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Khet Ghamasan Dirty Sex Story 2

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लड़के ने तुरंत मां की मान कर अपना मुंह खोला और रज्जो की बुर पर रख दिया.
रज्जो अब उसके मुंह में मूतने लगी.
वह अपनी मां का मूत पीने लगा.
रज्जो उत्तेजित होकर गंदी गंदी गालियां देने लगी.
“साले मादरचोद ले पी अपनी मां का मूत.
भोसड़ी के मां की पिशाब पी ले.
” मूतना खत्म होने पर वह खड़ा हो गया, उसका लंड तन्ना कर उसकी जांघों के बीच खड़ा था.
उसकी मां उसके सामने पैर फ़ैला कर खड़ी थी और उसकी जांघों के बीच का छेद पुकपुका रहा था.
वह बोली.
“बेटा अपनी मां का छेद भर दे.
” लड़के ने अपने कूल्हे आगे किये और मां से कहा “मां अपना छेद आगे कर.
” रज्जो ने पैर और फ़ैलाये और चूत आगे करके अपनी बुर का छेद अपने बेटे के लिये पूरा खोल दिया.
मैं अब मां की चूत मे बेटे का लंड डलता देख उत्तेजित था.
लड़के ने लंड अंदर घुसेड़ा और अपनी मां की कमर में हाथ डाल कर उसे अपने शरीर से चिपका लिया.
मां को दबोचे हुए वह बोला “साली जरा पास आ.
बदन से बदन चिपका.
” रज्जो ने भी उसे आलिंगन में भर के कहा.
“हाय जरा लंड पूरा अंदर दे के चोद.
” मैं भी अब अपनी मां बहन को चोदने के लिये उतावला था.
मैं जानता था कि कुछ ही देर में मेरा लंड मेरी मां की चूत में होगा.
पर घर जाने के पहले मैं अपने दूसरे दोस्त से मिलना चाहता था जो खेतों के पास ही रहता था.
रात बहुत हो गयी थी पर मुझे पता था कि वह मुझे जरूर कुछ बतायेगा.
उसके घर के पीछे एक खलिहान था जहां वे अनाज रखा करते थे.
खलिहान में से रोशनी आ रही थी.
मुझे एक छोटी सी खिड़की दिखी.
मैं देखना चाहता था कि वहां कौन है इसलिये एक पत्थर पर चढ़कर अंदर झांकने लगा.
अंदर दो खटिया थीं.
मेरे दोस्त की मां एक खाट पर पैर लटका कर बैठी थी और मेरा दोस्त उसके सामने जमीन पर मां के घुटनों को पकड़ा हुआ बैठा था.
वे बातें कर रहे थे जो मुझे साफ़ सुनाई दे रही थीं.
मेरा मित्र बोला.
“मां थोड़ी टांगें खोल ना.
” उसकी मां ने जरा सी अनिच्छा से अपनी जांघें थोड़ी सी फ़ैला दीं.
ऐसा लगता था कि वह मां को सलवार उतारने को मना रहा था.
“मां सलवार उतार दे ना.
” शायद उसकी मां चुदने को अभी तैयार नहीं थी, मुझे मालूम था कि शुरू में ऐसा होता है.
मेरा मित्र मां को मनाता रहा.
वह धीरे धीरे रास्ते पर आ रही थी और चुदने की उसकी अनिच्छा कम हो रही थी.
वह बोली “बेटा देख कोई देख तो नहीं रहा है.
” वह उठा और आंगन में देखने के बाद दरवाजे की सिटकनी लगाकर वापस आ गया.
बोला “मां सब दरवाजे बंद हैं.
हम दोनों अकेले हैं.
” उसकी मां ने फ़िर पूछा “ठीक से देखा है ना?” वह बोला “हां मां सब तरफ़ देखा है चल अब अपनी सलवार उतार.
” मां को नंगा करने को वह मचल रहा था.
उसकी मां खड़ी हो गयी और अपनी कमीज ऊपर उठा कर सलवार का नाड़ा खोल दिया.
सलवार अब ढीली होकर उसके पैरों में गिर पड़ी और उसमें से पैर निकाल कर वह आकर फ़िर खाट पर बेटे के सामने बैठ गयी.
मेरा दोस्त अब उतावला हो रहा था.
अपनी मां की जांघों के बीच हाथ डालकर उसने अपना हाथ बढ़ाया और पैंटी के ऊपर से ही मां की चूत सहलाने लगा.
उसके छूने से मस्त होकर उसकी मां ने भी टांगें और फ़ैला दीं.
