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Kahani Ek Pariwar Ki Family Sexy Story 2

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दामिनी ने अपने मुरझे लंड को हाथ मेँ लेकर सहलाने लगी । नरेश बिना रुके ताबड़ तोड़ धक्के लगाने लगा । दामिनी भी फ़िर से उत्तेजित हो चली थीं । नरेश ने अब गांड को छोड़ दामिनी के ऊपर झुकते हुये उनके मुम्मे. एक हाथ में भर लिये और दुसरे हाथ से अपनी पत्नी की लंड को मुठियाने लगा । दामिनी की गांड को अपनी कमर से चिपका कर पवन जोर जोर से मुठियाने लगा । “पता है, भावना कितना चीख चिल्ला रही थी । शर्म और उत्तेजना की मिली जुली भावना ने दामिनी के दिलोदिमाग को अपने काबू में कर लिया था । कुछ ही क्षणों में नरेश के लंड ने उलटी कर दी.. दामिनी की गांड में से सिकुड़ा हुआ लंड अपने आप बाहर निकल आया और व तुरन्त ही दूसरी तरफ़ करवट बदल कर सो गया । खैर, एक ही रात मेँ इतनी चोदाई के कारण दामिनी का जिस्म थक कर चूर हो चुकी थी । लेकिन ये भी सच है कि आज जीवन में पहली बार उनको मालूम हुआ था कि चुदाई में तृप्ति किसे कहते हैं । दामिनी ने करवट बदला और सोने की कोशिश करने लगी । अपने देवरानी भावना को पूरी तरह चोदने के बाद अगली सुबह दामिनी उठीं तो उसकी पूरे बदन में मीठा मीठा दर्द हो रहा था । कमरे में कोई नहीं था । पति. नरेश कभी के उठ कर छोटे भाई के साथ सुबह की सैर के लिये जा चुके थे । दामिनी हैंग ओवर (शराब पीने के कारण अगली सुबह व्यक्ति का सिर दुखता है, इसी को हैंग ओवर कहते है.
) की वजह से सिर को दबाये चादर के नीचे बिस्तर में लेटी हुईं थीं । थोड़ा सामान्य हुईं तो पिछली रात की बातें याद आने लगीं । शराब के नशे मेँ कैसे एक अश्लील सिनेमा से उनके उत्तेजना बढीँ और अपनी लंड से पहली बार अपनी देवरानी की झांटेदार बुर की. घनघोर चुदाई का आनन्द उठाया था और उन दोनों की आवाजें सुनकर अमन खुद दरवाजे तक चला आया था । इसी रात, जीवन में पहली बार पतिदेव ने भी पीछे से गांड मारी थी । अमन के बारे में सोचते ही उसे याद आया कि व घर की बडी बहु है और उसे अब तक उठ जाना चाहिये था । रात में जो कुछ भी हुआ वो अब उतना गलत नहीं लग रहा था । शायद उनकी भाग्य में अपनी देवरानी के द्वारा अपने लंड को मर्द बनाने का सौभाग्य लिखा था । पहली बार भावना. की बुर चोदी थी, इससे पहले हस्तमैथुन से और पति के द्वारा लाए गए एक फ्लॉसलाईट(मर्दोँ के हस्तमैथुन यन्त्र, एक नल जैसे चिज मेँ लंड डाल के पम्पिँ किया जाता है ) से अपनी लंड की गरमी को शांत करती थी । बूर चोदने मेँ मिला सुख दामिनी पहले कभी नहीँ पाई थी ।. कमरे में बिखरे हुये कपड़े इकट्ठे करते दामिनी को अब सब कुछ सामान्य लग रहा था । खैर, अब उनको एक संस्कारी बहु की तरह नीचे रसोई में जाकर देवरानी का हाथ बटाना था । उधर ये शंका भी कि शायद अमन ने कल रात को दोनों को संभोग करते देख लिया था… दामिनी के मन में डर पैदा कर रही थी । दामिनी रसोई में घुसी तो भावना सब के लिये चाय बना रही थी । “गुड माँर्निंग, दीदी!”, “ओह, गुड माँर्निंग भावना ।” दामिनी ने जवाब दिया । तभी अमन वहां पानी लेने आ गया । दामिनी तो जड़वत रह गई । कहीं अमन ने सच में अपनी माँ को