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Kahani Ek Pariwar Ki Family Sex Story

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एक खुशहाल परिवार में भी कितने ग़म होता है। एक ऐसा ग़म है सेक्स की कमी या फिर सेक्स की सच्ची संतुष्टि। ये अमीर लोग बोर भी जल्दी हो जाते है न। इनको हमेशा कुछ नया भी ट्राय करनी की इच्छा भी तो रहती है। आज. एक ऐसे ही परिवार की family sex story शुरू करने जा रहा हूँ.. Hindi Sex Story के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. पार्ट 4. पार्ट 5. पार्ट 6. मुम्बई के बडे शहर मेँ दामिनी अपने पति नरेश और एकमात्र 19 साल का बेटा अमन के साथ रहती थी । बडा खुशहाल परिवार था उसका । नरेश का छोटा भाई पवन अपनी पत्नी के साथ बाहर रहता था । एक दिन भावना और पवन अपने बडे. भाई नरेश और दामिनी के घर पर आये हुये थे । उस वक्त सब लोग एक हत्या की कहानी पर आधारित जो इस फिल्म देख रहे थे । आम मसाला फिल्म की तरह इस फिल्म में भी कुछ कामुक दृश्य थें । एक आवेशपूर्ण और गहन प्यार. दृश्य आते ही अमन कमरें को छोड़ कर जा चुका था । नरेश और दामिनी दृश्य के आते ही और लड़के के कमरा छोड़ने के कारण जम से गये थे ।. घर के ऊपर और सब सोने के कमरें थे और और शाम को जब से ये लोग आये थे, कोई भी ऊपर नहीं गया था । नौकर सामान लेकर आया था और नरेश, पवन शराब के पैग बना रहे थे । महिलायें भी इस वक्त उनके साथ बैठ कर पी रही थी । हालांकि परिवार को पूरी तरह से माता पिता की रूढ़िवादी चौकस निगाहों के अधीन रखा गया था । बड़ों के आसपास होने पर महिलायें सिंदूर, मंगलसूत्र और साड़ी परंपरागत तरीके से पहनती थी । पवन के बड़े भाई होने के नाते, भावना के लिए, नरेश भी बङे थे और वह अपने सिर को उनकी उपस्थिति में ढक कर रखती थी । लेकिन चूंकि, दोनों पवन और नरेश बड़े शहरों में और बड़ी कंपनियों में काम करने वाले है, सो उनके अपने घरों में जीवन शैली जो बड़े पैमाने पर उदार है । भावना और दामिनी दोनो हो बङे शहरों से थी अतः उनके विचार काफी उन्मुक्त थे । लेकिन ये सब के चलते एक बहुत बडा राज छुपा हुआ था उस घर मेँ जो सिर्फ नरेश और भावना को ही मालुम. था । दोनों महिलायें हमेशा नये फैशन के कपङे पहन कर ही यात्रा करती थी, खासकर जब घर के माता पिता साथ नहीं होते थे । हालांकि, दोनों की उम्र में दस साल का अंतर है, दामिनी अपनी वरिष्ठता का उपयोग करते हुए घर में नये फैशन की सहमति बनाती थी । इस प्रकार, बिना आस्तीन के ब्लाउज, पुश ब्रा, खुली पीठ के ब्लाउज और मेकअप का उपयोग होता था । हालांकि, यह स्वतंत्रता केवल छुट्टीयां व्यतीत करते समय के लिये ही दी गई है । सामान्य दिनचर्या में ऐसी चीजों के लिये कोई जगह नहीं थी । वे अक्सर सेक्स जीवन की बातें आपस में बाटती थीं और यहाँ से भी दोनों में काफी समानतायें थीं । दोनों ही पुरुष बहुत प्रयोगवादी नहीं थें और सेक्स एक दिनचर्या ही था । लेकिन अगली पीढ़ी का अमन बहुत अलग था । वह एक और अधिक उदार माहौल में, भारत के बड़े शहरों में बङा हुआ था । लड़का बड़ा हो गया था और बहुत जल्द ही अब एक पुरुष होने वाला था । ये बात भी भावना ने इस बार नोट की थी । फिल्म में प्रेम दृश्य आने पर वह कमरा छोड़कर गया था इसी से स्पष्ट था उसें काफी कुछ मालूम था । बचपन. में गर्मीयों की छुट्टी अमन भावना के यहां ही बिताता