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Jijaji Ne Chudai Family Chudai Stories 2

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मुझे उत्तेजना की वजह से पेशाब जाने की इच्छा होने लगी, मैं बोली- जीजाजी, पेशाब लगा है। जीजाजी बोले- अब तुम्हारी चूत पूरी तरह गीली हो चुकी है। तुम चाहे न मानो, लेकिन तुम्हारी चूत चुदने को तैयार है। मैं गिड़गिड़ाई- नहीं जीजाजी ! तकलीफ़ हो जायेगी मुझे !. मैं उनसे छूटने की कोशिश करने लगी।. जीजाजी बोले- देख मेघना, अब तुम्हें बिना चोदे तो मैं छोड़ूँगा नहीं। मैं रुआँसी हो गई। अनजाने डर से मेरी आँखों में आँसू आ गये।. मैं बोली- जीजाजी, पेशाब तो कर आने दो? जीजाजी बोले- चल, मैं करवा कर लाता हूँ। उन्होंने मुझे गोद में उठा लिया और…. टॉयलेट में ले गये।. मैं टॉयलेट में स्कर्ट को टाँगों में दबाये खड़ी जीजाजी के हटने का इन्तजार कर रही थी।. जीजाजी बोले- बैठ ! कर पेशाब।. मैं नहीं बैठी। मैं सिर झुकाये खड़ी रही।. जीजाजी बोले- प्रियाबैठ ना ! मैंने अभी तक तुम्हारी दीदी को भी पेशाब करते नहीं देखा है। तुम्हारी चड्डी तो मैंने ही उतारी है। अब तो तुम्हें पेशाब करते हुए देखूँगा।. मैं न चाहते हुए भी बैठ गई।. जीजाजी दरवाजे पर ही खड़े रहे, बोले- कर पेशाब। वो मेरी चूत की ओर देख रहे थे और मैंने पेशाब की धार छोड़ दी।. मैं उठी और जीजाजी मुझे बाँहों में भर कर कमरे में ले आये। कमरे में आते ही उन्होंने मेरी स्कर्ट के हुक खोल दिये और स्कर्ट नीचे गिर गई।. मैं अब पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी।. जीजाजी ने मुझे उठाकर बिस्तर पर पटक दिया, मेरी टाँगों को ऊपर उठाकर मेरे सामने बैठ गए। फिर मुझसे ही मेरी चूत का वर्णन करने लगे।. मेरी चूत के होठों को पकड़कर बताया- ये तुम्हारी चूत के होंठ हैं।. फिर चूत को अपनी उँगली और अँगूठे से फैलाकर बताया- यह तुम्हारी भगनासा है !. और हल्का सा सहला दिया।. मुझसे बरदाश्त न हुआ, मैं दोहरी हो गई, मेरी सिसकारी निकल गई। फिर उन्होंने मेरी चूत का बड़ी बारीकी से निरीक्षण किया। फिर अपने कपड़े भी उतार दिये।. मुझे अपने लण्ड को दिखाते हुए बोले- देख, यह लण्ड है। यही चूत फाड़ने का औजार है। फिर उन्होंने लण्ड की खाल को ऊपर खींच दिया, बोले- चूत में घुसने के बाद यह ऐसा हो जाता है। ऐसे भी घुस सकता है चूत में। अब मैं इसे तुम्हारी चूत में घुसाऊँगा। जीजाजी मेरे ऊपर ऐसे आ गये कि उनका लण्ड मेरे मुँह पर और उनका सिर मेरी चूत पर था।. उन्होंने जब मेरी चूत चाटना शुरू किया तो मेरी आह निकल गई। जीजाजी ने अपना लण्ड मेरे मुँह में डाल दिया और लण्ड को गले तक पहुँचा दिया।. उस समय मुझे पहली बार अहसास हुआ कि लण्ड कितना लंबा और सख्त होता है।. जीजाजी जल्दी ही असली काम पर आ गये। उन्होंने मेरी टाँगें ऊपर को मोड़ दीं। मेरी चूत के दोंनों होंठ खुल गये।. जीजाजी ने लण्ड को मेरी चूत पर रख दिया।. डर के मारे मुझे चूत पर लण्ड टिकते ही दर्द महसूस होने लगा।. मुझे लगा कि जीजाजी ने ठोक दिया लण्ड मेरी चूत में। मेरे मुँह से निकला- आ…।. जीजाजी बोले- अभी तो मैंने कुछ भी नहीं किया।. मैं बोली- जीजाजी, मुझे डर लग रहा है। दीदी की हालत तो मैं पहले ही देख चुकी थी।. अब जीजाजी ने लण्ड को मेरी चूत में घुसाना शुरू किया तो मेरी चूत में लगने लगी।. मैं जीजाजी को रोकते हुए बोली- आ… जीजाजी, लग रही है। जीजाजी मर जाऊँगी… आआ… आ… जीजाजी प्लीज ! मर जाऊँगी…मैं ! अभी तक जीजाजी लण्ड का चूत पर दबाव बढ़ा रहे थे। मेरी आँखों में आँसू छ्लक आये थे। तभी लण्ड फिसलकर मेरी भगनासा को रगड़ते हुए मेरे पेट की ओर आ गया।. डर के मारे मुझे पता नहीं था कि लण्ड कहाँ गया। मेरी आह निकली।. जीजाजी बोले- अरे वैसे ही, अभी घुसा ही कहाँ है? मैं बोली- जीजाजी मुझे बहुत डर लग रहा है।. जीजाजी बोले- इसमें डरना काहे का, बस लण्ड तुम्हारी चूत को फाड़ेगा और तुम्हारे पेट में घुस जायेगा। जीजाजी ने ऐसे कहा जैसे कुछ भी नहीं होने वाला।. जीजाजी ने फिर लण्ड को मेरी चूत के छेद पर रखा और लण्ड को मेरी चूत में घुसाना शुरू कर दिया।. मेरी चूत में  फिर से लगने लगी।. मैं जीजाजी को रोकते हुए बोली- आ…आ… जीजाजी, लग रही है। जीजाजी, लग रही है, मर जाऊँगी… आआ… आ… और जीजाजी ने थोड़ा रुककर एक जोर का धक्का मारा।. मेरी चीख निकली- आआआआ… आआ…।. मेरी चूत की झिल्ली फट गई, खून निकल आया था। लण्ड करीब दो इंच अन्दर मेरी चूत में घुस कर फँस चुका था। मुझे ऐसा महसूस हो रहा था मानो कोई मेरी चूत को चाकू से काट रहा हो। मैं रोने लगी थी- आआआ… आ… जीजाजी… बहुत जोर से लग रही है।. जीजाजी के लण्ड का बीच का मोटा हिस्सा अभी और घुसना बाकी था।.
स्रोत:इंटरनेट