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Kahani Ek Pariwar Ki Family Sex Story 2

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अपने चेहरे को भावना के चेहरे से सटाते हुये दामिनी ने दूसरा हाथ भी भावना के दूसरे स्तन पर जमा दिया । दोनों पन्जों ने भावना के यौवन कपोतों को मसलना शुरु कर दिया । भावना के स्तन आकार में दामिनी के स्तनों. से कहीं बड़े और भारी थे । भावना ने पीछे हटते हुये दामिनी और अपने बीच में थोड़ी जगह बना ली ताकि दामिनी आराम से उसके दुखते हुये मुम्मों को सहला सके । उसका चेहरा दामिनी के गालों से रगड़ रहा था और होंठ. थरथरा रहे थे । भावना की गर्म सांसे दामिनी के चेहरे पर पड़ रहीं थीं । दोनों के होंठ एक दूसरे की और लपके और अगले ही पल दोनों औरतें प्रेमी युगल की भांति एक दूसरे को किस कर रही थीं । दोनों की अनुभवी जीभ. एक दूसरे के मुहं में समाई हुई थी । “तुम्हारे मुम्मे तो मेरे मुम्मों से भी कहीं ज्यादा भरे हुये है, जी भर के चूसा होगा इनको देवर जी ने” दामिनी ने अपनी स्तनों को ब्लाऊज के ऊपर से ही दबाते हुये बोली । भावना दामिनी के मन की बात समझ गई और तुरन्त ही जेठानी की ब्लाऊज के सारे बटन खोल कर पीछे पीठ पर ब्रा के हुक भी खोल दिये दामिनी के भारी भारी चूचें अपनी जामुन जैसे बड़े निप्पलों के साथ बाहर को. उछल पड़े । भावना जीवन में पहली बार किसी दुसरी औरत के स्तनों को देख रही थी । कितने मोटे और रसीले है ये । दामिनी ने दोनों हाथों में उठा कर अपने चूंचे भावना की तरफ़ बढ़ाये । भावना झुकी और तनी हुई. निप्पलों पर चुम्बनों की बारिश सी कर दी । “ओह, भावनाआआआ” दामिनी आनन्द से सीत्कारी । भावना ने एक निप्पल अपने मुहं मे ही दबा लिया । उसकी जीभ जेठानी की तनी हुई घुंडी पर वैसे ही नाच रही थी जैसे वो रोज रात पति की गुलाबी सुपाड़े पर फ़ुदकती थी । पहली बार एक औरत के साथ । नया ही अनुभव था ये तो । दामिनी खुद एक स्त्री होने के नाते वो ये जानती थी की भावना क्या चाहती है । भावना के बदन में भी अलग ही. आकर्षण था । उसके शरीर में भी वही जोश और उत्तेजना थी । ये सोचते सोचते ही दामिनी ने भी भावना के निप्पल को चबाने लगी ।. “आऊच…आह्ह्ह” भावना के मुहं से दबी हुई चीख भी निकली । दामिनी अब उस बिचारे निप्पल पर अपने दातों का प्रयोग कर रही थी । भावना अपना दूसरा स्तन हाथ में भर लिया । दामिनी ने भावना का थूक से. सना निप्पल छोड़ दिया और फ़िर से भावना के निप्पल को मुहं में भर लिया और पहले से भी ज्यादा तीव्रता से चुसाई में जुट गयी मानो निप्पल नहीं लंड हो जो थोड़ी देर में ही अपना पानी छोड़ देगा ।. “आआआह्ह्ह्ह्ह्ह॥ दीदी, प्लीज जोर से चूसो, हां हां”, भावना दामिनी को उकसाते हुये चीखी । उसकी चूत में तो बिजली का करंट सा दौड़ रहा था । “यहां, देखो यहां घुसती है मर्द की जुबान”, भावना ने फ़ुर्ती के साथ दामिनी कि साड़ी और पेटीकोट ऊपर कर पैन्टी की कसी हुई इलास्टिक में हाथ घुसेड़ दिया । पैन्टी को खींच कर उतारने का प्रयास किया तो भावना की हाथ में कोई बडे मांस पिंड जैसा चीज लगी ।. उसने उपर जेठानी की तरफ देखा, दामिनी मुस्करा रही थी । तभी दामिनी ने खुद ही साड़ी और पेटिकोट को कमर पर इकट्ठा कर उन्गली फ़सा अपनी पैन्टी नीचे जांघों तक सरका दी, भावना की आँखेँ एकदम खुले के खुले रह गए । पहली बार भावना को इतना बडा सदमा लगा । दामिनी के पैन्टी निचे सरकते ही एक 8 इंच का लम्बा और मोटा लंड बाहर निकल आया, साथ मेँ बडे-बडे अंडे जैसे अंडकोष । दामिनी के लंड घने काले झाँटोँ से भरे थे । क्या मनमोहक द्रुश्य था भावना के सामने । उसकी सगी बहन जैसी जेठानी पूरी तरह से औरत नहीँ थी । स्त्री के शरीर मेँ पुरुषांग । स्त्री और पुरुष के अद्भुतपूर्व मिश्रण थे दामिनी की बदन मेँ । और दामिनी के लंड के तो. क्या कहने! 8 इंच लम्बा और 4 इंच मोटा था दामिनी की लंड । इतना बडा लंड जिन्दगी मेँ पहली बार देख रही थी भावना । अपनी पति पवन का तो अपनी भाभी के लंड का आधा ही होगा । भावना बडे प्यार से जेठानी की लंड को. मुठ्ठी मेँ भर कर बडे-बडे अंडकोष पर जिभ फिराते हुए उपर दामिनी की मुखडे को देखने लगी । दामिनी की चेहरे पर मुस्कराहट था ।”ये क्या है दीदी ? और अमनननन…..कैसा….