था । एक छोटे लड़के के रूप में भावना उसको स्नान भी कराती थी । कई बार पवन की कामोद्दीपक उपन्यास गायब हो जाते थे वह खोजने पर वह उनको अमन के कमरे में. पाती थी । इस बारे में सोच कर ही वह कभी कभी उत्तेजित हो जाती थी पर अमन के एक सामान्य स्वस्थ लड़का होने के कारण वह इस बारे में चुप रही । अमन के कमरा छोडने के फौरन बाद, नरेश और पवन भी थकने का बहाना बना कर जा रहे थे ।. भावना को कोई संदेह ना था कि ये क्या हो सकता है । दामिनी से उसकी नजरें एक बार मिली थी । पर दामिनी अपनी चेहरे पर एक शरारती मुस्कराहट भरी और सीढ़ियों पर चल दी । शराब का नशा होने के बाद भी फिल्म का असर. भावना पर काफी अच्छा रहा था । फिल्म के उस प्रेम दृश्य में आदमी उस औरत को जानवरों की तरह चौपाया बना कर चोद रहा था । अपने कॉलेज के दिनों में भावना ने इस सब के बारें में के बारे में अश्लील साहित्य में. पढ़ा था और कुछ अश्लील फिल्मों में देखा भी था लेकिन अपने पति के साथ कभी इस का अनुभव नहीं किया । इस विषय की चर्चा अपने पति से करना उसके लिये बहुत सहज नहीं था । उनके लिए सेक्स शरीर की एक जरूरी गतिविधि थी. । भावना ने अपने आप को चारों ओर से उसके पल्लू से लपेट लिया । इन मादक द्रुश्य के प्रभाव से उसे एक कंपकंपी महसूस हो रही थी । इस वक्त वह सोच रही थी कि पवन अब कहां हैं? भावना को नींद आ रही थी और उसने ऊपर. जाकर सोने का निर्णय लिया ।. ऊपर जाते ही न जाने कहाँ से जेठानी आ गयी, “सो, कैसा चल रहा है सब कुछ”, भावना ने पूछा । “क्या कैसा चल रहा है?” दामिनी ने शंकित स्वर में पूछा । “वहीं सबकुछ, आपके और भाई साहब के बीच में..” भावना ने दामिनी को कुहनी मारते हुये कहा । दोनों के बीच सालों से चलता आ रहा था इस तरह का मजाक और छेड़खानी । “आह, वो”, दामिनी ने दिमाग को झटका सा दिया । “दीदी, क्या हुआ?” भावना के स्वर ने दामिनी के विचारों को तोड़ा । “नहीं, कुछ नहीं । आओ, हॉल में बैठ कर बातें करते हैं” । साड़ी के पल्लू से अपने हाथ पोंछती हुई दामिनी बाहर हॉल की तरफ़ बढ़ गई । हॉल में इस समय कोई नहीं था । दोनों मर्द अपने अपने कमरों मे सोने चले गये थे और अमन का कहीं अता पता नहीं था । दामिनी सोफ़े पर पसर गई और भावना उसके बगल में आकर जमीन पर ही बैठ गयी ।. “आपने जवाब नहीं दिया दीदी ।”. “क्या जवाब?” दामिनी झुंझला गयी । ये औरत चुप नहीं रह सकती । भावना के कन्धे पर दबाव बढ़ाते हुये दामिनी ने कहा ।. “आपने मेरी बरसों से दबी हुई इच्छाओं को भड़का दिया है इस सिनेमा के बारे में सोचने भर से मेरी चूत में पानी भर रहा है ।” भावना बोली । दामिनी ने भावना की ठोड़ी पकड़ कर उसका चेहरा ऊपर उठाया, बोली “उदास मत हो छोटी, आज मैँ हुं ना, आज जेठानी तेरी बुर से पानी निकालेगी । भावना दामिनी के शब्दों से दंग रह गयी,”क्या कह रही हो दीदी? ।” और भावना को हाथ पकड़ कर अपने पास खींचा और बाहों में भर लिया । भावना के हाथ दामिनी की पीठ पर मचल रहे थे । जेठानी के बदन से उठती आग वो महसूस कर सकती थी । उसके हाथ अब भावना के स्तनों पर थे । अंगूठे से वो. अपनी देवरानी के निप्पल को दबाने सहलाने लगी । अपनी बहन जैसी जेठानी से मिले इस सिग्नल के बाद तो भावना के जिस्म में बिजलियां सी दौड़ने लगीं । दामिनी भी अपने ब्लाऊज और साड़ी के बीच नन्गी पीठ पर भावना के. कांपते हाथों से सिहर उठी ।.
स्रोत:इंटरनेट