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Kahani Ek Pariwar Sex Story 3

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अमन ने अपना सिर मां और चाची के पास से हटा नीचे चाची के चूचों को जकड़े पड़े मम्मी के हाथों को चूमा । और थोड़ा नीचे आते हुये चाची के नंगे बदन पर जैसे चुम्बनों की बारिश ही कर दी । चूत में भरे हुये मम्मी. के लंड और मुहं में समाई उसकी जीभ के बीच मेँ अमन की हरकतों को महसूस ही नहीं कर पा रही थी । किन्तु जब अमन ने अपने होंठों को उसकी घनी झांटों के बीच में से तनी हुई क्लिट के ठीक ऊपर रखा तो भावना मम्मी के. मुहं में ही चीख पड़ी । भावना के तपते होंठ और चूत को रौंदती दामिनी का बलशाली पुरुषांग एक साथ भावना के होशो-हवास छीन चुके थे । दामिनी की हालत भी खराब थी । देवरानी के प्रजनांग में अन्दर बाहर होते उसके. लंड को अमन के नर्म होंठों पर से गुजरना पड़ रहा था । हे भगवान, मम्मी चोदने की सब कलाओं में पारंगत है । प्रणय क्रीड़ा के चरम पर खुद को महसूस कर दामिनी लंड को जोर जोर से मशीनी पिस्टन की भांति भावना की झाँटोँ से भरी चूत में भरने लगा । मम्मी खजुराहों की किसी सुन्दर मूर्ति के जैसी बिस्तर पर देवरानी के बुर मेँ लंड अंदर किए पसरी पड़ी थी । एक हाथ पीछे ले जाकर दामिनी ने अपने भारी नितम्बोँ को सहला रही थी. और दुसरे से भावना की कमर पकड़ उसे अपनी मोटी जांघों की गहराई में दबा रखी थी । मम्मी की गोरा गदराया शरीर धक्कों के साथ बिस्तर पर उछल रहा था ।. भावना की चूत एक ही समय में चोदी और चूसी जा रही थी । अमन के सिर ने अपनी माँ के लंड के साथ तालमेल बैठा लिया था । जब मम्मी की लंड भावना चाची की चूत में गुम होता ठीक उसी समय अमन भी चाची के तने हुये चोंचले. को पूरा अपने होंठों में समा लेता । फ़िर जैसे ही मम्मी लंड को बुर से बाहर खींचती, वो भी क्लिट को आजाद कर देता । चूत की दिवारों पर घर्षण से उत्पन्न आनन्द, लाल सुर्ख सुपाडी पर पडते बिजली के झटके और भावना के हाथों में दुखते हुये चूंचें, कुल मिलाकर अब तक का सबसे वहशीयाना और अद्भुत काम समागम था ये दामिनी के जीवन में । अगले कुछ ही धक्कों के बाद दोनों जेठानी-देवरानी अपने आर्गैज्म के पास पहुंच गये । अब किसी भी क्षण वो अपनी मंजिल को पा सकते हैं । पहले भावना की चूत का सब्र टूटा । मम्मी के गले में “म्म्म।” की कराह के साथ ही चाची ने अमन के सिर को चूत के ऊपर जोरों से दबा दिया । दामिनी के हाथों ने. पहले से ही दुखते भावना के स्तनों पर दवाब बढ़ा दिया । दामिनी की सूजे हुये लंड पर फ़िसलते अमन के होंठों ने आग में घी का काम किया । जैसे ही उसे लंड में कुछ बहने का अहसास हुआ, मम्मी ने लंड को चाची की बुर में जोर-जोर से अन्दर-बाहर करना शुरु कर दिया ।. अमन ने भी चूत से लंड तक बिना रुके चाटना जारी रखा । जीभ पर सबसे पहले चाची का चूतरस आया । क्षणभर पश्चात ही मम्मी का मीठा खत्टा वीर्य भी होठों के किनारे से आ लगा । गंगा, जमुना सरस्वती की भांति, चाची का आर्गैज्म, मम्मी का वीर्य और उसका थूक उसके गले में मिल संगम बना रहे थे । भावना ने सांस लेने के लिये जेठानी के मुहं में दबे पड़े अपने होंठों को बाहर खींचा । आर्गैज्म के बाद आते हल्के हल्के झटकों के बाद दिमाग सुन्न और शरीर निढाल हो गया । मानो किसी ने पूरी ऊर्जा खींच कर निकाल ली हो । परन्तु