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Khet Ghamasan Incest Sex Stories 2

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मेरे पास आ कर उसने प्यार से मेरा पसीना पोंछा.
फ़िर हम खाने बैठे.
मैं तो मां की तरफ़ ज्यादा नहीं देख पा रहा था पर वह नजर जमा कर मेरी ओर देख रही थी.
खाने के बाद मैंने हाथ धोए और फ़िर ट्रैक्टर की ओर चला, इतने में मां पीछे से बोली.
“बेटा एक ज़रूरी बात करनी है ” मैं वापस आ कर उसके पास बैठ गया.
मां काफ़ी परेशान दिख रही थी.
सहसा वह बोली “बेटा बाजरा बड़ा हो गया है कोई चोरी तो नहीं करता.
” मैं बोला “नहीं मां अब कौन लेगा इसे.
” मां बोली “नहीं कोई भी चोरी कर सकता है तू देख आस पास कोई है तो नहीं.
ऐसा कर तू पेड़ पे चढ़ जा और सब तरफ़ देख़ ” मैंने पेड़ पर चढ़ कर सब तरफ़ देखा और उतर के बोला “मां आस पास तो कोई भी नहीं है, हम दोनों बिल्कुल अकेले हैं.
दूर तक कोई नहीं दिखता” मां ने मेरी आंखों से नजर भिड़ा कर पूछा ” हम दोनों अकेले हैं क्या?” मैंने सिर हिलाकर हामी भरी तो वह बोली “तू मुझे बाजरे के खेत में ले चल” मैं खेत की सबसे घनी और ऊंची जगह की ओर चल. दिया, मां मेरे पीछे पीछे आ रही थी.
जैसे ही हम खेत में घुसे, हम पूरी तरह से बाहर वालों की नजरों से छिप गये, अगर कोई देख भी रहा होता तो कुछ न देख पाता.
मैंने मां का हाथ पकड़ा और उसे खींच कर और गहरे ले जाने लगा.
मां धीरे से मेरे कान में बोली “बेटा कोई देखेगा तो नहीं हमें यहां.
” मैं एक जगह रुक गया और उसकी ओर मुड़ कर बोली “यहां कौन देखेगा हमें, देखना तो दूर कोई हमारी आवाज़ भी नहीं सुन सकेगा”.
मैं मां की ओर देखकर बोला “मां मेरे साथ गंदा काम करेगी?” फ़िर और पास जा कर बोला “मा चल गंदी गंदी बात कर ना?” मां मेरी ओर देख कर बोली “अच्छा, तू अब मुझे गन्दी औरत बनने को बोल” मैं अब उत्तेजित हो रहा था और मेरा लंड फ़िर खड़ा होने लगा था.
मैंने इधर उधर देखा, हम लोग बिलकुल अकेले थे.
 मैं फ़िर बोला.
“मां मैं आदमी वाला काम करूंगा तेरे साथ.
” मां मेरी ओर देख कर बोली.
“हाय मेरे साथ गंदी बात कर रहा है तू.
” मैंने उसकी ओर देख कर कहा “चल अब अपने कपड़े उतार के नंगी हो जा.
” मां का चेहरा इस पर लज्जा से लाल हो गया और वह शर्माकर बोली “नहीं पहले तू अपना लंड दिखा”.
मैंने अपनी ज़िप खोली और फ़िर अपनी अंडरवियर निकाली.
अंदर हाथ डाल कर मैंने अपना लंबा तगड़ा लंड बाहर निकाला और मां के हाथ पकड़कर उंगलियां खोल कर उनमें थमा दिया “ले मेरा लंड पकड़” मेरे ही लंड पर मेरी खुद की मां के नरम हाथों का स्पर्श मुझे पागल बना रहा था.
मैंने अब धीरे धीरे मां के कपड़े उतारना शुरू कर दिये.
उसकी कमीज़ के दोनों छोर पकड़ कर मैंने ऊपर खींचे और उसने भी दोनों हाथों को उठाकर मुझे कमीज़ निकाल लेने दी.
अब वह मेरे सामने सिर्फ़ ब्रेसियर और सलवार में खड़ी थी.
मैंने उसकी सलवार की नाड़ी खींच दी और सलवार को खींच कर उसके पैरों में नीचे उतार दिया.
मां ने पैर उठा कर सलवार पूरी तरह से निकाल दी.
अब मेरी मां सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में मेरा लंड पकड़ कर मेरे सामने खड़ी थी.
मैंने उसका चुंबन लेते हुए अपने हाथ उसके नंगे कंधों पर रख कर कहा “मां, तुझे नंगी कर दूं? ” मां कुछ न बोली पर मेरे लंड को प्यार से दबाती और सहलाती रही जो अब खड़ा होकर खूब बड़ा और मोटा हो गया था.