 दोनों अब जम के उत्तेजित थे.
वह बोला “मां कच्छी भी उतार दे.
” वह उसकी ओर देख कर बोली “तू अपना लंड बाहर निकाल.
” वह बोला “ठीक है, तू मेरा लंड देख़” उसने फ़िर अपने पैंट की ज़िप खोली और अपना एक फ़ुट लंबा मोटा लंड बाहर निकाल लिया.
उसका मस्त लंड देखकर उसकी मां ने हाथ बढ़ाकर लंड हाथ में ले लिया और बोली “बड़ा भारी लौड़ा है तेरा.
देख कैसा तोप की नाल की तरह खड़ा है” वह बोला “मां इसको अपनी चूत तो दिखा.
” उसकी मां खड़ी हो गयी और अपनी पैंटी भी उतार दी.
उसकी फ़ूली सूजी हुई चूत अब उसके बेटे की आंखों के सामने थी और वह उसे बड़ी भूखी नजर से देख रहा था.
उसकी जांघों के बीच उसका लंड अब और तन्ना रहा था.
मां ने उसके चेहरे की ओर देख कर कहा “हाय बेटे तेरा लंड खड़ा हो गया है.
” उसने अपने मचलते लंड को देखा और फ़िर मां के चेहरे को तकने लगा.
फ़िर बोला “मां मेरे लंड को तेरी चूत चाहिये.
” मां की कलाई पकड़ कर खींच कर उसने अपनी मां को गोद में बिठा लिया और फ़िर उसका बांयां स्तन पकड़ कर दबाते हुए बोला “मां मरवाएगी?” उसकी मां हल्के से बोली “अपनी मां की चूत मारेगा?” मेरे मित्र ने अपनी मां की बुर मे उंगली करनी शुरू कर दी.
फ़िर उसे खाट पर पटक कर उसकी जांघें खोलीं और अपना मुंह मां की बुर पर रख दिया.
फ़िर मुंह खोल कर मां की चूत चूसने लगा.
कुछ ही देर में मां मस्त हो गयी और उसे बोली “रुक बेटे, मैं तेरे लिये चूत ठीक से खोलती हूं, जरा खाट के किनारे मुझे बैठने दे.
” वह जमीन पर बैठ गया और मां खाट पर चढ़कर मूतने के अंदाज में जांघें फ़ैला कर बैठ गयी.
फ़िर उसने अपने बेटे के कंधे सहारे के लिये पकड़ लिये और उसका मुंह खींच कर अपनी चूत पर दबा लिया.
वह जोर जोर से मां की खुली हुई चूत चूसने लगा.
खुछ देर बाद बत्ती बंद हो गई.
सब तरफ़ अंधेरा और सन्नाटा था.
मैंने उसकी मां की धीमी आवाज सुनी.
मां काफ़ी उत्तेजित लग रही थी.
“बेटे मेरे साथ गांड खाने वाला काम करेगा?” वह मां की चूत रस ले लेकर चूसता रहा और कुछ न बोला.
उसने फ़िर पूछा “हाय सुन मेरी गांड खा ना.
” वह धीरे से बोला “मां, पूरा खिलाएगी? या बीच में छोड़ देगी जैसा उस दिन किया था” उसने उत्तर दिया “हाय गांड पूरी खिलाऊंगी बेटा, खाएगा?” वह अब मस्त होकर मुठ्ठ मार रहा था, बोला “मां मौका है आज तुझे, पता है तान्त्रिक भी कह रहा था कि मां की गांड का माल खाने से आदमी पूरा मस्त हो जाता है.
मां बता ना तूने तान्त्रिक के मुंह में टट्टी की थी ना.
” वह बोली “हाय बेटे, वो तो साले सब गांड का माल खाते हैं.
उनकी बात छोड़.
तू खायेगा मां की गांड से?” मेरा मित्र बोला “मां अपनी गांड आगे कर.
” उसकी मां ने टांगें फ़ैला कर अपना गुदाद्वार बेटे के मुंह के आगे कर दिया.
वह मां की गांड चाटने लगा.
उसका लंड बड़ा बुरी तरह से खड़ा था और मस्ती में वह मां की चूत भी चूस रहा था.
“मां, खिला ना” “सबर कर, सुबह खिला दूंगी, मेरे कमरे में आ जाना” उसकी मां बोली.
पढ़िए My Hindi Sex Stories पर.. Hindi Sex Story के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. पार्ट 4.
स्रोत:इंटरनेट