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Kaise Main Ek Kali Se Phool Bani Part 1 4

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अब तो सिलसिला चल पड़ा था मेरा और विजय का, जब भी मोका मिलता विजय मुझे घर पे या स्कूल में दबोच के मेरी ले लेता । पर धीरे धीरे मुझे एहसास होने लगा था कि इस सब में प्यार तो हे ही नही । विजय कभी भी मुझे किस नही करता और न ही प्यार भरी रोमानी बातें करता, वह बस मोका मिलते ही मुझे झुका के स्कर्ट उठाता,पेंटी उतारता और थूक लगा के मेरी गांड मार लेता। एक दिन मेने सोना दीदी से इस बारे में बात की, उसने मुझे यकीन दिलाया कि विजय बोहत अछा लड़का हे ओर मुझे उस जेसा बॉय-फ्रेंड नही मिलेगा। तभी विजय और पियूष वहां आ गये, सोना ने विजय को झिडकी लगा के मेरा ख्याल रखने को कहा। पियूष को मोका मिला और उसने विजय को मेरा ख्याल रखने की सलाह देते हुए यह कह दिया कि अगर वोह ख्याल नही रखेगा तो में रखूगा। पियूष की आँखों में अजीब सी चमक थी, ओर मुझे पहली बार पियूष में एक अछा इन्सान नजर आया। वेसे देखने में ओर बोल-चाल में पियूष विजय से कई कदम आगे था ओर मेने पहली बार ध्यान दिया की पियूष विजय से कितना गोरा चिकना ओर स्मार्ट था ।. स्कूल ख़त्म होने के बाद हम चारो बाहर निकले ओर विजय के कहने पे ice-cream खाने पास के रेस्टोरेंट की ओर चल दिए। विजय मेरी दायें ओर था पर उसका ध्यान मुझसे ज्यादा विभा में था। पियूष मेरी बाएँ तरफ था ओर बार. बार मेरी आँखों में आंखें डाल के कुछ कहने का यतन कर रहा था। तभी चलते चलते उसने अपना हाथ मेरे नितम्ब पे चिपका दिया, मेरी सिसकारी निकल गयी पर उसने जल्दी हाथ हटा लिया। मेने उसकी ओर देखा तो वोह मुस्कुरा दिया, मैं भी उसकी बेशर्मी से भरी मुस्कान पे लुट सी गयी ओर मुस्कुरा दी । हम सब अंदर बैठे ice cream का मज्जा ले रहे थे। पियूष मेरे सामने और विजय विभा के सामने बता था। तभी मुझे किसी के पेर अपनी टांग से छुते हुए महसूस हुए। मुझे लगा विजय ही होगा,इसलिए विरोध नही किया और बेठी रही। आहिस्ते से वो पेर मेरी दोनों टांगो के बिच से घुटनों तक आ गये। पर विजय तो ऐसी हरकतें करता ही नही था, वह तो बस मेरे भारी भरकम कूल्हों का दीवाना था। खैर हमने ice cream ख़त्म की ओर चल पड़े। मेरा ध्यान पियूष की पेंट की ओर गया तो समझ गयी की मुझे पेर से कोन छेड़ रहा था; पियूष की पेंट में टेंट बना हुआ था । मैं मुस्कुरा गयी शर्म के मारे ओर चेहरा लाल हो गया, पियूष ने भी मेरी नजर पकड ली थी जब में उसके लिंग को घूर रही थी। वह भी मुझे देख मुस्कुराया ओर एक फ्लाइंग किस चोरी से मेरी ओर भेज दी। मेने भी आंख के इशारे से उसे जता दिया कि मेने उसकी फ्लाइंग किस कबूल करली।. धीरे धीरे पियूष मेरे करीब ओर विजय मुझसे दूर होते जा रहे थे। एक दिन हम चारो विजय के घर शनिवार के दिन हाफ-डे छुट्टी के बाद गये। वहां हम विजय के मम्मी पापा वाले बेडरूम में बैठे थे जहाँ विजय ने कोई 20 बार. मेरी गांड ली होगी। बातों बातों में ही ब्लू-फिल्मो पे आ गये तो पता चला की विभा को xxx फिल्म्स देखते हुए 2 साल हो चुके थे, ओर यह बात भी पता