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Kaise Main Ek Kali Se Phool Bani Part 2 Hindi Sex Story

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हेलो दोस्तों, आपकी महक वापिस आ गयी है अपनी desi kahaniya लेके.
ये hindi sex story लोगो को काफी पसंद आई है उसके लिए शुक्रिया.
अब में इस Hindi Sex Stories का आखिरी भाग पेश करने जा रही हूँ.
कहानी के अन्य भाग–. पार्ट 1 . पार्ट 2. हम चारों नंगे बेड पे ब्लू-फिल्म का आनंद ले रहे थे। मुझे नंगी देख पियूष ने विभा को छोड़ के मेरे पास आ गया था। ओर फिर मेरी नंगी कमर में हाथ डाल के अपने चिकने नंगे गोरे बदन से चिपका लिया। मैं भी शरम लाज. की सभी सीमओं को लाँघ के पियूष से चिपक गयी। फिर पियूष ने मेरे रसीले होंठो का रसपान शुरू किया, ओर निचे से एक ऊँगली मेरी योनि में घुसा दी। मेरी चीख निकली ओर तभी विजय ओर विभा का ध्यान मेरी ओर गया। मैं पियूष से अलग हो के अपनी योनि को पकडे हुए लेटी थी, पियूष परेशान ओर विजय हैरान था। पियूष ने पुछा की तेरी इतनी टाइट क्यों हे, विजय तो बोलता हे की खूब ली हे। इस्पे मेने कहा की सामने से कुवारी हूँ, विजय पीछे से लेता हैं। विभा यह बात सुन के हस दी ओर बोली, विजय तो बस पीछे से लेने का शोकीन हे, सामने से पियूष ही लेगा तेरी। यह सुन के मैंने पियूष की ओर देखा तो वोह चमकती आँखों से मेरी ओर देख के बोला, तयार हो जा अपनी सील तुडवाने को। मैं थोडा सा घबरा गयी ओर प्रेगनेंसी के डर से उनको अवगत करवाया। मुझे माँ नही बनना था इसलिए मेने उनसे बता दिया जो मेरे दिल में था।. विभा ने हस्ते हुए कहा की घबरा मत कुछ नही होगा, में भी तो चूत देती हूँ इनको, मैं कभी प्रेग्नेंट नही हुई। मेने पुछा केसे तो वो बोली की हम लडकियों के पेट से होने के चांस महवारी के 7 दिन बाद बोहत कम होते हैं, उन दिनों में चूत मरवाया करना। मेरे दिल में ओर जितने सवाल थे में उनसे पूछती गयी, वीर्य को लेके या कंडोम को लेके, माला-डी और एबॉर्शन, शादी ओर बच्चे, प्यार और हवस….
हर मुद्दे पे हमने खुक के बात की ओर जब मुझे संतुष्टि हो गयी तो में भी योनी संभोग के आनंद का मज़ा लेने को व्याकुल हो गयी. मैंने पियूष के लिंग को हाथों में लेके मसलना शुरू किया। उधर विभा झुक के विजय के लंड को चूस रही थी जेसे ब्लू-फिल्म में हो रहा था। पियूष ने मुझे इशारा किया चूसने का, मैं भी झुक गयी ओर मूह खोल के उसके गोरे लंड का सुपाडा मूंह में ले के स्वाद किया। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ ….
क्या नज़ारा था। मोहल्ले की दो सबसे हसीन ओर सेक्सी कुडियां झुक के अपने मुंह में लंड लिए हुए थीं, ओर दोनों एक दुसरे से आगे बढ़ना चाहती थी। विभा अनुभवी थी ओर लिंग को धीमी लय से चूस रही थी, वहीँ मैं जोश से भरी हुई तेज़ी से लिंग-मुंड पे अपने रसीले होंठ चला रही थी। विजय ओर पियूष दोनों की हालत खराब थी ओर किसी भी समय झड सकते थे। तभी विजय ने अपना लंड विभा के मुंह से खीँच लिया, ओर मेरे पीछे आ गया। मैं पियूष का लंड चूसने में व्यस्त थी की तभी मेरे गोरे चिट्टे भारी चुतड के बीच विजय का फनफनाता लंड महसूस हुआ। मेने पियूष के लिंग को मुंह से निकाल के पीछे देखा तो विजय तयार था ओर तभी मेरी गांड में तेज़ दर्द के साथ उसका मोटा सुपाडा मेरी गुदा में प्रवेश कर गया। मेरे. मुंह से चीख निकली,”हाय रब्बा …ओउह ओह आओह … दर्द हो रहा विजय निकाल लो प्लीज़” परन्तु विजय पे हवस का भूत सवार था ओर वो अपने फूले हुए लंड को मेरी गांड की गहराइयों में अंदर ओर अंदर करता