अभी तक दामिनी का लंड तनिक भी शिथिल नहीं हुआ था । बार बार धक्के मार कर भावना की बुर में अपनी उपस्थिति दर्ज करा. रहा था । भावना के पेट के बल लुढ़क जाने से मम्मी की लंड अपने आप स्प्रींग की तरह उछल कर बाहर आ गया । अमन रुक कर ये सब देख रहा था । तुरंत अमन ने चाची की टांगों के बीच से घुसकर मम्मी की लंड पर गोल करके. अपने होंठों को सरका दिया । कुछ देर तक सिर को हिल-हिला कर मम्मी की लंड को आखिरी बूंद तक आराम से झड़ने दिया ।. दामिनी आनन्द के मारे कांप रही थी । उत्तेजना से भर कर अपने दांत भावना की कंधों में गड़ा दिये । वीर्य की आखिरी बूंद भी भावना चाची के गले में खाली करके मम्मी का लन्ड “पॉप” की आवाज के साथ चाची. के मुहं से बाहर निकल आया । भावना ने पहली बार किसी औरत की वीर्य अपने गले भरा था, इससे पहले भी अमन को चूसते समय उसको गले से बाहर ही अपने मुखड़े पर झड़ाया था और पवन अपने पति को तो वो सिर्फ़ उत्तेजित करने के लिये ही चुसती हैं । जैसे ही मुहं खोल गले के भीतर का मिश्रण बिस्तर पर उलटना चाहा, जेठानी के वीर्य के गाढ़ेपन और स्वाद से रुक गई । फ़िर उन्गलियां चेहरे पर फ़िरा कर बाकी बचे तरल को भी चटखारे ले लेकर मजे से खा गई । मम्मी ने भी चाची की मांसल जांघों को पकड़ कर अपनी मुँह की तरफ खिंच लायी और उसकी बुर से निकल रहे वीर्य और चुत रस के मिश्रण को चाट के निगल लिया । काफी देर रात तक चोदाई के करण तीनों थक चुके. थे और उसी तरह नंगे ही गहरे नींद में सो गए ।. थकान से चूर होकर अमन बेसुध सो रहा था कि देर रात में या कहे की सवेरे की हल्कि रोशनी में बिस्तर पर किसी की कराहों से उसकी आंख खुली । आंखों ने मम्मी को चाची की बुर सहलाते हुए देखा । मोटी मोटी गोरी जांघों. के बीच में काले घने बालों से भरी चाची चूत सॉफ नज़र आ रही थी । क्या फूली हुई चूत थी!। मम्मी ने भावना की टाँगें और चौड़ी कर दी और जीभ निकाल कर चूत चाटने लगी ।. ” आआआः ..आ.
एयेए..ऊवू! बहुत अच्छा लग रहा है । बाल आपके मुँह में तो नहीं जा रहे दीदी ।?” भावना अपनी भारी चूतर उच्छाल कर अपनी चूत मम्मी के मुँह पर रगड़ रही थी । दामिनी कभी भावना की चूत चाटते और कभी बड़ी बड़ी चूचिओ को चूस्ते । थोरी देर बाद मम्मी और चाची 69 की मुद्रा में आ गये अब भावना की चूत मम्मी के मुँह पर थी और मम्मी की मोटी लंड भावना के मुँह में। काफ़ी देर तक चूमा चॅटी का खेल चलता रहा।. फिर मम्मी ने चाची को बिस्तेर पर लिटा कर उनकी मोटी जांघों को चौड़ा किया और लंड का सुपरा उनकी चूत के मुँह पर रख कर रगड़ने लगी ।. ” ऊऊऊः, अब तंग मत करिए दीदी । पेल दीजिए पूरा लंड।” भावना गांड को उचका कर लंड चूत में डालने की कोशिश करती हुई बोली। मम्मी अपना लंड चूत के लाल छेद पर रगडती रही और भावना को उत्तेजित करती रही ।. ” बस भी कीजिए।! अब और नहीं सहा जा रहा । मम्मी ने अपनी चौड़ी उभरे गांड हवा में उछाली और एक ज़ोर का धक्का लगाया । मम्मी की लंबा मोटा लंड आधा भावना की चूत में समा गया ।. ” एयाया….
आआआः.
ऊऊऊऊः….
ओई माआअ……।” मम्मी ने लंड को बाहर खींच कर फिर एक ज़ोर का धक्का लगाया । इस बार तो पूरा लंड भावना की चूत को चीरता हुआ जड़ तक अंडर घुस गया । अब मम्मी के गांड थिरकने से अंडकोष भावना की गांद के छेद से रगड़ रहे थे । मम्मी अब जबरदस्त गांड उछालते हुए चाची को चोदे जा रही थी ।.
स्रोत:इंटरनेट