मैने मां को बांहों में लिया और उसकी ब्रा के हुक खोल दिये.
ब्रा नीचे गिर पड़ी और मां के खूबसूरत मोटे स्तन मेरे सामने नंगे हो गये.
मां ने तुरंत शरमा कर मुझे पास खींच लिया जिससे उसकी चूंचियां न दिखें.
यह देखकर मैंने उसके कान में शरारत से कहा ” मां, अपने बेटे को चूंची दिखाने में इतना शरमा रही है तो तू अपनी चूत कैसे खोलेगी मेरे सामने?” मां अब बोली ” चल अब ज्यादा बातें मत कर, मेरे साथ काम कर”. मुझे अब बड़ा मजा आ रहा था और मां की शरम कम करने को मैं उससे और गंदी गंदी बातें करने लगा.
मैंने दबी आवाज में पूछा “मरवाएगी?” मां बोली “इतनी दूर से मरवाने के लिये ही तो आई हूं, बाजरे के खेत में नंगी खड़ी हूं तेरे सामने और तू पूछ रहा है कि मरवाएगी?” मैंने उसे और चिढ़ाते हुए पूछा “कच्छी उतार दूं क्या”. मां अब तक मेरे धीरे धीरे सताने वाले बर्ताव से चिढ़ गयी थी.
वह मुझे अलग कर के पीछे सरकी, एक झटके में अपनी पैंटी उतार के फ़ेक दी, अपने कपड़ों को नीचे बिछाया और उन पर लेट गयी.
अपने घुटने मोड़ कर अपनी जांघें उसने फ़ैलायीं और अपनी चूत को मेरे सामने खोल कर बोली “और कुछ खोलूं क्या? अब जल्दी से अपना लंड डाल!”. मैंने अपने कपड़े उतारे और मां की टांगों के बीच घुटने टेक कर बैठ गया.
मेरी मां अपनी नजरें गड़ा कर मेरे मस्त तन्नाये हुए लंड को देख रही थी.
मैंने हाथ में लौड़ा लिया और धीरे से चमड़ी पीछे खींची.
लाल लाल सूजे हुए सुपाड़े को देख कर मां की जांघें अपने आप और फ़ैल गयीं.
हम दोनों अब असहनीय वासना के शिकार हो चुके थे.
मां भर्रायी आवाज में बोली “अब देर मत कर बेटे, अपना लंड मेरे अन्दर कर दे जल्दी से”.
मैंने लंड पकड़ कर सुपाड़ा मां की चूत के द्वार पर रखा.
फ़िर उसके घुटने पकड़ कर उसकी जांघें और फ़ैलाते हुए आंखों में आंखें डाल कर पूछा “चोद दूं तुझे?”. मां का पूरा शरीर मस्ती से कांप रहा था.
उसने अपना सिर हिला कर मूक जवाब दिया ’हां’, मैंने घुटनों पर बैठे बैठे झुक कर एक धक्का दिया और लंड को उसकी बुर में घुसेड़ दिया.
जैसे ही मोटा ताजा सुपाड़ा उसकी गीली बुर में घुसा, मां की चूत के पपोटे पूरे तन कर चौड़े हो गये.
मां सिसक कर बोली “आ बेटे मेरे ऊपर चढ़ जा.
” यह सुनकर लंड को वैसा ही घुसाये हुए मैं आगे झुका और अपनी कोहनियां उसकी छाती के दोनों ओर टेक दीं.
फ़िर अपने दोनों हाथों में मैंने मां की चूंचियां पकड़ लीं.
हम दोनों अब एक दूसरे की आंखों में आंखें डाल कर देख रहे थे.
मैंने अब एक कस कर धक्का दिया और मेरा पूरा लंड मां की चूत की गहराई में समा गया.
लंबी प्रतीक्षा और चाहत के बाद लंड घुसेड़ने का काम आखिर खत्म हुआ और हमारा ध्यान अब चुदाई के असली काम पर गया.
मैं मां को चोदने लगा.
हम दोनों वासना में डूबे हुए थे और एक दूसरे की कामपीड़ा को समझते हुए पूरे जोर से एक दूसरे को भोगने में लग गये.
मां की मतवाली चूत बुरी तरह से चू रही थी और मेरा लंड उसकी बुर के रस से पूरी तरह चिकना और चिपचिपा हो गया था.
मैं पूरे जोर से धक्के मार मार कर मां को चोद रहा था.
अपनी मां को चोदते हुए मुझे जो सुख मिल रहा था वह अवर्णनीय है.
मैंने उसके गुदाज बड़े बड़े स्तन अपने पंजों में जकड़ रखे थे और उसकी आंखों में देखते हुए लंबे लंबे झटकों के साथ उसकी चूत में अपना लंड अंदर बाहर कर रहा था.

स्रोत:इंटरनेट