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Jamnadas Ka Beej Hot Desi Kahani 2

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 . अब चमेली के पास कोई काम नहीं था। वह खाली बैठी सोच रही थी कि उसे आज के पैसे आज ही मिल जायेंगे या हफ्ता पूरा होने पर सात दिन के पैसे एक साथ मिलेंगे। उसने सोचा कि कम से कम एक दिन के पैसे तो उसे आज ही. मांग लेने चाहियें।.  . कोई एक घंटे बाद उसे पास के कमरे से कुछ आवाजें सुनाई दीं, चलने-फिरने की, बाथरूम का किवाड़ बंद होने और खुलने की। फिर उसने जमना दास की आवाज सुनी। वह उसे अन्दर बुला रहा था। वह कमरे में गयी तो जमना दास ने उसे कहा, “तू बाहर जा कर दफ्तर के ताला लगा दे और फिर पीछे के दरवाजे से इस कमरे में आ जा।”  . वह ताला लगा कर पीछे से कमरे में आई तो उसने देखा कि जमना दास सिर्फ़ कच्छे और बनियान में एक कुर्सी पर बैठा था। उसने लम्पट दृष्टि से चमेली को देखते हुए कहा, “अब असली ‘काम’ करते हैं। दरवाजा बंद कर दे। किसी को पता नहीं चलेगा कि अन्दर कोई है।”.  . चमेली को पता था कि उसे देर-सबेर यह ‘काम’ करना ही पड़ेगा पर फिर भी दरवाजा बंद करते वक़्त वह घबरा रही थी। उसने किशन के अलावा और किसी के साथ यह नहीं किया था और किशन नामर्द न सही पर पूरा मर्द भी नहीं था।. जमना दास ने उसे अपने पास बुला कर कपडे उतारने के लिए कहा। उसने झिझकते हुए अपनी ओढनी और चोली उतार कर मेज पर रख दी और सर झुका कर खड़ी हो गई। जमना दास ने अपने होंठों पर जीभ फेरते हुए कहा, “बाकी भी तो उतार।”.  . चमेली ने अचरज से पूछा, “बाकी काहे?”  . “इसमें पूछने की क्या बात है? अपने खसम के आगे नहीं उतारती क्या?”.  . “नहीं।”.  . “तो क्या करता है वो?”.  . चमेली सर झुकाए चुपचाप खड़ी रही। जमना दास ने कहा, “बता ना, कुछ करता भी है या फिर छक्का है?”  . “जी, वो अंगिया के ऊपर से हाथ फेर लेते हैं।”  . “और? … और क्या करता है?”.  . “जी, लहंगा उठा कर अपना काम कर लेते है।”  . ‘और चूसता नहीं है?”.  . “क्या?”.  . “तेरी चून्चियां, और क्या?”  . चमेली फिर चुप हो गई। उसे एक गैर मर्द के सामने ऐसी बातें करने में शर्म आ रही थी। लेकिन जमना दास को उसकी झिझक देख कर मज़ा आ रहा था। उसने फिर पूछा, “अरी, बता ना!”  . “जी, उन्हें ये अच्छा नहीं लगता।”  . “लो और सुनो! उसे ये अच्छा नहीं लगता! पूरा नालायक है साला! … खैर तू कपडे उतार। मैं चूसूंगा भी और चुसवाऊंगा भी!”.  . चमेली को उसकी बात पूरी तरह समझ में नहीं आई। उसे शर्म भी आ रही थी। किसी तरह हिम्मत कर के उसने अपने बाकी कपडे उतारे। उसे पूरी तरह नंगी देख कर जमना दास की तबीयत फड़कने लगी पर उसने कहा, “यह क्या जंगल उगा रखा है! कभी झांटें साफ़ नहीं करती?”.  . यह सुन कर तो चमेली शर्म से पानी-पानी हो गई। उसे कोई जवाब नहीं सूझ रहा था। पर जमना दास ने उसकी मुश्किल आसान करते हुआ कहा, “कोई बात नहीं। मैं कल तुझे शेविंग का सामान ला दूंगा। या तू कहेगी तो मैं ही तेरी झांटें साफ़ कर दूंगा।… अब आ जा यहां।”.  . चमेली लजाते हुए उसके पास पहुंची तो जमना दास ने उसे अपनी गोद में बिठा लिया। उसने उसकी गर्दन को चूमना शुरू किया और धीरे-धीरे उसके होंठ पहले चमेली के कान और फिर गालों से होते हुए उसके होंठों तक पहुँच गए।. उसके हाथ चमेली की नंगी पीठ पर घूम रहे थे। होंठों को चूसते-चूसते उसने उसके स्तन को अपने हाथ में भर लिया और उसे हल्के-हल्के दबाने लगा। उसने अपनी जीभ उसकी जीभ से लड़ाई तो चमेली भी अपने आप को रोक नहीं पाई।. उसने बेमन से खुद को जमना दास के हवाले किया था पर अब वह भी उत्तेजित होने लगी थी। उसने भी अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी और मुँह के अंदर उसे घुमाने लगी।.  . अब जमना दास को लगा कि चमेली उसके काबू में आ गई है। उसने उसे अपने सामने फर्श पर बैठाया। अपना कच्छा उतार कर उसे बोला, “चल, अब इसे मुँह में ले!”  . चमेली ने हैरत से कहा, “यह क्या कह रहे हैं आप!”  . जमना दास बोला, “अरे, चूसने के लिए ही तो कह रहा हूं। अब यह मत कहना कि किशन ने तुझ से लंड भी नहीं चुसवाया।”  . जमुना ने सोचा, “ये कहाँ फंस गई मैं! किशन ठीक ही कह रहा था। यह जमना दास तो वास्तव में कमीना है।” प्रत्यक्षत: उसने रुआंसी आवाज में कहा, “मैं सच कह रही हूं। उन्होंने कभी नहीं चुसवाया।”  . जमना दास यह जान कर खुश हो गया कि उसे एक कुंवारा मुंह मिल रहा है। वह बोला, “मैं किशन नहीं, ठेकेदार जमना दास हूं। चूत से पहले लंड हमेशा मुंह में देता हूं। चल, मुंह खोल।”  . चमेली को यह बहुत गन्दा लग रहा था। किशन अधूरा मर्द ही सही पर उससे ऐसा काम तो नहीं करवाता था। यहाँ उसके पास और कोई चारा नहीं था। मजबूरी में उसे अपना मुंह खोलना पड़ा। जमना दास ने लंड उसके होंठों पर. फिसलाते हुए कहा, “एक बार स्वाद ले कर देख! फिर रोज़ चूसने को मन करेगा! जीभ फिरा इस पर!  . उसने बेमन से लंड के सुपाड़े पर जीभ फिराई। पहले उसे अजीब सा महसूस हुआ पर कुछ देर जीभ फिराने के बाद उसे लगा कि स्वाद बुरा नहीं है। उसने सुपाड़ा मुंह में लिया और अपनी झिझक छोड़ कर उसे चूसने लगी। जमना दास ने. उसका सर पकड़ लिया और वह उसके मुंह में धक्के लगाने लगा, “आह्ह! चूस, मेरी रानी … चूस। आह … आह्ह!”  . जमना दास काफी देर तक लंड चुसवाने का मज़ा लेता रहा। जब उसे लगा कि वो झड़ने वाला है तो उसने अपना लण्ड मुंह से बाहर निकाल लिया। उसने चमेली को अपने सामने खड़ा कर दिया। अब चमेली के उठे हुए अर्धगोलाकार मम्मे. उसके सामने थे। जमना दास की मुट्ठियां अनायास ही उसके मम्मों पर भिंच गयीं। वह उन्हें बेदर्दी से दबाने लगा। चमेली दर्द से सिसक उठी पर जमना दास पर उसकी सिसकियों का कोई असर नहीं हुआ। जी भर कर मम्मों को. दबाने और मसलने के बाद उसने अपना मुंह एक मम्मे पर रख दिया। वह उसे चाट रहा था और चूस रहा था। साथ ही वह अपनी जीभ उसके निप्पल पर फिरा रहा था और उसको बीच-बीच में आहिस्ता से काट भी लेता था।.  . चमेली का दर्द अब गायब हो चुका था। उसे अपनी चूंची से एक मीठी गुदगुदी उठती हुई महसूस हो रही थी। वो भी अब चूंची-चुसाई का आनन्द लेने लगी। उसके मुंह से बरबस ही कामुक आवाज़ें निकल रही थी। जमना दास का एक हाथ. उसकी जाँघों के बीच पहुँच गया। उसके मम्मों को चूसने के साथ-साथ वह अपने हाथ से उसकी चूत को सहला रहा था। जल्द ही चूत उत्तेजना से पनिया गई। अब उन दोनों की कामुक सिसकारियाँ कमरे में गूज रही थी।.  . अनुभवी जमना दास को यह समझने में देर न लगी कि लोहा गर्म है और हथोडा मारने का समय आ गया है। वह चमेली को पलंग पर ले गया। उसे पलंग पर चित्त लिटा कर वह बोला, “रानी, जरा टांगें चौड़ी कर!”  . चमेली अब पूरी तरह गर्म हो चुकी थी। उसने बेहिचक अपनी टांगें फैला दीं। जमना दास उसकी जांघों के बीच बैठ गया और उसने उसकी टांगें अपने कन्धों पर रख लीं। वह उसकी चूत को अपने लंड के सुपाड़े से सहलाने लगा।. चमेली उत्तेजना से कसमसा उठी। उसने अपने चूतड उछाले पर लंड अपनी जगह से फिसल गया। जमना दास उसकी बेचैनी देख कर खुश हो गया। उसे लगा कि मुर्गी खुद क़त्ल होने के लिए तडफड़ा रही है। वह ठसके से बोला, “क्या हो रहा है, रानी? चुदवाना चाहती है?”
स्रोत:इंटरनेट