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Jamnadas Ka Beej Hot Desi Kahani 3

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 . चमेली ने बेबसी से उसकी तरफ देखा। उसके मुंह से शब्द नहीं निकले। उसने धीरे से अपनी गर्दन हाँ में हिला दी। जमना दास ने कहा, “चूत पर थूक लगा ले।“  . चमेली ने अपने हाथ पर थूका और हाथ से चूत पर थूक लगा लिया।.  . जमना दास फिर बोला, “इतने से काम नहीं चलेगा। ज़रा मेरे लंड पर भी थूक लगा दे।“  . चमेली ने फिर अपने हाथ पर थूका और इस बार उसने लंड के सुपाड़े पर थूक लगा दिया। जमना दास ने सुपाड़ा उसकी चूत पर रखा और अपने चूतड़ों को पूरी ताक़त से आगे धकेल दिया। लंड अपना रास्ता बनाता हुआ चूत के अन्दर घुस. गया। चमेली कोई कुंवारी कन्या नहीं थी पर इतना जानदार लंड उसने पहली बार लिया था। वह तड़प कर बोली, “आह्ह! … सेठ, आराम से!”  . वह बोला, “बस रानी, अब डरने की कोई बात नहीं है।”  . वह चमेली के ऊपर लेट गया। चूत बहुत टाइट थी और वह बुरी तरह उत्तेजित था लेकिन वह लम्बे समय तक औरत को चोदने के तरीके जानता था। उसने चुदाई बहुत हलके धक्कों से शुरू की। … जब उसने अपनी उत्तेजना पर काबू. पा लिया तो धक्कों की ताक़त बढ़ा दी। वह कभी अपने लंड को लगभग पूरा निकाल कर सिर्फ सुपाड़े से उसे चोद रहा था तो कभी आधे लंड से। कुछ देर बाद चमेली नीचे से धक्के लगा कर उसके धक्कों का जवाब देने लगी। बेशक वो. अब इस खेल में पूरी तरह से शामिल थी और चुदाई का लुत्फ़ उठा रही थी। उसके मुंह से बेसाख्ता सिस्कारियां निकल रही थीं।.  . उसकी प्रतिक्रिया देख कर जमना दास बोला, “क्यों रानी, अभी भी दर्द हो रहा है?”  . “स्स्स! … नहीं! … उई मां! … उम्म्म! … जोर से!”.  . “ले रानी … ले, जोर से ले!” और जमना दास ने अपनी पूरी ताक़त लगा दी। लंड अब पूरा अन्दर जा रहा था। घमासान चुदाई से कमरे में ‘फच्च फच्च’ की आवाजें गूँज रही थीं।  . कुछ ही देर में चमेली झड़ने की कगार पर पहुँच गई। वह बेमन से चुदने के लिए तैयार हुई थी पर ऐसी धमाकेदार चुदाई उसे आज पहली बार नसीब हुई थी। उसने जमना दास को कस कर पकड़ लिया और हांफते हुए बोली, “बस सेठ … मैं झड रही हूँ। … अब बस!”.  . जमना दास भी झड़ने के लिए तैयार था। वह सिर्फ चमेली के लिए रुका हुआ था। जब उसने देखा कि चमेली अपनी मंजिल पर पहुँचने वाली है तो उसने धुआंधार चुदाई शुरू कर दी। दोनों एक साथ चुदाई के चरम पर पहुंचे …. दोनों के शरीर अकड़ गए … लंड ने चूत में बरसात शुरू कर दी।.  . कुछ देर दोनों एक दूसरे की बाँहों में पड़े रहे। … चमेली चुद चुकी थी। उसकी चूत तृप्त हो गई थी। … जमना दास खुश था कि उसके मन की मुराद पूरी हो गई थी और एक नई चिड़िया उसके जाल में फंस गई थी।.  .  .  . दिन बीतते गए। यह खेल चलता रहा। वायदे के मुताबिक ठेकेदार जमना दास किशन की भूख-प्यास मिटाता रहा। चमेली चुदती रही और इतनी चुदी कि एक भावी मजदूर उसकी कोख में पलने लगा।.  .  . अपनी घरवाली का पेट दिनों-दिन बढ़ता देख कर किशन को चिंता सताने लगी। उसने सोचा कि मैंने जरा सी छूट क्या दे दी, इन्होने तो … वह ठेकेदार जमना दास के पास जाने ही वाला था कि विलायती दारू की एक पेटी उसके पास पहुंच गई। पूरी पेटी और वह भी विलायती दारू की! … उसके विचार बदलने लगे। उसने सोचा, “जमना दास तो देवता है … देवता प्रसाद तो देगा ही … चमेली ही मूरख निकली … उसे प्रसाद लेना भी न आया! आजकल तो इतने सारे साधन हैं फिर भी …”.  . रात को नशे में धुत्त किशन चमेली पर फट पड़ा। दिल की बात जुबान पर आ गई, ‘‘अपने पेट को देख, बेशरम! यह क्या कर आई?’’  . “मैंने क्या किया? यह सब तो भगवान के हाथ में है!”.  . “भगवान के हाथ में? इसे रोकने के साधन मुफ्त में मिलते हैं! किसी सरकारी अस्पताल क्यों ना गई?”.  . “क्यों जाती अस्पताल? ज़रा सोच, अभी तो तेरे खाने-पीने का जुगाड़ मैं कर सकती हूं। मैं बूढ़ी हो जाऊंगी तो कौन करेगा यह?” चमेली अपने पेट पर हाथ फेरते हुए बोली, ‘‘बुढ़ापे में तेरी देखभाल करने वाला ले आई हूं मैं?’’.  . यह सुन कर किशन का दुःख दूर हो गया.
वह सोच रहा था, “क्या इन्साफ किया है भगवान ने! बुढापे में मेरी सेवा ठेकेदार जमना दास का बेटा करेगा!” चमेली की कहानी भी गज़ब है, शराबी, नाकारा पति और गरीबी.. पर अब कम से कम उसे प्यासा तो नही रहना पड़ता.. कैसी लगी ये hot desi kahani आप लोगो को? और भी शानदार पढ़िए पर..
स्रोत:इंटरनेट