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Kahani Ek Pariwar Ki Family Sexy Stories 3

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ठीक इसी तरह से अगर अमन मेरी चूत पर भी जीभ फ़िराये तो ? पहली बार तो बस चूम कर रह गया था । आज इसको सब कुछ सिखा दूंगी, यहीं इसकी मां के सामने । और इस तरह से दामिनी के लिये भी रोज अपनी लंड चुसाई का इन्तजाम हो जायेगा । इन्ही ख्यालों में डूबी हुय़ी भावना अमन की सीने को छोड़ जेठानी की विशाल गांड को सहलाने लगी । और दामिनी अधीरतापूर्वक अपने फ़ड़कते लंड को अमन के मुख में पागलों की भांति पेल रही थी ।. अमन ने हाथ बढ़ा मम्मी के दूसरे निप्पल को मसलना चाहा परन्तु भावना ने बीच में ही उसका हाथ थाम उसे रोक लिया । क्षण भर के लिये मां बेटे को छोड़ भावना बिस्तर के सिरहाने पर जा कर बैठ गयी । मम्मी ने चारों. तरफ़ नज़र घुमा चाची को देखने का असफ़ल प्रयास किया । अपनी जांघों को अमन की पीठ पर लपेटते हुये दामिनी बेटे के मुहं को चोदने लगी । माथे पर एक गीले गरम चुम्बन से मम्मी की आंखें खुलीं । भावना ने उनके पीछे. से आकर ये आसन बनाया था । अपने खुले रेशमी बालों को मम्मी के स्तनोँ पर फ़ैला, होठों को खोल कर उसके होठों से भिड़ा दिया । भावना चाची ने जब अपनी थूक सनी जीभ मम्मी के मुख में डाली तो जवाब में मम्मी ने भी लपककर अपनी जुबान को भावना चाची के गरम मुख में सरका दिया । दोस्तों सम्भोग के समय होने वाली थूक के आदान प्रदान की ये. प्रक्रिया बड़ी ही उत्तेजक एवं महत्वपूर्ण होती है । चाची के स्तन मम्मी के सिर पर टिके हुये थे और व उनको अपने मुहं में भरने के लिये उतावला हो रही थी । चाची का मंगलसूत्र उसके गालों से टकराकर ठंडा अहसास. दे रहा था और साथ ही साथ उनके शादीशुदा होने की बात भी याद दिला रहा था । शायद इन्हीं विपरीत परिस्थितियों से निकल कर मम्मी भविष्य में जबर्दस्त चुदक्कड़ बन पायेंगी और फ़िर भीषण चुदाई का अनुभव पाने के लिये. घर की ही एक भद्र महिला से ज्यादा भरोसेमंद साथी भला कौन मिलेगा ? चाची अब होठों को छोड़ अब मम्मी के उरोजोँ को चूमना लगीं । आगे सरकने से उनके स्तन मम्मी के चेहरे पर आ गये थे । जब मम्मी के होठों ने गदराये. चूचों पर निप्पलों को तलाशा तो स्तनों मे अचानक उठी गुदगुदी से भावना हंस पड़ी । कमरे के अन्दर का वातावरण अब तीनों प्राणियों के लिये काफ़ी सहज हो चला था. अमन अब सारी शर्म त्याग करके पूरी तरह से दोनों औरतों के मस्त बदन को भोगने के लिये तैयार हो चुका था । दामिनी के दिमाग से भी बन्धन, मर्यादा और लज्जा जैसे विचार गायब हो चुके थे । अब उन्हें भी अपने बेटे के साथ साथ किसी तीसरे प्राणी के साथ प्रणय क्रीड़ा करने में भी कोई संकोच ना था । भावना चाची की शरारतें भी रुकने का नाम नहीं ले रही थी । मम्मी के पेट का सहारा ले वो बार बार शरीर ऊपर को उठा अपने चूचों को. मम्मी के होठों की पहुंच से दूर कर देतीं । कभी मम्मी की जीभ निप्पलों पर बस फ़िर कर रह जाती तो बिचारे और उत्तेजित हो कर कड़क हो जाते । खुद ही उन दोनों तरसते यौवन कपोतों को जेठानी के मुहं में ठूस देना. चाहती थी । और दामिनी ने यहां भी उसे निराश नहीं किया । चाची की उछल-कूद से परेशान मम्मी ने अमन के सिर को छोड़ कर दोनों हाथों से चाची के झूलते स्तनों को कस कर