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Hot Bahan Gay Brother Story 2

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 . तो मेरे लंड का तनाव खत्म होने लगा और मेरी धक्का लगाने की स्पीड कम होती गयी और फिर मैं रुक गया ।. उधर दीदी की मदहोशी में खलल पड़ गया था , उनको कामतृप्ति का सुख मिलना बंद हो चुका था । वो अपनी चूत को मेरे लंड पर ज़ोर ज़ोर से रगड़ रही थी । पर मेरा लंड ढीला पड़ता जा रहा था और कुछ ही पल बाद मेरा लंड मुरझा कर उनकी चूत से बाहर आ गया ।.  . फिर कुछ ऐसा हुआ जिसकी मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी ।. दीदी ने मुझे पीछे धकेला और बेड पर पीठ के बल लेट कर अपने हाथ से अपनी चूत को ज़ोर ज़ोर से रगड़ने लगी । वो वासना की आग में बुरी तरह जल रही थी पर अपने हाथ से दीदी को संतुष्टि नहीं मिली । थोड़ी देर अपनी. चूत को रगड़ने के बाद दीदी बेड पर बैठ गयी और मेरी तरफ देखते हुए गुस्से से बोली , ” क्या फायदा ऐसे लंड का जो किसी की प्यास न बुझा सके । ”  . मैं पहली बार दीदी के मुंह से लंड जैसा शब्द सुन कर हैरान रह गया और मैंने पलट कर कहा ,” सॉरी दीदी ! ”  . इस पर दीदी बोली ,” तेरे सॉरी बोलने से मेरी आग तो नहीं बुझेगी भेंनचोद !!!”  . दीदी के मुंह से गाली सुनकर मुझे गुस्सा आ गया और मैंने कहा , ” दीदी !!! माइंड योर लैंग्वेज ।” दीदी भी गुस्से में बोली ,” क्या माइंड योर लैंग्वेज । ज़्यादा चिल्ला मत ।”  . फिर रुक कर बोली , ” हिजड़ा कहीं का !!! ”  . मैं ज़ोर से चिल्लाया , ” दीदी !!! मैं कह रहा हूँ अपना मुंह बंद रखो । मुझे गुस्सा मत दिलाओ ।”  . दीदी ने टौंट मारा , ” ओह ! तो हिजड़ों को भी गुस्सा आता है । क्या करेगा तू मेरा ? ”  . मैंने फिर गुस्से में कहा , ” दीदी शटअप !! मैं कोई हिजड़ा नहीं हूँ । आप अच्छी तरह से जानती हो और बार बार मुझे गाली देना बंद करो । ”  . पर दीदी किसी और ही मूड में थी । वो मेरी कहाँ सुनने वाली थी ।. वो फिर बोली ,” अच्छा तो तू हिजड़ा नहीं है तो अपने लंड को खड़ा क्यों नहीं करता । देख एक नंगी लड़की तेरे सामने बैठी है । कोई बुड्ढा भी मेरा जिस्म अगर इस तरह से देख ले तो मुझे बिना चोदे नहीं रह सकता ।”  . और यह कहते ही दीदी ने अपनी टीशर्ट सर के ऊपर से उतार फेंकी । मैं बेड पर नंगा बैठा दीदी के नए रूप को देख रहा था । मुझे दीदी से बहस में पड़ना फ़िज़ूल लगा । मैं उठा और अपने कपड़े पहनने लगा ।.  . दीदी ने मुझे कपडे पहनते हुए देखा और बोली , ” क्यों अब जवाब नहीं है तेरे पास । साले गाँडू !!! जा जाकर किसी लौंडे की गांड मार । तू इसी लायक है । ”  . मैं अपना शार्ट पहन चुका था । मुझे गुस्सा आ गया , ” साली अब और कुछ बोली ना तो …।”  . दीदी गुस्से में ही हंसी ,” तो क्या भड़वे !! मारेगा मुझे ? आ ले मार । ”  . दीदी के मुंह से और गालियां सुनकर मुझसे रहा नहीं गया , मैं तेज़ी से उनके पास पहुंचा और उनके बॉयकट बालों को अपनी मुट्ठी में भर कर बोला , ” साली कुतिया !!! बहुत ज़ुबान चला रही है । साली !! शहर के सारे कुत्तों से तुझे चुदवा दूंगा । हरामज़ादी ! ”.  . दीदी ने अपने बाल मेरी मुट्ठी से छुड़ाये और बोली , ” जा जा ! बड़ा आया कुत्तों से चुदवाने वाला ! जा जाकर उन कुत्तों की ही गांड मार । भेनचोद हिजड़े !! ”  . बस फिर न जाने मुझे क्या हुआ मैंने एक ज़ोरदार थप्पड़ दीदी के गाल पर दे मारा ।. दीदी बेड पर पेट के बल गिर पड़ी । मैं गुस्से से भर चुका था और मेरा खून खौल रहा था। मुझे सिवाय गुस्से के कुछ और नहीं सूझ रहा था । मैंने एक ही झटके में अपना शार्ट उतार फेंका और दीदी को उनके बालों से पकड़. कर उठाते हुए बोला , ” साली कुतिया !!! बहुत चुदने का शौक चढ़ा है ना तुझे । आज तेरी मैं सारी गर्मी निकाल दूंगा । चोद चोद कर तेरी चूत ही फाड़ दूंगा । ”  . पता नहीं कैसे मेरे मुंह से ऐसे शब्द निकल रहे थे मुझे नहीं पता । मैं गुस्से और अपमान में सुलग रहा था । मैंने दीदी के सर को उठाया और अपने लंड को उनके मुंह पर रगड़ने लगा ।.  . मेरा लंड पहले से ही अपने पूरे शबाब पर था । मुझे ये भी नहीं पता चला कि वो कब इतना सख्त हो गया । करीब 1 मिनट तक मैं गुस्से और आवेश में अपने लंड को दीदी के मुंह पर रगड़ता रहा । फिर मैंने गुस्से में ही. कहा , ” चल खोल अपना मुंह बहन की लोड़ी !! और चूस इसे ।”  . दीदी ने कोई जवाब नहीं दिया और अपना मुंह खोल कर लंड को धीरे धीरे चूसने लगी । पर मैं इतने में कहाँ मानने वाला था । मैंने उनके बालों को पकड़े पकड़े ही उनके मुंह में धक्के लगाने शुरू कर दिये और अपना पूरा. लंड उनके गले तक ठूंस दिया ।.  . दीदी गों गों की आवाज़ें निकाल रही थी । पर मैं तो जैसे अपने अपमान की आग में अँधा हो गया था । मुझे उनके किसी दुःख दर्द की फ़िक्र नहीं हो रही थी ।.  . बड़ी मुश्किल से दीदी ने खुद को छुड़ाया और बेड से उतर कर खड़ी हो गयी । उनकी साँसें बहुत तेज़ी से चल रही थी और उनकी मोटी मोटी पपीते की शेप की चूचियां उनकी सांस के साथ ऊपर नीचे हो रही थी । पहली बार. ज़िन्दगी में मुझे किसी लड़की की चूचियों में रूचि हो रही थी और मैं एकटक उन्हें ऊपर नीचे होता हुआ देख रहा था ।.  . वीणा दीदी ने बहुत मुश्किल से अपनी सांस संभाली और बोली , “ पागल हो गया है क्या , जानवर !!! मुझे जान से मारेगा क्या ? ”  . मैं जो उनकी चूचियों में खोया हुआ था , जैसे नींद से जागा और बोला , “शुरू तूने किया था कुतिया !! अब भुगत । ”  . दीदी मेरे द्वारा कहे गए अपशब्दों का बिलकुल भी विरोध नहीं कर रही थी और मैं उनकी ख़ूबसूरती को ऊपर से नीचे तक निहार रहा था ।.  . फिर दीदी ने मेरा ध्यान भंग किया , ” मैं जा रही हूँ । ” और वो अपने कपड़े उठाने के लिए झुकी ।.  . तभी मैंने पीछे से जाकर दीदी को दबोच लिया और उन्हें सीधा खड़ा कर के अपनी तरफ घुमाया । फिर उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिये और उन्हें बेतहाशा चूमने लगा ।.  . वीणा दीदी ने शायद इस सब की कल्पना भी नहीं की होगी । पहले तो उन्हें आश्चर्य हुआ फिर वो भी चूमने में मेरा साथ देने लगी । हम दोनों के बदन आपस में किसी बेल की तरह लिपटे हुए थे और मेरा लंड दीदी के पेट पर. रगड़ खा रहा था । कुछ देर तक हम एक दूसरे के होंठों को ऐसे ही चूमते रहे फिर दीदी ने मुझे अलग किया और बोली , ” चल हट ! अब कपड़े पहन ले ।”
स्रोत:इंटरनेट