गया तेज़ धक्कों से।. उधर पियूष ने फिरसे मेरे मुंह में अपने लिंग को ठूस दिया ओर अब महक दो दो लंड अपने अंदर ले के निहाल हुए जा रही थी। विजय के धक्के तेज़ होते गये ओर कुछ ही पलों बाद उसका कामरस मेरी गुदा में बहने लगा। में भी. विजय को झड़ते हुए महसूस कर रही थी, उसके लंड की नस्सें फूल ओर सिकुड़ के मेरी चिकनी गांड में वीर्य का सैलाब भर रही थी। मुझे गरम लावा अपने अंदर बहता हुआ महसूस हो रहा था। अब विजय निढाल हो के बिस्तर पे गिर गया पर मुझे आज़ादी नही मिली क्युकी पियूष मेरे मुंह में हलकी लैय बना के धक्के देता हुआ मेरा मुंह चोद रहा था। तभी पीछे से विजय ने अपनी ऊँगली मेरी योनी में घुसा दी, मुझे महसूस हुआ की इस बार मेरी चूत योंन-रस से पूरी भीग चुकी थी ओर विजय की ऊँगली सरक के बड़े आराम से अंदर बाहर हो रही थी। विजय मेरी चूत को ऊँगली से चोद रहा था जबकि पियूष मेरे लम्बे केश पकड़ के तेज़ी से मेरा. मुख-मैथुन कर रहा था। मेरी योनी में विजय की ऊँगली नये नये करतब करती हुई मुझे अपने चरम की ओर ले के जा रही थी।. विजय की ऊँगली मेरी योनी में एक तूफ़ान सा ले आई थी। जेसे जेसे विजय ऊँगली अंदर बाहर करता वेसे वेसे मैं अपने चरम के पास पुहंच रही थी। विजय तेज़ तेज़ ऊँगली चलाने लगा, मेरी भी अब बर्दाश्त करने की शकती समाप्त होती जा रही थी। मेने अपने मुंह से पियूष का लंड निकाल लिया ओर अपने चेहरे को तकिये में धंसा के योनी में उठने वाली तरंगों का आनंद लेने लगी। फिर कुछ ही देर बाद वह पल आ गया जब पेट की गहराई में कुछ. टूटता हुआ महसूस हुआ, ओर फिर एक भावनात्मक शारीरिक ओर मानसिक तौर पे जिंदगी का सबसे हसींन एहसास जो एक उफनते हुए सैलाब की भांती सारे बाँध तोड़ के बाहिर निकल आया । मेरे जीवन का यह पहला सखलन था, पर यह कुछ ऐसा नशा था जिसकी लत्त पहली ही बार में लग गयी ।. अगले कुछ मिनटों तक में यूँही बेसुध सी बिस्तर में पड़ी हुई झटके खा रही थी, जब मुझे होश आया तोह पियूष मेरी टांगो के बीच आ चूका था ओर अपने लिंग को मेरी करारी योनी पे रगड़ रहा था। में जानती थी अब क्या होने वाला था, पर अपना कुवारापन खोने का डर तो हर भारतीये लड़की को होता ही हे। मेने पियूष से रुकने को कहा, पर इस से पहले की में कुछ समज पाती, पियूष ने तीर निशाने पे छोड दिया। तीखे दर्द से में एकदम दोहरी हो गयी ओर चीख चीख के पियूष को मेरी योनी से अपना लिंग निकालने की गुजारिश करने लगी। पर मेरी किसी बात का असर नही हुआ ओर वो मुझे बिस्तर में दबा के मेरी योनी की गहराई नापने में जुट गया।. दूसरी ओर विभा doggy पोज में झुकी हुई थी और विजय उसकी चूत पीछे खड़ा हो के मार रहा था। उसके लम्बे केश विजय ने लगाम की तरह पकड रखे थे ओर खींच खींच के लंड पेल रहा था अंदर बाहर। हम दोनों अपने रब को याद. करके “हायो रब्बा हायो रब्बा” का जाप कर रही थी, जब की पियूष ओर विजय दोनों अपने अपने लंड से हमारी सेवा में जुट गये थे। मेरे दर्द में अब कुछ कमी होने लगी क्योंकि चूत पानी पानी हो चुकी थी जिस से लंड को अंदर बाहर करना में आसानी ही रही थी। पियूष ने चुदाई की रफ़्तार बढ़ा ली ओर दूसरी तरफ विजय ने तो शताब्दी रेल की भांति विभा की चूत में तूफ़ान भर दिया था । आखिरकार वह पल आ ही गया , ओर हम चारों एकसाथ अपने चरम पे पहुँच गये । मैं ओर विभा “… हाय रब्बा.. ओह हाय वाहेगुरु … आह् मार सुटेया…” कहती हुई झड़ने लगी तो दूसरी तरफ पियूष ओर विजय ” ओह गॉड… फ़क यू… बहनचोद मज़्ज़ा आ गया सरदारनी … ओर ले और ले ” जेसे शब्द बोल के हमारे अंदर ही झड गये.
स्रोत:इंटरनेट