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Kahani Ek Pariwar Ki Family Sex Kahani 2

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अब कसी हुय़ चूत की दिवारों को इस उन्गली के नाखून से खुरचने लगी । हालांकि दामिनी भावना को और ज्यादा पीड़ा नहीं देना चाहती थी । कहीं ऐसा ना हो कि अत्यधिक आनन्द के मारे जोर से चीख पड़े और उनके पति जाग कर. यहां आ जायें । भावना भी होठों को दातों में दबाये ये सुख भरी तकलीफ़ सहन किये जा रही थी । अचानक से भावना छूटी । सैक्स में इतने ऊंचे बिन्दु तक पहुंचने के बाद भावना का शरीर उसके काबू में नहीं रह गया । रह. रह कर नितम्ब अपने आप ही उछलने लगे मानो किसी काल्पनिक लंड को चोद रहे हो । दामिनी पूरे यत्न से भावना की चूत पर अपने मुहं की पकड़ बनाये रख रही थी । लेकिन भावना कुछ क्षणों के लिये पागल हो चुकी थी । एक ही. साथ हंसने और रोने लगी । “हां दीदी हां । यहीं बस यहीं…और चाट ना प्लीज । उई मां.
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मैं गईईईई..आई लव यू डार्लिंग..” दामिनी के बदन पर हाथ फ़िराते हुये भावना कुछ भी बक रही थी । एक साथ आये कई आर्गेज्मों का नतीजा था ये । “कभी पवन भी मुझे इतना मजा नहीं दे पाया….
आह आह.. बस..” भावना ने दामिनी को अपने ऊपर खींचा और उसका चेहरा अपने चेहरे के सामने किया । दामिनी के गालों और होठों पर उसकी खुद की चूत का रस चुपड़ा हुआ था परन्तु इस सब से भावना को कोई मतलब नहीं था ।. ये वक्त भावना को धन्यवाद देने का था । दामिनी ने भावना को जोर से भींचा और अपने होठों को उसके होठों पर रख दिया । भावना भी अपनी जेठानी के पहलू में समा गई । दामिनी के स्तन उसके भारी भरे हुये स्तनों के. नीचे दबे पड़े गुदगुदी कर रहे थे । भावना को सहलाते हुये दामिनी पूछ बैठी, “क्या पवन ने ये सब किया था?” भावना ने ना में सिर हिलया । दोनों औरतों के बीच एक नया रिश्ता कायम हो चुका था । दामिनी थोड़ा सा शरमाई और भावना के पूरे बदन पर हाथ फ़िराते हुये सोचने लगी कि कहां से शुरु करे । पता नहीं, लेकिन दामिनी उसे वो सब देना चाहती थी जो एक मर्द एक औरत के बदन में ढूंढता है । भावना के हाथों ने दामिनी की सारी को पकड़ कर उसकी कमर पर इकट्ठा कर दिया । दोनों हाथों से दामिनी की खुली हुई विशाल गांड सहलाते हुये सोच रही थी कि अब उसे भी जेठानी की लंड चाटनी होगी ।भावना ने दामिनी को अपने ऊपर से हटने का इशारा. दिया । दामिनी अचंभित सी जब खड़ी हुई तो भावना ने उसकी अधखुली साड़ी को खींच कर उसके शरीर से अलग कर दिया । उसके सामने खड़ी औरत के चूचें उत्तेजना के मारे पत्थर की तरह कठोर हो गये थे । दोनों निप्पल भी. बिचारी तने रह कर दुख रहे होंगे । दामिनी ने अपने बाल खोल दिये । उसका ये रुप क्या औरत क्या मर्द, सभी को पागल करने के लिये काफ़ी था । भावना ने पेटीकोट के ऊपर से ही दोनों हथेलियों से जेठानी की चौडी गांड को दबोचा । थोङा उचक कर उसके होठों को अपने होठों की गिरफ़्त में ले लिया और अपनी जीभ को उसके मुहं मे अन्दर बाहर करने लगी । “लेट जाओ, मैं तुम्हारा बदला चुकाना चाहती हूँ.
मैं भी तुम्हें जी भर के प्यार करना चाहती हूं.