?” भावना लंड को चाटती हुई पुछी । “ये बहुत लम्बी कहानी है किसी दिन बैठ के बताउंगी ।”. दामिनी बोली ।”फिर भी कुछ तो बताईये, दीदी । “भावना ने जिद पे उतर आई ।”बस इतना समझ लो कि मेरी ख्वाईशेँ, मेरी तमन्ना पूरी हुई है । पिछले पांच साल हो गए मेरी इस बदलाव को ।” “मतलब मेरी प्यारी जेठानी पांच सालोँ से साडी के निचे लंड लिए इसी घर मेँ घुम फिर रही हैँ ?” भावना आश्चर्य होकर पुछी ।”हां छोटी, मैँ पिछले पांच सालोँ से लंड लिए अपनी पति और बेटे के साथ जिंदगी गुजार रही हुं । तुम्हारे जेठ जी को ये मालुम है और खुशी-खुशी मुझे स्वीकारा है और अब मैँ इस बदलाव यानि की मेरी लंड का भरपुर मजा उठाना चाहती हुं ।” दामिनी ने बात पूरी की ।”पर दिदी, क्या अमन को ये मालुम है कि उसकी प्यारी माँ की मर्द के जैसा लंड है, उसकी माँ बाकी महिलाओँ से अलग है ? “”नहीँ, यही डर मुझे हमेशा लगी रहती है! कि कब उसे ये बात पता लग जाएगा ।” दामिनी ने शंका जाहिर करते हुए कहा ।. “नहीँ दीदी, कुछ नहीँ होगा मैँ उसे मना लुंगी बस अब के सोचिए दीदी आपकी ये विशाल लंड देख कर मुझसे और रहा नहीँ जाता ।” कहती हुई भावना ने जेठानी की तने लंड को मुठ्ठी मेँ भर ली । इधर दामिनी ने फ़िर से भावना के स्तनों को जकड़ा उधर भावना भी पूरी तैयारी में थी । दामिनी की समझ में तो कुछ भी नहीं आ रहा था और भावना अपने जिस्म में उमड़ती उत्तेजना से नशे में झूम रही थी ।. भावना के कपडे पूरी तरह से अस्त व्यस्त थे । भावना उसकी दोनों टांगों के बीच में बैठी हुई थी । उसकी साड़ी का पल्लू बिस्तर पर बिछा हुआ था । लो कट के ब्लाउज से विशाल स्तनों के बीच की दरार साफ दिख रही थी ।. आखिरकार भावना ने खुद ही कमरे में प्रवेश किया था और अब वो जेठानी की लंड को मुँह में लेकर चूस रही थी । दामिनी ने वापस अपना हाथ भावना के सिर पर रख कर उसकी मुंह में लंड घुसेडने का प्रयास कर रही थी । इस. जोर जबरदस्ती में दामिनी की फुंफकार मारता लंड भावना के सिर, बालों और सिन्दूर से रगड खा के रह गया । अपना लक्ष्य चूक जाने से दामिनी का लंड और भी तन गया और उसके मुंह से एक आह सी निकली । भावना ने नीचे झुककर देखा तो ब्लाउज का लो कट गला, दो भारी स्तनों और उनके बीच की दरार का शानदार दृश्य दामिनी को दिखा रहा था । भावना का मंगलसूत्र इस वक्त उसके गले से लटका हुआ दो बङी बङी गेंदों के बीच में झूल रहा था । भावना ने तुरन्त ही अपनी शादी की इस निशानी को वापिस से ब्लाउज में डाला और वहीं पास पडे साड़ी के पल्लू से खुद को ढकने की कोशिश की । तब तक दामिनी दोनों हाथों से भावना के उरोजों को बेदर्दी से मसल दिया ।.
स्रोत:इंटरनेट