पकड़ा और दोनों निप्पलों को एक दूसरे से भिड़ा. कर एक साथ दातों के बीच में दबा लिया मानों कह रही हो कि अब कहां जाओगी बच कर । भावना आंखें बन्द करके सर उठाये सिसक सिसक कर मम्मी की करतूतों का मजा ले रही थी । दामिनी आज उनके साथ दुबारा से सहवास रत थी ।. भावना ने जब आंखें खोली तो दामिनी को अपनी तरफ़ ही देखते पाया । उसने अमन के मुहं में झटके लगाना बन्द कर दिया था । कमर पर लिपटी उसकी टांगें भी जब खुल कर बिस्तर पा आ गयी थी । जब भावना ने सिर उठाया तो उसके. चेहरे पर छाई वासना और तन्मयता से दामिनी का दिल टूटने लगा । दोनों ने काफ़ी देर तक एक दूसरे की आंखों मे देखा । अमन उनके निप्पलों पर अपने होंठों से मालिश कर रहा था और इसी वजफ़ से रह रह कर चाची की चूत में. बुलबुले उठ रहे थे । अपने प्लान की कामयाबी के लिये भावना को अब आगे बढ़ना था ।. भावना ने दामिनी के सिर के पीछे यन्त्रवत उछलती अपनी कमर को रोका और आगे सरक आई । अमन ने मम्मी के लंड को कस के मुट्ठी में जकड़ लिया और होठों को सिर्फ़ सुपाड़े पर गोल गोल फ़िराने लगा । भावना ने भी. कुहनियों पर खुद को व्यवस्थित करते हुये भारी गांड को जेठानी के चेहरे पर जमा दिया । इस समय भावना की गीली टपकती चूत दामिनी के प्यासे होंठों से काफ़ी दूर थी । और मम्मी उत्तेजना में जीभ को घूमा घूमा कर. चाची के तर योनि-प्रदेश तक पहुंचने का प्रयास कर रही थी इधर भावना चाची ने अमन को उसके हाल पर छोड़ अपना ध्यान जेठानी दामिनी के ऊपर लगा दिया । दामिनी के चेहरे के पास जा भावना ने उनके गालों को चूमा ।. दामिनी ने भी जवाब में भावना के दोनों होठों को अपने होठों की गिरफ़्त में ले लिया । दोनों औरते फ़िर से एक दूसरे में तल्लीन हो गईं । अमन ने सिर उठा कर देखा तो उसकी मां और चाची जैसे किसी दूसरे ही संसार. में थी ।. दामिनी के मुहं में जीभ फ़िराते हुये भावना अमन की लार का स्वाद महसूस कर सकती थी उधर दामिनी भी भावना की जीभ पर खुद उसका, भावना का और अमन का मिला जुला रस आराम से चाट पा रही थी । आज की रात तीनों ही प्राणी एकाकार हो गये थे । चाची ने दुबारा से मम्मी के खड़े मुस्टंडे लंड के एक तरफ़ अमन के होठों को जमा दूसरी तरफ़ से खुद पूरा मुहं खोल गरमा गरम रॉड को जकड़ लिया । अब इस तरीके से वो दोनों एक दूसरे को किस भी कर. सकती थीं और दामिनी का तन्नाया पुरुषांग भी उनके चार गरम होठों के बीच में आराम से फ़िसल सकता था । मम्मी ने जब ये दृश्य देखा तो मारे जोश के उसने भावना चाची के दोनों नितम्बों को कस के जकड़ लिया । लेकिन. चाची की चूत से बहते झरने को वो अपने प्यासे होठों तक नहीं ला पायी । गांड को नीचे खीचने पर भावना के होंठ मम्मी के लंड का साथ छोड़ दे देते थे और भावना चाची ये होने नहीं दे रही थीं । खैर मम्मी ने भावना की. कमर को चूमना चाटना चालू कर दिया । भावना पूरी तन्मयता से जेठानी के मोटे लंड पर लार टपका उसे होठों से मल रही थी । अमन भी जल्द ही ये कला सीख गई । दोनों दामिनी के उस कड़कड़ाते पुरुषांग को आइसक्रीम की तरह. दोनों तरफ़ से एक साथ चूस रही थीं । बीच-बीच में चाची और अमन के होंठ कभी मिलते तो एक दूसरे को किस करने लगते और यकायक मम्मी की लंड पर दवाब बढ़ जाता । इतनी पूजा करने के बाद तो दामिनी के लंड में जैसे नया. स्वाद ही पैदा हो गया ।.
स्रोत:इंटरनेट