश हो रही थी ।. वो हंसकर बोली , ” क्या कमाल , यार मोनू ! मैं तो रोज़ ही ऐसे रहता हूँ , तू देखता ही कहाँ है मुझे ।”  . मैंने दीदी को अपने आलिंगन में थोड़ा और कसा । फिर अपने लंड को उनकी गांड पर रगड़ते हुए उत्तेजना से भरी आवाज़ में कहा , “ तो दिखा दे ना डार्लिंग । क्या दिखाना चाहता है अपने यार को ? ”.  . मेरे इस तरह लंड को रगड़ने और बाँहों की जकड़ ने दीदी को मदहोश बना दिया था ।. दीदी के मुंह से मस्ती भरी सिसकारी निकली , आह हहहहह ……। फिर मादक आवाज़ में वीणा दीदी बोली , ” सब तेरा ही तो है यार , जो चाहे देख ले। ” मैंने दीदी को ऐसे ही कस कर पकड़े रखा और अपने लंड से हलके हलके धक्के लगाने लगा और दीदी की गरदन और कान को बेतहाशा चूमने लगा । दीदी भी अपनी गांड को पीछे उछाल उछाल कर मज़े ले रही थी । फिर मैंने अचानक से. दीदी का बॉक्सर नीचे सरकाने की कोशिश की तो दीदी खड़ी हो गयी और बोली , ” यहाँ नहीं ! कोई देख लेगा , चल अंदर चल। ”  . हम जल्दी से कमरे के अंदर आ गये और बालकनी का दरवाज़ा बंद कर दिया । सबसे पहले मैंने अपना बॉक्सर उतार कर अलग किया और मेरा 6.
5 इंच का लंड फनफनाता हुआ बाहर आ गया । जल्दबाज़ी के चक्कर में दीदी ने मेरी तरफ मुंह किये हुए सबसे पहले अपनी शर्ट उतार फेंकी और अगले ही पल अपना बॉक्सर उतार दिया । और मेरी नज़र उनकी बड़ी बड़ी चूचियों से होती हुई बिना बालों की चिकनी चूत पर पड़ी और मेरा excitement उतनी ही तेज़ी की. साथ खत्म होता चला गया।. दीदी को अपनी गलती का एहसास हुआ और वो तुरंत पलट कर खड़ी हो गयी और थोड़ा सा आगे की तरफ झुक गयी पर मेरे लंड का तनाव गिरता ही गया।. दीदी ने जब ये देखा तो आगे बढ़ कर मेरे लंड को हाथ में लेकर सहलाने लगी पर कुछ असर नहीं हुआ । फिर उन्होंने अपनी नंगी गांड को मेरे मुरझाते हुए लंड पर रगड़ा पर रिजल्ट वही का वही रहा। मैंने मायूसी से अपने. कपडे उठाये और बाथरूम की तरफ बढ़ गया और वीणा दीदी ऐसे ही नंगी खड़ी मुझे जाता देखती रही ।.  . बाद में जब मैं ऑफिस के लिए तैयार हो रहा था ।. तब वीणा दीदी मेरे रूम में आयी और बोली , ” क्या बात है हीरो , सुबह तो कमाल हो गया । ”  . सुबह की बात याद आते ही मैंने अपना मुंह फेर लिया ।. दीदी फिर बोली , “ अरे क्या बात है , मायूस क्यों हो रहा है यार । ” वो अब भी मेरे male फ्रेंड की तरह बात कर रही थी ।.  . मैंने गुस्से से कहा , ” दीदी छोड़ो ना , मुझे तैयार होने दो । ”  . दीदी गुस्सा होते हुए बोली , ” कौन दीदी ! भाई मेरा नाम रॉय है , भूल गया क्या ? मारूंगा अगर फिर मेरा नाम रॉय से कुछ और बोला तो । ”.  . मुझे हंसी आ गयी । मैं अपने जूते पहनते हुए बोला , ” ओके रॉय ! राइट ! अब मैं ऑफिस जा रहा हूँ , शाम को बात करेंगे । ”  . घर से बाहर निकलते वक्त वीणा दीदी ने कहा , ” कुछ तो पॉजिटिव हुआ । इतनी जल्दी मायूस नहीं होते और जो हुआ उसे भूल जा , जैसे कुछ हुआ ही ना हो । हमें अपनी कोशिश जारी रखनी है ।”  . मैंने मंज़ूरी में अपना सर हिलाया और ऑफिस के लिए चल दिया ।. शाम को जब मैं वापस आया तो दीदी और मेरे बीच वैसे ही लड़कों की तरह बात हुई ।.  . रात को दीदी मेरे साथ जब बेड पर सोने आयी तो मैंने पूछा , ” यार रॉय ! मम्मी कब वापस आयेंगी ? ”  . दीदी बोली , “ क्यों तेरा मन नहीं लग रहा क्या ? ”  . मैंने कहा ,” नहीं ऐसी बात नहीं है । बस काफी दिन हो गये उन्हें गये हुए , इसलिए पूछ रहा था ।”  . दीदी बोली , ” उनका फ़ोन आया था । मामाजी की लड़की को कुछ लड़के वाले देखने आ रहे हैं । कुछ दिन बाद आ जायेंगी । ”  . मैंने कहा , ” ओहो , ऐसी बात है । ”  . दीदी ने कहा ,” हाँ ! चल अब सो जा । ”  . और दीदी दूसरी तरफ मुंह करके लेट गयी और मेरा हाथ पकड़ कर अपने पेट पर रख लिया ।.  . मैंने भी दीदी को लेटे लेटे ही पीछे से आलिंगन किया और उनके कान में फुसफुसाया , ” यार रॉय ! आई लव यू । ”  . दीदी ने अपनी गांड को लेटे लेटे ही मेरे लंड पर दबाया और बोली , ” आई लव यू टू , मोनू !”  . दीदी की गांड के दबाव से मेरे लंड में कुछ हरकत हुई और थोड़ा सा तनाव आया । पर ज़्यादा देर बरक़रार नहीं रह सका । दीदी को अहसास हुआ तो उन्होंने और ज़्यादा दबाव बनाया पर कोई फायदा नहीं हुआ और फिर हम ऐसे ही. सो गये । अगले 3-4 दिन तक यही सिलसिला चलता रहा ।. दीदी रोज़ रात को मेरे साथ ऐसे ही सोती और अपनी गांड को मेरे लंड पर रगड़ती रहती । मेरे लंड में थोड़ी हरकत तो होती पर ज़्यादा देर तक कायम नहीं रह पाती ।. फिर शनिवार आया और क्यूंकि अगले दिन हमारी छुट्टी थी । इसलिए हम देर तक बातें करते रहे । फिर आपस में लिपट कर सो गये । सुबह जब मेरी आँख खुली तो मुझे बहुत तेज़ पेशाब लगी थी । मैं जल्दी से बाथरूम भागा और. पेशाब कर के वापस आया तो देखा दीदी पेट के बल सोयी हुई थी और उनकी टाइट गांड उनके लोअर को फाड़ने का इरादा कर के उभरी हुई पड़ी थी ।अचानक मेरे लंड ने झटका खाया और अपना आकार बढ़ाने लगा । मुझे उस वक्त दीदी. की गांड के अलावा कुछ और नहीं सूझ रहा था । मैं वीणा दीदी को दीदी न समझ कर सिर्फ रॉय ही imagine कर रहा था । मैंने आनन फानन में अपने सारे कपडे उतार फेंके और बेड पे जाकर दीदी के ऊपर लेट गया और दीदी की. गरदन , कान और गालों को चूमने लगा ।
स्रोत:इंटरनेट