भावना की बुर मेँ चोदते देख तो नहीं लिया, या वो सिर्फ़ अन्दाजा लगा रही हैं । “सो, कैसा रहा सब कुछ माँ ।” अमन ने सामान्य बनते हुये पूछा । “बेटा, कल शाम को शराब पीने के बाद, हम सब को थोड़ा नशा हो गया था ।” कहते हुये दामिनी के हाथ काँप रहे थे । “कल रात को मजा आया कि नहीं ।” आखिरकार अमन अपना गुस्सा जाहिर कर ही डाला । अब शक की कोई गुन्जाईश नहीं थी की अमन ने कल रात मम्मी और चाची का चोदाई देख लिया था और मम्मी की मूषल लंड को भी । “देखो. बेटा, ये सब गलती से हुआ ।” अब दामिनी भी टूट गई । दिल जोरो से धड़क रहा था और तेजी से चलती सांसो से सीना भी ऊपर नीचे हो रहा था । अमन कुछ नहीँ बोला और सिधे अपने कमरे मेँ चला गया । शर्म के मारे दामिनी के दोनों गाल लाल हो गये थे ।. अमन बचपन से अपने माता पिता के साथ एक ही कमरे में सोता आया था । जब वो तेरह साल का हुआ तो एक दिन दामिनी को उसके बिस्तर में कुछ धब्बे मिले । उस दिन से उसने अमन का दूसरे कमरे में सोने का इन्तजाम कर दिया. और साथ ही उसे नहलाना और उसके कपड़े बदलना भी बन्द कर दिया ।. अपनी इकलौते बेटे की मन से सारे उलझनोँ को मिटाना होगा । और अब दामिनी को आज रात तक चैन नहीं लेने देगा । नरेश ने ऑफ़िस का कुछ जरूरी काम बता वहां से विदा ली । सवेरे जब चाय बना कर उसने सब को आवाज लगाई तो. अमन सबसे आखिर में पूरी तरह से तैयार हो कर डाईनिंग टेबिल पर आया था और पूरे दिन के लिये कॉलेज जाने का बहाना बना कर निकल गया और फ़िर दामिनी के सामने नहीं आया । दामिनी समझ गई ये सब पिछले रात भावना को. चोदने का नतीजा जो अमन ने देख लिया था । अमन को उसकी रहस्य का पता चल गया था । दामिनी अपने कमरे में बैठी कुछ सोच रही थी । नरेश सो रहे थे । आज का पूरा दिन मानसिक और शारीरिक उथल पुथल से भरा रहा था । दामिनी. ने आज पूरे दिन अमन पर नज़र रखी थी । अमन दिन भर उनसे बातेँ तक नहीँ किया । एक वास्तविकता ये भी थी कि वो अमन की मां थी । ममता और वासना की मिली जुली भावनाओं से दामिनी के दिमाग में हलचल सी मची हुई थी ।. लेकिन जल्द ही अपने को काबू में कर लिया । दिमाग अब सिर्फ़ अमन के बरताव के बारे में सोचने लगा । बेचारा क्या सोच रहा होगा अपने माँ के बारे मेँ । माँ औरत है या मर्द । इन सब विचारों से दामिनी का शरीर कांप. रहा था । अब निर्णय की घड़ी पास ही थी । दामिनी अमन के कमरे मे दबे पांव घुसी । आज रात अपने बच्चे का सारा उलझनेँ दुर करना चाहती थी । रात होने का इंतजार करने लगी ।. रात को जब थोड़ी देर के लिये दामिनी की आंख भी लग गयी । अचानक अमन के कमरे से कुछ आवाज आयी तो वो जाग गयी, धीरे से वो कमरे के अन्दर दाखिल हुयी और अमन के बिस्तर के पास पहुँच गयी । आंखें जअब अन्धेरे की अभ्यस्त हुयीं तो देखा कि अमन चादर के अन्दर हाथ डाले किसी चीज को ज़ोर ज़ोर से हिला रहा था । अमन, कमरे में अपनी मां कि मौजूदगी से अनभिज्ञ मुट्ठ मारने में व्यस्त था । शायद अमन कल की रात को अपनी माँ और चाची के करतुत को सपनों में ही दुहरा रहा था । “आह, चाचीईईई” अमन की कराह सुनकर दामिनी को कोई शक नहीं रह गया कि अमन उसकी सच्चाई जान चुका था । भावना और अपने के लिये उनका मन घृणा से भर उठा ।
स्रोत:इंटरनेट