चली की विजय ने विभा को भी इस कमरे में बुला के फिल्मे देखी हैं। धीरे धीरे माहोल गरम हो गया। विभा ने बताया की जब पहले पहले विजय उसकी लेता था तो दर्द कितना हुआ करता था, इस बात पे मैंने भी अपने दर्द भरे एहसास को बता दिया। फिर बात पियूष ओर विजय के लिंग के साइज़ की हुई तो दोनों ने जल्दी से अपने कपडे उतार के तन्ने हुए लंड सामने करते हुए बोला बताओ कोन किसका पसंद करती हे। विभा ने झट से विजय का 6इंची काला लम्बा लंड पकड़ लिया। मेरी नज़रें पियूष के 5इंची गोरे चिट्टे लंड. पे टिक्की हुई थी। पर शर्म के मारे मेने कोई हरकत नही की ओर चुप चाप बेठी रही। तभी पियूष विभा की ओर बढ़ा और उसके होंठों को अपने मूंह में भर के रसपान करने लगा। विभा को उन दोनों के साथ खुल के अय्याशी करते. देख मुजे विजय की दिखाई हुई ब्लू-मैगज़ीन याद आई जिस में एक लड़की 2 या 3 मर्दों के साथ लगी होती थी। तभी विजय ने पुछा किसे किसे ब्लू-फिल्म देखनी हे। हम सब ने एक स्वर में हामी भर दी।. विजय ने अलमारी से एक cd निकाली ओर dvd player में डाल दी। फिल्म शुरू हो गयी ओर साथ ही साथ उन तीनो की अय्याशी भी।. विभा उन दोनों को बड़ी आसानी से संभाले हुए थी। एक तरफ विजय का लंड हाथों में सहलाते सहलाते और तगड़ा कर रही थी दूसरी तरफ पियूष से अपने होंठो को चुसवा चुसवा के मदमस्त कर रही थी। ब्लू-फिल्म on हो चुकी थी. ओर मेरा सारा ध्यान उसमे होने वाले हवस के प्रदर्शन पे चला गया। एक इंडियन सी दिखने वाली लड़की को दो अंग्रेजो ने घेर रखा था ओर बारी बारी से उसके जिस्म से खिलवाड़ कर रहे थे। कभी मम्मे चूसते तो कभी होंठो. का मदिरापान करके उसकी मदहोशी बढ़ाते। इधर विजय ओर पियूष पूरे नंगे हो के विभा को भी नग्न करने में जुट गये।. यह सब देख के मेरे दिल-o-दिमाग पे गहरा असर पढ़ रहा था। प्यार ओर हवस के बीच का फर्क अब बेमानी हो गया था। जिस विजय से पहले मुझे प्यार हुआ ओर जिस पियूष के लिए मेरे दिल में नये जज्बात उभर रहे थे वह दोनों. मेरी आँखों के सामने मेरी सहेली ओर स्कूल की सबसे चालू ओर बदनाम सरदारनी के साथ हवस का नंगा नाच खेल रहे थे।. पर मैं भी तो विभा कौर की राह पे चल पड़ी थी, अब मेरे लिए पीछे हटना संभव नही था। दो-दो हवस भरे नज़ारे देख के मेरा दिमाग मेरे काबू से बाहिर होता जा रहा था। मैंने भी अब अयाशी के समुन्द्र में डुबकी लगाने की ठान ली ओर उन तीनो के देखते देखते अपने जिस्म से स्कूल यूनिफार्म की स्कर्ट ओर शर्ट उतार के बिस्तर पे उनके साथ जा मिली।. हम चारों नंगे बेड पे ब्लू-फिल्म का आनंद ले रहे थे। मुझे नंगी देख पियूष ने विभा को छोड़ के मेरे पास आ गया था। ओर फिर मेरी नंगी कमर में हाथ डाल के अपने चिकने नंगे गोरे बदन से चिपका लिया। मैं भी शरम लाज. की सभी सीमओं को लाँघ के पियूष से चिपक गयी। फिर पियूष ने मेरे रसीले होंठो का रसपान शुरू किया, ओर निचे से एक ऊँगली मेरी योनि में घुसा दी। मेरी चीख निकली ओर तभी विजय ओर विभा का ध्यान मेरी ओर गया। ————-क्रमशः————–. आगे की कहानी पार्ट-2 में.. पार्ट -2 का लिंक– कैसे मैं एक कलि से फूल बनी – पार्ट 2. Stay tuned to My.
स्रोत:इंटरनेट