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नाकामयाबी के बावजूद दीदी का मुझे स्ट्रैट बनाने का जूनून कम नहीं हुआ था। गे मैगज़ीन से ही सही, पर मेरा उनके सामने खड़ा तो हो.. , अब देखिये इन gay stories में आगे क्या होता है.. Sex Story के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. दीदी बोली, ” चल अब बातें बनाना छोड़ और मैगज़ीन निकाल ।” मैंने बेड के नीचे से एक मैगज़ीन निकली और दीदी की तरफ उछाल दी ।. दीदी ने मैगज़ीन ली और पन्ने पलटकर देखने लगी और उनके मुंह से निकला , ” इतना मोटा ! ” फिर मेरी तरफ देखते हुए बोली , “ लड़कों को वहां दर्द नहीं होता क्या ? ” मुझे उनकी बात पर हंसी आ गयी , मैंने कहा , “ शुरू शुरू में होता है । बाद में आदत हो जाती है और मज़ा आता है । ”  . दीदी बोली , “ तुझे भी तो शुरू शुरू में दर्द हुआ होगा ? ”  . मैंने कहा , ” दीदी मुझे क्यों दर्द होगा ? ”  . दीदी बोली , “ क्यों तेरे साथ नहीं किया किसी ने ? ”  . मैंने कहा , ” दीदी मुझे देने में नहीं , लेने में मज़ा आता है ” और मैं हंस दिया ।  . दीदी ने मैगज़ीन मेरे सर पर मारी और बोली , “ तो इसका मतलब तेरी किसी ने नहीं ली ? ”  . मैंने हँसते हुए कहा , ” हाँ “।  . दीदी बोली , ” चल अब मैगज़ीन पढ़ मैं देखना चाहती हूँ , तेरा खड़ा होता है कि नहीं ।”  . वीणा दीदी के मुंह से ” खड़ा ” शब्द सुन कर मैं चौंक गया ।.  . उन्होंने मुझे अपनी तरफ देखता पाकर कहा , ” ऐसे क्या देख रहा है ? खड़ा ही तो बोलते हैं erection को ।”  . मैंने चुपचाप उनके हाथ से मैगज़ीन ली और पन्ने पलटने लगा । पर मेरा मन दीदी के साथ बैठकर कुछ भी देखने या पढ़ने का नहीं. हो रहा था । 2-3 मिनट तक मैं ऐसे ही पन्ने पलटता रहा।. तभी दीदी ने टोक दिया , ” अरे पढ़ ना ! पन्ने क्यों पलट रहा है ? ” मैंने कहा , ” दीदी मेरा आप के साथ बैठ कर पढ़ने का मन नहीं हो रहा है ।”  . दीदी बोली , ” क्या अब भी शर्म आ रही है ? ”  . मैंने कहा , ” बात शर्म की नहीं है । एक तो आप लड़की, ऊपर से मेरी दीदी । मुझे बहुत guilty फील हो रहा है । ”  . दीदी बोली , ” ओह ! ऐसी बात है । ”  . दीदी कुछ सोचने लगी , फिर बोली , ” देख ऐसा करते हैं , तू सोच कि मैं तेरी वीणा दीदी ना होकर तेरा भाई हूँ और तेरा बेस्ट फ्रेंड भी । तू बेहिचक मेरे सामने ऐसा behave कर जैसा तू अपने फ्रेंड्स के साथ करता है । मैं बिलकुल बुरा नहीं मानूंगी ।”.  . मैंने कहा , ” दीदी ये कैसे possible है ? आप मेरी दीदी हो । मैं ये कैसे imagine कर लूँ कि आप लड़का हो । मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा , मैं सो रहा हूँ बस ।”  . दीदी बोली , ” ठीक है ठीक है । तू सो जा , मत कर जो मैं बोल रही हूँ । तोड़ दे अपना प्रॉमिस । मैं होती ही कौन हूँ , तुझे समझाने वाली ।”  . दीदी गुस्सा कर के दूसरी तरफ मुंह कर के लेट गयी ।.  . मैंने दीदी को कंधे से पकड़ कर उठाया और कहा , ” दीदी आप जो कह रही हो वो एकदम से पॉसिबल कैसे हो सकता है ? थोड़ा वक्त तो लगेगा ना , इमेजिन करने में ।” दीदी बोली , “ मैंने कब कहा कि तू अभी इमाजिन कर । ओके ! चल एक काम करते हैं । कल से तू मुझे अपने फ्रेंड की तरह ट्रीट करना और मैं कोशिश करुँगी कि तुझे , मैं लड़की कम और लड़का ज्यादा लगूँ । ”  . मैंने कहा , ” ok lets try ! लेकिन अगर मान लीजिये कि मैंने आपको लड़का imagine कर भी लिया और मुझे आपको देखकर इरेक्शन हो भी गया तब भी तो प्रॉब्लम वही रहेगी ना । मेरे कहने का मतलब है कि मैं तो लड़के में ही इंटरेस्टेड रहूँगा ना ? ”.  . दीदी बोली , ” तब का तब देखेंगे अभी इतना तो कर । ”  . मैंने कहा , “ ओके ! कल से कोशिश कर के देखते हैं । अब सो जायें ? ”  . दीदी बोली , ” ओके ! गुड़ नाईट ! “  . अगले दिन जब मैं सो कर उठा तो देखा वीणा दीदी किचन में चाय बना रही हैं और उन्होंने जीन्स और मेरी सफ़ेद शर्ट पहन रखी है ।. मैं उनके करीब गया और गुड़ मॉर्निंग कहा। दीदी पलटी और उन्होंने मेरा गुड मॉर्निंग का रिप्लाई किया । मैंने देखा कि उन्होंने अपनी नाक और कान में ज्वेलरी नहीं पहनी है ।.  . मैंने पूछा , ” दीदी आपकी जेवेलरी कहाँ गयी ? ” दीदी मुझे चाय का कप पकड़ाते हुए बोली , ” भूल गया , लड़के ज्वेलरी नहीं पहनते और खबरदार अगर मुझे दीदी कहा तो । मैं तुम्हारा फ्रेंड हूँ ।“.  . मैंने हँसते हुए कहा , ” ओके फ्रेंड ! पर तुम्हारा नाम क्या है ? ”  . दीदी ने कुछ सोचा फिर बोली , ” जैसे तू रोहित से मोनू है , वैसे ही अब मैं वीणा से रॉय हूँ । और अब से तू मुझे इसी नाम से बुलायेगा । “  . मैंने कहा , ” ओके रॉय ! तो ऑफिस भी ऐसे ही जाओगे क्या ? ”  . दीदी बोली , “ नहीं यार ! ऑफिस तो वैसे ही जाना पड़ेगा । लेकिन घर पर मैं तुझसे ऐसे ही मिलूंगा ।”  . मैंने कहा , ” ठीक है रॉय ! शाम को मिलते हैं ।” फिर मैं ऑफिस जाने की तैयारी में जुट गया ।.  . 4-5 दिन तक यही सिलसिला चलता रहा । मैं दीदी को रॉय कह कर बुलाता और दीदी मुझे मोनू ।. कभी भूल चूक से मेरे मुंह से दीदी निकल जाता तो दीदी तुरंत मुझे डांट कर ठीक कर देती ।. 5-6 दिन बाद मुझे कुछ आदत सी हो गयी और मैं दीदी को रॉय पुकारने लगा और उन्हें एक लड़के की तरह ही ट्रीट करने लगा और मुझे दीदी ने इसमें पूरा सहयोग दिया । वो बिलकुल लड़के की तरह ही behave करती और वैसे ही. ड्रेस पहनती । कभी जीन्स और मेरी ही शर्ट्स , कभी लुंगी के साथ शर्ट्स , कभी मेरे शॉर्ट्स और मेरी टी -शर्ट्स , बिना किसी ज्वेलरी के और बिना किसी मेकअप के । ऐसा चलते चलते करीब 10 दिन निकल गये ।. 11 वें दिन मैं सोकर उठा और दीदी को ढूंढ़ने लगा । किचन में गया पर दीदी किचन में नहीं थी ।फिर मैं पेपर उठाने के लिए बालकनी में गया तो देखा वीणा दीदी बालकनी की रैलिंग पर झुके हुए पेपर पढ़ रही हैं ।. उन्होंने मेरा boxer और मेरी ही शर्ट पहन रखी थी और रैलिंग पर झुकने के कारण उनकी बड़ी सी गांड एकदम से बाहर की तरफ उभरी हुई थी । पहली बार अपनी ही दीदी की गांड देखकर मेरे लंड ने झटका खाया और मैं दूर खड़े. होकर ही उस नज़ारे को एन्जॉय करने लगा ।तरबूज जैसी गांड से होती हुई मेरी नज़र उनकी चिकनी जांघों पर आ टिकी , जहाँ बालों का नामोनिशान तक न था और मेरे बॉक्सर के अंदर तूफ़ान अंगड़ाइयां लेने लगा ।
स्रोत:इंटरनेट