” भावना की इच्छा सुनकर दामिनी टेबिल और सोफ़े के बीच में अपनी खुली हुई साड़ी को बिछा उसी पर लेट गय़ी । “”पता नहीं जितना तुम जानती हो उतना मैं कर पाऊंगी या नहीं लेकिन मुझे एक बार ट्राई करने दो” भावना उसके ऊपर आती हुई बोली ।. पहले की भांति भावना ने फ़िर से अपने स्तनों को दामिनी के चेहरे के सामने नचाकर उसे सताना शुरु कर दिया । दामिनी ने गर्दन उठा उसके स्तनों को होठों से छुने की असफ़ल कोशिश की तो भावना खिलखिला कर हँस पड़ी ।. पीछे सरकते हुये भावना अब दामिनी की जांघों पर बैठ गय़ी और उसके पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया । दोनों हाथों से पकड़ कर पहले पेटिकोट को पैंटी की इलास्टिक तक खींचा और फ़िर पैंटी को भी पेटीकोट के साथ ही उतारने. लगी । दामिनी ने तुरन्त ही कमर उठा कर दोनों वस्त्रों को अपने भारी नितम्बों से नीचे सरकाने में मदद की । पैन्टी लंड के पास पूरी गीली हो चुकी थी तो उतरते समय चप्प की आवाज के साथ सरकी । अब सिर्फ़ कन्धों पर. झूलते खुले हुए ब्रा और ब्लाऊज के अलावा दामिनी भी पूरी तरह नन्गी थी । भावना ने प्यार से जेठानी की नाभी के नीचे काले घने बाल रहित मूषल लंड को निहारा जो करीब 8 इंच का था और निचे दो बडे अंडे जैसे अँडकोष ।. अपनी बहन जैसी जेठानी के सेक्सी औरती बदन पे ये पुरुषांग.
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जो एक लडके की माँ भी है, ये विचार मन मेँ आते ही भावना के मुहं में ढेर सारी लार आने लगी । हाय राम ये कैसी औरत बनाई है? धीरे से भावना ने दामिनी की एक टांग को उठा कर टेबिल पर रख दिया और दूसरी को सोफ़े पर ।. भावना तो उन दो उठी हुई टांगों के बीच में घुस कर उस बिचारी लंड पर भूखी शेरनी की तरह टूट पड़ी । भावना का अनुभव भले ही कम था परन्तु तीव्र इच्छाशक्ति के कारण अपनी प्यारी जेठानी की लंड को जी भर के चाट सहला. रही थी । अब किसी को प्यार करने के लिये कोई कायदा कानून तो होता नहीं भाई और फ़िर ये तो खेल ही अवैध संबंधों का चल रहा था । भावना के इस जोश भरे धावे को अपनी तने लंड पर सहना दामिनी के लिये जरा मुश्किल हो. रहा था । लेकिन भावना जो जैसे जानवर हो गयी थी । बलपूर्वक दामिनी को लिटाये रख कर क्या जांघ, क्या लंड, क्या अंडकोष, क्या गांड सब जगह अपनी बेरहमी के निशान छोड़ रही थी । “भावना, जरा आराम से, प्लीज” । दामिनी ने याचना की । पर भावना के कान तो बन्द हो गये थे । मुहं से गुर्राहट का स्वर निकल रहा था और लपलपाती जीभ जेठानी की लाल सुपाडे पर फिरा रही थी । अपने दांतों का भी भरपूर इस्तेमाल कर. रही थी लेटी पड़ी दामिनी पर । पहले जेठानी की अन्दरुनी जांघ के चर्बीदार हिस्से को जी भर के खाया । फ़िर काले झाँटो से भरी लंड को मुठियाती हुई बडे-बडे अंडोँ को चाटने लगी । और तुरन्त ही घांव पर मरहम लगाने. के उद्देश्य से अपनी मुंह मेँ दामिनी का पूरा का पूरा अंडकोष मुंह में भर लिया ।. दामिनी का दर्द और उत्तेजना के मारे बुरा हाल था । भावना अगर ऐसे ही करती रही तो उसकी लंड अगले दो दिन तक किसी बुर चोदने के काबिल नहीं रहेगा । होंठों से थूक बहकर कान तक आ गया था । दामिनी ने दोनों हाथों को. ऊपर उठा, एक से टेबिल और दूसरे से सोफ़े का किनारा थाम लिया । उधर भावना भी तरक्की पर थी । भावना ने तो एक उन्गलि गांड के अन्दर डाली थी । भावना ने एक साथ दो उन्गलियां दामिनी की छेद घुसा दी तो उसकी मुहं से जोर से आह निकली । लेकिन भावना ने इस सब की परवाह किये बगैर अपना दुसरी हाथ से जेठानी की विशाल लंड को ऊपर-निचे करना जारी रखा । दामिनी का शरीर भी इस हस्त चुदाई की ताल के साथ ऊपर नीचे होने लगा । तभी भावना. को याद आया की कैसे उसने अमन की सुपाडा को चूसा था और फ़िर वो किस तरह से झड़ रहा था ।.
स्रोत:इंटरनेट